Modern History Question | आधुनिक भारत का इतिहास

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Modern History Question

19वीं सदी के प्रारंभ से 1956 ईस्वी तक आधुनिक भारत का इतिहास

अतिलघुतरात्मक ( 15 से 20 शब्द )

प्र 1. भारत का वह पहला राज्य कौन सा था जिसने अंग्रेजो की सहायक संधि स्वीकार की ?

उत्तर- निजामशाही की स्थापना चिनकिलिच खां ने 1724 ईस्वी में की। निजाम अली (1799) के समय में हैदराबाद में अंग्रेजों से सहायक संधि की। पहला भारतीय राज्य जिसने सहायक संधि स्वीकार की।

प्र 2. बसीन की संधि ?

उत्तर- बसीन की संधि पेशवा बाजीराव द्वितीय एवं कंपनी के मध्य 31 दिसंबर 1802 में हुई जिसमें पेशवा ने कंपनी की अधीनता स्वीकार की।

प्र 3. सेरमपुर की त्रयी ?

उत्तर- बंगाल की सेरमपुर बस्ती में डॉक्टर केरे, वार्ड तथा मार्शमैन इसाई मिशनरियों द्वारा शिक्षा शुरू की गई, इन्हें ‘बंगाल की त्रयी’ या ‘सेरमपुर त्रयी’ के नाम से जाना जाता है, जो 1799 में अस्तित्व में आई।

प्र 4. होम चार्जेस से आप क्या समझते हैं ?

उत्तर- गृह प्रभार का अर्थ भारत की अंग्रेजी सरकार द्वारा किया गया ब्रिटेन में खर्च जैसे इंग्लैंड में नियुक्त भारत के यूरोपीय अधिकारियों के वेतन एवं भत्ते, सैन्य खरीदारी, रेल में पूंजी निवेश में दिया जाने वाला ब्याज गृह प्रभार कहलाता था।

प्र 5. हिंदी का प्रथम समाचार पत्र कब और किसके द्वारा प्रकाशित किया गया ?

उत्तर- उदत्त मार्तण्ड पहला हिंदी भाषा का समाचार पत्र था जिसे 1826 में जुगल किशोर द्वारा कलकत्ता से प्रकाशित किया गया। वह पहला भारतीय देशी भाषा में पहला समाचार पत्र बना।

लघूतरात्मक (50 से 60 शब्द)

प्र 6. कर्जन – किचनर विवाद क्या हैं।

उत्तर- 1902 में किचनर को भारत में सेनापति के पद पर नियुक्त किया गया। किचनर जांच के तहत प्रत्येक सैनिक बटालियन को एक कड़े परीक्षण से गुजरना आवश्यक था। सैनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए क्वेटा( वर्तमान पाकिस्तान) में एक कॉलेज इंग्लैंड के केंबरले कॉलेज के नमूने पर खोला गया। भारतीय सेना को किचनर ने दो कमानों में विभाजित किया।

उत्तरी कमान का प्रधान केंद्र मरी और प्रहार केंद्र पेशावर तथा दक्षिणी कमान का प्रधान केंद्र पुणे व प्रहार केंद्र क्वेटा थे। किचनर ने यह प्रस्ताव रखा कि गवर्नर जनरल की कार्यकारिणी से सैनिक सदस्य का पद समाप्त कर दिया जाए और सेना संबंधी कार्यों का उत्तरदायित्व केवल सेनापति को ही सौंप दिया जाए। कर्जन ने किचनर के प्रस्ताव का विरोध किया जबकि ब्रिटिश सरकार ने किचनर का पक्ष लिया तो कर्जन ने इसे अपमान समझा और कर्जन ने 1905 में त्याग पत्र दे दिया।

प्र 7. भारत में आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता किसे कहा है ?

उत्तर- 1792 ईस्वी में चार्ल्स ग्रांट ने “ऑब्जर्वेशन ऑन द स्टेट ऑफ सोसाइटी अमंग दी एशियाटिक सब्जेक्ट्स ऑफ ग्रेट ब्रिटेन” (ब्रिटेन की एशियाई प्रजा की सामाजिक स्थिति: एक टिप्पणी) नामक पुस्तक लिखी। उसने भारतीयों को नैतिक दृष्टि से पतित बताया।

अतः उसने भारतीयों को शिक्षित करने और ईसाई बनाने का समर्थन किया। शिक्षा प्रचार के लिए ग्रांट ने अंग्रेजी भाषा को उपयुक्त माध्यम बताया। भारतीयों को अंग्रेजी साहित्य, दर्शन और धर्म की शिक्षा देनी चाहिए। वस्तुतः अंग्रेजी शिक्षा की अग्रिम रूप रेखा का निर्माण ग्रांट ने ही किया, अतः उसे भारत में आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता कहा जाता है।

प्र 8. 1857 के पश्चात ब्रिटिश नीति में हुए नीतिगत परिवर्तन क्या थे ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- 1857 के बाद जो नीतिगत परिवर्तन किए गए, उनका उद्देश्य अन्य जन विद्रोह को रोकना था। किए गए नीतिगत परिवर्तन निम्नलिखित थे –

1. सामाजिक सुधार प्रक्रिया को जारी रखने की आवश्यकता महसूस नहीं की गई अर्थात सुधारों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया।

2. प्रगतिशीलता के तथ्यों को नकारा गया। रूढ़िवादिता को समर्थन दिया गया।

3. संकीर्णता का दृष्टिकोण अपनाया गया।

4. सतर्कता का दृष्टिकोण अपनाया गया।

5. प्राथमिक एवं तकनीकी शिक्षा की अवहेलना की गई तथा भारत में उच्च शिक्षा के प्रसार का विरोध का दृष्टिकोण अपनाया गया।

6. विशेषताएं पहले के समान- श्वेत नस्लवाद का सिध्दांत, सभ्य बनाने, ईसाई मिशनरियों के कार्य आदि।

प्र 9. 1857 का विद्रोह एक सैनिक विद्रोह मात्र था? क्या आप इससे सहमत हैं? विवेचना कीजिए । (निबन्धात्मक)

उत्तर- सर जॉन लॉरेंस और सीले के अनुसार ‘यह केवल सैनिक विद्रोह था तथा अन्य कुछ नहीं। यह विद्रोह (1857) एक पूर्णतया देश भक्ति रहित और स्वार्थी सैनिक विद्रोह था जिसमे ना कोई स्थानीय नेतृत्व था और ना ही इसे सर्वसाधारण का समर्थन प्राप्त था। यह एक संस्थापित सरकार के विरुद्ध भारतीय सिपाहियों का विद्रोह था। ब्रिटिश सरकार ने संस्थापित सरकार होने के कारण इस विद्रोह का दमन किया और कानून व्यवस्था को पुनः स्थापित किया।’

इसे सिपाही विद्रोह मानने के पीछे विद्रोह के तात्कालिक कारण कारतूस वाली घटना को आधार बनाया गया है लेकिन इसमें सेना के अतिरिक्त अन्य वर्गों की भी भागीदारी थी। इसलिए इस विद्रोह को केवल सैन्य विद्रोह कहना उचित ना होगा-

1. निसंदेह यह विद्रोह एक सैनिक विद्रोह के रूप में आरंभ हुआ किंतु सभी स्थानों पर यह सेना तक सीमित नहीं रहा।

2. सभी सैनिक रेजीमेंटों ने विद्रोह नहीं किया तथा सेना का अधिकांश भाग विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश शासन की ओर से लड़ रहा था।

3. विद्रोही जनता के लगभग सभी वर्गों से आए।

4. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के कुछ भागों में तथा पश्चिमी बिहार में सैनिक विप्लव के पश्चात सर्वसाधारण का विद्रोह हुआ, जिसमें असैनिक वर्ग, शासक, भूमिपति, मुजारे व अन्य वर्ग भी सम्मिलित थे।

5. राजस्थान व महाराष्ट्र में अधिकांश जनता ने विद्रोहियों का साथ दिया और कहीं-कहीं जैसे अलवर दौसा भरतपुर में गुर्जरों ने खुलकर विद्रोह किया।

6. 1858- 59 के अभियोगों में सहस्रों असैनिक भी सैनिकों के साथ साथ विद्रोह के दोषी पाए गए तथा उन्हें दंड दिया गया। यदि विद्रोह केवल सैनिकों ने ही किया तो असैनिकों को दंड क्यों दिया गया।

निष्कर्ष यह कहा जा सकता है कि यह विद्रोह सिपाही विद्रोह मात्र नहीं था। हालांकि विद्रोह की शुरुआत सिपाहियों ने की थी लेकिन विद्रोह के विस्तार के दौरान अन्य वर्गों की भी सक्रिय भूमिका दिखाई देती है।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri, रजनी जी तनेजा

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