रीतिमुक्त काव्यधारा

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*)इस धारा के कवि लक्षण उदाहरण की न तो पद्धति अपनाते है, न ही लक्षणों का ध्यान रखते है *)ये प्रेम के विशेषतः विरह के उन्मत गायक कवि है *)इनमे रीतिबद्धता और दरबारीपन के प्रति विद्रोह का भाव *)प्रमुख काव्यभाषा -- ब्रज *)इस धारा के कवियों का लक्ष्य ह्र्दय के भाववेगो को मुक्त भाव से उड़ेल देना है *)रीतिमुक्त काव्य व्यक्तिप्रधान है *)प्रेम वर्णन व्यथाप्रधान(फ़ारसी का प्रभाव) *)प्राचीन काव्यपरम्परा का त्याग *)भावात्मकता,,,रहस्यत्मक्ता,,,लाक्षणिकता,,,मार्मिकता

**घनानन्द** *)1689-1739 *)मुहम्मदशाह के मीर मुंशी *)प्रेमिका--सुजान वेश्या *)ग्रन्थ--सुजानसागर, विरहलीला, कोकसार, रासकेलिवल्ली, *)वियोग श्रंगार के प्रधान मुक्तक कवि *)भाषा--लक्षणा से युक्त *)आ.शुक्ल-- "ये साक्षात रसमूर्ति और ब्रजभाषा काव्य के प्रधान स्तम्भो में है" "प्रेम की पीर को ही लेकर इनकी वाणी का प्रादुर्भाव हुआ" *)वि.त्रिपाठी-- "घनानन्द कलाकार है कलावादी नहीं"

**बोधा** *)नाम-बुद्धिसेन *)पन्ना के दरबार में *)शिवसिंह सरोज में जन्म--1747ई *)सुभान नामक वेश्या से प्रेम *)पुस्तक-- विरहवारिश,, इश्कनामा *)आ.शुक्ल-- "बोधा एक रसोन्मत कवि थे" *)भाषा--स्वाभाविक रूप *)अकृत्रिमता बोधा की कविता की सर्वपमुख विशेषता **आलम** *)कविताकाल(1683-1703ई) *)ब्राह्मण थे(शेख रंगरेजिंन से प्रेम फिर मुसलमान) *)ओरंगजेब के बेटे मुअज्जम के आश्रय में *)रचनाओ में ह्र्दय तत्व प्रधान *)कविता संग्रह--आलमकेलि *)भाषा--अलंकार से युक्त *)आ.शुक्ल-- "प्रेम की पीर या इश्क का दर्द इनके एक एक वाक्य में भरा पाया जाता है" "प्रेम की तन्मयता की दृष्टि से आलम की गणना रसखान और घनानंद की कोटि में ही होनी चाहिए" *)वि.त्रिपाठी--"प्रेम की दीवानगी के कवि"

**ठाकुर**** *)जन्म ओरछा(1766ई) *)कविताओ का संग्रह--ठाकुर ठसक नाम से *)भाषा--लोकोक्तियों का प्रयोग *)आ.शुक्ल-- "ठाकुर बहुत सच्ची उमंग के कवि थे इनमे कृत्रिमता का लेश नहीं" "लोकोक्तयो का जैसा मधुर उपयोग ठाकुर ने किया है वैसा और किसी कवि ने नहीं" *)वि.त्रिपाठी-- "ठाकुर मध्यकाल के उन दुर्लभ कवियों में से है जिनकी प्रेम की अनुभूति आधुनिक है| प्रेमी प्रिय का तन भी चाहता है लेकिन तन से अधिक उसका मन चाहता है"

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