Retikal Question 03

Q.1  भूषण का वीर रसात्मक काव्य भले ही शिवाजी को आलम्बन रूप में लेकर चला, लेकिन उसमें हैं ?

A उनके प्रति निष्ठा का अभाव ✔
B उत्साहजनक वाणी का भाव
C राष्ट्रीय चेतना का भाव
D अलंकारों का भाव

Q.2 शिवाजी की प्रशस्ति और ओजपूर्ण वाणी प्रस्फुटन भूषण की किस रचना में मिलता है?

A शिवराज भूषण
B शिवाजी प्रताप
C शिवा बावनी ✔
D शिवाष्टक

Q.3 भूषण की भाषा की आलोचना किंसने की?

A आचार्य शुक्ल✔
B नामवर सिंह
C हजारीप्रसाद
D रामविलास शर्मा

Q.4  बिहारी के पश्चात किस रितिकवि की सतसई आती है?

A रसलीन
B मतिराम✔
C लाल
D पद्माकर

Q.5 बिहारी सतसई पर ‘फिरंगी सतसई’ नाम से फारसी भाषा में एक टीका लिखी गई जिसके टीकाकार है?

A आनंद शर्मा शंकर
B मिर्जा गालिब
C कृपाराम
D आनंदीलाल शर्मा ✔

Q.6 रीतिकालीन वह कोनसा कवि है जो अनेक आश्रयदाताओं के यहाँ भटकते हुए भी काव्य रचना में निरन्तर प्रवृत्त रहा?

A देव✔
B घनानंद
C बिहारी
D रसलीन

Q.7 देव रचित ‘भाव विलास’ सम्बंधित है?

A रसभेद
B नायक नायिका भेद
C अलंकार निरूपण
D उपर्युक्त सभी✔

Q.8 देव किस दृष्टि से अधिक सफल है?

A आचार्य
B कवि✔
C टीकाकर
D आलोचक

Q.9 सर्वप्रथम देव ने किस राजा का आश्रय ग्रहण किया था ?

A भोगीलाल
B भवानीदत्त
C आजमशाह✔
D कुशल सिंह

Q.10 बूंदी के महाराव  भावसिंह के आश्रय में रहने वाला वह कवि कौन सा है , जिसने ‘सतसई’ की रचना की थी?

A सूर्यवँशी
B मतिराम✔
C वृंद
D मकरंद शाह

Q.11 पंडित विश्वनाथ प्रसाद मिश्र द्वारा घनानन्द की समस्त रचनाओं का सम्पादन किस ग्रन्थ के रूप में किया?

A घनानन्द चयनिका
B भोगपरक
C घनानंद वाणी
D घनानंद ग्रन्थावली✔

Q.12 घनानंद की वर्णन शैली प्रेम की अनिवर्चनीयता का निष्ठुरता का प्रतिपादन करते समय सर्वाधिक प्रयोग करती है?

A फैंटसी का
B विरोधमूलक✔
C बिम्बो का
D प्रतीकों का

Q.13 घनानंद के समूचे  कवित्व में प्रेम की निष्ठुरता ओर परस्पर स्नेह  सम्बन्ध को अभिव्यक्ति देने वाला बिम्ब कौन-सा है?

A मोर-मोरनी
B बिजली-बादल
C स्वाति नक्षत्र-पपीह
D बादल ओर चातक✔

Q.14 रीतिकाल के पतन का क्या कारण  था?

A जीवन निरपेक्षता
B चमत्कार अतिशयता
C अत्यधिक रसिकता
D उपर्युक्त सभी✔

Q.15 रूप के पर्व में एन्द्रिय आनंद का पान करके नयनोत्सव का रंग जिन कवियों में सर्वाधिक मिलता है वे है?

A बिहारी ,भूषण, सेनापति
B मतिराम, घनानंद, पद्माकर✔
C बोधा, आलम, ठाकुर
D देव,रसलीन,घनानन्द

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