Rajasthan History-20th Century Events ( 19-20 वीं शताब्दी की प्रमुख घटनाएं )

20th Century Events

19-20 वीं शताब्दी की प्रमुख घटनाएं

प्र 1. देश हितैषनी सभा ?

उत्तर- 2 जुलाई 1877 ईस्वी में महाराणा सज्जन सिंह की अध्यक्षता में उदयपुर में देश हितैषनी सभा का गठन किया गया। इसका उद्देश्य राजपूतों में वैवाहिक समस्याओं को सुलझाना था। देश हितैषनी सभा के अपेक्षित परिणाम निकले।

प्र 2. कुशाल सिंह चांपावत ?

उत्तर- सुगाली देवी का भक्त आउवा का ठाकुर कुशाल सिंह चांपावत 1857 की क्रांति का वीर नायक था, जिसने एरिनपुरा छावनी के क्रांतिकारी सैनिकों को नेतृत्व प्रदान किया और अंग्रेजों से लोहा लिया।

प्र 3. वृहद राजस्थान ?

उत्तर- 30 मार्च 1949 को जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर रियासतों के ‘संयुक्त राजस्थान’ में समूहन से ‘वृहद् राजस्थान’ के निर्माण से राजस्थान में सदियों पुराना निरंकुश राजतंत्र समाप्त हो गया। अब 30 मार्च राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्र 4. मारवाड़ प्रजामंडल ?

उत्तर- मारवाड़ राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना तथा नागरिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए 1934 ईस्वी में जोधपुर में भंवरलाल सर्राफ की अध्यक्षता में मारवाड़ प्रजामंडल की स्थापना की गई।

प्र 5. खांडलाई आश्रम ?

उत्तर- माणिक्य लाल वर्मा ने आदिवासी भीलों एवं हरिजनों में शिक्षा प्रसार एवं उनके सर्वोन्मुखी विकास के लिए 1934 ईस्वी में सागवाड़ा से 10 मील दूर भीलों की पाल के मध्य खंडलाई आश्रम की स्थापना की।

लघूतरात्मक ( 50 से 60 शब्द )

प्र 6. नीमूचना हत्याकांड।

उत्तर- अलवर राज्य के किसान लगान दर में वृद्धि के विरोध में 14 मई 1925 ईस्वी के दिन अलवर के निमूचना गांव में एकत्रित हुए। शांति सभा कर रहे किसानों पर पुलिस ने मशीनगन उसे गोलियां बरसाई। सैकड़ों लोग घटनास्थल पर मारे गए। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। उनके घरों एवं पशुओं को जलाया गया। लोगों को घरों से निकालकर घोड़ों की टापों से मारा गया। गांधी जी ने इसे जलियांवाला हत्याकांड से भी विभत्स एवं जघन्य कृत्य बताया। इसके बावजूद भी आंदोलन थमा नहीं। अंततः अलवर नरेश को झुकना पड़ा और लगान में छूट देनी पड़ी। तब कहीं जाकर यह आंदोलन समाप्त हुआ।

प्र 7. सागरमल गोपा।

उत्तर- जैसलमेर में जन्मे सागरमल गोपा जीवन पर्यंत अपनी जन्मभूमि के दुखों को दूर करते रहे। इन्होंने अत्याचारी निरंकुश राजशाही का कड़ा विरोध कर जैसलमेर राज्य में राजनीतिक चेतना उत्पन्न करने के साथ-साथ शिक्षा प्रसार पर विशेष जोर दिया। गोपा जी ने ‘आजादी के दीवाने’ एवं ‘जैसलमेर में गुंडाराज’ पुस्तके छपवा कर वितरित की। जिनमें जैसलमेर राजशाही के काले कारनामों की लंबी सूची एवं उनकी कटु आलोचना की। साथ ही अपने क्रांतिकारी विचारों एवं गतिविधियों से लोगों में राजनीतिक चेतना उत्पन्न की। इसके लिए उनको राज का कोप भाजन बनना पड़ा। इन्हें राजद्रोह के आरोप में 24 मई 1941 ईस्वी को जेल में डाल कर इन पर अमानवीय अत्याचार किए। अंततः इन पर तेल छिड़ककर आग लगा दी गई और जीवित ही जला दिया गया।

प्र 8. राजस्थान के एकीकरण में सिरोही के विलय की समस्या।

उत्तर- सरदार पटेल ने सिरोही को नवंबर 1947 में मुंबई प्रांत के अंतर्गत कर दिया जो गोकुल भाई भट्ट की जन्मभूमि थी। शास्त्री जी ने कहा हमारे लिए सिरोही व गोकुल भाई भट्ट का अर्थ एक ही है। गोकुल भाई भट्ट के बिना हम राजस्थान नहीं चला सकते। राजस्थान के एकीकरण के छठे चरण में जनवरी 1950 को देलवाड़ा व आबू बंबई प्रांत में तथा शेष सिरोही (गोकुल भाई भट्ट सहित) राजस्थान में मिला दिया गया। सिरोही की जनता ने गोकुल भाई भट्ट के नेतृत्व में एक लंबा आंदोलन इस निर्णय के विरुद्ध छेड़ा। यह आंदोलन तब समाप्त हुआ जब 1 नवंबर 1956 को सिरोही को देलवाड़ा व आबू सहित राजस्थान में मिलाया गया।

प्र 9. राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान बताइए। (निबन्धात्मक)

उत्तर- राजस्थान में राजनीतिक चेतना और नागरिक अधिकारों के लिए अनवरत चले आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका भी श्लाघनीय रही है। 1930 से 1947 तक अनेक महिलाएं जेल गई। इन का नेतृत्व करने वाली साधारण गृहणियां ही थी जिनकी गिनती अपने कार्यों तथा उपलब्धियों से असाधारण श्रेणी में की जाती है। अजमेर की प्रकाशवती सिन्हा, अंजना देवी (पत्नी रामनारायण चौधरी), नारायणी देवी (पत्नी माणिक्य लाल वर्मा), रतन शास्त्री (पत्नी हीरा लाल शास्त्री) आदि प्रमुख थी।

बिजोलिया आंदोलन के दौरान अनेक स्त्रियों ने भाग लिया जिनमें श्रीमती विजया, श्रीमती अंजना, श्रीमती विमला देवी, श्रीमती दुर्गा, श्रीमती भागीरथी, श्रीमती तुलसी, श्रीमती रमा देवी जोशी और श्रीमती शकुंतला गर्ग ने भाग लेते हुए सत्याग्रह किया तथा बड़े साहस के साथ पुलिस दमन चक्र का सामना किया। अनेक किसान महिला सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें विभिन्न अवधि के कारावास का दंड दिया गया। 1930 ईस्वी के नमक सत्याग्रह से महिलाओं में राजनीतिक चेतना का आरंभ हुआ।

जब राजस्थान में राजनीतिक चेतना और नागरिक अधिकारियों के लिए संघर्ष का बिगुल बजा को महिलाएं भी इसमें कूद पड़ी तथा पुरुषों के साथ वह भी सत्याग्रह में खुलकर भाग लेने लगी। 1942 की अगस्त क्रांति में छात्राओं ने अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया। रमादेवी पांडे, सुमित्रा देवी खेतानी, इंदिरा देवी शास्त्री, विद्या देवी, गौतमी देवी भार्गव, मनोरमा पंडित, मनोरमा टंडन, प्रियंवदा चतुर्वेदी और विजया बाई आदि ने अगस्त क्रांति में खुल कर भाग लिया। कोटा शहर में तो रामपुरा पुलिस कोतवाली पर अधिकार करने वालों में छात्राएं भी शामिल थी। राजस्थान में 1942 के आंदोलन में जोधपुर राज्य का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

इस आंदोलन में लगभग 400 व्यक्ति जेल में गए। महिलाओं में श्रीमती गिरिजा देवी जोशी, श्रीमती सावित्री देवी भाटी, श्रीमती सिरे कंवल व्यास, श्रीमती राज कौर व्यास आदि ने अपनी गिरफ्तारियां दी। उदयपुर में महिलाएं भी पीछे नहीं रही। माणिक्य लाल वर्मा की पत्नी नारायणी देवी वर्मा अपने छह माह के पुत्र को गोद में लिए जेल में गई। प्यारचंद विश्नोई की धर्मपत्नी भगवती देवी भी जेल गई। रास्ता पाल की भील बाला काली बाई 19 जून 1947 को रास्ता पाल सत्याग्रह के दौरान शहीद हुई।

इस प्रकार जिस तरह राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में पुरुषों का योगदान रहा, महिलाओं का योगदान भी कम नहीं रहा। वह पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रही।

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri, तिलोकाराम जी

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