Sovereignty ( सम्प्रभुता )

Sovereignty ( सम्प्रभुता )

सम्प्रभुता राजनीती विज्ञान की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा हे एवम् राज्य का सबसे अनिवार्य तत्व हे क्योकि सम्प्रभुता के कारण ही राज्य आंतरिक दृष्टि से सर्वोच्च तथा बाहय दृष्टि से स्वतंत्र होता हे।

Sovereignty सब्द की उत्तपति लेटिन भाषा के सब्द Supernhas से हुई हे जिसका अभिप्राय हे सर्वोच्च सत्ता अर्थात राज्य की सर्वोच्च सत्ता को ही संप्रभुता की सज्ञा दी जाती हे।

सर्वप्रथम बोदा ने अपनी पुस्तक six book concering the republic/state में सम्प्रभुता सब्द का प्रयोग किया तथा बोड के अनुसार ” सम्प्रभुता नागरिको तथा प्रजाजनों पर वह शक्ति हे जिस पर कानून का कोई नियंत्रण नहीं होता हे।”

गार्नर के अनुसार:- सम्प्रभुता राज्य की ऐसी विशेषता हे जिअके कारण वह अपनी इच्छा के अलावा अन्य किसी से भी सिमित नहीं होती हे।

विलोबि:- सम्प्रभुता को राज्य की सर्वोच्च इच्छा माना हे।

गिलक्राइस्ट:- सम्प्रभुता को राज्य की सर्वोच्च शक्ति माना हे ।

लास्की:- सम्प्रभुता के कारण की राज्य अन्य सभी समुदायो से प्रथक होता हे।

संप्रभुता आंतरिक तथा बाहरी दो प्रकार की होती हैं। संप्रभुता राज्य की सर्वोच्च शक्ति होती है सिद्धांतिक दृष्टि से इस पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती है।  राष्ट्रीय और राजतंत्र में राज्यों के उदय के परिणाम स्वरुप संप्रभुता का सिद्धांत अस्तित्व में आया।

प्राचीन भारतीय चिंतन में धर्म एवं दंड को राज्य की संप्रभुता शक्ति का आधार माना गया है पूर्णता, सार्वभौमिकता, और अहस्तांतरणनियता स्थायित्व, अविभाज्यता तथा अनन्यता, संप्रभुता के प्रमुख लक्षण हैं।

संप्रभुता के नाम मात्र की तथा वास्तविक वैज्ञानिक राजनीतिक तथा वेद और वास्तविक आदि अनेक रुप हो सकते हैं।

संप्रभुता की एक तत्ववादी धारणा के अनुसार सर्वोच्च संप्रभु शक्ति अखंडित होती है यह एक इकाई है तथा व्यक्तियों और संघों में इसका विभाजन नहीं हो सकता। संप्रभुता के बहुलवादी धारणा के अनुसार संप्रभुता केवल राज्य में नहीं रहती बल्कि इसका निवास समाज में विद्यमान अनेक प्रकार की राजनीतिक धार्मिक सांस्कृतिक सामाजिक तथा आर्थिक संस्थाओं में भी होता है।

सम्प्रभुता के लक्षण ( Symptoms of Sovereignty )

  1. सर्वोच्चता
  2. पूर्णता
  3. सार्वभौमिकता
  4. स्थायित्व
  5. अदेयता
  6. अविभाज्यता

सम्प्रभुता के लक्षण

1). नाम मात्र तथा वास्तविक
2) वैधानिक तथा राजनितिक
3). लोकप्रिय सम्प्रभुता
4) विधि सम्मत तथा तथ्य सम्मत सम्प्रभुता

1. नाममात्र तथा वास्तविक सम्प्रभुता:-  नाममात्र का सम्प्रभुता वह होता हे जिसके नाम पर शासन किस समस्त शक्तिया उसी में निहित होती हे लेकिन वह वास्तविक रूप में प्रयोग नहीं कर सकता हे ब्रिटिश ताज, व भारतीय राष्ट्रपति।
वास्तविक सम्प्रभु वह सम्प्रभु जिसके द्वारा शासन की समस्त शक्तियो का वास्तव में प्रयोग किया जाता हे भारत में मंत्रिपरिषद तथा ब्रिटेन में मंत्रिपरिषद सहित प्रधानमन्त्री।

2. वैधानिक सम्प्रभु तथा राहनीतिक सम्प्रभुता:-  वैधानिक सम्प्रभुता से अभिप्राय वह सम्प्रभु हे जिसे कानून निर्माण तथा उसे लागू कराने का सर्वोच्च अधिकार प्राप्त हो ब्रिटिश संसद् को वैधानिक सम्प्रभुता का श्रेष्ठ उदाहरण माना हे।
राजनितिक सम्प्रभुता का अभिप्राय जनता के निर्वाचक मंडल से हे जिस पर वैधानिक सम्प्रभु का आश्तित्व निर्भर हे।

डायसी:- “वैधानिक सम्प्रभु को राजनेतिक सम्प्रभु के आगे झुकना पड़ता हे।”

3. लोकप्रिय सम्प्रभुता:- इसका अभिप्राय जनशधरण की शक्ति जब शासन की अंतिम शक्ति का प्रयोग जनता के द्वारा किया जाता हे तो इसे लोकप्रिय सम्प्रभुता कहते हे वर्तमान में सम्प्रभुता का यही रूप सर्वमान्य हे। रूसो लिकप्रिय सम्प्रभुता के सर्वश्रेष्ठ समर्थक माने जाते हे।

4. विधि सम्मत तथा तथ्य सम्मत सम्प्रभुता:- विधि सम्मत सम्प्रभु वह सम्प्रभु हे जिसे राज्य के कानून के तहत सर्वोच्च शक्ति प्राप्ति हो तथा कानून आज्ञा देने व आज्ञा पालन लराने का वेध अधिकार हो।
तथ्य सम्म्मत सम्प्रभु वह सम्प्रभु हे जिसने शक्ति बाल पर शासन सत्ता पर अधिपत्य स्थापित कर सम्प्रभुता का यह प्रकार क्रांतियों के समय दिखाई देता हे जेसे 1999 में पाकिस्थान में नवाज सरीफ विधिसम्मत सम्प्रभु थे जबकि मुशर्रफ तथ्य सम्मत सम्प्रभु थे।

सम्प्रभुता के सिद्धांत ( Principles of Sovereignty )

1).  एकलवादि/ वैधानिक सम्प्रभु
2). बहुलवादी सम्प्रभु

 

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

लाल शंकर पटेल, महेन्द्र चौहान

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