

भारतीय कला और संस्कृति का विकास: प्रागैतिहासिक काल से ब्रिटिश युग तक (Fine and Performing Arts of India till the British Period) भारतीय कला और संस्कृति का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गतिशील रहा है, जो प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्रों से शुरू होकर ब्रिटिश काल की आधुनिक विधाओं तक विस्तृत है। इस विकास यात्रा में ललित कलाएँ (जैसे चित्रकला, मूर्तिकला) और प्रदर्शन कलाएँ (जैसे शास्त्रीय नृत्य, लोक संगीत) न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का माध्यम बनीं, बल्कि इन्होंने सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को भी प्रतिबिंबित किया। यह पोस्ट विशेष रूप से RPSC RAS, MPPSC, UPPSC, UKSSSC, BPSC और UPSC Mains परीक्षा के नवीनतम पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जिसमें अतिलघुत्तरात्मक और लघुत्तरात्मक प्रश्नों के माध्यम से महत्वपूर्ण कला रूपों का प्रामाणिक व सटीक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है ताकि आप मुख्य परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त कर सकें।
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प्रश्न 1. प्रागैतिहासिक पाषाण चित्रकला का प्रमुख स्थल - भीमबेटका?
उत्तर: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका एक प्रसिद्ध यूनेस्को धरोहर है। यहाँ आदिमानव द्वारा बनाई गई करीब 600 गुफाएं मिली हैं, जिनमें से 275 गुफाओं में शिकार, नाच-गाने और रोजमर्रा की जिंदगी को दर्शाने वाले बेहद खूबसूरत शैलचित्र (पत्थरों पर बने चित्र) आज भी मौजूद हैं।
प्रश्न 2. साफी कला क्या है?
उत्तर: साफी कला असल में हमारी पारंपरिक रंगोली या अल्पना का ही एक रूप है। यह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र की कला है, लेकिन पिछले करीब 40 सालों से यह बिहार के पटना और मिथिलांचल वाले इलाकों में सूती कपड़ों और फर्श पर ज्यामितीय आकृतियाँ बनाने के लिए बहुत ज्यादा मशहूर हो चुकी है।
प्रश्न 3. भरतनाट्यम?
उत्तर: भरतनाट्यम तमिलनाडु का सबसे पुराना और प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है, जो पूरी तरह से भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' पर आधारित है। पुराने समय में दक्षिण भारत के मंदिरों में देवदासियों द्वारा इस नृत्य को बढ़ावा दिया गया था। यह मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाने वाला एक एकल (Single) नृत्य है, जिसमें भाव और कला का खूबसूरत मेल दिखता है।
प्रश्न 4. ठुमरी गायन शैली?
उत्तर: ठुमरी उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक बेहद लोकप्रिय और सुगम (हल्की-फुल्की) शैली है। इसमें शास्त्रीय नियमों के साथ-साथ भावनाओं और श्रृंगार रस को ज्यादा अहमियत दी जाती है। इसकी चाल थोड़ी चंचल होती है और इसे गाते समय बहुत ही कोमल शब्दों और ब्रजभाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
प्रश्न 5. रऊफ नृत्य?
उत्तर: रऊफ जम्मू-कश्मीर का एक बहुत ही सुंदर और पारंपरिक लोक नृत्य है, जिसे वहाँ की मुस्लिम महिलाएं वसंत ऋतु में फसल की कटाई के बाद खुशी मनाने के लिए करती हैं। इसमें नाचने वाली महिलाएं आमने-सामने दो कतारों में खड़ी होकर, एक-दूसरे के गले में हाथ डालकर गाती और थिरकती हैं। खास बात यह है कि इसमें किसी म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट (वाद्य यंत्र) की जरूरत नहीं होती।
प्रश्न 6. अजंता चित्रकला और बाघ चित्रकला के बीच अंतर और समानता के बिंदु बताइए।
उत्तर:
प्रश्न 7. जहांगीर कालीन चित्रकला की मुख्य विशेषताएं बताइए।
उत्तर: जहांगीर के शासनकाल को मुगल चित्रकला का 'गोल्डन पीरियड' (स्वर्णकाल) कहा जाता है क्योंकि जहांगीर खुद कला का बहुत बड़ा पारखी था। इस दौर की मुख्य बातें ये थीं:
प्रश्न 8. यक्ष गान नृत्य नाट्य के प्रमुख लक्षण बताइए।
उत्तर: यक्षगान कर्नाटक राज्य का एक बहुत ही अनोखा और पारंपरिक नाटक-नृत्य (Dance-Drama) रूप है, जिसके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
प्रश्न 9. आरंभिक भारतीय शिलालेखों में अंकित 'तांडव' नृत्य की विवेचना कीजिए।
उत्तर: भारत के पुराने इतिहास और पत्थरों पर लिखे लेखों (शिलालेखों) में 'तांडव' नृत्य का बहुत बड़ा धार्मिक और दार्शनिक महत्व है। इसे पूरी सृष्टि के चलने, मिटने और दोबारा बनने के चक्र से जोड़कर देखा जाता है।
Specially thanks to Post Authors - P K Nagauri, रजनी जी तनेजा
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