Industrial Revolution and Imperialism औद्योगिक क्रांति एवं साम्राज्यवाद

Industrial Revolution and Imperialism

औद्योगिक क्रांति एवं अफ्रीका तथा एशिया में साम्राज्यवाद 

अतिलघुतरात्मक (15 से 20 शब्द)

प्र 1. औद्योगिक क्रांति से आप क्या समझते हैं? इस शब्द का सबसे पहले प्रयोग कब और किसने किया ?

उत्तर- औद्योगिक क्रांति का तात्पर्य उत्पादन प्रणाली में हुए उन आधारभूत परिवर्तनों से हैं जिसने हस्त चालित औजारों से शक्ति चालित सयंत्रों तक अभियान किया। औद्योगिक क्रांति का शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग एक कैप्सूल मुहावरे के रूप में फ्रांस के समाजवादी नेता लुई ब्लांकी ने 1833 में किया।

प्र 2. रिचर्ड आर्कराइट द्वारा आविष्कृत मशीन का नाम व कार्य बताइए।

उत्तर- 1769 में रिचर्ड आर्कराइट ने स्पिनिंग जेनी में सुधार करके शक्ति से चलने वाला वाटर फ्रेम नामक सूत काटने का यंत्र बनाया। यह संसार की सबसे पहली मशीन थी जो हाथ से ना चलकर कर जल शक्ति से चलती थी। अधिकांश विद्वान औद्योगिक क्रांति की शुरुआत यहीं से मानते हैं।

प्र 3. प्रभाव क्षेत्र को स्पष्ट कीजिए ?

उत्तर- जहां राजनीतिक आधिपत्य स्थापित नहीं किया हो परंतु उन क्षेत्रों में पूंजी निवेश कर साम्राज्यवादी देशों ने अपना राजनीतिक प्रभाव स्थापित किया, वे क्षेत्र प्रभाव क्षेत्र कहलाए।

प्र 4. फशोदा कांड क्या था ?

उत्तर- मिस्र में ब्रिटिश प्रभाव का फ्रांस बड़ा खेद था। इसी कारण 1908 में फ्रांसीसी सेना ने श्वेत नील पर स्थि फशोदा पर फ्रांस का झंडा गाड़ दिया। इंग्लैंड के जनरल कचनर ने फ्रांस के सेनापति मार्चंड को फशोदा से हट जाने के लिए कहा। युद्ध की संभावना व अपनी निर्बलता को देखकर फ्रांस हट गया।

प्र 5. इंडोनेशिया में कल्चर सिस्टम क्या था ?

उत्तर- डच सरकार के द्वारा इंडोनेशिया पर पुनः अधिकार करने के पश्चात आय का स्रोत बढ़ाने के उद्देश्य से नई आर्थिक नीति लागू की गई, इसे कल्चर सिस्टम कहा गया।

लघूतरात्मक ( 50 से 60 शब्द )

प्र 6. मोरक्को संकट क्या था और उसे कैसे सुलझाया गया?

उत्तर- 1880 के मेड्रिड सम्मेलन में निर्णय लिया गया कि मोरक्को में सभी देशों को व्यापार करने की स्वतंत्रता है। मोरक्को के शासक अब्दुल अजीज की फिजूलखर्ची से आर्थिक व्यवस्था बिगड़ने लगी जिससे जन असंतोष उठ खड़ा हुआ। फ्रांस का मोरक्को के पूर्व में स्थित ट्यूनिस पर और दक्षिण में गेम्बिया पर अधिकार था। प्रारंभ में सभी यूरोपीय देशों ने इस अधिकार पर सहमति दे दी।

1904 में फ्रांस ने अपना एक दल सुधार प्रस्ताव के साथ मोरक्को भेजा जिसका जर्मनी ने कड़ा विरोध किया। 1905 में जर्मन सम्राट ने टेंजियर की यात्रा की और कहा कि मोरक्को में जर्मनी और जापान के हित है। इसलिए जर्मनी ने 1906 में एज्लेसिरास में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया जिसमें 12 देशों ने भाग लिया। इसमें मोरक्को की स्वतंत्रता की पुष्टि की।

प्र 7. औद्योगिक क्रांति का प्रारंभ इंग्लैंड से ही क्यों हुआ?

उत्तर- औद्योगिक क्रांति की शुरुआत 1760 के आसपास इंग्लैंड में हुई। जिसके कारण थे-

  1. इंग्लैंड के लोगों का जीवन स्तर अन्य देशों के लोगों से ऊंचा होना।
  2. लोहे व कोयले की खानों का पास पास होना।
  3. विशाल औपनिवेशिक साम्राज्य।
  4. समुद्री व्यापार पर एकाधिकार।
  5. इंग्लैंड की भौगोलिक स्थिति का अनुकूल होना।
  6. इंग्लैंड की व्यापारिक, राजनीतिक स्थिति का सुदृढ़ होना।
  7. कृषि क्रांति का सूत्रपात इंग्लैंड से होना।
  8. इंग्लैंड के पास विशाल पूंजी का होना।
  9. बंगाल की लूट- रजनी पामदत्त ने ‘आज का भारत’ में इस तथ्य को उजागर किया है।

प्र 8. उन्मुक्त द्वार की नीति क्या थी ? बताइए ।

उत्तर- अमेरिका ने जापान के द्वार पश्चिम के लिए खोले थे और उसी ने चीन के द्वार पश्चिम के लिए खोलें। 1898 ईस्वी के बाद अमेरिका ने चीन में उन्मुक्त द्वार नीति का अवलंबन किया। जॉन है नामक संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश सचिव ने अमेरिका के हितों की रक्षा के लिए एक नवीन नीति का प्रतिपादन किया जो उन्मुक्त द्वार नीति के नाम से जानी जाती है।

सभी देशों को चीन से व्यापार करने की सुविधाएं दी जाए, किसी भी देश को दूसरे देश की तुलना में विशेष अधिकार न प्रदान किए जाए, चुंगी कर की दरें सब देशों के लिए सम्मान हो और उनकी वसूली का अधिकार केवल चीन को दिया जाए।

वस्तुतः अमेरिका की चीन में उन्मुक्त द्वार की नीति व्यावसायिक स्वार्थ की भावना पर आधारित थी। वह चीन की क्षेत्रीय अखंडता तथा सार्वभौमिकता में रुचि न रखकर सुविधाओं और विशेषाधिकारों को कायम रखना चाहता था। रूस के अतिरिक्त अन्य सब पश्चिमी देशों ने अमेरिका की नीति का अनुमोदन किया।

प्र 9. यूरोपीय प्रतिस्पर्धा की दुर्घटनाओं द्वारा अफ्रीका को कृत्रिम रूप से निर्मित छोटे-छोटे राज्यों में बांट दिया गया। विश्लेषण कीजिए । (निबन्धात्मक)

उत्तर- आधुनिक युग में विश्व के समक्ष साम्राज्यवाद के दो दौर हुए। प्रथम दौर का प्रारंभ 15वीं शताब्दी के अंत में हुए व्यापारिक मार्गों की खोजों से हुआ जिसका समापन वर्ष 1815 में हुआ। कुछ समय इस विस्तार वादी प्रक्रिया में विश्राम रहा।। वर्ष 1870 के पश्चात इसका दूसरा दौर प्रारंभ हुआ।

अफ्रीका, एशिया तथा दक्षिण अमेरिका के देश इसके शिकार बने। इस दौर को नवीन साम्राज्यवादी दौर से अभिहित किया गया है। यह समय यूरोप में औद्योगिक क्रांति के पश्चात का दौर था। इसके पश्चात यूरोपियों ने कच्चे माल, मानव श्रम तथा अपनी राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के लिए उपनिवेश स्थापित करने प्रारंभ कर दिए। इसकी परिणति अफ्रीका के विभाजन के रूप में आई।

अफ्रीका के परिप्रेक्ष्य में यूरोपीय देशों की उपनिवेशवादी प्रतिस्पर्धा की दुर्घटनाएं घटी जिन्होंने अपने लाभ के लिए अफ़्रीका को बांटना प्रारंभ कर दिया। इस क्रम में बेल्जियम के शासक लियोपोल्ड ने अफ्रीका के संसाधनों का दोहन करने तथा वहां उपनिवेश स्थापित करने के लिए वर्ष 1876 में ब्रुसेल्स में एक सम्मेलन आयोजित किया।

इस सभा में अफ्रीकन अवगाहन करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सभा गठित की। इसके पश्चात उसके दूतों ने अफ्रीका के आंतरिक भागों में संधियां करके उसका प्रभुत्व स्थापित किया।

इस गतिविधि से अन्य यूरोपीय राष्ट्र जैसे ब्रिटेन और पुर्तगाल और उन्होंने कांगो नदी पर नियंत्रण के लिए एक संयुक्त आयोग स्थापित किया। इस दौरान इंग्लैंड मने कांगो पर पुर्तगाली आधिपत्य स्वीकार कर लिया। इस विरोध की परिणति एक अन्य दुर्घटना से हुई।

1884 कांग्रेस में बर्लिन की संधि की रूपरेखा तय की गई। जिसके तहत कांगो के निम्नतर प्रदेशों पर बेल्जियन का अधिकार स्वीकृत किया गया। इस कांग्रेस ने यह भी निर्णय लिया गया कि यूरोपीय देशों द्वारा कब्जा करने के पश्चात इसकी सूचना उस देश द्वारा अन्य देशों को दिए जाने पर उसके आधिपत्य को मान्यता मिल जाएगी।

इसके पश्चात अनेक यूरोपीय देशों ने अफ्रीका में आधिपत्य के लिए चार्टर कंपनियां स्थापित की। वे अफ्रीका के भू भागों पर कब्जा करते गए तथा भू भागों को अपनी सुविधानुसार बांटते गए। जब यूरोपीय देशों ने बीसवीं शताब्दी में इन उपनिवेशों को स्वतंत्र करना प्रारंभ किया तो वे भू भाग कृत्रिम सीमाओं के आधार पर छोटे-छोटे राज्यों के रूप में अस्तित्व में आए। अतः स्पष्ट कहा जा सकता है कि यूरोपियों प्रतिस्पर्धा की दुर्घटनाओं द्वारा अफ्रीका को कृत्रिम रूप से निर्मित छोटे छोटे राज्यों में बांट दिया।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri

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