नवीन लोक प्रशासन का अर्थ (New Public Administration)
लोक प्रशासन में नवीनता से तात्पर्य है किसी भी प्रचलित प्रशासनिक व्यवस्था में नवीन तथ्यों व नवीन विधियों को प्रभावी करना । तकनीकी दृष्टि से इसका आशय ‘प्रशासनिक संगठन व्यवहार विधियों एवं प्रक्रियाओं में संगठित एवं व्यवस्थित सुधार करना है।,
सन् 1968 के पश्चात् लोक प्रशासन के अध्ययन क्षेत्र में नये विचारों का उदय हुआ । इन विचारों को ही ‘नवीन लोक प्रशासन’ की संज्ञा दी गई । सन् 1967 में ‘हनी प्रतिवेदन’ के प्रकाशन के साथ ही ‘नवीन लोक प्रशासन’ को मान्यता मिली ।
मिन्नोब्रुक सम्मेलन I, 1968 ( Minnowbrook Conference 1968 ) - यह सम्मेलन युवा पीढ़ी का सम्मेलन था । 1960 का दशक उथल-पुथल का काल था । पुराने एवं युवा पीढ़ी के बीच मतभेद नजर आने लगे थे* इस सम्मेलन में चर्चा का प्रमुख विषय यह था कि परिवर्तनशील समाज में लोक प्रशासन की क्या भूमिका होनी चाहिये, नवीन लोक प्रशासन के समर्थक लोक प्रशासन की प्रचलित व्यवस्था से असन्तुष्ट थे । वे उथल-पुथल के काल में लोक प्रशासन के जागरूक होने की अपेक्षा करते थे। इस सम्मेलन द्वारा लोक प्रशासन को नवीन छवि प्रदान की गई ।
अतिलघुतरात्मक (15 से 20 शब्द)
1. वुडरो विल्सन को लोकप्रशासन का पिता क्यों कहा जाता है?
उत्तर- विल्सन ने प्रशासन को विज्ञान के रूप में प्रस्तुत किया तथा राजनीति से पृथक प्रशासन की इस नयी व्याख्या के कारण ही वाल्डो ने विल्सन को लोक प्रशासन का पिता कहा।
2. गेंगप्लांक क्या है? बताइए।
उत्तर- पदसोपानीय व्यवस्था की कमियों एवं दोषों को दूर करने के लिए प्रभावी संचार की व्यवस्था।
3. POSDCORB को स्पष्ट करे।
उत्तर- P- Planning
O- organization
S- staffing
D- direction
CO- Coordination
R- Reporting
B- Budgeting
4. नवीन लोक प्रशासन के लक्ष्य बताइए
उत्तर- नवीन लोक प्रशासन के लक्ष्य -- 1. प्रासंगिकता, 2. मूल्य, 3. परिवर्तन, 4. सामाजिक समानता
5. नव लोक प्रबंधन में 4D क्या हैॽ
उत्तर- Delegation (प्रत्यायोजन), Democratisation (लोकतंत्रीकरण), Decentralisation (विकेन्द्रीकरण), Debureaucratisation (विनौकरशाहीकरण)
प्र.6. सत्ता का प्रत्यायोजन क्या है?
उत्तर-उच्च आधिकारिक स्तर द्वारा प्राधिकार और कार्यों को निम्न अधिकारियों को सौंपा जाना।
प्र.7. प्राधिकार और उत्तरदायित्व में क्या अंतर है?
उत्तर- प्राधिकार का प्रत्यायोजन किया जा सकता है लेकिन उत्तरदायित्व का नहीं किया जा सकता है।
प्र.8. वैधता की दो विशेषताएं बताइए
उत्तर- 1. वैधता जन आस्था का प्रतीक है।
2. वैधता एक गत्यात्मक अवधारणा है।
प्र.9. शक्ति के स्रोत कौन कौन से हैं?
उत्तर- शक्ति के स्रोत -
- व्यक्तिक गुणों के द्वारा
- अर्थ पर नियंत्रण करके
- विभिन्न विचारधाराओं के प्रयोग द्वारा
- परिस्थितिगत शक्ति
प्र.10. प्रत्यायोजन की कोई दो सीमाएं बताइए
उत्तर- निम्न का प्रत्यायोजन नहीं हो सकता
- नियम बनाने की शक्ति
- विशिष्ट उच्च पदों पर नियुक्त करने का अधिकार
लघूतरात्मक (50 से 60 शब्द)
1. 'आधुनिक समय में लोकप्रशासन का अर्थ नवीन लोक प्रशासन या प्रबंधन से है।' कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर- नवीन लोक प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण का समर्थक, सामाजिक परिवर्तन पर व नवीनता और लोचशीलता बल देने वाला है। यह ग्राहक केन्द्रित प्रशासन है जो विकेन्द्रीकरण और प्रत्यायोजन का समर्थक है तथा सामाजिक कार्यकुशलता तथा प्रभावशीलत आपर बल देता है। इस प्रकार नवीन लोक प्रशासन परम्परागत लोक प्रशासन से विचारधारा के रूप में अलग है।
2. लोक प्रशासन के मिन्नोब्रुक सम्मेलनों के बारें में बताइए।
उत्तर- प्रथम सम्मेलन 1968 - इसमे भाग लेने वाले अधिकतर प्रतिभागियों की पृष्ठभूमि राजनीति विज्ञान से थी। यह सम्मेलन डी वाल्डो की अध्यक्षता में हुआ।
द्वितीय सम्मेलन 1988 - इसमे राज्य की भूमिका सेवा प्रदायक के स्थान पर सुविधापरक करने का प्रयास किया गया।
तृतीय सम्मेलन 2008 - इस सम्मेलन की विषयवस्तु थी -, लोकप्रशासन का भविष्य, लोक प्रबंध तथा विश्व में लोक सेवा। '
प्र.3. भारत में प्रत्यायोजन की आवश्यकता क्यों है?
उत्तर- देश में बढती समस्याओं की जटिलता और बढ़ रहे कार्य क्षेत्र के लिए प्रयोजन की आवश्यकता है प्रयोजन की आवश्यकता इस तरह भी बढ़ जाती है कि शोध कार्य अनुसंधान आपदा प्रबंधन सामाजिक समस्याओं राजनीतिक मसलों कूटनीतिक मामलों समेत कई स्तरों पर प्रयोजन की आवश्यकता पड़ती है। तकनीकी व विशेषज्ञता की आवश्यकता भी इसका एक प्रमुख कारण है।
प्र.4. प्राधिकार और उत्तरदायित्व साथ-साथ चलते हैं। टिप्पणी कीजिए।
उत्तर- प्राधिकार के साथ ही उत्तरदायित्व समान रूप में अवस्थित होना चाहिए। इस संबंध में हेनरी फेयोल ने कहा है कि प्राधिकार और उत्तरदायित्व अंतर्संबंधित एवं समानुपातिक होने चाहिए। उरविक ने इस संबंध में तदनुरूपता का सिद्धांत प्रतिपादित किया।
इसके अनुसार सभी स्तरों पर सत्ता एवं उत्तरदायित्व सहवासीनी और परस्पर समान होते हैं। वस्तुतः सांगठनिक कार्यों के प्रभावी निष्पादन के लिए एवं संगठन को सुनिश्चित मानकों एवं मापदंडों, वैज्ञानिक रीति के अनुसार चलाने के लिए पदसोपान के प्रत्येक स्तर पर प्राधिकार एवं उत्तरदायित्व समानुपातिक होने चाहिए।
