Parliament of India – संसद

Parliament of India – संसद

किसी भी लोकतांत्रिक शासन में सरकार के 3 अंग होते है 

  1. व्यवस्थापिका
  2. कार्यपालिका
  3. न्यायपालिका

भारत की व्यवस्थापिका को संसद कहा जाता है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 79 में किया गया है जिसके अनुसार भारतीय संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी जिसका नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे

भारत में सर्वप्रथम 1853 के चार्टर के द्वारा एक सदनीय व्यवस्थापिका की स्थापना की गई (केंद्रीय विधान परिषद)

1892 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा सर्वप्रथम भारत में संसदीय प्रणाली की शुरुआत की गई 1919 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा द्विसदनात्मक व्यवस्थापिक की स्थापना की गई

  1. केंद्रीय विधानसभा ( सदस्य संख्या 145 कार्यकाल 3 वर्ष )
  2. राज्य परिषद ( सदस्य संख्या 60 कार्यकाल 5 वर्ष )

नोट – भारत में संसद संप्रभु नहीं है जनता संप्रभु है

भारतीय सविधान में संघीय व्यवस्थापिका को ‘संसद’ का नाम दिया गया हे। संसद के निम्न तिन अंग हे:-

1. रास्ट्रपति  – जो कार्य पालिका का प्रधान हे और उसकी कानून निर्माण के क्षेत्र में भी भूमिका हे।
2. लोकसभा – जो प्रथम या निम्न सदन या वरिष्ठ सदन हे।
3. राज्यसभा – जो द्वितीय अर्थात उच्च सदन या वरिष्ठ सदन।

भारतीय संविधान सभा ने दो कार्य किए

  1. संविधान का निर्माण
  2. जब तक संसद का गठन नहीं होता तब तक केंद्रीय व्यवस्थापिका के रूप में

नोट –  भारतीय संविधान के भाग 5 के अध्याय 2 व 3 तथा अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद की संरचना, पदाधिकारी तथा प्रक्रियाओं का उल्लेख है

भारत की संसद का वृताकार भवन है जिसके वास्तुकार सर एडवर्ड लुटियंस तथा हर्बर्ट बेकर (1992 से 1813) है अनुच्छेद 79 संघ की एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और उसके दो सदनों से मिलकर बनेगी जिनका नाम लोकसभा व राज्यसभा होगा

संविधान के अनुसार भारत की संसद के तीन अंग हैं   राष्ट्रपति, लोकसभा व राज्यसभा। 1954 में राज्य परिषद एवं जनता का सदन के स्थान पर क्रमशः राज्यसभा एवं लोकसभा शब्द को अपनाया गया। राज्यसभा, उच्च सदन कहलाता है जबकि लोकसभा निचला सदन कहलाता है।

भारत की संघीय व्यवस्थापिका को संसद के नाम से जाना जाता है । संविधान के अनुच्छेद 79 से 122 तक संसद से संबंधित प्रावधान है ।अनुच्छेद 79 के अनुसार “संघ के लिए एक संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेंगी जिनके नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे”।

राष्ट्रपति को संसद का अंग एन गोपाल स्वामी की सिफारिश पर जोड़ा गया तथा राज्यसभा, लोकसभा, व राष्ट्रपति इनमें से एक की भी अनुपस्थिति रहने पर वह संसद नहीं कहलाती ह।

भारतीय संसद में राज्यसभा और लोकसभा संसद के दो प्रमुख अंग है राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य न होते हुए भी संसद का अभिन्न अंग होता है। संसद का अपना एक सचिवालय होता है जिसके मुख्य कैबिनेट सचिव होता है और पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होता है।

संसदीय समितियां

यह भारत शासन अधिनियम 1919 की देन है यह दो प्रकार की है – 

  1. स्थाई
  2. अस्थाई

1 प्राकलन समिति – यह है स्थाई समिति है जिसे जॉन मथाई की सिफारिश पर है 1950 मे गठित किया गया

  • सदस्य संख्या 30 ( लोकसभा से )
  • सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष
  • कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं हो सकता
  • सत्ता पक्ष का सदस्य इसका अध्यक्ष होता है
  • इसे लोक सभा की समिति भी कहा जाता है
  • कार्य वित्तीय नियंत्रण

2 लोक लेखा समिति – यह स्थाई समिति है  इसका गठन 1921 में किया गया

  • सदस्य संख्या 22 (15 लोकसभा, सात राज्यसभा से)
  • 1967 से अध्यक्ष विपक्ष का होता है जिसे लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त किया जाता है
  • सदस्यों का कार्यकाल 1 वर्ष है कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं होता

नोट – लोक लेखा समिति को प्राक्कलन समिति की जुड़वा बहन कहा जाता है कार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदन पर विचार विमर्श करना

3 लोक उपक्रम समिति –   स्थापना कृष्ण मेनन समिति की सिफारिश पर 1964 में

  • सदस्य संख्या 22 (15 लोकसभा, सात राज्यसभा)
  • अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष
  • कार्य सार्वजनिक उपक्रमों की देखरेख करना

Parliament important facts

  1. संसद जननी किसे कहा जाता हे  – ब्रिटेन की संसद को
  2. भारतीय संसद का अंग हे   – राष्ट्रपति, राज्यसभा तथा लोकसभा
  3. सांसदो के वेतन का निर्णय कौन करता हे  – संसद
  4. संसद के दोनो सदनो का संयुक्त सत्र कोन बुला सकता हे – राष्ट्रपति
  5. अविष्ट अधिकार किसको दिए गये हे – संघ की संसद को
  6. संसद को भंग करने के लिए कौन सक्षम हे – राष्ट्रपति
  7. संसदीय कार्य विधि शुन्य काल किसकी देन हे – भारतवर्ष

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

सुभाष शेरावत, D. S ALWAR, लाल शंकर पटेल डूंगरपुर,  दीपक मेघवाल उदयपुर

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