PALI District : Rajasthan Jila Darshan | पाली राजस्थान

पाली का इतिहास ( History of Pali District )   

इस जिले का नामांकरण पाली नगर के आधार पर किया गया। प्राचीन काल में इस नगर को पालिका कहा जाता था । यह जिला 24 डिग्री 45′ व 26 डिग्री 29′ उत्तरी अक्षांश और 72 डिग्री 47′ व 74 डिग्री 18′ पूर्वी देशांतर के मध्य स्थित है

इसके उत्तर में जोधपुर व नागौर जिला, उत्तर-पूर्व में अजमेर दक्षिण पूर्व में उदयपुर जिला और राजसमंद जिला दक्षिण-पश्चिम जालौर व सिरोही जिला, पश्चिम में बाड़मेर जिला स्थित है इसका क्षेत्रफल 12386 वर्ग किलोमीटर है क्षैत्रफल की दृष्टि से पाली जिले का राजस्थान में 9वाँ स्थान हैं।

पाली (Pali) का सामान्य परिचय 

  • राज्य – राजस्थान (भारत)
  • प्रशासनिक प्रभाग – जोधपुर संभाग
  • मुख्यालय – पाली
  • क्षेत्रफल – 12,386 वर्ग कि.मी.
  • भौगोलिक स्थिति – 24॰-45॰26′ उत्तरी अंक्षाश, 72॰47′-74॰18′ पूर्वी देशान्तर
  • पाली में राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या – 3 ( NH-65, NH-112, NH-14 )
  • मुख्य रेलवे स्टेशन – पाली व मारवाड़ जंक्शन
  • STD CODE – 02932
  • पिनकोड – 306401
  • वाहन पंजीकरण संख्या – RJ-22
  • आधिकारिक भाषाएं – हिन्दी एवं मारवाड़ी 
  • जिले में प्रशासनिक दृष्टि से 10 तहसिले और 10 ही पंचायत समितियां हैं 4 उपखण्ड कार्यालय हैं
  • तहसील व पंचायत समिति – 1. बाली, 2. देसूरी, 3 जैतारण, 4 रायपुर, 5 पाली, 6 रोहट, 7 मारवाड़ जंक्शन, 8 सोजत, 9 सुमेरपुर, 10 रानी

2011 की जनगणना के अनुसार पाली की जनसंख्या ( Pali Population )

  • पुरुष जनसंख्या –  1025422
  • महिला जनसंख्या –  1012151
  • जनसंख्या योग  – 2037573
  • जनसंख्या घनत्व – 164
  • लिंगानुपात  – 987 ( राजस्थान में तीसरा स्थान)
  • 0-6 आयु की जनसंख्या  – 297434 ( कुल जनसंख्या का 14.60 % )
  • दशकीय जनसंख्या वृद्धि –  11.9%

पाली की भौगोलिक और भौतिक विशेषताएं : Geographical and Physical Features of Pali

तापमान ( Temperature of Pali )

अधिकतम तापमान  – 44.2 सेल्सियस
न्यूनतम तापमान – 1.2 सेल्सियस
वार्षिक वर्षा  – 41.64 सेमी

भूमि

कुल भौगोलिक क्षेत्र 1233 वर्ग हैक्टेयर

  • कृषि क्षेत्रफल –  अनाज 294 हैक्टेयर, दाले 44 हैक्टेयर, तिलहन 171 हैक्टेयर, कपास 20 हैक्टेयर, गन्ना – नगण्य
  • सिंचाई – साधनों के अनुसार विशुद्ध सिंचाई क्षेत्र 156296 हैक्टेयर
  • कुएँ –  कुल कुएँ – 49414, नलकूप – 8517
  • पशुधन – 2803895
  • कुक्कुट – 72904
  • उद्योग – पंजीकृत कारखाने 656

पाली की जलवायु : Pali Climate

इस जिले की जलवायु में तेज गर्मी अल्पवर्षा ठंडा शीतकाल और केवल मानसून के स्वर्ण काल को छोड़कर हवा के शुष्कता वाले लक्षण पाए जाते हैं आधे नवंबर से लेकर फरवरी के अंत तक सर्दी का मौसम रहता है इसके बाद कृष्ण काल का आगमन हुआ है, जो जून माह के अंत तक चलता है फिर दक्षिण पश्चिम मानसून का मौसम होता है जो लगभग आधे सितंबर तक रहता है।

इसके बाद वाले 1 महीने को मानसून के बाद का अथवा जाती हुई मानसून का काल कहा जा सकता है क्योंकि वक्त से दिन और रात दोनों के तापमान में तेजी से बदलाव होता है। उस समय न्यूनतम तापमान पानी के जमाव बिंदु से 2 या 3 डिग्री नीचे तक चला जाता है।

हवाऐं  – सामान्यतः हवाएं हल्की से मध्यम तक होती हैं । किंतु गर्मी में और प्रारंभिक दक्षिण पश्चिम मानसून के मौसम में तेज हवाएं भी चलती है । वह मानसून के मौसम में पश्चिम से दक्षिण पश्चिमी हवाएं प्रभावित होती हैं । वर्षा काल के बाद में वह शीतकाल के महीनों में हवा का रुख प्रमुख रुप से पश्चिम और उत्तर के बीच रहता है । गर्मी के मौसम में हमें दक्षिण पश्चिम व उत्तर पश्चिम दिशाओं के बीच प्रभावित होती है।

आद्रता – केवल दक्षिण पश्चिम मानसून के अल्प काल के दौरान सापेक्ष आद्रता समय तक रहती हैं । वर्ष के बाकी दिनों में हवा शुष्क होती हैं । गर्मी के मौसम में जो कि वर्ष का सबसे गर्म होता है । दोपहर के समय आद्रता सामान्यतः 30% से नीचे रहती है।

सड़कें

  • कुल सड़कें – 5610
  • मोटर वाहन की पंजीकरण संख्या – 82882

संचार सुविधाएं

  • पोस्ट ऑफिस – 378
  • टेलीफोन एक्सचेंज केन्द्र – 129

Pali की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ 

इस जिले में अरावली की पहाड़ियां स्थित है किसी भी पहाड़ी की उचाई महत्वपूर्ण नहीं है पाली तहसील में स्थित पहाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं  मनियारी, बालासोर , सोरावास , केरला , बुमाद्रा, चोटिला भोरी ,भाकरी वाला, हेमावास। 

सोजत तहसील की प्रमुख पहाड़िया इस प्रकार हैं – माताजी की भाखरी, नरसिंह जी की भाकरी, धोलागर का भाकर, नीम की भाकरी ,धारेश्वर की भाखरी, खोड़िया व रायरा तथा गजनाई के भाकर, देसूरी नाल, करमाल भाकरी, भील बेरी, जेतारण सब डिवीजन के अंतर्गत बर, मेघड़दा, सेन्दड़ा, निमाज गिरी, सुमेल और रास में भी छोटी छोटी पहाड़ियां बिखरी हुई है ।

पाली जिले की नदियां ( Rivers of Pali District )

लीलरी नदी 

यह नदी अरावली पर्वत श्रेणियों से निकलती हैं और पाली जिले के जैतारण तहसील के सुमेल और रास नामक गांव से प्रवाहित होती हुई दक्षिण पश्चिम की ओर मुड़ जाती हैं सुकड़ी से मिलती हुई है निमाज से होकर प्रवाहित होती हैं और निम्बोल नामक गांव के निकट लूणी से मिल जाती है 

इसी नाम की एक दूसरी नदी अरावली पर्वत से निकलती हैं और गोरिया एवं बोयल नामक गांव से प्रवाहित होती हुए लगभग 45 किलोमीटर की दूरी तय करती है।

Luni River ( लूनी नदी ) से संबधित सम्पूर्ण जानकारियों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करे 

सुकड़ी नदी 

यह नदी जयसुरी के दक्षिण में स्थित अरावली पर्वत से निकलती हैं और रानी गुडा एंदला और कानोर नामक गांव में प्रभावित होती हैं। पाली जिले में यह लगभग 130 किलोमीटर बहती हैं 

इसी नाम की एक दूसरी नदी भी पाली जिले में ही बहती है यह नदी अरावली पर्वत से निकलती हैं और हरियामाली,बगड़ी नगर, सियाट, सोजत और गागुड़ा से होकर प्रवाहित होती हैं और सरदारसमन्द बांध में जाकर गिरती हैं

बांडी नदी

यह नदी अरावली पर्वत से निकलती हैं और फुलाद, मिथोरा, कालान, भटकते फेकारिया और पाली से होकर निकलती हैं पाली में इसकी जल का उपयोग वस्त्रों की रंगाई हेतु किया जाता है यह नदी पाली जिले में लगभग 118 किलोमीटर तक बहती है 

जवाई नदी

यह नदी  सिरोही जिले से पाली जिले में प्रवेश करती हैं और लगभग 66 किलोमीटर तक प्रवाहित होती हैं एरनपुरा में इस नदी पर जवाई बांध का निर्माण किया गया है।

PALI District की झीले एवं तालाब  

इस जिले में झीलों का अभाव है, यद्यपि यहां सिचाईं के उद्देश्य से अनेक तालाबों और बांधों का निर्माण किया गया है। जवाई बांध, रायपुर बांध, गजनाई बांध, लूणी बांध, हेमावास बांध, खारडा बांध, बिराटिया खुर्द बांध, कंटालिया बांध आदि जिले के प्रमुख बांध है ।

पाली के महत्वपूर्ण स्थल : Famous tourist Place of Pali Rajasthan

रणकपुर

यह स्थान महाराणा कुंभा के शासन काल में निर्मित जैन मंदिरों के लिए विख्यात है रणकपुर जैन मंदिर उदयपुर के महाराणा कुंभा के शासनकाल में उनके मंत्री धरण शाह ने शिल्पी देपा से इस विशाल एवं भव्य चतुर्मुखी मंदिर का निर्माण करवाया था इसमें 1444 विशाल खंबे हैं जिनकी बनावट एक दूसरे से भिन्न है इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में हुआ

परशुराम गुफा 

यह स्थान सादड़ी से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अरावली पर स्थित हैं जनश्रुति के अनुसार ऋषि परशुराम ने यहा पर तपस्या की थी यहां शिवरात्रि एवं श्रावण माह में मेला लगता है गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग है तथा मनमोहक स्थान देखते ही बनता है 

सालेश्वर महादेव 

यह स्थान पाली के गुड़ा प्रताप सिंह गांव के निकट स्थित सालेश्वर महादेव नामक प्राचीन तीर्थ स्थल के लिए प्रसिद्ध है 

जवाई बांध

आधुनिक विकास तीर्थों में सुमेरपुर के निकट जवाई बांध है जो पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध है और मारवाड़ का अमृत सरोवर कहा गया है जो पेयजल की दृष्टि से महत्वपूर्ण है 

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    जूना खेड़ा

    यह गांव नाडोल कस्बे के निकट स्थित हैं। चौहानों की प्राचीन राजधानी रही। यहा पर 8 वीं एवं नवीं शताब्दी के अनेक स्थल दर्शनीय हैं।  जूना खेड़ा चौहान वंश के क्षत्रियों की प्राचीन राजधानी रहा था। इसका इतिहास आठवीं व  9 वीं शताब्दी का रहा। कालांतर में इसका नाम नाडोल हो गया । यही पर  सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर सोलंकियों से युद्ध करते हुए शहीद हुए

    चामुण्डा मंदिर 

    निमाज कस्बे में राजा भोज का बनाया हुआ प्राचीन चामुंडा माता का मंदिर पुरातात्विक महत्व का प्रमुख स्थल है। नाथ निरजंन कुटीर में मेहन्दी नगरी सोजत के समीप नेशनल हाइवे पर स्थित चन्डावल नगर में पश्चिमी राजस्थान के साईनाथ से विख्यात परम् श्रद्धेय, प्रातः वन्दनीय व स्मरणीय ब्रह्मलीन गुरुदेव वासुदेव जी महाराज का परम धाम हैं

    महारात्री (गुरुदेव का जन्मदिन) और गुरुपुर्णिमा पर भव्य बरसी व धार्मिक समारोह का आयोजन होता है जो हजारों की तादाद में भक्त देश के कोने कोने से गुरूवर के धाम पर पहुंचते हैं।

    सुमेल 

    जेतारण के पास गिरी गांव के पास सुमेल का प्रसिद्ध युद्ध 1544 ई. में हुआ। शेरशाह व माल देव के बीच में हुआ था जो एक ऐतिहासिक स्थल है  यहां पर पूर्व सांसद ओंकार सिंह लखावत द्वारा सत्याग्रह उद्यान का निर्माण करवाया है ।

    जूना खेड़ा 

    चौहान वंश की प्राचीन राजधानी तथा जैन धर्म का प्रसिद्ध स्थल सारंगवास खेतलाजी के मेल में गोडवाड समारोह का आयोजन स्थल है । वहां पर हर साल समारोह व धार्मिक समारोह का आयोजन होता हैं। इसका इतिहास आठवीं शताब्दी का रहा है कालांतर में इसका नाम नाडोल हो गया  सम्राट पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर सोलंकी युद्ध करते हुए शहीद हुए।

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    पाली जिले के मेले ( Fairs of Pali District )

    रामदेव जी का मेला  – रामदेव जी का मेला पाली जिले में रायपुर क्षेत्र के बिराटिया खुर्द गांव में प्रतिवर्ष भादवा शुक्ला एकादशी को पड़ता है।

    परशुराम महादेव मेला – देसूरी क्षेत्र में स्थित परशुराम महादेव की प्राकृतिक गुफा एवं परशुराम जयंती श्रावण शुक्ला सप्तमी पर भारी मेला भरता है।

    निंबो का नाथ मेला – नींबों के नाथ स्थल पर वैशाखी पूर्णिमा शिवरात्रि को मेला भरता हैं ।

    सोनाणा खेतलाजी का मेला – सारंगवास गांव में सोना जी खेतला जी का दो दिवसीय लक्खी मेला प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को भरता है इसमें 7 से 70 गैर नृत्य दल अपनी पारंपरिक एवं विचित्र वेशभूषा में ढोल थाली तथा चंग के साथ गैर और लोक नृत्य प्रस्तुत करते हैं।

    बरकाना का मेला  – जैन धर्मावलंबियों का यह मेला रानी के पास बरकाना जैन तीर्थ पर प्रतिवर्ष पौष सुदी 10 को भरता है ।

    चोटिला में पीर दुलेशाह का मेला – यह मेला जोधपुर पाली रेलवे लाइन पर केरला रेलवे स्टेशन के पास हजरत पीर की मजार पर दिवाली के दूसरे दिन भरता है ।

    पाली जिले के अन्य महत्वपूर्ण मेले

    गोरिया गणगौर मेला, महादेव मेला, भाकरी मेला, बजरंग बाग, फूल मंडी मेला, हनुमान मेला, महालक्ष्मी मेला, खिवाड़ा तथा चंडावल का पशु मेला ,मावली पशु मेला, मानपुरा भाकरी पशु मेला, नया गांव चोपड़ा पशु मेला  आनंदपुर कालू में पशु मेला, ओम बन्ना पाली और जोधपुर के मध्य रोहट ओम बन्ना का पवित्र स्थान है जहां पर देश विदेश से लाखों भक्तों आते हैं।

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    लोक संस्कृति 

    पाली जिले के पादरला गांव का 13 ताल लोक नृत्य देश विदेश में विख्यात है अन्य लोक नृत्य में मुंडारा की कच्छी घोड़ी नृत्य । नित्य माता की दांडी भील युवतियों का घूमर, गरासियों का गणगौर नृत्य एवं गवरी नृत्य आदि प्रमुख नृत्य हैं।

    जीवन शैली 

    पाली जिले के लोग बहुत मिलनसार होते है, ये सदैव दुसरों की मदद के लिये तत्पर रहते है। बोली बहुत मीठी होती हैं। बोली में मिठास व अपनत्व होता है। कलात्मक रूप से बनी हुई रंगबिरंगी पोशाकें पहने हुए लोगों को देखकर प्रतीत होता हैं कि पाली की जीवनशैली असाधारण रूप से सम्मोहित करने वाली है। वैसे पाली प्रेम, प्यार व स्नेह का अभिप्राय है। पुरूषों द्वारा पहनी हुई रंगीन पगड़ियाँ एक अलग ही पहचान और चहुँ ओर रंग बिखेर देती हैं।

    खान-पान 

    यहाँ खासतौर पर दूध निर्मित खाद्य पदार्थों का ज्‍यादा प्रयोग होता है। जैसे मावा का लड्डू, क्रीम युक्‍त लस्‍सी, मावा कचौरी, और दूध फिरनी आदि। भोजन में प्राय यहाँ बाजरे का आटे से बनी रोटियां, जिन्हें सोगरा कहते हैं प्रमुखता से खाया जाता है। सोगरा लसन व पुदीने की चटनी, साग आदि के साथ खाया जाता है। जो खाने में स्वादिष्ट होता है। गेहूँ का फुलका (रोटी) भी बड़ी तबियत से जिमते हैं। दाल बाटी चूरमा यहां के लोगों का पसंदीदा व्यंजन हैं। इसी प्रकार छाछ और प्याज भी इसके साथ खाया जाता है।

    RAJASTHAN POLICE EXAM QUESTION 25

    पाली के आऊवा का 1857 की क्रान्ति में योगदान 

    18 सितंबर 1857 की सुबह सुगाली देवी का फतवा ठाकुर कुशालसिंह अपने बाकी साथियों के साथ अंग्रेजों के सामने मैदान में डट गया  घमासान युद्ध छिड़ गया  2 दिन के घमासान युद्ध में जोधपुर के किलेदार अनार सिंह तथा राव रायमल मारे गए और सिंघवी कुशल राज अपनी सेना के साथ चेलावास गांव की ओर भाग गए।

    इसी बीच जोधपुर का अंग्रेजी रेजिडेंट मेजर मैंसन भी इस आक्रमण में सम्मिलित होने पहुंचा लेकिन लारेंस की सेना के कैंप तक पहुंचने से पूर्व ही विद्रोहियों की गोली का शिकार हो गया फिरंगियों का एजेंट मारा गया लॉरेंस ने 3 दिन तक के गेट को घेर रखा किंतु आहुवा की तोपों से निकलने वाले गोलों के सामने नहीं टिक सका और उसको अपनी सेना के साथ पीछे हटना पड़ा ।

    20 जनवरी 1858 कर्नल होम फिर हमला बोल दिया 3 दिन के युद्ध में शक्ति क्षीण हो गई ऐसी स्थिति में ठाकुर पृथ्वी सिंह ने युद्ध का भार लेकर ठाकुर कुशालसिंह को जबरदस्ती युद्ध से चले जाने का दबाव बनाया घमासान युद्ध के पश्चात अंग्रेजों ने अपनी कूटनीति सेे किले के दरवाजे खुलवा दियेे

    इस प्रकार 24 जनवरी 1858 होम्स की सेना ने अाहुवा पर अधिकार स्थापित कर लिया ठाकुर कुशालसिंह पर विपत्ति के पहाड़ टूट पड़े लेकिन उन्होंने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार नहीं की  

    Rajasthan Geography Quiz 12

    Pali से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां

    • श्री उम्मेद मिल राज्य की सबसे बड़ी सूती मिल है
    • फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और मरुधरा लोक कल्याण मंडल पाली में स्थित है।
    • पाली सर्वाधिक जिलो की सीमा छूने वाला जिला है ।
    • निम्बो का नाथ – पांडवों की माता कुंती इसी स्थान पर शिव पूजा किया करती थी।
    • सोमनाथ मंदिर – इसका निर्माण गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी ने विक्रम संवत 1209 में करवाया।
    • नवगज पीर बाबा – सरसमन्द बांध की तलहटी में बाबा की समाधि और मजार है, जहा हिन्दू और मुस्लिम दोनों मज़हब के भक्त लोग आते हैं।
    • मस्तान बाबा – यह कलक्टर स्थल पाली शहर से नये बस स्टैण्ड की तरफ जाते समय बायीं तरफ आता है।
    • आशापुरा माता – यह नाडोल में स्थित है। यह भी पवित्र स्थान हैं जहा हजारों श्रद्धालू भक्त आते हैं।
    • ओम बन्ना – यह पाली से जोधपुर वाले हाइवे मार्ग पर रोहट के समीप स्थित है। इन्हें बुलट वाला बाबा भी कहते हैं।
    • कर्माबाई का मन्दिर – पाली जिले का एकमात्र कर्माबाई का मन्दिर सोजत में अवस्थित है।

    राजस्थान के संबंध में महापुरुषों के विचार

    “जब भी मैं राजस्थान आता हूं मेरा मन पुराने जमाने की ओर चला जाता है राजस्थान का इतिहास वीरता की गाथा  का प्रतिबिम्ब रहा है” – पंडित जवाहरलाल नेहरु  

    “भारतीय संस्कृति के निर्माण में राजस्थान का प्रमुख स्थान हैं। प्रकृति की देन के कारण ही यहां के लोग एक होकर लोक संस्कृति के कई रूपों से जुड़ गए। राजस्थान की संपूर्ण संस्कृति और संस्कार संजीवनी लोक से प्राप्त होती हैं। इसी कारण यह धरा अद्वितीय हैं। राजस्थान के लोग सुसंस्कृत तथा मृदु भाषी हैं”  जैन मुनि विद्यानंद जी  

    “जब जब भी मैंं राजस्थान की वीर प्रसूता धरती पर कदम रखता हूं, मेरा हृदय कांप उठता है कि कहीं मेरे पैर के नीचे किसी वीर की समाधि ना हो, किसी वीरांगना का थान न हो”  –  रामधारी सिंह दिनकर 

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    हीरालाल जाट, अध्यापक चण्डावल नगर, तह सोजत, जिला पाली

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