अलवर प्रजामंडल आंदोलन

  • अलवर में हरीनारायण शर्मा और कुंज बिहारी मोदी के रचनात्मक कार्यके द्वारा जनता में जागृति उत्पन्न करने का प्रयास किया गया 
  • हरिनारायण शर्मा स्वाधीनता संग्राम के अग्रदूत थे
  • इन्होंने अलवर में अस्पृश्यता निवारण संघ ,वाल्मीकि संघ और आदिवासी संघ की स्थापना कर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की दशा सुधारने का प्रयास किया
  • 1921 में अलवर सरकार ने किसानों को जंगली सूअर मारने से रोक दिया था
  • इसलिए वहां की किसान सरकार के विरुद्ध सामूहिक रूप से इसका विरोध किया
  • इस का विरोध करने का कारण जंगली सूअर उनके खेतों को उजाड देते थे
  • इस आंदोलन के परिणाम किसानों के पक्षमें आए 
  • आंदोलन की सफलता के पश्चात में 1925 में अलवर का राजनीतिक वातावरण पुन: कुंठित हो गया
  • ??यहां के शासक राजा जयसिंह ने अपनी प्रजा पर अत्याचार किए और अलवर वासियों को किसी प्रकार की स्वतंत्रता प्राप्त नहीं थी
  • ?? इस कारण राज्य विरोधी वातावरण में वृद्धि होने लगी
  • ??इसी समय अलवर सरकार ने बानसूर व थानागाजी तहसीलों में *लगान वृद्धिकर दी और  कई नए कर लगा दिए गए .
  • ?? जब बानसूर व थानागाजी के किसानों ने कर देने से मना कर दिया तो राजा जयसिंह ने दोनों जगह सशत्र सैनिक भेज दिए *
  • ??14 मई 1925* को सैनिकों ने बिना पूर्व सूचना दिए गोलियां चला दी
  • ??परिणाम स्वरूप 15 व्यक्ति मारे गए और 250 घायलहो गए
  • ??यहां पर सेना ने बड़ी निर्दयता का परिचय दिया और स्त्रियों के साथ भी अमानुषिक व्यवहार किया सैनिकों की
  • ??इस गोलीबारी में 353 मकान जल गयेऔर 71 पशु भी आग की भेंट चढ़ गए
  • ??सैनिक किसानों से ₹50हजार नगद और 1लाख रूपये की संपत्ति लूट के ले गए
  • ??इस घटना से सारे अलवर में आतंक छा गया और किसान वर्ग में आक्रोश बढ़ गया
  • ??सरकार की दमन नीति का अंतयही नहीं हुआ
  • ?? इन्होने राज्य में समाचार पत्रों का आना बंद कर दिया
  • ??अगर किसी नागरिक के पास समाचार पत्र का एक टुकड़ा भी मिल जाता है तो उस पर ₹5000 तक का जुर्माना किया जाता था
  • ??कभी कभी तो नागरिको इस अपराध में राज्य से निकाल दिया जाता था
  • ?? इस दमन नीति के कारण अलवर नरेश जनता में आलोचना का पात्र बन गया
  • ??किसानो के क्रूर दमन से अलवर वासी अपनी सरकार से पहले ही नाराज थे
  • ??इस पर ब्रिटीश सरकार ने अलवर नरेश जयसिंह को 22 मई 1933 को अलवर से निकाल दिया था
  • ??अलवर नरेश जयसिंह के स्थान पर तेजसिंह को गद्दीपर बिठा दिया
  • ?? ब्रिटीश सरकार की इस कार्यवाही से अलवर की जनता और भी ज्यादा क्रूद्धहो गई
  • ??ब्रिटिश सरकार की इस नीति का जब श्री कुंज बिहारी लाल मोदी और हरीनारायण शर्मा ने विरोध किया तो उन्हें जेल भेज दिया गया
  • ??जेल से रिहा होते ही श्री कुंज बिहारी लाल मोदी और पंडित हरि नारायण शर्मा के प्रयत्नों से 1938 में अलवर प्रजामंडलकी स्थापना हुई
  • ?? किंतु सरकार ने इस संस्था का पंजीकरण करना स्वीकार नहीं किया
  • ??14 मई 1940 को उसके लिए पुन:प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया
  • ?? विवश होकर 1 अगस्त 1948 को सरकार ने इस प्रजामंडल का पंजीकरण किया
  • ??प्रजामंडल की स्थापना होते ही स्कूल में फीस बढ़ाने के विरोध में इस प्रजामंडल ने आंदोलन का सूत्रपात किया
  • ??राज्य ने इसी वर्ष सरकारी पाठशालाओं में फीस वृद्धिकी थी
  • ??इस आंदोलन के कारण अनेक नेता गिरफ्तारकिए गए
  • ??गिरफ्तार किए गए नेताओं में सर्व श्री हरि नारायण शर्मा ,लक्ष्मण स्वरूप त्रिपाठी, इंद्रसिंह आजाद, नत्थुराम मोदी और राधा स्वरुप आदि कार्यकर्ता थे
  • ??इन सब पर राजद्रोह के अभियोग लगाकर सजाए दी गई
  • ??इस आंदोलन के दौरान सरकारी स्कूल के अध्यापक श्री भोलानाथ को राजद्रोहात्मक प्रवृत्ति के कारण राज्यसेवा से पृथक कर दिया
  • ??भोलानाथ जेल से रिहा होने के बाद प्रजामंडल में शामिल हो गया
  • ??इन दिनों पुलिस ने एक बचकाना हरकत की
  • ??पुलिस ने प्रजामंडल के अलवर स्थित कार्यालय पर कब्जा कर तालालगा दिया
  • ??बाद में प्रजामंडल कार्यकर्ताओं ने कार्यालय पर अपना कब्जाकर लिया और उस पर तिरंगा फहरा दिया
  • ??सरकार ने कार्यकर्ताओं पर मुकदमाचलाया
  • ??जिससे मास्टर भोलानाथ और श्री द्वारिका दास गुप्ताको सजाएं हुई

 

??द्वितीय विश्व युद्ध के समय अलवर का राजनीतिक वातावरण?? 

  • ??द्वितीय विश्व युद्ध ने अलवर की राजनीतिक वातावरण को उग्रबनाया था 
  • ??सरकार ने जनता से *दूसरे विश्व युद्ध के लिए चंदा एकत्रित”करना चाहा
  • ??द्वितीय विश्वयुद्ध के लिए चंदा वसूल किए जाने वाली स्थिति से अलवर में फिर से तनाव पूर्ण वातावरण हो गया
  • ??चंदा वसूली का प्रजामंडल ने विरोध किया था
  • ??विरोध करने के कारण पंडित हरि नारायण शर्मा और मास्टर भोलानाथ को भारत रक्षा कानून के अंतर्गत गिरफ्तार कर लिया गया था
  • ??उन्हें कुछ समय बाद रिहा कर दिया था
  • ??द्वितीय विश्व युद्ध के समय चंदा वसूली की तनावपूर्ण स्थिति का अध्ययन करने के लिए श्री हरिभाऊ उपाध्याय अलवरआए थे
  • ??सरकार हरिभाऊ उपाध्याय के आने के पक्ष में नहींथी
  • ??लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण सरकार की दमन नीति कुछ समय के लिए शिथिलपड़ गई थी और हरिभाऊ उपाध्याय को अलवर आने से सरकार नहीं रोक सकी
  • ??इस प्रकार राजनीति का एक चरण समाप्त हुआ
  • ??1940 में नगरपालिका के गठन के कुछ समय बाद भूमि और किसान के मुद्दों पर प्रजामंडल और सरकार के बीच मतभेद आरंभ हो गए
  • ??प्रजामंडल ने 1-2 जून 1941 को जागीर माफी प्रजा सम्मेलनका आयोजन किया था
  • ??इस सम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित किया था कि किसान को जागीर माफी गांव में अपनी भूमि रखने और गिरवी रखने का अधिकारप्राप्त हो
  • ??प्रजामंडल के सहयोग से किसानों ने जागीरदारों के अत्याचारों के खिलाफ आंदोलन आरंभ किया
  • ??1943 में भोलानाथ के प्रयासों से राजपूताना प्रांतीय कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ
  • ??इसके साथ ही गांव में किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया

??अलवर प्रजामंडल का अधिवेशन?? 

  • ??जनवरी 1940 में अलवर प्रजामंडल का पहला अधिवेशन श्री भवानी शंकर शर्मा की अध्यक्षतामें हुआ 
  • ??इस सम्मेलन में सरकार की नीतियों की कटु आलोचना की गई और उत्तरदायी सरकार की मांग की गयी
  • ??उत्तरदायी सरकार की मांग को लेकर प्रजामंडल हमेशा ही निरंतर प्रयासरत रहा
  • ??1946 में प्रजामंडल ने किसानों की मांगों का समर्थन करके उन्हें भू-स्वामित्व देने के प्रस्ताव का समर्थन किया था
  • ??1946 में महाराजा ने संवैधानिक सुधारों के लिए समितिनियुक्ति की
  • ??जिसका आंदोलनकारियों ने बहिष्कार किया था
  • ??1946 में अलवर में फिरसे प्रजामंडल आंदोलनकी ओर अग्रसर हो गया
  • ??जागीरदारों की जुल्मों के विरोध में खेड़ा मंगल सिंह में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया
  • ??प्रजामंडल के कार्यकर्ताओंको पुनः जेल की हवा खानी पड़
  • ?? इस बार नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध भयंकर रूपसे हुआ
  • ??अलवर में स्कूल व कॉलेज बंद हो गए और अलवर नगर में हड़ताल रही
  • ??इसके परिणाम स्वरुप सरकार ने प्रजामंडल से समझौताकर लिया और सारे बंदी रिहा कर दिए गएे
  • ??यह परिणाम दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकारबन जाने के बाद निकला था
  • ??17 दिसंबर 1947 को महाराजा ने 2 वर्ष के भीतर राज्य में उत्तरदायी शासन स्थापित करने की घोषणा की
  • ??1 फरवरी 1948को भारत सरकार ने अलवर राज्य का शासन अपने हाथ में ले लिया
  • ??मार्च 1948 में मत्स्य संघ मैं अलवर के विलय के साथ ही राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई


??अलवर प्रजामंडल से संबंधित तथ्य??

  • * ??प्रजामंडल से पूर्व में अलवर में 1937 में कांग्रेस समितिकी स्थापना की गई थी  
  • ??पंडित शालिग्राम को इसका अध्यक्ष बनायागया और इंद्रसिंह आजाद को मंत्रीबनाया गया था
  • ??लेकिन प्रजा मंडल के गठन के पश्चात कांग्रेस समिति का प्रजामंडल में विलयहो गया
  • ??महात्मा गांधी की हत्या के उपरांत इस हत्या के षड्यंत्र में  संलग्नता की संभावना के आधार पर अलवर के महाराजा तेज सिंह और प्रधानमंत्री बी.एन.खरेको भारत सरकार ने दिल्ली में नजर बंद कर दिया था
  • ??इसके बाद के.बी लाल को अलवर का प्रशासक नियुक्तकिया गया था
  • ??सरकार की दमन नीति ने जनता को ओर नाराज कर
  • ??लेकिन अप्रैल 1940 में अलवर में निर्वाचित सदस्य की नगरपालिका गठित की गई
  • ??इसके 18 सदस्यों में से 10 सदस्य प्रजामंडल समर्थक थे
  • ??1947 में अलवर भारतीय संघ  में मिल गया था
  • ??अलवर प्रजामंडल की स्थापना 1938में हुई थी
  • ??लेकिन इस का प्रथम अधिवेशन 1944 में हुआ था
  • ??प्रजामंडल की स्थापना हरि नारायण शर्मा और कुंज बिहारी मोदी द्वाराकी गई थी
  • ??लेकिन इस संस्था के रजिस्ट्रेशन के बाद सरदार नत्थूमल( नत्थामल) इसके अध्यक्षबने थे
  • ??अलवर के महाराजा जयसिंह को अंग्रेजों द्वारा अलवर से निकाल दिया गया था
  • ??उसके बाद जयसिंह यूरोप चलेगए ,वहां पर पेरिस में उनकी मृत्युहो गई
  • ??8 फरवरी 1921को राजाओं की एक परिषद का गठनकिया गया
  • ??जो राजाओं की मांगों पर विचार करती थी
  • ?? इस परिषद का नाम नरेंद्र मंडल अलवर के महाराजा जयसिंह ने रखा था
  • ??महाराजा जयसिंह राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति सहानुभूतिका भाव रखते थे
  • ??उन्होंने स्वदेशी कपड़े पहनने का प्रण लिया