संस्कृत व्याकरण

संस्कृत व्याकरण १. वि+आङ्+कृ+ल्युट (व्युत्पत्ति) २. व्याक्रयन्ते व्युत्पाद्यन्ते शब्दाः अनेन इति व्याकरण: ३. व्याकरण को “शब्दानुशासन” भी कहा जाता है । ४. स्वर-व्यंजन, संधि-समास, शब्द-धातु, प्रकृति-प्रत्यय व स्फोट सिद्धांत व्याकरण के प्रमुख विभाग है । ५. रक्षा, ऊहा, आगम, लाघव व संदेहनिवारण इसके पञ्च प्रयोजन है । ६. वेदांगों में व्याकरण को “मुख” की संज्ञा …

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