जीएसटी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य(IMPORTANT FACTS OF GST)

जीएसटी का अर्थ है गुड एंड सर्विस टैक्स वस्तु व सेवा कर बिल है
इसके तहत पूरे भारत में एक ही तरह का टैक्स लगेगा
जिससे पूरे भारत में एक ही वस्तु का एक ही मुल्य होगा
और वर्तमान में विद्यमान विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करो की समाप्ति होगी
जीएसटी बिल वैट सिद्धांत पर आधारित है
जीएसटी का सुझाव सर्वप्रथम अप्रत्यक्ष करो पर केलकर कार्यबल ने 2003 में दिया था
वर्ष 2014 में लागू जीएसटी संविधान संशोधन 122 के तहत सभी वस्तुओंपर कर लगेगा सिर्फ अल्कोहल/शराब पर नहीं लगेगा
जीएसटी एक अप्रत्यक्ष करजो देश भर में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्तिपर विनिर्माता से उपभोक्ताओं तक एकल कर होगा
जिससे पूरा देश एक एकीकृत साझा व्यापारमें परिवर्तित हो जाएगा
उत्पादन के प्रत्येक चरण में भुगतान किए गए इनपुट करों का लाभ मूल्य संवर्द्धन के बाद के चरण में उपलब्ध होगा
इस प्रकार उत्पादन के स्तर पर केवल वैल्यू एडिशन पर ही यह करदेना होगा
अंतिम उपभोक्ताओं को इस आपूर्ति श्रंखला में अंतिम डीलर द्वारा लगाया गया GST ही वहन करना होगा
इस प्रकार विभिन्न स्तरों पर लगने वहां वाले करो पर कर का प्रभाव समाप्तसकेगा
जीएसटी के लागू होने से केन्द्रीय करों मे से केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त उत्पाद शुल्क ,सेवा कर, एडिशनल कस्टम ड्यूटी,विशेष ओर अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी,तथा वस्तुओं व
सेवाओं पर लगने वाले सारे सरचार्ज व सैस जहां समाप्त होंगे
वहीं राज्य के करों मे वैट, मनोरंजन कर, केंद्रीय बिक्री कर, चुंगी व प्रवेश कर, खरीद कर, विलासिता कर ,लॉटरी ,सट्टे व जुए पर लगने वाले कर तथा सरचार्ज व सैस इसमे समाहित हो जाएंगे
इस प्रकार केंद्र ,राज्य व स्थानीय निकायों द्वारा लिए जाने वाले विभिन्न प्रत्यक्ष करो के स्थान पर एकीकृत जीएसटी ही वसूला जाएगा और पूरा देश एक समरूप बाजार के रूपमें विकसित हो सकेगा
जीएसटी लागू होने से वस्तुओं के मूल्य कम होंगे
जिसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को होगा
सेवाओं के मूल्य में कुछ वृद्धि इससे होगी
वस्तुओं व सेवाओं की लागत कम होने से भारतीय निर्यात को इससे बढ़ावा मिलेगा
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस से जीडीपी में वृद्धि होगी
नेशनल कॉउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्चने इससे जीडीपी में 0.9%से 1.7% की वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया था
जीएसटी की संरचना दोहरी किस्मकी होगी
केंद्र सरकार द्वारा लगाया व वसूला जाने वाला कर तथा राज्य सरकारों द्वारा लगाया व वसूला जाने वाला कर वैल्यू एडिशन के प्रत्येक चरण पर CGST व SGST वसूलीजाएंगे
जीएसटी के मामले में विभिन्न मिलने के लिए जीएसटी परिषद का गठन किया जाएगा
जीएसटी परिषद का अध्यक्ष वित्त मंत्री होगा
जीएसटी परिषद में केंद्र व राज्य दोनोंका प्रतिनिधित्व होगा
जीएसटी परिषद में सभी राज्य सरकारेसदस्य होंगी
इस कारण यह एक शक्तिशाली सांविधिक निकाय होगा
जीएसटी का आरोपण शुरू से अंत तक सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित होने के कारण इसका अनुपालन सरलहोगा और कर वंचना नहींहो सकेगी
इससे कर संग्रह में वृद्धिहोगी और कर संग्रहण की लागत कमहोगी
केंद्र व राज्य सरकारों दोनों को ही जीएसटी के संबंध में कानूनबनाने का अधिकार होगा
संविधान संशोधन 122 के तहत वैयक्तिक उपभोग वाली शराब को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है
पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी के लागू करने के संबंध में निर्णय जीएसटी काउंसिल द्वारा लिया जाएगा
जीएसटी के परिणाम स्वरुप राज्य को होने वाली राजस्व हानि की भरपाई 5 वर्षों तक केंद्रद्वारा की जाएगी
भारत में वैट सिद्धांत पर आधारित एक व्यापक जीएसटीलाने का सुझाव सर्वप्रथम अप्रत्यक्ष करो पर केलकर कार्यबल ने 2003 में दिया था
वर्ष 2010 तक राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी लागू करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के 2006-07 के बजट में किया गया था
इसके लिए विस्तृत रूपरेखा व रोड मैप तैयार करने का दायित्व राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति को सौंपा
राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की अनेक बैठक व व केंद्र के साथ समिति के विचार विमर्श के पश्चात जीएसटी के लिए वार्षिक सविधान संसोधन विधेयक (115 वां सविधान संशोधन विधेयक) मार्च 2011 में लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था
जहां इसे संसद की वित्त पर स्थायी समिति को संदर्भित किया गया था
लेकिन 15वी लोकसभा भंगहो जाने पर यह विधेयक निष्प्रभावीहो गया
केंद्र में मई 2014 में नई सरकार के गठन के बाद पुनः केंद्रीय७ मंत्रिमंडल ने इसके लिए विधेयक के मसौदे को 17 दिसंबर 2014 को मंजूरी दी गई
19 दिसंबर 2014 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया
6 मई 2015 को लोकसभाने इसे पारित कर दिया था
इसके पश्चात राज्यसभा में इसे प्रवर समिति को सन्दर्भित किया था
प्रवर समितिने अपनी रिपोर्ट 22 जुलाई 2015 को प्रस्तुत की थी
विपक्षी दलों के साथ लंबे व गहन विचार विमर्श के बाद इसके लिए जुलाई 2016 में सरकार ने सहमतिप्राप्त की
जिससे 3 अगस्त 2016 को यह विधेयक राज्यसभा में पारित हो गया
अनेक संशोधनों के कारण लोकसभा में इसे 8 अगस्त 2016को पुनः पारित कराया गया
जीएसटी सविधान संशोधन विधेयक 101 वे सविधान संशोधन अधिनियम के रूप में अधिसूचित किया गया है
101 वे संविधान संशोधन अधिनियम के रूप में अधिसूचित इस जीएसटी में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे
वस्तुओं और सेवाओं पर समान करारोपण के लिए लाए जाने वाले जीएसटी के लिए 122वें संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति का अनुमोदन 8 सितंबर 2016 को प्राप्त हुआ था
जिससे जीएसटी बिल 101 वे सविधान संशोधन अधिनियम के रूप में अधिसूचित किया गया था
इससे बहुप्रतिक्षित गुड एंड सर्विस टैक्स के लिए मार्ग प्रशस्त हो गया
सरकार द्वारा 1अप्रैल 2017 से इसे लागू करनेका प्रयास किया जा रहा है
राज्य सभा द्वारा 3 अगस्त 2016 को और लोकसभा द्वारा 8 अगस्त 2016 को बिल को पारित किया गया था
पारित इस बिल को 122वें संविधान संशोधन विधेयक के राष्ट्रपति द्वाराअनुमोदन के लिए कम से कम 50% विधान सभाओं में भी पारित होना आवश्यक था
16 विधान सभाके अनुमोदन के पश्चात इसे राष्ट्रपति की मंजूरीहेतु भेजा गया
GST सविधान संशोधन अधिनियम अधिसूचित होने के पश्चात इस कर की दरें व इसके नियमोंआदि के निर्धारण के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद का गठनकिया गया
जीएसटी परिषद का गठन 12 सितंबर 2016को किया गया था
 सभी राज्य सरकारें इस परिषद की सदस्य हैं
जीएसटी परिषद की पहली बैठक 22 सितंबर 2016 को नई दिल्लीमें संपन्न हुई थी
?GST परिषद की प्रथम बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षतामे GST के संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे
20 लाख से कम सालाना टर्नओवर वाले (उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में 10 लाख) व्यापारियों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का निर्णय जीएसटी की प्रथम बैठकमें लिया गया
1.50 करोड़ से कम सालाना कारोबार वाले व्यापारी जहां राज्य के अधिकारियों की जांच के दायरे में आएंगेवहीं इससे अधिक कारोबार वालेकेंद्र व राज्य दोनों के क्षेत्राधिकार में आएंगे
राज्य के राजस्व अनुमानों के लिए वर्ष 2015-16को ही आधार माना जाएगा