Panchayati Raj System राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था

Rajasthan Panchayati Raj System

राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था

ग्राम पंचायत ( Village Panchayat )

  • संस्था का नाम : ग्राम पंचायत
  • क्षेत्राधिकार और गठन : गाँव या गाँवो का समूह (सरपंच ,उपसरपंच, और पंच)
  • सदस्य : ग्राम सभा द्धारा निर्वाचित पंच (प्रत्येक वार्ड से एक)
  • सदस्यों का निर्वाचन : प्रत्येक वार्ड में पंजीकृत व्यस्क सदस्यों द्धारा
  • त्यागपत्र : विकासअधिकारी को
  • अध्यक्ष का पदनाम : सरपंच
  • अध्यक्ष का चुनाव : ग्राम सभा के सभी व्यस्क सदस्यों के बहुमत के आधार पर
  • अध्यक्ष द्धारा त्यागपत्र : विकासधिकारी को
  • उपाध्यक्ष : उपसरपंच
  • उपाध्यक्ष का चुनाव : निर्वाचित पंचो द्धारा बहुमत के आधार पर
  • उपाध्यक्ष त्यागपत्र : विकासअधिकारी को
  • बेठकें : प्रत्येक 15 दिन मे कम से कम एक बार
  • सरकारी अधिकारी : ग्राम सचिव (ग्राम सेवक)
  • आय के साधन : राज्य सरकार से  प्राप्त अनुदान, कर शुल्क और शास्तियो द्धारा प्राप्त आय ।
  • कार्य : सफाई , पयेजल और स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था करना , सार्वजिनक स्थानों पर  प्रकाश की व्यवस्था करना।
    जन्म और म्रतुय का पंजीकरण करना,  वन और पशुधन का विकास और सरक्षण, भू आवंटन करना, ग्रामउद्योग और कुटीर उद्योगों को  बढावा देना और  ग्राम के विकास के कार्य करना।

पंचायत समिति ( Panchayat Samiti )

  • संस्था का नाम : पंचायत समिति
  • क्षेत्राधिकार और गठन : विकास खंड (ब्लॉक) प्रधान , उपप्रधान , ओर सदस्य
  • सदस्य : निर्वाचित सदस्य
  •  त्यागपत्र : प्रधान को
  • अध्यक्ष का पदनाम : प्रधान
  • अध्यक्ष का चुनाव  : निर्वाचित सदस्यों के द्धारा बहुमत के आधार पर अपने सदस्यों  मे  से ही निर्वाचन
  • अध्यक्ष द्धारा त्यागपत्र : जिला प्रमुख  को
  • उपाध्यक्ष का चुनाव : निर्वाचित सदस्यों के द्धारा बहुमत के आधार पर अपने सदस्यों मे  से ही निर्वाचन
  • उपाध्यक्ष द्धारा त्यागपत्र : प्रधान को
  • बेठकें : प्रत्येक माह मे कम से कम एक बार
  • सरकारी अधिकारी : खंड विकास अधिकारी (BDO)
  • आय के संसाधन : राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान और वितीय सहायता अलग-अलग करों से प्राप्त आय।
  • कार्य : ग्राम पंचायत द्धारा किये जाने वाले कार्यो की देखरेख करना, पंचायत समिति क्षेत्र मे प्रारम्भिक  शिक्षआ की व्यवस्था, किसानो के लिए उतम किस्म के बीज और खाद उपलब्ध कराना, उतम स्वास्थ्य  सेवा उपलब्ध कराना, पंचायत सिमिति और पुलों का निर्माण और रखरखाव करना।

जिला स्तर ( District level )

  • संस्था का नाम :  जिला परिषद
  • क्षेत्राधिकार और गठन : एक जिला ( जिला प्रमुख , उपजिलाप्रमुख और सदस्य
  • सदस्य : निर्वाचित सदस्य
  • निर्वाचित सदस्य संख्या : कम से कम 17सदस्यों द्धारा
  • त्यागपत्र : जिला प्रमुख को
  • अध्यक्ष का पदनाम : जिला प्रमुख
  • अध्यक्ष द्धारा त्यागपत्र : संभागीय आयुक्त को
  • उपाध्यक्ष का चुनाव :  केवल निर्वाचित सदस्यों के बहुमत के आधार पर अपनों मे से ही
  • उपाध्यक्ष द्धारा त्यागपत्र : जिला प्रमुख को
  • बेठकें : प्रत्येक तीन माह मे कम से कम एक बार
  • सरकारी अधिकारी : मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
  • आय के साधन : राज्य सरकार से प्राप्त अनुदान और वित्तीय सहायता, पंचायत सिमिति की आय से प्राप्त अंशदान, जनसहयोग से प्राप्त धनराशि
  • कार्य :  ग्राम पंचयतो और पंचायत सिमितीयो के बीच समन्वय करना और  उन्हे परामर्श देनाग्राम पंचायत और राज्य सरकार के बीच कड़ी का कार्य, विकास कार्यो के बारे मे राज्य सरकार को सलाह देना, पंचायत सिमिति के क्रियाकलापों की सामान्य देखरेख करना, विकास कार्यकर्मो को क्रियानिवित करना।

शहरी स्थानीय प्रशासन ( Urban Local Administration ) 

  • नगर निगम : जिन शहरो की जनसंख्या 5 लाख से अधिक हो , वहाँ का स्थानीय स्वशासन “नगर निगम” कहलाता है।
  • नगर परिषद : एक लाख से अधिक और 5 लाख के बीच की आबादी वाले क्षेत्र नगरपरिषद कहलाते है।
  • नगर पालिका :  एक लाख की आबादी वाले क्षेत्र “नगर पालिका” कहलाते है। राज्य मे वर्तमान मे 7 नगर निगम है  ( जयपुर , जोधपुर , कोटा , अजमेर , बीकानेर , उदयपुर और भरतपुर )।
  • सदस्यों का निर्वाचन : व्यस्क मताधिकार के आधार पर वार्डो से निर्वाचित स्थानीय निकाय के प्रत्येक वार्ड से एक पार्षद चुना जाता है।
  • पार्षदों की योग्यताये : न्यूनतम आयु 21 वर्ष।
  • अध्यक्ष/उपध्यक्ष का चुनाव : निर्वाचित पार्षदों के बहुमत के आधार पर किया जाता है।
  • अध्यक्ष/उपध्यक्ष का हटाना :  1/3 पार्षद द्धारा लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को 3/4  बहुमत से पारित करने के बाद जनमत संग्रह मे बहुमत प्रस्ताव के पक्ष मे आने पर “राईट तो रिकाल” का प्रावधान है।
  • कार्यकाल: 5 वर्ष
  • विघटन : विघटन की स्थिति मे विघटन की तारीख से  6 माह मे चुनाव कराने आवश्यक है।
  • आरक्षण :  सविधान संशोधन मे सभी पदों पर सभी वर्गो मे ( एक तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित किये गये थे। जिसे बढ़कर 50% कर दिया गया है। जो क्रमिक रुपसे लौटरी द्धारा निर्धारित किया गया है )
  • बैठकें : एक  वर्ष मे निकाय बोर्ड की कम से कम दो बेठकें होना अनिवार्य है। दोनों बेठकों के बीच 6 माह से अधिक का अन्तराल नहीं होना चाहिए
  • आय के साधन : राज्य से सरकार से प्राप्त अनुदान और ऋण। विभित्र कर, शुल्क और जुर्माने  से प्राप्त आय, बेचीं गयी सम्पति से आय, राज्य सरकर और अन्य अभिकरण से लिया गया ऋण।
  • राइट टू रिकाल का प्रावधान : नगर निगम, नगर परिषद्, नगर पालिका के प्रमुख को अपनी पद से हटाने के लिए उसके पदग्रहण की तिथि से उसके कार्यकाल के 2 वर्ष का समय पूरा होने पर ही उसे हटाने का प्रावधान है। 
  • नगर विकास न्यास ( “UIT” )राज्य मे नगरो के सुनियोजित विकास के लिए नगर विकास न्यास भी है।नगर विकास न्यास का अध्यक्ष राज्य सरकार द्धारा मनोनीत होता है
  • कार्य : नई बस्तियों का योजनापूर्ण निर्माण करना और उनका रखरखाव करना। नव विकसित बस्तियों मे सड़कों का निर्माण, रोशनी  और पेयजल की व्यवस्था करना। वृक्षारोपण कराना और बाग़ बगीचों,  उपवनों पार्को आदि का निर्माण और उनकी देखभाल करना।

पंचायती राज संस्थाओ को सशक्त बनाने हेतु उठाये गए कदम : 

  1. पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार
  2. किसान सेवा केंद्र
  3. विलेज नौंलेज सेंटर
  4. राजीव गाँधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान योजना
  5. नवाचार निधि योजना
  6. राष्ट्रीय  ग्राम स्वराज योजना
  7. आदर्श ग्राम पंचायत और मिनी सचिवालय
  8. जिला ग्रामीण विकास अभिकरण
  9. पंचायत राज संस्थाओ के लिए निर्बध कोष
  10. ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ
  11. शिक्षित होना अनिवार्य
  12. पंचायती राज के लिए संवैधानिक प्रावधान

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri

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