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UPSC & RAS Mains: Behavior Psychology Important Question Answer

UPSC & RAS Mains: Behavior Psychology Important Question Answer

क्या आप UPSC या RPSC RAS Mains परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं? मुख्य परीक्षा में सफलता का मुख्य आधार अवधारणात्मक स्पष्टता और सटीक उत्तर-लेखन शैली (Answer Writing) है। RAS Mains Paper-3 (व्यवहार/मनोविज्ञान) एवं UPSC GS-IV के लिए अधिगम, स्मृति, अभिप्रेरणा और विस्मरण बेहद महत्वपूर्ण विषय हैं। इस विशेष ब्लॉग पोस्ट में परीक्षा के नए पैटर्न को ध्यान में रखते हुए 50-60 शब्द (लघूत्तरात्मक) एवं 100-150 शब्द (निबन्धात्मक) सीमा वाले प्रामाणिक मॉडल प्रश्न-उत्तर तैयार किए गए हैं। यह नोट्स आपकी उत्तर-लेखन कला को निखारने और मुख्य परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करने में अत्यंत मददगार सिद्ध होंगे।

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लघूत्तरात्मक प्रश्न-उत्तर (शब्द सीमा: 50–60 शब्द)

प्रश्न 1. 'मन' (Mann) के अनुसार अधिगम (Learning) को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: मनोवैज्ञानिक एन. एल. मन (N.L. Mann) के अनुसार— "सीखना व्यवहार का अपेक्षाकृत स्थायी एवं प्रगतिशील रूपांतरण है, जो अभ्यास, प्रशिक्षण या अनुभव के परिणामस्वरूप किसी विशेष क्रिया में परिलक्षित होता है।"

मुख्य विशेषताएँ:

  • इसमें अनुभव द्वारा व्यवहार में स्थायी परिवर्तन आता है।
  • यह प्रक्रिया व्यक्ति को पर्यावरण के साथ अनुकूलन करने में सक्षम बनाती है।

प्रश्न 2. मनोविज्ञान में 'संवेदी स्मृति' (Sensory Memory) क्या है?

उत्तर: संवेदी स्मृति, स्मृति तंत्र की प्रारंभिक अवस्था है जो ज्ञानेंद्रियों (आंख, कान, त्वचा आदि) के माध्यम से प्राप्त उद्दीपकों की सूचनाओं को अत्यंत कम समय (1 सेकंड या उससे भी कम) के लिए उनके मूल रूप में बनाए रखती है।

विशेषता: यह केवल प्राथमिक स्तर की संवेदी छाप (Sensory Impression) होती है। यदि इस पर ध्यान केंद्रित न किया जाए, तो सूचना तुरंत लोप हो जाती है।

प्रश्न 3. गिलफोर्ड (Guilford) के अनुसार अभिप्रेरणा (Motivation) की परिभाषा लिखिए।

उत्तर: जे. पी. गिलफोर्ड के अनुसार— "अभिप्रेरक (Motive) एक विशेष आंतरिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक दशा या कारक है, जो किसी व्यक्ति को किसी क्रिया को आरंभ करने, उसे दिशा देने तथा निरंतर जारी रखने की प्रवृत्ति प्रदान करता है।"

सार: यह वह आंतरिक बल (Internal Force) है जो व्यक्ति को लक्ष्य-निर्देशित व्यवहार करने हेतु प्रेरित करता है।

प्रश्न 4. मैस्लो के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Need Hierarchy Theory) के अनुसार मानव आवश्यकताओं के 5 स्तर बताइए।

उत्तर: अब्राहम मैस्लो ने मानव अभिप्रेरकों को निम्न से उच्च क्रम में 5 स्तरों में वर्गीकृत किया है:

  1. दैहिक/शारीरिक आवश्यकताएं (भोजन, जल, नींद)
  2. सुरक्षा की आवश्यकताएं (शारीरिक व आर्थिक सुरक्षा)
  3. संबद्धता एवं स्नेह की आवश्यकताएं (सामाजिक संबंध, प्रेम)
  4. सम्मान की आवश्यकताएं (आत्म-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा)
  5. आत्म-सिद्धि की आवश्यकताएं (अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त करना)

प्रश्न 5. अभिप्रेरणा के संज्ञानात्मक सिद्धांत (Cognitive Theory) की संक्षिप्त समीक्षा कीजिए।

उत्तर: अभिप्रेरणा का संज्ञानात्मक सिद्धांत टॉलमैन (Tolman) एवं लेविन (Lewin) के अध्ययनों पर आधारित है। यह मानता है कि व्यवहार का मुख्य स्रोत संज्ञान (Cognition/सोच व समझ) है।

  • टॉलमैन: अभिप्रेरणा का मूल स्रोत आवश्यकताओं व अंतर्नोदों (Drives) का उद्दीपन है।
  • लेविन: व्यवहार का कारण अंतर्नोद नहीं, बल्कि व्यक्ति के अंदर उत्पन्न तनाव (Tension) है। जब व्यक्ति लक्ष्य हासिल कर लेता है, तो यह तनाव कम हो जाता है।

प्रश्न 6. 'संवेगात्मक बुद्धिमत्ता' (Emotional Intelligence) प्रशासनिक व्यवहार में किस प्रकार सहायक है?

उत्तर: संवेगात्मक बुद्धिमत्ता स्वयं के एवं दूसरों के संवेगों को पहचानने, समझने तथा उन्हें प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता है।

प्रशासनिक उपयोगिता:

  1. तनाव प्रबंधन: कठिन परिस्थितियों में प्रशासनिक अधिकारियों को धैर्य एवं मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
  2. जन-सहानुभूति: आम जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और सहानुभूति (Empathy) का विकास करती है।
  3. द्वंद्व समाधान: अधीनस्थ कर्मचारियों एवं हितधारकों के साथ संवाद स्थापित कर टकराव को टालने में सहायक है।

प्रश्न 7. 'अभिवृत्ति' (Attitude) और 'अभिक्षमता' (Aptitude) में क्या अंतर है?

उत्तर: अभिवृत्ति (Attitude): यह किसी व्यक्ति, वस्तु या विचार के प्रति मूल्यांकनपरक सकारात्मक या नकारात्मक मनोभाव (मनोवृत्ति) है। यह मुख्य रूप से अर्जित (Learned) होती है और व्यवहार को दिशा प्रदान करती है।

अभिक्षमता (Aptitude): यह किसी विशिष्ट कौशल या ज्ञान (जैसे- गणितीय, प्रशासनिक या तकनीकी) को सीखने और अर्जित करने की अंतर्निहित क्षमता या क्षमता-संभाव्यता (Potential) है।

सार: अभिक्षमता कार्य करने की क्षमता दर्शाती है, जबकि अभिवृत्ति कार्य के प्रति दृष्टिकोण तय करती है।

प्रश्न 8. प्रशासनिक अधिकारियों में 'प्रतिबल' (Stress) के मुख्य कारक एवं इसके प्रबंधन के दो उपाय बताइए।

उत्तर: मुख्य कारक:

  • अत्यधिक कार्यभार, त्वरित निर्णय लेने का दबाव और राजनीतिक-सामाजिक अपेक्षाएं।
  • समय सीमा की बाध्यता तथा संसाधनों की कमी।

प्रबंधन के उपाय:

  • समय एवं कार्य प्राथमिकता: समय प्रबंधन (Time Management) और कार्यों का उचित प्रत्योजन (Delegation)।
  • योग एवं माइंडफुलनेस: नियमित ध्यान, शारीरिक व्यायाम तथा सकारात्मक सोच द्वारा संवेगात्मक संतुलन बनाए रखना।

प्रश्न 9. सामाजिक अधिगम सिद्धांत (Social Learning Theory) का मानवीय व्यवहार निर्माण में क्या योगदान है?

उत्तर: अल्बर्ट बांडुरा द्वारा प्रतिपादित इस सिद्धांत के अनुसार, मनुष्य का व्यवहार केवल प्रत्यक्ष अनुभवों से ही नहीं, बल्कि दूसरों (मॉडल/रोल मॉडल) के व्यवहार का अवलोकन (Observation) एवं अनुकरण करके भी सीखता है।

महत्व:

  • समाज में मूल्य, नैतिकता एवं व्यवहारगत मानक (Norms) अवलोकन द्वारा विकसित होते हैं।
  • प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों का सत्यनिष्ठा से परिपूर्ण व्यवहार अधीनस्थों के लिए सकारात्मक अनुकरण का आधार बनता है।

प्रश्न 10. 'मानसिक स्वास्थ्य' (Mental Health) का लोक सेवक की कार्यकुशलता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की वह मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें वह जीवन के तनावों का सामना करते हुए अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग कर सकता है।

कार्यकुशलता पर प्रभाव:

  • उत्पादकता: मानसिक रूप से स्वस्थ अधिकारी बेहतर त्वरित एवं सटीक निर्णय लेता है।
  • सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार: सहकर्मियों एवं जनता के साथ सौहार्दपूर्ण संवाद बना रहता है।
  • सहनशीलता: विषम परिस्थितियों तथा जन-आक्रोश के दौरान संयम नहीं खोता।

निबन्धात्मक प्रश्न-उत्तर (शब्द सीमा: 145–150 शब्द)

प्रश्न 11. विस्मरण (Forgetting) के प्रमुख कारणों (जैविक एवं मनोवैज्ञानिक) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: विस्मरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति पूर्व में सीखी गई सामग्री या अनुभवों को पुनःस्मरण या पहचान करने में असमर्थ हो जाता है। इसके मुख्य कारणों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है:

1. जैविक/दैहिक कारण:

  • मस्तिष्क क्षति एवं बीमारी: मस्तिष्क में चोट, एम्नेशिया (Amnesia) या गंभीर बीमारियों के कारण तंत्रिका कोशिकाओं (Neurons) को नुकसान पहुँचने पर जैविक विस्मरण होता है।

2. मनोवैज्ञानिक कारण:

  • संवेगात्मक कारक: अत्यधिक भय, तनाव, चिंता या संवेगात्मक आघात मानसिक प्रक्रमण को बाधित करते हैं।
  • दमन (Repression): सिगमंड फ्रायड के अनुसार, व्यक्ति दुखद एवं अप्रिय स्मृतियों को अनजाने में अचेतन मन में धकेल देता है।
  • रुचि एवं ध्यान का अभाव: विषय सामग्री के प्रति तत्परता या रुचि न होने पर उसका संधारण (Retention) कमजोर होता है।
  • समानता व हस्तक्षेप (Interference): सीखी गई दो सामग्रियों में अत्यधिक समानता होने पर पूर्वाग्रह या हस्तक्षेप के कारण विस्मृति शीघ्र होती है।

निष्कर्ष: विस्मरण केवल एक नकारात्मक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क को अनावश्यक सूचनाओं के अति-भार से बचाने का एक स्वाभाविक तंत्र भी है।

प्रश्न 12. स्मृति के 'एकल स्मृति मॉडल' (Single-Store/Processing Levels Model) की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: स्मृति का एकल स्मृति मॉडल (प्रक्रमण स्तर उपागम) वर्ष 1972 में क्रेक एवं लॉकहार्ट (Craik & Lockhart) द्वारा प्रतिपादित किया गया था।

यह मॉडल एटकिंसन और शिफरीन (Atkinson-Shiffrin) के बहु-भंडार (Multi-store) मॉडल को चुनौती देता है। एटकिंसन के अनुसार सूचनाएं संवेदी, अल्पकालिक और दीर्घकालिक भंडारों में स्थानांतरित होती हैं, जबकि क्रेक और लॉकहार्ट का मानना है कि स्मृति का कोई अलग-अलग डिब्बा या भंडार नहीं होता, बल्कि स्मृति केवल एक ही भंडार (Single Store) है।

मुख्य बिंदु:

  • प्रक्रमण का स्तर (Level of Processing): कोई सूचना कितने समय तक याद रहेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका मानसिक प्रक्रमण (Processing) कितना गहरा हुआ है।
  • सतही प्रक्रमण (Shallow Processing): केवल ध्वनियों या संरचनात्मक गुणों पर ध्यान देने से स्मृति अल्पकालिक होती है।
  • गहरा प्रक्रमण (Deep Processing): अर्थगत (Semantic) समझ और विश्लेषण के साथ सीखी गई बातें दीर्घकाल तक याद रहती हैं। इसी स्तर से कूटसंकेतन, संकलन और पुनरुत्पादित कार्य होता है।

प्रश्न 13. मानवीय व्यवहार को संचालित करने वाले 'अर्जित व्यक्तिगत अभिप्रेरकों' (Acquired Individual Motives) को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: अर्जित वैयक्तिक अभिप्रेरक वे प्रेरक हैं जो व्यक्ति जन्मजात न लाकर, समाज में रहते हुए अपने अनुभवों, अंतःक्रियाओं और वातावरण के माध्यम से सीखता या अर्जित करता है।

प्रमुख अर्जित वैयक्तिक अभिप्रेरक:

  1. जीवन लक्ष्य (Life Goals): समाज में दूसरों के संपर्क में आने पर व्यक्ति अपने जीवन का कोई विशेष उद्देश्य निर्धारित करता है। एक बार लक्ष्य तय होने के बाद, व्यक्ति की समस्त अनुक्रियाएं और प्रयास उसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभिप्रेरित होते हैं।
  2. आकांक्षा स्तर (Level of Aspiration): इसका तात्पर्य अपने निर्धारित लक्ष्यों और मूल्यों को प्राप्त करने की इच्छा की तीव्रता से है। यह व्यक्ति के तात्कालिक लक्ष्यों का संकेत देता है, जिन्हें प्राप्त करने के लिए वह निरंतर कठिन परिश्रम करता है।
  3. अचेतन अभिप्रेरक (Unconscious Motives): सिगमंड फ्रायड के अनुसार, मानव व्यवहार का एक बड़ा भाग उसके अचेतन मन में दबी इच्छाओं और प्रेरकों से संचालित होता है। भारतीय दर्शन और ऋषियों ने भी अचेतन मन की इस आंतरिक शक्ति को स्वीकार किया है।

प्रश्न 14. "अभिवृत्ति (Attitude) का निर्माण कैसे होता है? लोक सेवा में सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करने के उपायों की चर्चा कीजिए।"

उत्तर: अभिवृत्ति का निर्माण: अभिवृत्ति का निर्माण जन्मजात न होकर मुख्य रूप से सामाजिककरण एवं अनुभवों की प्रक्रिया से होता है:

  1. प्रत्यक्ष अनुभव: जीवन में मिले व्यक्तिगत सुखद या दुखद अनुभव मनोवृत्ति तय करते हैं।
  2. सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक: परिवार, शैक्षणिक संस्थान, मित्र समूह और सांस्कृतिक मूल्य।
  3. सूचना एवं मीडिया: सूचनाओं का प्रवाह और मीडिया तंत्र अभिवृत्ति के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोक सेवा में सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करने के उपाय:

  • प्रशिक्षण कार्यक्रम: सेवाकालीन प्रशिक्षण (In-service Training) द्वारा लोक सेवकों को जन-केन्द्रित तथा संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना।
  • भूमिका निर्वहन (Role Playing) व केस स्टडी: वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित केस स्टडीज से सहानुभूति और मूल्य-आधारित सोच विकसित करना।
  • उत्कृष्ट कार्य का प्रोत्साहन: सत्यनिष्ठ एवं जन-हितैषी अधिकारियों को पुरस्कृत कर अन्य लोक सेवकों के समक्ष आदर्श प्रस्तुत करना।
  • संवेगात्मक स्व-मूल्यांकन: स्व-चिंतन (Self-reflection) और योग/ध्यान के माध्यम से नकारात्मक मनोवृत्तियों का शमन करना।

निष्कर्ष: सकारात्मक अभिवृत्ति लोक सेवा की रीढ़ है, जो केवल कार्य निष्पादन ही नहीं बल्कि सुशासन की स्थापना को भी सुनिश्चित करती है।

प्रश्न 15. "व्यक्तित्व (Personality) के प्रमुख निर्धारकों की व्याख्या कीजिए। एक कुशल प्रशासक के व्यक्तित्व में कौन-कौन से गुण अनिवार्य माने जाते हैं?"

उत्तर: व्यक्तित्व के प्रमुख निर्धारक:

  1. जैविक कारक: आनुवंशिकता, शारीरिक संरचना एवं तंत्रिका तंत्र का प्रभाव।
  2. पर्यावरणीय कारक: पारिवारिक परिवेश, सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि तथा लालन-पालन की शैली।
  3. मनोवैज्ञानिक कारक: संवेग, बुद्धि, अभिप्रेरणा तथा स्व-अवधारणा (Self-concept)।
  4. परिस्थितिजन्य कारक: जीवन की विशेष घटनाएं एवं चुनौतियां जो व्यवहार को दिशा देती हैं।

कुशल प्रशासक के व्यक्तित्व के अनिवार्य गुण:

  • सत्यनिष्ठा एवं ईमानदारी (Integrity): नैतिक मूल्यों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता और भ्रष्टाचार-मुक्त आचरण।

  • उच्च संवेगात्मक बुद्धिमत्ता: तनावपूर्ण एवं दबाव वाली स्थितियों में संयम तथा जन-सामान्य के प्रति सहानुभूति (Empathy)।

  • निर्णयन क्षमता (Decision Making): बिना पक्षपात के त्वरित, तार्किक और निष्पक्ष निर्णय लेने का कौशल।

  • प्रभावी संचार एवं नेतृत्व: विविध वर्ग के लोगों से जुड़ने तथा टीम को अभिप्रेरित (Motivate) करने की क्षमता।

  • अनुकूलनशीलता (Adaptability): नए नियमों, तकनीकों (ई-गवर्नेंस) एवं बदलती सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने का गुण।

निष्कर्ष: एक उत्कृष्ट प्रशासक का व्यक्तित्व केवल बौद्धिक क्षमता का ही नहीं, बल्कि उच्च नैतिक मूल्यों और सुदृढ़ संवेगात्मक संतुलन का समावेश होता है।

प्रश्न 16. "कार्यस्थल पर तनाव (Stress) एवं कुंठा (Frustration) मानवीय व्यवहार को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? तनाव प्रबंधन की मनोवैज्ञानिक विधियों की समीक्षा कीजिए।"

उत्तर: व्यवहार पर प्रभाव: कार्यस्थल पर अत्यधिक तनाव एवं कुंठा अधिकारी के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। इससे निर्णय लेने में त्रुटियां, चिड़चिड़ापन, उत्पादकता में कमी, सहकर्मियों के साथ टकराव तथा जन-संवाद में कठोरता जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। बर्नआउट (Burnout) की स्थिति प्रशासनिक दक्षता को समाप्त कर देती है।

तनाव प्रबंधन की मनोवैज्ञानिक विधियां:

  1. संज्ञानात्मक पुनर्रचना (Cognitive Restructuring): नकारात्मक एवं निराशावादी विचारों को पहचानकर उन्हें सकारात्मक तथा व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रतिस्थापित करना।

  2. माइंडफुलनेस एवं ध्यान: ध्यान (Meditation) और प्राणायाम से मस्तिष्क को शांत रखना तथा वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करना।

  3. समय एवं कार्य प्राथमिकीकरण: 'आयजनहावर मैट्रिक्स' जैसी तकनीकों का उपयोग कर अति-आवश्यक व सामान्य कार्यों को विभाजित करना ताकि कार्यभार का संतुलन बना रहे।

  4. सामाजिक समर्थन (Social Support): परिवार, मित्रों तथा परामर्शदाताओं (Counselors) के साथ संवाद स्थापित कर मानसिक बोझ को कम करना।

निष्कर्ष: प्रशासनिक सफलता हेतु अधिकारियों का मानसिक रूप से स्वस्थ रहना अनिवार्य है; अतः व्यक्तिगत एवं संगठनात्मक दोनों स्तरों पर तनाव प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए।

 

विशेष आभार (Special Thanks): इस प्रश्नोत्तरी/सामग्री को तैयार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सम्मानित लेखकगण — श्री पी. के. नागौरी जी एवं  SGGP Team का हम सहृदय धन्यवाद करते हैं। 

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