Navratri Festival Essay in Hindi | नवरात्रि पर निबंध

नवरात्रि हिंदू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है यह त्यौहार असत्य पर सत्य की जीत को दर्शाता है हिंदू मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि ( Navratri Festival )साल में दो बार मनाया जाता है पहला नवरात्रि चित्र महीने में और दूसरी बार अश्विन महीने में मनाया जाता है अंग्रेजी महीनों के अनुसार नवरात्रि साल में कई बार मनाया जाता है। पहला नवरात्रि मार्च और अप्रैल महीने में और दूसरा अक्टूबर महीने में मनाया जाता है ।

Navratri Festival Essay in Hindi

नवरात्रि यानी 9 दिनों की पूजा के पश्चात फिर दसवें दिन को धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक निरंतर चलता है जिसमें देवी मां के अलग-अलग स्वरूपों की लोग भक्ति और निष्ठा के साथ पूजा करते हैं भारत में नवरात्रि अलग-अलग राज्यों में विभिन्न तरीकों और विधियों के साथ मनाई जाती है। नवरात्र शक्ति की उपासना का पर्व है शक्ति ही विश्व का सृजन करती है शक्ति ही विश्व का संचालन करती है और शक्ति ही इसका सहार करती है।

Reasons to celebrate Navratri Festival ( नवरात्रि मनाने का कारण )

नवरात्रि त्यौहार में लोग 9 दिनों के लिए उपवास रखते हैं और देवी दुर्गा की पूजा करते हैं परिवार की समृद्धि ,अच्छे स्वास्थ्य और खुशी की तलाश के लिए प्रार्थना की जाती है अंतिम दिन लोग कन्याओं को कन्या पूजन के लिए घर में बुलाकर कन्याओं का पूजन कर उन को खाना खिला कर अपना व्रत तोड़ते हैं क्योंकि वह पवित्रता की प्रतीक हैं उन्हें विभिन्न व्यंजन जैसे हलवा पूरी खिला कर पैसे, चूड़ियां, क्लिप आदि का उपहार दिया जाता है।

नवरात्री त्योहार में मां दुर्गा की पूजा इसलिए की जाती है कि देवी मां ने महिषासुर राक्षस का वध किया था। इस राक्षस को ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त था जिसकी वजह से उसने उत्पात मचाया हुआ था लोग उसके अत्याचारों से परेशान थे तब ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी ने अपनी शक्ति को मिलान कर देवी दुर्गा की सृष्टि की थी देवी दुर्गा के 10 हाथ थे और सारी शक्तियां भी उन्हें दी गई थी देवी दुर्गा ने 9 दिनों तक इस राक्षस का मुकाबला किया और अंत में दसवें दिन में जाकर उसका वध किया ।देवी दुर्गा की शक्ति को नवरात्रि के इस त्यौहार में धूमधाम से मनाया जाता है।

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भारत के विभिन्न हिस्सों में नवरात्रि का त्योहार ( Navratri Festival celebration in India )

गुजरात में नवरात्रि – गुजरात में लोग नवरात्रि को बहुत धूमधाम से मनाते हैं महिलाएं और पुरुष पारंपरिक पोशाक पहनते हैं और एक जगह पर डांडिया नृत्य और गरबा नृत्य का आयोजन किया जाता है।

पश्चिम बंगाल में नवरात्रि- पश्चिम बंगाल नवरात्रि त्योहार के विदेशी उत्सव के लिए जाना जाता है यह सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है अनोखे पंडाल लगाए जाते हैं जहां देवी दुर्गा की पूजा की जाती है पंडाल फूलों और आकर्षक सजावटी सामग्री से सजे होते हैं। जुलूस के अंतिम दिन लोग सूखे रंगों से खेलते हैं और नाचते हैं महिलाएं पारंपरिक बंगाली साड़ी पहनती है और एक अनोखी प्रकार का नृत्य करती है ।

जम्मू कश्मीर में नवरात्रि- जम्मू में वैष्णो देवी का प्रसिद्ध मंदिर में उत्सव के दौरान आने वाले भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती ह।ै ऐसा माना जाता है कि अगर लोग त्योहार के दिन मंदिर जाते हैं तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं ।

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9 days of Navratri festival 

नवरात्रि के 9 दिन नवरात्रि के 9 दिन आमतौर पर देवी दुर्गा के नौ अवतारों को समर्पित है और 9 दिन इन 9 अवतारों की पूजा की जाती है जो हम इस प्रकार देखते हैं।

पहला दिन – मां शैलपुत्री देवी पार्वती का अवतार है लाल रंग के वस्त्र पहने हुए मां शैलपुत्री को महाकाली की प्रत्यक्ष अवतार के रूप में दर्शाया गया है। मां शैलपुत्री की सवारी बैल नंदी और एक हाथ में त्रिशूल और अन्य हाथों में कमल लिए रहती है।

दूसरा दिन – देवी ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती या उनकी अविवाहित सुबह देवी सती का एक अवतार है वह शांति और शांति का प्रतीक है और देवी ब्रह्मचारिणी को एक जप माला एवं कमंडल पकड़े हुए दिखाया गया है। नवरात्रि के दूसरे दिन का शुभ रंग कोड नीला माना गया है क्योंकि यह शांति का प्रतीक माना गया है।

तीसरा दिन- देवी चंद्रघंटा का अवतार माना गया है पार्वती ने शिव से विवाह के लिए अपने माथे पर अर्धचंद्र पहला था जिसके कारण चंद्रघंटा देवी के इस रूप का चित्रण हुआ था तीसरा दिन का शुभ रंग पीला होता है जो उनकी जीवंतता का प्रतीक माना जाता है।

चौथा दिन- देवी कुष्मांडा का अवतार माना जाता है देवी कुष्मांडा को ब्रह्मांड में रचनात्मक शक्ति के रूप में जाना जाता है इस दिन का शुभ रंग हरा माना जाता है ।देवी कुष्मांडा की सवारी बाग है जिसे 8 हाथों से दर्शाया है।

पांचवा दिन- देवी स्कंदमाता भगवान स्कंद या कार्तिकेय की मां की शक्ति को दर्शाया है ऐसा माना जाता है कि जब बच्चा खतरे में था तो मां अपने बच्चे के साथ एक शेर को गोद में उठा रखा था इस दिन का शुभ रंग ग्रह है।

छठा दिन- देवी कात्यायनी का अवतार माना जाता है देवी कात्यायनी एक योद्धा देवी है और इन्हें चार भुजाओं के साथ दर्शाया गया है वह शेर की सवारी करती है और साहस का प्रतीक है इस दिन का शुभ रंग नारंगी है।

सातवां दिन- देवी महाकाली का अवतार माना गया है महाकाली देवी दुर्गा का सबसे हिंसक रूप माना गया है इसमें देवी पार्वती राक्षसों के निशुंभ और सुमन को नष्ट करने के लिए उनकी निष्पक्ष तो अच्छा को हटा देती है माना जाता है कि देवी सफेद पोशाक में दिखाई दी और उनकी त्वचा गुस्से में कहीं काली हो गई इसलिए इस दिन का शुभ रंग सफेद माना जाता है।

आठवां दिन- महागौरी का अवतार माना जाता है महागौरी इस दिन शांति और आशावाद दर्शाती है नवरात्रि के आठवें दिन से जुड़ा शुभ रंग गुलाबी माना जाता है।

नौवां दिन- देवी सिद्धिदात्री का अवतार माना जाता है देवी सिद्धिदात्री कमल पर बैठती है और सिद्धियों की शक्ति रखती है देवी सिद्धिदात्री ज्ञान और प्रकृति की सुंदरता को प्रसारित करती है। देवी सिद्धिदात्री को सरस्वती देवी के रूप में भी जाना जाता है इस दिन का शुभ रंग हल्का नीला होता है।

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Maa Shakti Navratri Festival

गुजरात के वडोदरा में नवरात्रि के उत्सव में सबसे भव्य और सुंदर रूप देखने को मिलता है इसमें त्यौहार के दौरान प्रतिदिन चार पांच लाख लोग गरबा नाचने के लिए एक ही स्थान पर इकट्ठा होते हैं जहां बेहतर गरबा करने वालों को पुरस्कृत किया जाता है “मां शक्ति नवरात्रि महोत्सव” को सबसे बड़ा गरबा नृत्य एक साथ होने के कारण लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है । शक्ति और उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक नौ तिथि नौ नक्षत्र नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाई जाती है

सबसे पहले श्री राम जी ने नवरात्रि पूजा समुद्र तट पर की थी और उसके बाद उन्होंने दसवें दिन लंका पर चढ़ाई शुरू की थी तब से नवरात्रि असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाने लगा। देवता मानव सभी इनकी पूजा और कृपा के बिना पंगु हैं इसलिए आगम निगम दोनों में इसकी उपासना समान रूप से वर्णित है सभी देव राक्षस मनुष्य और गंधर्व इनकी कृपा प्रसाद के लिए लालायित रहते हैं।

निष्कर्ष

लोक देवी के इन सभी रूपों की पूजा करते हैं और भारत के कई हिस्सों में 9 दिनों तक उपवास करते हैं लोग देवी की भव्य प्रतिमाएं बनाते हैं और जुलूस निकालते हैं कई जगहों पर नवरात्रि में मेला भरता है दुर्गा पूजा हमारी संस्कृति और लोक विविधता का एक बड़ा प्रतीक है। क्योंकि पूरे भारत में एक ही त्यौहार अलग अलग तरीके से एक साथ मनाया जाता है।

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