Renaissance पुनर्जागरण काल

Renaissance

पुनर्जागरण काल

अतिलघुतरात्मक (15 से 20 शब्द)

प्र 1. पुनर्जागरण का अर्थ क्या है ?

उत्तर- पुनर्जागरण मानव के स्वातंत्र्य प्रिय साहसी विचारों को जो मध्य युग में धर्म अधिकारियों द्वारा जकड़े व बंदी कर लिए गए थे, को व्यक्त करता है। पुनर्जागरण एक राजनीतिक व धार्मिक आंदोलन नहीं था बल्कि यह एक मानसिक क्रांति और सांस्कृतिक आंदोलन था।

प्र 2. मानववाद से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर- मानववाद शब्द लैटिन भाषा के Humanities से निकला है जिसका शाब्दिक अर्थ है उन्नत ज्ञान। मानववाद का तात्पर्य उस उन्नत ज्ञान से है जिसमें मानवता का माधुर्य और जीवन की वास्तविकता निहित है।

प्र 3. पुनर्जागरण का क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर- पुनर्जागरण का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव धार्मिक क्षेत्र में था। मध्यकालीन रूढ़ियों व अंधविश्वास का पतन तथा इसी के प्रभाव स्वरूप भौगोलिक एवं वैज्ञानिक खोजों का मार्ग प्रशस्त हो गया।

प्र 4. लियोनार्डो द विंची ?

उत्तर- लियोनार्डो फ्लोरेंस के विंची गांव का रहने वाला था। उसे फ्लोरेंस में मेडिची परिवार का संरक्षण प्राप्त हुआ। उसके प्रमुख चित्रों में मोनालिसा, लास्ट सपर, वर्जन ऑफ द रॉक्स, वर्जिन एंड चाइल्ड विद सेंट एन आदि है।

प्र 5. टॉमस मूर ?

उत्तर- पुनर्जागरण कालीन ब्रिटिश साहित्यकार जिसने ‘यूटोपिया’ नामक एक काल्पनिक ग्रंथ लिखा। जिसमें आदर्श राज्य व समाज की कल्पना की गई। यह पुस्तक मूल रूप से लैटिन में लिखी गई थी परंतु इसका अंग्रेजी में अनुवाद कर दिया गया। उसके अन्य ग्रंथों में है – डायलॉग अपोलोजी आदि।

लघूतरात्मक (50 से 60 शब्द)

प्र 6. पुनर्जागरण की विशेषताएं बताइए।

उत्तर- पुनर्जागरण की निम्नलिखित विशेषताएं थी-

  1. पुष्टि के लिए प्रयोग का महत्व स्थापित होना।
  2. मानववाद अर्थात मानव जीवन, उसकी समस्याओं, उसके महत्व आदि पर विचार।
  3. सहज सौंदर्य की उपासना।
  4. परंपराओं को और मान्यताओं को तर्क की कसौटी पर कसना।
  5. बोलचाल की भाषा में साहित्य की रचना।
  6. मध्यकालीन विषयों का प्रभाव।
  7. व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकास।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास।

प्र 7. फ्रांसिस्को पैटार्क का एक मानववादी के रूप में वर्णन कीजिए।

उत्तर- पैटार्क को मानववाद का जनक कहा जाता है। इसे पुनर्जागरण का जनक भी कहा जाता है। यह 14वीं शताब्दी का इटालियन विद्वान था। इसके पिता दांते के घनिष्ठ मित्र थे। पैटार्क के द्वारा लिखित ग्रंथों में अप्रीय नामक लंबा गीत है जिसमें सीपियों के अद्भुत जीवन का उल्लेख किया गया है। पैटार्क ने 14 पंक्तियों की विशेष कविता की शैली प्रारंभ की जिसे सोनेट्स कहते हैं। उसने सोनेट्स टू लोरा नामक कविताएं लिखी। इसने मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं, प्रेम व दुख को अभिव्यक्ति प्रदान की। इसके अन्य ग्रंथों में सम्मिलित है ‘फैमिलियर लेटर्स’ जिसमें प्राचीन विद्वानों को संबोधित किया गया है जैसे सिसरो, वर्जिल, हॉरेस आदि। ‘इलस्ट्रीयस मैन’ नामक पुस्तक में प्राचीन रोमन साम्राज्य के 30 रोमन शासकों का वर्णन किया गया है। इसने प्राचीन रोमन व यूनानी पांडुलिपियों को भी संग्रहित किया तथा आधुनिक पुस्तकालयों की स्थापना की।

प्र 8. पुनर्जागरण एक मनोदशा थी। विवेचना कीजिए।

उत्तर-

  1. पुनर्जागरण अतीत में रुचि का प्रतीक और भविष्य को समझने का दृष्टिकोण था।
  2. पुनर्जागरण अज्ञात को समझने के प्रति एकचेतना थी।
  3. पुनर्जागरण चिंतन की स्वतंत्रता का परिचायक। स्वतंत्र सोच का परिचायक था।
  4. पुनर्जागरण एक उत्सुकता पूर्ण दृष्टि का परिचायक जिसमे परीक्षण व जांच तर्क के तत्वों का निहित होना।
  5. एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण, एक विवेकपूर्ण दृष्टिकोण, एक तर्कसंगत दृष्टिकोण था।
  6. पुनर्जागरण की दृष्टि का केंद्र बिंदु मानव जिसके अंतर्गत मानव गरिमा की स्थापना पर बल दिया गया। मानव के प्रति यह दृष्टिकोण एक नवीन दृष्टि का परिचायक था।
  7. इस नवीन दृष्टि की अभिव्यक्ति विभिन्न क्षेत्रों में जैसे कला, साहित्य, विज्ञान आदि में हुई।

प्र 9. पुनर्जागरण का विज्ञान के क्षेत्र में क्या प्रभाव पड़ा? पुनर्जागरण कालीन प्रमुख वैज्ञानिक विचार धाराएं कौन-कौन कौन-कौन सी उपजी? विवेचना कीजिए । (निबन्धात्मक)

उत्तर- पुनर्जागरण काल में विज्ञान का अभूतपूर्व विकास हुआ जिसके कारण थे-

  1. धार्मिक आवरण को हटाकर सोचने की प्रवृत्ति
  2. मानववाद से बौद्धिक विकास
  3. वैज्ञानिक वाद को प्रोत्साहन
  4. तर्क वाद की स्थापना

रोजर बेकन को प्रायोगिक विज्ञान का जन्मदाता माना जाता है। उसके इस कथन ने “ज्ञान की प्राप्ति प्रेक्षण और प्रयोग करने से ही हो सकती है” ने विज्ञान को जन्म दिया ।

मुख्य वैज्ञानिक विचारधाराएं-

सूर्य केंद्रित सिद्धांत : टॉलेमी ने भू केंद्रित सिद्धांत स्थापित किया था। जिसे पुनर्जागरण काल में पोलैंड के वैज्ञानिक कॉपरनिक्स एक अमान्य करके सूर्य केंद्रित सिद्धांत प्रतिपादित किया। कॉपरनिक्स ने ‘कंसर्निंग द रिवोल्यूशन ऑफ हेवनली बॉडीज’ तथा’ ऑन द रिवोल्यूशन ऑफ सेलीस्टियल बॉडीज’ नामक पुस्तक लिखी।

जर्मन खगोल शास्त्री केपलर ने कॉपरनिक्स के सिद्धांत की गणितीय प्रमाणोंसे पुष्टि की। उसने बताया कि ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते समय उनका पथ वर्तुलाकार ना होकर दीर्घ वृत्तीय होता है। इटालियन वैज्ञानिक गैलीलियो ने कॉपरनिक्स के सिद्धांत को स्वीकार किया। जिसने एक दूरबीन बनाकर ग्रहों की गति को देखा। गैलीलियो ने यह सिद्ध कर दिया कि गिरते हुए पिंड की गति उनके भार पर निर्भर नहीं करती बल्कि दूरी पर निर्भर करती है।

जिससे अरस्तु का सिद्धांत गलत साबित हो गया। ब्रिटिश वैज्ञानिक सर आइज़ेक न्यूटन ने यह सिद्ध कर दिया कि यह समस्त ग्रह आपस में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण की वजह से बंधे हुए हैं। उन्होंने पलायन वेग का सिद्धांत भी स्थापित किया। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘प्रिंसिपिया मैथमैटिसिया’ में इस सिद्धांत को स्थापित करके यह स्पष्ट कर दिया कि प्रकृति सुव्यवस्थित नियमों के अनुसार चल रही है। इंग्लैंड के वैज्ञानिक विलियम गिलबर्ट ने चुंबक की खोज की तो हॉलेंडवासी जॉनसन ने माइक्रोस्कोप बनाया।

चिकित्सा विज्ञान में इंग्लैंड के विलियम हार्वे ने रक्त परिसंचरण का सिद्धांत प्रतिपादित किया। नीदरलैंड के वैज्ञानिक बेसीलियस ने औषधि एवं शल्य प्रणाली का अध्ययन किया और अपनी पुस्तक ‘कंसर्निंग द स्ट्रक्चर आफ हुमन बॉडीज’ इनके सिद्धांत स्थापित किए। इसी प्रकार वॉन हेलमोट ने CO2 गैस का निर्माण किया तो कोडेस ने ईथर का। रॉबर्ट बाइल ने गैसों के विस्तार के क्षेत्र में नए सिद्धांत प्रतिपादित की।

निष्कर्ष यह निकला कि विश्व म कोई देव योग या आकस्मिक घटना नहीं है अपितु एक ऐसी वस्तु है जो प्रकृति के सुव्यवस्थित नियमों के अनुसार चल रही है।

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri, राजपाल जी

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