Malnutrition : कुपोषण

Malnutrition

कुपोषण

कुपोषण से अभिप्राय संतुलित आहार न मिलने से हैं। आहार में एक या अधिक पोषक तत्वों की कमी से होने वाले रोग को कुपोषण या हीनता जन्य रोग कहते हैं।

मनुष्य के संतुलित विकास के लिए भोजन में संतुलित मात्रा में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा विटामिन खनिज लवण एवं अन्य सूक्ष्म तत्वों का होना आवश्यक है। हमारे देश तथा विकासशील देशों में बड़ी संख्या में लोग कुपोषण से ग्रसित हैं,क्योंकि पर्याप्त मात्रा में संतुलित भोजन नहीं मिल पाता।

कुपोषण के कारण ( Reasons of malnutrition )

  • गरीबी व अज्ञानता
  • बेरोजगारी एवं बढ़ती आबादी
  • खाद्यान्नों का अभाव एवं खाद्य सामग्री में मिलावट
  • भोजन संबंधी हमारी आदतें
  • मानसिक वेदना तथा चिंता

कुपोषण के कारण होने वाले रोग ( Diseases due to malnutrition )

प्रोटीन की कमी से होने वाले रोग- मनुष्य के शारीरिक विकास के लिए प्रोटीन की आवश्यकता बहुत जरूरी है। बच्चों में प्रोटीन की कमी से सर्वाधिक कुपोषण होता है। जिससे दो मुख्य रोग होते हैं-

  1. क्वाशियोरकोर- बच्चों में यह रोग प्रोटीन की कमी के कारण होता है। इसके मुख्य लक्षण जैसे-भूख कम लगना, शरीर सूज कर फूलना, त्वचा पीली और शुष्क होना, चिड़चिड़ा होना
  2. मैरेस्मस- यह रोग भोजन में प्रोटीन और कैलोरी दोनों की कमी से होता है। इसमें शरीर सूखने लगता है। रोगी दुबला पतला,चेहरा दुर्बल तथा आंखें कांतिहीन और अन्दर धंसी-सी हो जाती है।

कार्बोहाइड्रेट की कमी से होने वाले रोग ( Carbohydrate deficiency diseases )

भोजन में कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा का प्रमुख स्रोत होता है। इसकी की कमी से कई गंभीर रोग हो जाते हैं।

हाइपोग्लाइसीमिया- कार्बोहाइड्रेट की कमी से ग्लूकोज की शरीर में अनुपलब्धता से रक्त शर्करा के स्तर में गिरावट हो जाती है। रक्त में ग्लूकोज की कमी से चक्कर आना,थकान व ऊर्जा में कमी आदि लक्षण नजर आते हैं।

खनिज लवण की कमी से होने वाले रोग ( Mineral salts deficiency diseases )

खनिज वे पदार्थ है,जो हड्डियों व दांतो को मजबूत बनाकर स्वस्थ शरीर का निर्माण करते हैं।

(1) कैल्शियम और विटामिन डी- हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। कैल्शियम की कमी से हड्डियों पेशियों में दर्द एवं ऐंठन जैसे लक्षण दिखते हैं। जिसके कारण बार-बार फैक्चर की शिकायत रहती है। वयस्क के शरीर में ऊर्जा स्तर को बनाए रखने के लिए मैग्नीशियम का स्तर बैलेंस होना चाहिए क्योंकि इसकी कमी से पोटेशियम सोडियम तथा कैल्सियम में कमी आ जाती हैं। जिसके कारण ऐंठन तथा मितली आदि लक्षण दिखाई देते है। पोटेशियम मांसपेशियों को सुचारु रुप से कार्य करने में मदद करता है। आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है,जिससे एनीमिया रोग उत्पन्न होता है। जिंक मानसिक विकास तथा प्रतिरक्षा तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।

(2) गलगण्ड रोग- आयोडीन की मदद से थायराइड ग्रंथि थायरोक्सिन हार्मोन स्रावित होता है। जो उपापचयी क्रियाओं को नियंत्रित करता है। शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है। जिसे गलगण्ड या घेंघा रोग कहते हैं।

विटामिन की कमी से होने वाले रोग ( Vitamin deficiency diseases )

  1. रतौंधी या नाइट ब्लाइंडनेस- विटामिन “A” की कमी से उत्पन्न होता है। जिसके कारण रोगी को रात में दिखाई नहीं देता।
  2. बेरी बेरी रोग- विटामिन “B” की कमी से होता है,जो सीधे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। जिससे रोगी के भूख में कमी,शरीर में कमजोरी, पेशियों में निष्कियता के लक्षण रहते हैं।
  3. स्कर्वी रोग- यह रोग विटामिन “C” की कमी से होता है। जिसके कारण त्वचा पर चकत्ते बनना,मसूड़ों से रक्त बहना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। इसकी कमी से शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता में कमी आ जाती है।
  4. रिकेट्स रोग- विटामिन “D” के अभाव में बच्चों में रिकेट्स नामक रोग हो जाता है तथा वयस्कों में इसे “ऑस्टियोपोरोसिस” कहते हैं। इस रोग से अस्थि विकलांगता उत्पन्न होती है जिससे टांगे धनुषाकार,कबूतरनुमा वक्ष तथा दातों में इनेमल का क्षय प्रारंभ हो जाता है।
  5. बंध्यता(sterlity)- विटामिन “E” की कमी से शरीर में नपुंसकता आ जाती है।
  6. हैमरेज रोग- यह रोग विटामिन “K” की कमी से होता है। अतः चोट लगने पर रक्त का बहाव बंद नहीं होता है एवं सारा रक्त शरीर से बह जाता है और रक्त की कमी से मनुष्य की मृत्यु हो जाती है।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

दिनेश मीना झालरा, टोंक

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