Memory Psychology Studies ( स्मृति )

Memory Psychology Studies

स्मृति 

स्मृति एक प्रकार की मानसिक प्रक्रिया जिसमें व्यक्ति धारण की गई विषय सामग्री का पुनःस्मरण कर चेतना में लाकर पहचानने का प्रयास करता है। स्मरण के स्वरूप के समय में कुछ मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि अधिगमित सामग्री का कारण स्मृति चिन्हों के रूप में होता है अर्थात वह एक दैहिक मानसिक प्रक्रिया है।

स्मृति की परिभाषाएं ( Memory definitions )

हिलगार्ड और एटकिंसन के अनुसार – “पहले सीखी गई अनुक्रियाओं के चिन्हों को वर्तमान समय में व्यक्त या प्रदर्शित करने का अर्थ ही स्मरण है।”

आइजेनक के अनुसार- “स्मृति व्यक्ति की वह योग्यता है जिसके द्वारा वह पहले अधिगम की हुई प्रक्रिया या अनुभव को सूचना के रूप में एकत्रित करता है। फिर इस सूचना को विशिष्ट उत्तेजनाओं के प्रत्युत्तर में पुनरोत्पादित करता है।”

ब्रूनो के अनुसार -” स्मृति एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है इसमें सूचना का कूट संकेतन, संचयन और पुनरुद्धार सम्मिलित होता है। “

प्राइस और उनके सहयोगियों के अनुसार -” अतीत के अनुभवों और विचारों को पुनर्सृजित या पूनरोत्पादित करने की मस्तिष्क की योग्यता ही स्मृति है।”

स्मृति के तत्व अथवा प्रक्रियाएं ( Memory Elements or processes )

मनोवैज्ञानिकों ने स्मृति की तीन अवस्थाओं या प्रक्रियाओं का वर्णन किया है-

1. कूटांकन या कूटसंकेत ( Encoding or codec )- स्मृति से संबंधित यह प्रथम प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में जब व्यक्ति किसी वस्तु या सामग्री का अधिगम या प्रत्यक्षीकरण करता है तो वस्तु अथवा सामग्री से संबंधित स्मृति चिन्ह बनते हैं। स्मृति को न्यूरो ग्राम भी कहा जाता है। व्यक्ति सामग्री का कूटसंकेतन भी आवश्यकता के अनुसार ही करता है।

2. संकलन या धारण ( Compilation or holding )- यह स्मृति की द्वितीय प्रक्रिया या अवस्था है। यह प्रक्रिया कूटसंकेतन के बाद संपादित होती है। संकलन प्रक्रिया में संकेतन द्वारा प्राप्त सूचनाएं मस्तिष्क में संकलित रहती है, जब तक उसका कोई उपयोग नहीं होता अर्थात संकलन की अवस्था में स्मृति में आ चुकी सूचनाओं को कुछ समय तक धारण करके रखा जाता है।

3. पुनरोत्पादन या पुनः स्मरण ( Reproduction or recollection ) यह स्मृति की तीसरी प्रकिया या अवस्था है। स्मृति की इस अवस्था में संकलित सूचनाओं में से उस सूचना का प्रत्याह्वान या खोज की जाती है जो स्मृति उद्दीपक से संबंधित होती है या जिसे व्यक्ति पुनः स्मरण करना चाहता है।

स्मृति के स्वरूप या मॉडल ( Memory format or model)

आधुनिक प्रयोगात्मक मनोविज्ञान में स्मृति के स्वरूप की विवेचना के लिए दो प्रकार के मॉडल उपलब्ध है। इन दोनों मंडलों का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार से है-

1. स्मृति की अवस्थाएं मॉडल ( Memory Stages Model )

स्मृति स्वरूप की व्याख्या एटकिंसन और शिफरिन (1968) ने स्मृति की अवस्थाएं मॉडल के आधार पर की है। इस मॉडल को एटकिंसन- शिफरिन मॉडल के नाम से भी जाना जाता है। यह मॉडल सूचना प्रक्रम उपागम पर आधारित है।

इस मॉडल की मुख्य मान्यता यह है कि मनुष्य का केंद्रीय स्नायु मंडल कंप्यूटर की तरह कार्य करता है।

ज्ञानेंद्रियों से प्राप्त सूचनाओं का निवेश केंद्रीय स्नायु मंडल में होता है। फिर यहां सूचनाओं का प्रक्रमण होता है। जिसके बाद अनेक प्रकार की स्मृतियों के स्वरूप का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इन विद्वानों ने स्मृति की तीन अवस्थाएं बतायी है-

  1. सांवेदिक स्मृति
  2. अल्पकालिक स्मृति
  3. दीर्घकालिक स्मृति

वातावरण में स्थित उद्दीपकों से जो सूचनाएं ज्ञानेंद्रियों द्वारा प्राप्त होती है वह सर्वप्रथम सांवेदिक स्मृति में आती है। सांवेदिक स्मृति को इन विद्वानों ने सांवेदिक पंजिका और सांवेदिक भंडार कहा है।

जब व्यक्ति का चयनात्मक अवधान सांवेदिक स्मृति पर केंद्रित होता है तब इसकी सूचना का पुनः कूटसंकेतन होता है और यह सूचना इस रूप में अल्पकालिक स्मृति में जाती है। अल्पकालिक स्मृति में सूचना सामान्यतः लगभग 30 सेकंड अथवा इससे कम समय तक रह सकती है। यदि व्यक्ति अनुरक्षण अभ्यास करता है तो अल्पकालिक स्मृति में सूचनाएं 30 सेकंड से अधिक भी रह सकती है।

यहां नई नई सूचनाएं पुरानी सूचनाओं को अल्पकालिक स्मृति से न केवल विस्थापित कर देती है बल्कि ऐसी सूचनाएं विलुप्त भी हो सकती है।अल्पकालिक स्मृति भंडार से या सांवेदिक स्मृति भंडार से सूचनाएं दीर्घकालिक भंडार में स्थानांतरित होती है। दीर्घकालिक स्मृति भंडार में सूचनाओं का भंडारण अपेक्षाकृत स्थाई होता है। इस स्मृति भंडार मे अल्पकालिक स्मृति भंडार की सूचनाएं व्यापक अभ्यास द्वारा स्थानांतरित होती है।

कोई भी व्यक्ति रटन अभ्यास के द्वारा, साहचर्य निर्माण के द्वारा, प्रतिमा निर्माण के द्वारा अथवा व्यापक अभ्यास के द्वारा अल्पकालिक स्मृति भंडार की सूचनाओं को दीर्घकालीन स्मृति में परिवर्तित कर सकता है।

प्रक्रमण स्तर उपागम : एकल स्मृति स्थिति मॉडल ( Single memory position model )

एकल स्मृति स्थिति या प्रक्रमण स्तर उपागम का प्रतिपादन क्रेक और लॉकहार्ट (1972) के अध्ययन के आधार पर किया गया है। इन मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि स्मृति का स्वरूप एटकिंसन और शिफ़रीन के स्मृति की अवस्थाएं मॉडल के अनुसार ना होकर स्मृति का एकल भंडार मॉडल होता है।

इन विद्वानों के अनुसार ज्ञानेंद्रियों के द्वारा प्राप्त सूचनाओं का भंडारण न अनेक भंडारों में होता है और ना ही सूचनाएं एक भंडार से दूसरे भंडार को स्थानांतरित होती है। बल्कि स्मृति का भंडार मात्र एक ही होता है जहां से ही कूट संकेतन, संकलन और पुनरोत्पादन किया जाता है।

कुछ मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं कि इनमें से अवस्थाएं मॉडल सही है, कुछ मनोवैज्ञानिक एकल स्मृति स्थिति मॉडल को ज्यादा महत्व देते हैं।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri