Ras Mains Test Series -9

Ras Mains Test Series -9

धन का अधिकतमीकरण, वित के स्रोत, पूंजी संरचना, पूंजी लागत

Overhauling of funds, Sources of finance, Capital structure, Capital cost

अतिलघुतरात्मक ( 15 से 20 शब्द )

प्र 1. अनुकूलतम पूंजी संरचना की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- कंपनी द्वारा निर्गमित अंशों और ऋण पत्रों के मिश्रण से जब पूंजी लागत न्यूनतम और अंशो के मूल्य को अधिकतम बनाए रखा जा सकता हो तो उसे अनुकूलतम पूंजी संरचना कहा जाता है।

प्र 2. ऋण पत्र से क्या तात्पर्य है ?

उत्तर- ऋण पत्र कंपनी की सार्वमुद्रा के अधीन जारी एक ऐसा प्रलेख है जो कंपनी पर ऋण को प्रमाणित करता है तथा ऋण की प्रमुख शर्तों को प्रकट करता है।

प्र 3. आढतीकरण को समझाइए।

उत्तर- यह देनदारियों का एक प्रकार का विक्रय है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्थान को देनदारी वसूल करने का अधिकार दे दिया जाता है एवं इसकी एवज में कुछ बट्टा काटकर कम राशि पहले ही ले ली जाती है।

प्र 4. पूंजी संरचना को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- किसी उपक्रम की कुल दीर्घकालीन पूंजी में विभिन्न पूंजी प्राप्ति के स्रोतों के अनुपात को निश्चित करना ही पूंजी संरचना कहलाता है।

प्र 5. पूंजी की लागत से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर- पूंजी की लागत वह न्यूनतम प्रत्याय दर है जो किसी संस्था को ऋणदाताओं को उनके त्याग की लागत का भुगतान करने व अपने समता अंशों के बाजार मूल्य में वृद्धि करने के लिए अपने विनियोगों पर अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।

लघूतरात्मक ( 50 से 60 शब्द )

प्र 6. धन के अधिकतमीकरण के क्या उद्देश्य है ? बताइए  

उत्तर- धन के अधिकतमीकरण के उद्देश्य-

  1. अंशधारियों के अंशो के मूल्य में वृद्धि करना।
  2. कंपनी के शुद्ध मूल्य का अधिकतम करना।
  3. वित्तीय निर्णयों को अधिक व्यापकता प्रदान करना।
  4. व्यवसाय की दीर्घकालीन सुस्थिरता बढ़ाना।
  5. विनियोग पर अधिकतम प्रत्याय प्राप्त करना।

प्र 7. पूंजी की लागत की अवधारणा का महत्व समझाइए।(120 शब्द )

उत्तर-

  1. पूंजी लागत की अवधारणा किसी संस्था के अनुकूलतम पूंजी संरचना निर्धारण में अत्यंत सहायक होती है।
  2. वित्त प्राप्ति के विभिन्न स्रोतों में से किसी समय विशेष पर किसी एक या अधिक स्रोतों का चुनाव उनके लागत का तुलनात्मक अध्ययन करके किया जा सकता है।
  3. पूंजी की लागत पूंजी विनियोग संबंधी निर्णयों की आधारशिला है। हम उसी प्रस्तावना या परियोजना को स्वीकार करते हैं जिससे होने वाली संभावित प्रत्याय की दर पूंजी की लागत से अधिक हो या बराबर हो।
  4. पूंजी की लागत के आधार पर कार्यशील पूंजी की मात्रा तथा न्यूनतम लागत हेतु उपयुक्त स्रोत का चुनाव किया जा सकता है।
  5. पूंजी की लागत की अवधारणा से किसी व्यवसाय की संभावित आय का पता लगाने के साथ-साथ उसमें अंतर्निहित जोखिम के बारे में जानकारी मिलती है।
  6. पूंजी की लागत के आधार पर उच्च प्रबंध की वित्तीय कुशलता का मूल्यांकन करना संभव होता है।

प्र 8. पूंजी संरचना को प्रभावित करने वाले तत्व कौन कौन से हैं? मूल्यांकन कीजिए । (150 शब्द)

उत्तर-

  1. भावी योजनाएं – संस्था के भावी विकास की योजनाएं या नवीन तकनीके पूंजी संरचना को को प्रभावित करती है।पुरानी संस्था बनाम
  2. नवीन संस्था – जब उपक्रम पुराना हो तो उसे बाजार से ऋण आसानी से मिल जाता है जबकि नए संस्था को इसमें कठिनाई होती है।
  3. प्रबंधकों की क्षमताएं – किसी कंपनी के प्रबंधक गण जितने अधिक योग्य एवं अनुभवी होंगे उतनी ही श्रेष्ठ पूंजी संरचना का निर्माण किया जा सकेगा।
  4. समता पर व्यापार की नीति- समता अंश धारी की नीति रहती है कि व्यवसाय में केवल अपनी ही समता पूंजी रखें और भावी अंशो के निर्गमन से बचते हुए ऋणों की मात्रा बढ़ाकर अधिकाधिक लाभ कमाएं। अतः ऐसी नीति से पूंजीगत ढांचा का प्रभावित हुए बिना नहीं रहता है।
  5. व्यवसाय पर नियंत्रण की इच्छा – जब अंश धारी ही प्रबंधक का कार्य करने लगते हैं और केंद्रीकरण की प्रवृत्ति बनाते हैं तो संस्था को बाजार की परिस्थिति के अनुरूप लाभ या नुकसान हो सकता है।
  6. परिचालन अनुपात की स्थिति- संस्था के परिचालन खर्चों का विक्रय किए गए माल की शुद्ध विक्रय की राशि से अनुपात पूंजी संस्था को प्रभावित किए बिना नहीं रहता है।
  7. पूंजी दंति अनुपात- दंति अनुपात से तात्पर्य कंपनी की कुल पूंजी में से समता पूंजी और स्थिर लागत वाली पूंजी के मध्य के अनुपात को ज्ञात करने से हैं, जिसके कारण पूंजी संरचना प्रभावित होती है।

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

चित्रकूट जी त्रिपाठी, P K Nagauri

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