Madhya Pradesh Famous Rajmahal

Madhya Pradesh Famous Rajmahal

मध्यप्रदेश के प्रमुख राजमहल

मदन महल

मदन महल मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले मे स्थित है मदन महल किला उन शासकों के अस्तित्व का साक्षी है, जिन्होंने यहां 11वीं शताब्दी में काफी समय के लिए शासन किया था। मदन महल को राजा मदन सिंह द्वारा बनवाया गया यह किला जबलपुर शहर से करीब दो किमी दूर एक 400 मीटर ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।

यह किला राजा की मां रानी दुर्गावती से भी जुड़ा हुआ है, जो कि एक बहादुर गोंड रानी के रूप के जानी जाती है। माना जाता है, इस महल में कई गुप्त सुरंगे भी हैं अब यह खंडहर में तब्दील हो चुका है लेकिन यह किला रानी दुर्गावती और उनकी पूरी तरह से सुसज्जित प्रशासन व सेना के बारे में काफी कुछ बयान करता है।

शाही परिवार का मुख्य कक्ष, युद्ध कक्ष, छोटा सा जलाशय और अस्तबल इसकी खूबसूरती मे चार चाँद लगाते है इस किले से प्रचीन काल के लोगों के रहन-सहन का भी पता चलता है। साथ ही इससे उस समय के रॉयल्टी का भी अंदाजा हो जाता है। बेशक, मदन मोहन किला भारत के आकर्षक प्राचीन स्मारकों में से एक है यह भवन अब  भारतीय पुरातत्व संस्थान की देख रेख में है।

शीशमहल

शीशमहल मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है ! इसका निर्माण सन् 1706 मे महाराज उद्देत सिंह ने करवाया था शीश महल ओरछा मे जहाँगीर महल के समीप ही स्थित है यह प्राचीन निर्माताओं की अद्भुत निर्माण शैली का प्रतीक बना हुआ है। महल के प्रांगण के नीचे विशालतम घर है। स्थापत्य कला एवं वास्तुकला का यह महल सर्वाधिक सृजनात्मक एवं उत्कृष्ट उदाहरण है।

शीशमहल का निर्माण वास्तव में एक विश्रांति गृह के रूप में करवाया गया था। महल मे विभिन्न रंगों के कांच जड़ित होने के कारण ही इसका नाम शीशमहल रखा गया था। इस महल में शाही एवं अन्य कीमती सामान लगा हुआ था जो धीरे-धीरे गायब होता गया। महल के अन्दर भव्य विशाल कक्ष एवं स्नानगृह आदि उस समय के राजाओं की विलासिता के परिचायक हैं। वर्तमान में यह महल मध्य प्रदेश पर्यटन के अधीन है।

मानमंदिर महल

मानमंदिर महल मध्य प्रदेश राज्य के  ग्वालियर शहर में स्थित है। इसका निर्माण 1486 से 1517 के बीच   राजा मानसिंह द्वारा करवाया गया था। सुन्दर रंगीन टाइलों से सजे इस किले की भव्यता अब पहले जैसी नही रही है किन्तु इसके कुछ आन्तरिक व बाह्य हिस्सों में इन नीली, पीली, हरी, सफेद टाइल्स द्वारा बनाई उत्कृष्ट कलाकृतियों के अवशेष अब भी इस किले के भव्य अतीत का पता देते हैं।

इस किले के विशाल कक्षों में अतीत आज भी स्पंदित है। यहां जालीदार दीवारों से बना संगीत कक्ष है इस महल के तहखानों में एक कैदखाना है, इतिहास कहता है कि औरंगज़ेब ने यहां अपने भाई मुराद को कैद रखवाया था और बाद में उसे समाप्त करवा दिया। जौहर कुण्ड भी यहां स्थित है। स्त्रियाँ इसमें कूद कर जौहर करती थीं।

जय विलास महल

जय विलास महल ग्वालियर जिले में स्थित है यह महल आज भी सिंधिया राजवंश और उनके पूर्वजों का निवास स्थान है। इसके एक भाग का उपयोग आजकल संग्रहालय की तरह किया जाता है। इसका निर्माण जीवाजी राव सिंधिया ने 1809 में करवाया था। लेफ्टिनेंट कर्नल सर माइकल फ़िलोस इसके वास्तुकार थे।

इसकी स्थापत्य शैली इतालवी, टस्कन और कोरिंथियन शैली का अद्भुत मिश्रण है। यहाँ सिंधिया शासनकाल के कई दस्तावेज़ और कलाकृतियाँ तथा औरंगज़ेब और शाहजहाँ की तलवार है। इटली और फ़्रांस की कलाकृतियां और जहाज़ भी यहाँ प्रदर्शन के लिए रखे गए हैं। संग्रहालय में कई टन के दो बड़े झूमर लगे हुए हैं जो निश्चित रूप से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यह स्थान इतिहासकारों और सामान्य जनता को समान रूप से आकर्षित करता है।

हिंडोला महल

हिंडोला महल मांडू मे स्थित है हिंडोला महल मांडू, मध्य प्रदेश की शाही इमारतों में से एक है। इसका निर्माण हुशंगशाह ने उसके के शासन काल में करवाया था।  मालवा शैली की वास्तुकला वाले इस महल में बाहरी दीवारें 77 डिग्री के कोण पर झुकी हुई हैं, जिसके कारण इसे हिंडोला महल कहा जाता है।

हिंडोला महल का उपयोग मुख्य रूप से दरबार के रूप में किया जाता था, जहाँ राजा बैठकर अपनी प्रजा की समस्याओं को सुनते थे। इस महल के निर्माण को करने वाले लोगों ने ही वारंगल के क़िले को इसकी प्रतिकृति के रूप में बनवाया था। हिंडोला महल भारत के इतिहास में एक महत्‍वपूर्ण चिह्न है और इसकी वास्‍तुकला भी काफ़ी विख्‍यात है।

इतिहास और स्‍थापत्‍य कला में उत्‍साही लोगों के लिए यह स्‍थल बेहद ख़ास है, यहाँ आकर पर्यटक दरबार की गूँज को समय की रेत में दफन हुआ देख सकते हैं।

राजवाड़ा महल

राजवाड़ा महल इंदौर मे स्थित है राज्य के शहर इन्दौर में कई पर्यटन स्थल है जिनमें से एक राजवाड़ा महल है। राजवाड़ा महल नगर के बीचोबीच स्थित है। होल्‍कर शासन के दौरान यह बना था और वे यहीं से शासन चलाते थे। राजवाड़ा महल की ख़ूबसूरती आज भी बरकार है। इन्दौर के हृदय का पर्याय राजवाड़ा होल्कर साम्राज्य के विगत सौन्दर्य का मूक गवाह रहा है।

यह दो सदी प्राचीन सात मंजिला ऐतिहासिक राजमहल मुस्लिम, मराठा एवं फ्रेंच शैलियों के समन्वय से बना है। राजवाड़ा महल की निचली तीन मंज़िल पत्थर से एवं ऊपरी मंज़िल लकड़ी से निर्मित है जिसके कारण ये आग से सुरक्षित नहीं है। राजवाड़ा अपने इतिहास में तीन बार जल चुका है और 1984 में लगी अंतिम आग ने इसे भीषण क्षति पहुँचायी है। आज केवल बाहरी हिस्सा यथावत है लेकिन फिर भी यह अपने कलात्मक सौंदर्य से पर्यटकों को आकर्षित करता है !

लाल बाग़ महल

लाल बाग़ महल मध्य प्रदेश राज्य के इन्दौर शहर मे स्थित है लाल बाग़ महल इंदौर की भव्य और शानदार इमारतों में से एक है। यह महल होल्‍कर राजवंश की वास्तु कला का उत्‍कृष्‍ट नमूना है। लाल बाग़ महल ख़ान नदी के किनारे पर 28 एकड़ में बने राजघराने का साधारण दिखने वाला महल है, मगर अन्दर से इस की महंगी सजावट पर्यटकों को आकर्षित करती है।

लाल बाग़ महल का निर्माण सन् 1886 में महाराजा तुकोजी राव होल्कर द्वितीय के राज में प्रारंभ हुआ और महाराजा तुकोजी राव होल्कर तृतीय के शासन काल में संपन्न हुआ। इसका निर्माण तीन चरणों में पूरा हुआ था। लाल बाग़ महल मूल रुप से सामाज्‍य के महत्‍वपूर्ण लोगों का मिलन स्‍थल था। इसी भवन में साम्राज्‍य के महत्त्वपूर्ण अधिकारी विचार-विर्मश करते थे।

1978 तक यह राजनिवास रहा जिसके अन्तिम निवासी तुकाजीराव (तृतीय) थे। लाल बाग़ महल परिसर में लोहे का बना भव्य द्वार लंदन के बकिंघम महल के लोहे के दरवाजों की दुगने आकार की प्रति है। इंग्लैण्ड में इन्हें तैयार कर के पानी के रास्ते भारत लाया गया था। अब यह मध्य प्रदेश सरकार की निगरानी में है और इस के कुछ हिस्सों को संग्रहालय बना दिया गया है। यहाँ का गुलाब बाग़ भारत का सबसे बड़ा गुलाब बाग़ है।

जहाज़ महल

जहाज़ महल मांडू-मध्य प्रदेश में स्थित है। इसका निर्माण ग़यासुद्दीन ख़िलजी के समय में किया गया था। जहाज़ महल अपनी सुन्दर महराबों, मण्डपों आदि के कारण बहुत प्रसिद्ध है। इसमें हिन्दू अलंकरणों का प्रयोग बड़े ही ख़ास प्रकार से किया गया है। जहाज़ महल ‘कपूर तालाब’ एवं ‘मुंजे तालाब’ के मध्य में स्थित है।

तालाब के जल में यह महल जहाज़ की तरह दिखाई देता है। जहाज़ महल अपनी मेहराबी दीवारों, छाये हुए मण्डपों एवं सुन्दर तालाबो के कारण मांडू की सुन्दर इमारतों में स्थान रखता है। इनमें इस्लामी प्रभावजन्य संरचनात्मक आधार की भव्यता अति विशालता तथा हिन्दू अलंकरण की सुन्दरता, परिष्कृति व सुक्ष्मता का विवेकपूर्ण समन्वय है।

राजमन्दिर महल 

राजमहल मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित है। यह बेतबा नदी के किनारे पर बसा हुआ है अपने प्राचीन वैभव का निरंतर बखान करता हुआ यह महल ओरछा का विशाल राजमहल एक मिसाल है। इस ऐतिहासिक महल का निर्माण भी महाराज वीरसिंह देव ने सन् 1616 ई. में करवाया था।

इस महल की सुदृढ़ता एवं आकर्षक भव्यता उस समय के कारीगरों एवं शिल्पियों की अद्भुत प्रतिभा व अनूठी निर्माण कला का प्रमाण है। महल के अंदर अनगिनत विशाल कक्ष हैं। वर्तमान में यह महल पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। महल के सभी भाग समग्र रूप से प्राचीन हिन्दू स्थापत्य कला एवं वास्तुकला का परिपूर्ण मिश्रण प्रस्तुत करते हैं।

रानी रूपमती महल

यह महल मांडू में स्थित है इसका निर्माण बाज बहादुर ने करवाया था कहा जाता है कि रानी रूपमती को बाजबहादुर इतना अधिक चाहते थे कि रानी उनके बिना कुछ कहे ही वो उनके दिल की बात समझ लिया करते थे। इस लिए बाज बहादुर ने रानी रूपमती की सुरक्षा के लिए मांडू में 3500 फीट की ऊंचाई पर इस महल का निर्माण करवाया था है

बताया जाता है कि रानी नर्मदा नदी का दर्शन करने के बाद ही भोजन ग्रहण किया करती थी। रानी की इसी इच्छा को पूरा करने के लिए बाज बहादुर ने इस महल का निर्माण कराया था इस महल से रानी नर्मदा का दर्शन करती थी। यह महल आज भी अपनी सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है सन 1568 में सारंगपुर के पास एक मकबरे का निर्माण कराया गया। इस मे बाज बहादुर के मकबरे पर अकबर ने ‘आशिक-ए-सादिक’ और रूपमती की समाधि पर ‘शहीदे-ए-वफा’ लिखवाया।

नौखंडा महल

नौखंडा महल चंदेरी में स्थित है इस महल को चंदेरी के राजा कीर्तिपाल ने 11 वीं सदी में बनवाया था नौखंडा महल कहीं दो तो कहीं तीन मंजिला है। बीच में बड़ा आंगन है इस महल के बाहर और आस–पास कई प्राचीन स्मारक स्थित हैं नवखण्डा महल के पीछे संगीत सम्राट बैजूबावरा का स्मारक बना हुआ है। इसके पास ही एक जौहर स्मारक बना है जिस पर बाबर द्वारा किये गये आक्रमण,मेदिनीराय के सैनिकों द्वारा किये गये युद्ध तथा राजपूत रानियों द्वारा किये गये जौहर के बारे में जानकारी मिलती है !

बादल महल

बादल महल मध्यप्रदेश के रायसेन जिले मे स्थित है(कहीं कही ग्वालियर भी मिलता है) बादल महल का दरवाज़ा वास्तव में एक द्वार की एकैकी संरचना है जो किसी महल में नहीं खुलती। है इस दरवाज़े का निर्माण मालवा के राजा महमूद शाह खिलजी ने 15 वी शताब्दी में करवाया था। इसका निर्माण एक शानदार विजय की याद में करवाया था। बादल महल दरवाज़े की ऊंचाई 100 फुट है। इस संरचना में विस्तृत नक्काशियां और प्रभावशाली रूपांकन हैं। द्वार का ऊपरी भाग धनुषाकार है और इसके दोनों और ऊंची मीनारें हैं।

जहाँगीर महल

जहाँगीर महल मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थान ओरछा में स्थित है। इसका निर्माण वीरसिंह देव ने अपने परम मित्र बादशाह जहांगीर के लिए सन् 1518 मे बनवाया था। महल का प्रवेश द्वार पूर्व की ओर था किन्तु बाद में पश्चिम की ओर से एक प्रवेश द्वार बनवाया गया है। आजकल पूर्व वाला प्रवेश द्वार बंद रहता है तथा पश्चिम वाला प्रवेश द्वार पर्यटकों के आवागमन के लिए खोल दिया गया है।

मोती महल ग्वालियर 

इस महल का निर्माण दौलतराव सिंधिया ने 1825 में इस मोतीमहल को बनवाया था और इसे बिल्कुल पूना के पेशवा पैलेस की तर्ज पर बनाया गया है। इस हॉल में कई किलो सोना लगाकर छत और दीवारों को सजाया गया है। इस महल के कई कमरों में राग-रागिनी के ऊपर बनी पेटिंग बनाई हुई हैं। जब भोपाल राजधानी बना तो मोतीमहल में राज्य सरकार के कई दफ्तर आ गए। आज भी इस बिल्डिंग के 300 कमरो का उपयोग होता है।

गुजरी महल

गुजरी महल ग्वालियर में स्थित है 1486 ई.से 1516 के मध्य राजा मानसिंह तोमर ने करवाया था गवालियर में स्थित गुजरी महल भारत के प्रसिद्ध पुरातात्विक संग्रहालयों में से एक है। यह इमारत वास्तविक रूप से एक महल थी जिसका निर्माण राजा मान सिंह ने अपनी रानी मृगनयनी के लिए करवाया था जो एक गूजर थी। अत: इस महल का नाम गुजरी महल पड़ा। वर्ष 1922 में पुरातात्विक विभाग द्वारा इसे एक संग्रहालय में बदल दिया गया।

सतखंडा महल (दतिया महल)

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से लगभग 75 किमी दूर स्थित है। इसका निर्माण वीरसिंह देव ने 1614 ई. करवाया था यह महल 7 मंजिला है। बुंदेलखंड में दतिया साम्राज्य के संस्थापक – महाराज बीरसिंह देओ ने देश भर में ऐसे 52 स्मारक बनवाये थे। दतिया के महल या सतखंडा महल को दतिया महल भी कहा जाता है, साथ इसे ही पुराण महल या “पुराना महल” भी इसे कहते है। यह महल लगभग 80 मीटर लंबा और बहुत ही व्यापक है। यह बहुत ही सुंदर और मजबूत महलों मे से एक माना जाता है।

अशर्फी महल

अशर्फी महल मध्यप्रदेश के मांडू में स्थित है मांडू के इस महल मे आपको अफगानी कला का भव्य नमूना देखने को मिलता है कटोरी की भांति इस महल में संगमरमर के बेल-बूटे वर्क कटी जालीदार खिड़कियां हैं आगरा का ताजमहल बनवाने से पूर्व शाहजहां ने अपने कारीगरो को यहां कला का अध्ययन करने के लिए भेजा था इस महल में दमिश्क की मस्जिद के नमूने पर एक मस्जिद भी बनी है !

राज महल

राजमहल ओरछा मे स्थित है यह महल ओरछा के सबसे प्राचीन स्मारकों में एक है। इसका निर्माण मधुकर शाह ने 17 वीं शताब्दी में करवाया था। राजा बीरसिंह देव उन्हीं के उत्तराधिकारी थे। यह महल छतरियों और बेहतरीन आंतरिक भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। महल में धर्म ग्रन्थों से जुड़ी तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं।

खरबूजा महल

खरबूजा महल मध्य प्रदेश के जिले धार मे स्थित है यह महल धार के किले में निर्मित होने से पूरा धार नगर इस महल से दिखाई देता है इसकी सुंदरता एवं आकर्षक भव्यता उस समय के कार्यक्रम एवं शक्तियों के अद्भुत प्रतिभा एवं अनूटी निर्माण कला का प्रमाण है यह महल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है !

मोती महल 

मोती महल मध्यप्रदेश के मंडला जिले के रामनगर में सघन जंगलो के बीच स्थित है ! गोंड राजा हृदयशाह के द्वारा इस महल का निर्माण 11 वी शताब्दी में करवाया गया था। महल को लेकर आज भी यह प्रचलित है कि इसका निर्माण ढाई दिन में हुआ था। महल से पांच किलोमीटर दूर अष्टफल पत्थरों का पहाड़ है। इस काली पहाड़ी के अष्टफलक पत्थरों से ही मोती महल का निर्माण किया गया है।

कोशक महल

यह मध्यप्रदेश के चंदेरी मे स्थित है इस महल को 1445 ई. में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। यह महल चार बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि सुल्तान इस महल को सात खंड का बनवाना चाहता था लेकिन मात्र 3 खंड का ही बनवा सका। महल के हर खंड में बॉलकनी, खिड़कियों की कतारें और छत की गई शानदार नक्कासियां हैं।

इत्रदार महल

इत्रदार महल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है ! यह रायसेन दुर्ग में स्थित है इसका निर्माण राजा मानसिंह ने करवाया था यह स्थापत्य कला का एक अनुपम उदाहरण है आज भी यह अपने सौंदर्य और वैभव के साथ पर्यटकों का आकर्षण केंद्र बना हुआ है !

दाई का महल

दाई का महल एक महत्‍वपूर्ण पर्यटन स्‍थल है। यह मांडू में स्थित है  दाई का महल शहर के बीचों – बीच स्थित है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है नर्स यानि सेवा करने वाली। इसी महल में मुगल सम्राट अकबर ने खानदेश से विजय के लिए आगरा से प्रस्थान के पश्चात मार्ग में यहीं विश्राम किया था यहां एक नीलकंठ महादेव का मंदिर भी है!

बघेलिन महल

बघेलिन महल मध्यप्रदेश के मंडला में स्थित है इसका निर्माण बाकी दलों द्वारा करवाया गया था बघेलिन महल नर्मदा नदी के तट पर (मोती महल मण्डला) से 3 किलोमीटर पूर्व में स्थित है

राजगढ़ महल

राजगढ़ महल मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित है पीताम्बरा पीठ के निकट बना राजगढ़ महल, राजा शत्रुजीत बुन्देला द्वारा बनवाया गया था। यह महल बुन्देली भवन निर्माण शैली में बना है। इस स्थान पर ही एक संग्रहालय भी है जहां भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व की अनेक वस्तुओं का संग्रह रखा गया है।

हवा महल

हवा महल अशोकनगर जिले के चंदेरी में स्थित है इसका निर्माण प्रतिहार राजा कीर्ति पाल द्वारा 11 वीं शताब्दी में चंदेरी के किले में करवाया गया था यह महल अपनी भव्य कलाकृति और सौंदर्य से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है !

सुन्दर महल 

सुंदर महल ओरछा मे स्थित है इस महल को राजा जुझार सिंह के पुत्र धुरभजन के बनवाया था। वर्तमान में यह महल काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। एवं पुरातत्व विभाग के संरक्षण मे है !

राय प्रवीण महल

यह महल राजा इन्द्रमणि की खूबसूरत गणिका  प्रवीणराय की याद में बनवाया गया था। वह एक कवयित्री और संगीतकारा थीं। यह दो मंजिला महल प्राकृतिक बगीचों और पेड़-पौधों से घिरा है। राय प्रवीन महल में एक लघु हाल और चेम्बर है। यह महल मध्यप्रदेश के ओरछा मे स्थित है 

राजा अमन पाल महल

अजयगढ़ (पन्ना) दुर्ग में इस महल का निर्माण राजा अजय पाल द्वारा 18 वीं सदी में करवाया गया था

राजा रोहित महल

राजा रोहित महल मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है इस महल का निर्माण राज बसंती द्वारा सोलवीं वी सदी में रायसेन दुर्ग में करवाया गया था पीएम हेलो अपनी बात पर कलात्मकता और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

विष्णु गौर सीहोर, मध्यप्रदेश