इल्तुतमिश द्वारा अपने विरोधियों का दमन

? इल्तुतमिश जब शासक बना उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था
? जिनमें उसके तीन प्रमुख ( यल्दौज ,कुबाचा,  अलीमर्दान) प्रतिद्वंदी थे
? इल्तुतमिश के शासनकाल में ही मंगोल आक्रमण की महत्वपूर्ण घटना घटित हुई थी

?ताजुद्दीन यल्दोज का पतन?
?यल्दोज  गजनी का शासक था वह दिल्ली की संप्रभुता पर दावा रखता था
?इल्तुतमिश दिल्ली में अपने प्रतिद्वंदी अमीरों का दमन करने में व्यस्त था
?तब यल्दौज ने उसे अपने अधीन मानते हुए छत्र ,दंड आदि राज चिह्न भेजें जो किसी संप्रभु द्वारा अधीनस्थ शासक को दिए जाते हैं
?इल्तुतमिश ने उसे शांतिपूर्वक स्वीकार कर लिया क्योंकि वह अपने आंतरिक स्थिति को सुदृढ़ करने में लगा था
?कुछ समय पश्चात जब ख्वारिज्मो ने यल्दौज को गजनी से मार भगाया तो वह लाहौर आ गया
?उसने  कुबाचा को वहां से भगा कर लाहौर पर अधिकार कर लिया और पंजाब से थानेश्वर तक विस्तार कर लिया था
?उसने दिल्ली के सिहासन पर भी अपना दावा किया
?यल्दौज के विस्तार को रोकना इल्तुतमिश के लिए आवश्यक था क्योंकि यल्दौज  यदि पंजाब में अपनी शक्ति संगठित कर लेता तो दिल्ली में इल्तुतमिश सुरक्षित नहीं रह सकता था
?1215-16ईस्वी  में तराइन के ऐतिहासिक मैदान में दोनों के मध्य युद्ध हुआ जिसमें यल्दौज  पराजित हुआ
? तत्पश्चात उसे कैद कर बदायूं ले जाया गया जहां उसका वध कर दिया गया
? इल्तुतमिश के लिए यह दोहरी विजय थी—

 1. प्रथम– उसकी सत्ता को चुनौती देने वाला उसका प्रबल शत्रु का विनाश हो गया
2. द्वितीय– दिल्ली सल्तनत का गजनी से सदा के लिए संपर्क टूट गया जिसके फलस्वरूप दिल्ली का स्वतंत्र अस्तित्व निश्चित हो गया था

 ??नासिरुद्दीन कुबाचा की पराजय??
?इल्तुतमिश का दूसरा प्रतिद्वंदी नासिरुद्दीन कुबाचा था जो सिंध और मुल्तान का शासक था
? इल्तुतमिश के गद्दी पर बैठते ही उसने सिंध-सागर-दोआब, सरस्वती ,भटिंडा और लाहौर तक अपना अधिकार कर लिया
?इस कारण वह उत्तर पश्चिमी सीमा और पंजाब में इल्तुतमिश का प्रमुख प्रतिद्वंदी था।
?यल्दोज ने लाहौर कुबाचा से छीन लिया था लेकिन जब वह इल्तुतमिश से परास्त हो गया तब कुबाचा ने लाहौर पर पुनः अधिकार कर लिया
?कुबाचा  बिना युद्ध के भाग  खड़ा हुआ इल्तुतमिश ने उसका पीछा किया और चिनाब स्थित मंसूरा के निकट एक युद्ध में उसे पराजित कर लाहौर पर अधिकार कर लिया
?लाहौर पर अधिकार करने के पश्चात इल्तुतमिश ने अपने पुत्र नासिरुद्दीन को वहां नियुक्त किया
?सिंध क्षेत्र में अभी भी कुबाचा की शक्ति शेष थी, इस बीच 1221 ई. में मंगोल विजेता चंगेज खां एक विशाल सेना लेकर सिंध की और बड़ा
?इल्तुतमिश मंगोल आक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए कुबाचा  की तरफ ध्यान नहीं दे सका
?जलालुद्दीन मांगबर्नी के वापस जाने के पश्चात उसने पुन: कुबाचा  की तरफ ध्यान दिया,1227 ई.  में इल्तुतमिश ने पुन: कुबाचा पर चढ़ाई की और भठिंडा व सरसुती पर अधिकार कर  उच्छ और मुल्तान की ओर बढ़ा

?कुबाचा भागकर निचले सिंध में स्थित भक्कर के किले में जाकर शरण ली 3 माह  पश्चात इल्तुतमिश का उच्छ पर भी अधिकार हो गया
?अंत में विवश होकर कुबाचा ने अपने पुत्र बहराम मसूद को संधि का प्रस्ताव लेकर इल्तुतमिश के पास भेजा लेकिन इल्तुतमिश संधि अस्वीकार कर उसके पुत्र को बंदी बना लिया
?अंत में विवश होकर कुबाचा ने सिंधु नदी में डूबकर आत्महत्या कर ली इस प्रकार 1228 में इल्तुतमिश का एक और शत्रु भी समाप्त हो गया
?मुल्तान और उच्छ कोदिल्ली सल्तनत में मिला लिया गया
? सिंध विजय को पूरा करने के लिए निजामुद्दीन जुनैदी को  वहां नियुक्त किया। निजामुद्दीन जुनैदी इल्तुतमिश का प्रसिद्ध वजीर था

?इल्तुतमिश के समय में जब उलेमाओं ने हिंदुओं के समक्ष  मृत्यु या इस्लाम की शर्त रखने की पेशकश की तो वजीर निजामुद्दीन जुनैदी ने कहा कि— हाल ही में भारत में विजय प्राप्त हुई है,मुसलमान समुंद्र में केवल एक बूंद के समान है और यह संभवत है कि यह आदेश लागू करने पर हिंदू आपस में मिल जाएंगे और व्यापक स्तर पर गड़बड़ी पैदा हो जा हो सकती है

??मंगोल आक्रमण का खतरा ??
?इल्तुतमिश के समय में भारत में मंगोलों के आक्रमण का खतरा उत्पन्न हुआ था
?इल्तुतमिश ने 1221 ईसवी में नवोदित दिल्ली सल्तनत को मंगोल आक्रमण से बचाया था
?जब चंगेज खां ख्वारिज्म  के शाह जलालुद्दीन मांगबर्नी  का पीछा करता हुआ सिंध नदी तक आ गया
?उस समय जलालुद्दीन मांगबर्नी  ने इल्तुतमिश से सहायता मांगी थी लेकिन इल्तुतमिश ने भविष्य के परिणामों को देखते हुए मांगबर्नी को शरण देने से मना कर बुद्धिमत्ता का परिचय दिया और दिल्ली सल्तनत को मंगोल के आक्रमण से बचाया था

?मंगोलों के नेता चंगेज खां था जिसका मूल नाम तिमुचिन था वह अपने को ईश्वर का अभिशाप कहने में गर्व अनुभव करता था
?मंगोलों के नेता चंगेज खाँ  ने गोबी के रेगिस्तान और एशिया के घास के मैदान की समस्त बर्बर जातियों को अपने नेतृत्व में संगठित कर चीन ,तुर्किस्तान, मध्य एशिया, और पर्शिया (ईरान )को अपने पैरों तले रोंद दिया था
?उसने पर्शिया (ईरान )के शासक जलालुद्दीन मुहम्मद ख्वारिज्म शाह का संपूर्ण साम्राज्य नष्ट कर दिया
?ख्वाहिश शाह स्वयं कैस्पियन समुद्र तट की ओर भागा और उसका सबसे बड़ा पुत्र जलालुद्दीन मांगबर्नी भाग कर भारत की ओर आया
?चंगेज खॉ (1221ई.)भी उसका पीछा करता हुआ सिंधु नदी तक आ पहुंचा था

?जुबैनी  लिखता है कि— “”सुल्तान आग और पानी के बीच में फस गया””

?इसी समय चंगेज खां ने  इल्तुतमिश के दरबार में अपना एक दूत भेजता है जिसका मुख्य उद्देश्य इल्तुतमिश को सावधान करना था कि वह जलालुद्दीन मांगबर्नी की सहायता ना करें
?उस समय पंजाब और ऊपरी सिंध दोआब का  क्षेत्र चंगेज खां के सेनानियों, कुबाचा मांगबर्नी और खोखरों के बीच संघर्ष का विषय बन गया था
?इल्तुतमिश ने प्रतीक्षा और अवलोकन का निश्चय किया उसने दृढ़ संकल्प कर लिया था कि दिल्ली साम्राज्य कि इस उथल-पुथल  से रक्षा करनी है इस स्थिति को चुपचाप देखता रहा
?इसी बीच मांगबर्नी ने खोखरो से वैवाहिक संबंध स्थापित किए और खोखरों के सरदार राय खोकर संकीन  की पुत्री से विवाह कर सिंध-सागर-दोआब में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ली
?तत्पश्चात सियालकोट जिले के बसरौर(पसरोर) स्थित दुर्ग पर अधिकार कर लिया
?जलालुद्दीन मांगबर्नी ने आईनुलमुल्क नामक अपना दूत  इल्तुतमिश के पास भेजा और मंगोलों के विरुद्ध से सहायता मांगी
?इल्तुतमिश के सामने बड़ी कठिनाई थी। वह मांगबर्नी  की सहायता कर चंगेज खाँ से शत्रुता मोल लेना नहीं चाहता था
?इल्तुतमिश ने जलालुद्दीन मांगबर्नी के दूत आईनुलमुल्क की हत्या करवा दी और विनम्रतापूर्वक उसे शरण देने से इंकार कर दिया
?इल्तुतमिश ने जलालुद्दीन से प्रार्थना की कि वह पंजाब छोड़ दे साथ ही उसने एक बड़ी सेना भी युद्ध के लिए तैयार कर ली थी।जलालुद्दीन मांगबर्नी ने इल्तुतमिश से युद्ध करना उचित नहीं समझा

?अत: अपना ध्यान कुबाचा  की ओर मोडा़।उसने उच्छ के निकट कुबाचा को पराजित किया और सिंध  के दक्षिण भाग को लूटकर 1224ईस्वी  में जलालुद्दीन मांगबर्नी भारत छोड़कर चला गया
?जब तक   चंगेज खाँ  जीवित था,पुन:उसने सिंधु नदी के पश्चिमी राज्य विस्तार की लालसा नहीं कि इस प्रकार इल्तुतमिश की दूरदर्शिता ने तुर्की राज्य को मंगोल आक्रमण से बचा लिया
?इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत को मंगोल आक्रमण से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सिंध राज्य का प्रयोग मध्यवर्ती राज्य के रूप में किया
?मांगबर्नी के भारत से चले जाने के पश्चात इल्तुतमिश ने सर्वप्रथम अपना ध्यान बंगाल की ओर आकर्षित किया

?सत्ता का सुदृढ़ीकरण?

??बिहार-बंगाल विजय ??
?अली मर्दान कुतुबुद्दीन एबक के समर्थन से बंगाल का शासक बना था किंतु उसकी मृत्यु के बाद अपने को स्वाधीन बना लिया और अलाउद्दीन की उपाधि ग्रहण की 2 वर्ष पश्चात उसके उत्तराधिकारियों ने उसकी हत्या कर दी
?उसके पश्चात हिसामुद्दीन एवज खिलजी गद्दी पर बैठा उसने गयासुद्दीन आजम की उपाधि ग्रहण की और अपने नाम के सिक्के चलाए और खुत्बा भी पड़ा
? उस समय इल्तुतमिश पश्चिमोत्तर प्रांत( सिंध घाटी) की समस्याओं में उलझा हुआ था इसीलिए वह बंगाल की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं कर सका
? इल्तुतमिश की व्यस्तता का पूर्ण लाभ उठाकर हिसामुद्दीन एवज में बिहार में भी अपनी सत्ता का विस्तार किया और  जाजनगर ,तिरहुत ,बंग  और कामरुप के  राज्य से खराज  वसूला
? अपनी पश्चिमी सीमा को सुनिश्चित करने के बाद इल्तुतमिश ने पूर्वी क्षेत्र की ओर अपना ध्यान लगाया उसने गंगा नदी के दक्षिण स्थित बिहार के समस्त प्रदेश पर अधिकार कर लिया और वहां एक राज्यपाल नियुक्त किया

? अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के पश्चात इल्तुतमिश 1225 ईस्वी में गंगा नदी के किनारे किनारे आगे बढ़ा उधर हिसामुद्दीन एवज भी इल्तुतमिश को रोकने के लिए आगे बढ़ा
? लेकिन बिना किसी युद्ध के ही हिसामुद्दीन एवज ने इल्तुतमिश की अधीनता स्वीकार कर ली और युद्ध की क्षतिपूर्ति के रूप में बहुत सारा धन दिया
? इल्तुतमिश ने मलिक जानी को बिहार का सूबेदार नियुक्त कर वापस दिल्ली लौट गया लेकिन इल्तुतमिश के वापस लौटते ही हिसामुद्दीन  एवाज (गयासुद्दीन की उपाधि से युक्त )ने मलिक जानी  को बिहार से बाहर निकाल दिया और दिल्ली राज्य की अधीनता मानने से इनकार कर दिया

? हिसामुद्दीन एवाज को दंडित करने के लिए इल्तुतमिश ने अपने बड़े पुत्र नासिरुद्दीन को जो उस समय अवध का राज्यपाल था को आक्रमण करने का आदेश दिया लेकिन उसे उपयुक्त समय की प्रतीक्षा करने का परामर्श दिया
? 2 वर्ष पश्चात जब गयासुद्दीन (हिसामुद्दीन  एवाज) अपने पूर्वी अभियान कामरूप (आसाम) और बंग( पूर्वी बंगाल) पर गया था तभी अवसर का लाभ उठाकर नासिरुद्दीन ने उसकी राजधानी लखनौती पर आक्रमण कर दिया
? हिसामुद्दीन एवाज अपनी राजधानी की सुरक्षा के लिए वापस लौटा लेकिन युद्ध में मारा गया 1226 ईस्वी  में नासिरुद्दीन महमूद ने लखनौती पर अधिकार कर लिया

? इल्तुतमिश ने नासिरुद्दीन को बंगाल का सूबेदार (प्रांतीय गवर्नर या मुक्ता) नियुक्त किया और इस प्रकार 1226 ईस्वी में बंगाल दिल्ली सल्तनत का एक  इक्ता (सुबा) बन गया
?लेकिन 2 वर्ष पश्चात 1229 ईस्वी में शाहजादा नासिरुद्दीन की मृत्यु हो गई
? मलिक इख्तियारूद्दीन बल्ख के नेतृत्व में खिलजी अमीरों ने लखनौती में विद्रोह कर दिया 1230 ईस्वी  में इल्तुतमिश ने स्वयं  जाकर इस विद्रोह को समाप्त किया
? इख्तियारूद्दीन बल्ख मारा गया और बंगाल पुनः दिल्ली सल्तनत के अधीन हो गया
? राजधानी से दूर होने के कारण बंगाल पर सदैव नियंत्रण रखना कठिन था इसलिए इल्तुतमिश ने प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से बंगाल और बिहार को अलग कर वहां अलग-अलग सूबेदार नियुक्त किए मलिक अलाउद्दीन जानी को बंगाल का सूबेदार बनाया गया

 ??राजपूताना क्षेत्र??
?बंगाल अभियान के बाद इल्तुतमिश ने राजपूतों की ओर ध्यान दिया
?राजपुताना का क्षेत्र एबक के शासन काल से ही विद्रोह और उपद्रव  का केंद्र बना हुआ था राजपूत सरदार तुर्को की सत्ता का अंत करने के लिए प्रयासरत थे
?अपने अल्पावधि में कुतुबुद्दीन ऐबक इस समस्या का समाधान करने में असमर्थ रहा कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद चंदेलो ने कालिंजर और अजय गढ़ पर पुनः अपना अधिकार कर लिया
?प्रतिहारों ने तुर्की सेना को ग्वालियर से निष्काषित कर नरवर और झांसी पर अधिकार कर लिया था
?गोविंद राज के नेतृत्व में चौहानों ने रणथंबोर को तुर्कों से छीनकर जोधपुर और उसके निकट के प्रदेशों पर अपना अधिकार कर लिया था
?भाटी राजपूतों ने अलवर और उसके   निकटस्थ प्रदेशों अजमेर ,बयाना और  थम्भोर को स्वतंत्र कर लिया था
?राजस्थान की भांति दोआब (आधुनिक उत्तर प्रदेश) के भी हिंदू शासक विद्रोह कर रहे थे इन समस्याओं से निपटने के लिए इल्तुतमिश ने कार्रवाई आरंभ की

??रणथंबोर और मंदसौर??
?1226 ईस्वी में इल्तुतमिश ने रणथंबोर के अत्यंत सूदृढ़ दुर्ग पर घेरा डाला,उस समय उस पर पृथ्वीराज तृतीय के वंशज शासन कर रहे थे
?इल्तुतमिश ने  रणथंबोर दुर्ग पर अधिकार कर लिया यह उस की महान सफलता थी,
?क्योंकि रणथंबोर एक अजेय दुर्ग समझा जाता था ऐसा माना जाता था कि 70 शासक उस पर विजय पाने में असफल रहे थे
?इसके पश्चात इल्तुतमिश ने 1227 में परमारों की राजधानी  मंदसौर पर आक्रमण कर अधिकार कर लिया

??जालौर ,बयाना,थंगीर,  अजमेर और नागौर विजय??
?1228-29ईस्वी में इल्तुतमिश ने जालौर का घेरा डाला था उस समय वहां का शासक चौहान राजा उदयसिंह  था
?उसने उदयसिंह को आधिपत्य स्वीकार करने और वार्षिक कर देने के लिए बाध्य किया
?इसके पश्चात बयाना, थंगीर, अजमेर और नागौर पर भी इल्तुतमिश ने अधिकार कर लिया

?खलीफा से सुल्तान पद की स्वीकृति ?
? इल्तुतमिश ने सुल्तान की स्वीकृति गोर के किसी शासक से नहीं प्राप्त की थी बल्की 1229 ईस्वी  में बगदाद के खलीफा अल मुंतसिर बिल्लाह से प्राप्त की थी
? इल्तुतमिश खलीफा से अधिकार पत्र प्राप्त करने वाला दिल्ली सल्तनत का प्रथम वैधानिक सुल्तान था
? खलीफा के दूत ने बगदाद से विशिष्ट अधिकार पत्र और सम्मान वस्त्र सूचक (खिलअत) लेकर दिल्ली पहुंचा
? इस विशिष्ट अधिकार पत्र में इल्तुतमिश द्वारा विजित सभी देश और सागर पर सुल्तान ए आजम के रूप में उस को अधिकार दिया गया

?इल्तुतमिश द्वारा खलीफा से खिलअत प्राप्त करने का उल्लेख “मिनहाज -उल- सिराज” की पुस्तक “तबकात- ए -नासिरी से प्राप्त होता है जिसमें उल्लेख है कि इस्लाम की राजधानी से भेजे गए लाल वस्त्र ,आभूषण और उपहार को सुल्तान उसके पुत्रों और अमीरो ने स्वीकार किए थे

? यद्यपि यह एक मात्र औपचारिकता थी लेकिन यह इल्तुतमिश की एक दीर्घकालीन अभिलाषा की पूर्ति थी
? इल्तुतमिश ने यह अवसर बड़े उत्साह और मान मर्यादा से मनाया इस कार्य ने दिल्ली सल्तनत के ऊपर खिलाफत की छाप को दृढ़ कर दिया और भारत की भौगोलिक सीमाओं के बाहर खलीफा के अंतिम अधिकार को वैधानिक रूप से पुष्टि कर दी
? इल्तुतमिश ने अपने सिक्कों पर अपने लिए खलीफा का दूत प्रदर्शित किया उस ने सर्वप्रथम अब्बासी खलीफा अलमुस्तनसिर  के नाम से युक्त सिक्के चलवाए
? इस प्रकार खलीफा द्वारा सुल्तान पद की स्वीकृति के कारण उसका पद कानूनी बन गया और दिल्ली सल्तनत वैद्य रूप से एक स्वतंत्र राज्य हो गया

 ??इल्तुतमिश के पुत्र नासिरुद्दीन की मृत्यु ??
? खलीफा द्वारा उसकी सत्ता को मान्यता प्राप्त होने के कुछ समय पश्चात अथार्थ मार्च-अप्रैल 1229 ईस्वी में उस के बड़े पुत्र नासिरुद्दीन की मृत्यु हो गई इसका इल्तुतमिश पर बहुत दुखद प्रभाव पड़ा
? वह एक अत्यंत योग्य शाशक था सुल्तान इल्तुतमिश की सभी आशाएं उसी पर केंद्रित थी मृत्यु के पूर्व वह हांसी ,अवध ,लाहौर और लखनौती जैसे सामरिक महत्व के स्थानों का सूबेदार रह चुका था
? इस दुखद घटना के बाद भी इल्तुतमिश अपने शासनकाल के 6 वर्षों में निरंतर दिल्ली सल्तनत के संगठन में लगा रहा और विद्रोह का दमन किया


??ग्वालियर और कालिंजर (1231ईसवी)  विजय??
?1231 ईस्वी में इल्तुतमिश ने ग्वालियर पर आक्रमण किया
?वहां के परिहार शासक मंगल देव (मलय वर्मा )ने 11 माह तक वीरता पूर्वक नगर की रक्षा की लेकिन अंत में उसे पराजय स्वीकार करनी पड़ी
?ग्वालियर को बुंदेलखंड और मालवा में लूटपाट के अभियान संचालित करने का अड्डा बनाया गया
?ग्वालियर के शासन प्रबंध के लिए इल्तुतमिश ने “मज्दुलमुल्क जियाउद्दीन मोहम्मद जुनैदी” को अमीर- ए-दाद और सिपहसालार “”रशीदुद्दीन” को कोतवाल नियुक्त किया
?मिनहाज को कुज्जा,  खिताबत, इमामत तथा एहतिसाब के पदों पर नियुक्त किया गया
?ग्वालियर विजय के 2 वर्ष पश्चात इल्तुतमिश ने सुल्तानकोट और बयाना की इक्ताएं और ग्वालियर दुर्ग के शाहना का पद गोरी के एक तुर्क दास अधिकारी मलिक नुसरतुद्दीन तयसी को प्रदान किया और उसे कालिंजर आक्रमण के लिए भेजा गया
?1233-34 ईस्वी में मलिक नुसरतुद्दीन तयसी ने कालिंजर पर आक्रमण किया उस समय वहां का शासक चंदेल राजा त्रिलोक वर्मा था
?वह बिना युद्ध के ही भाग गया तुर्को ने कालिंजर को लूटा और नगर पर अधिकार कर लिया

 ??नागदा और  अन्हिलवाडा़ मे असफलता??
? इल्तुतमिश ने स्वयं गुहिलोत की राजधानी नागदा पर आक्रमण किया लेकिन वहां का राजा क्षेत्रसिंह ने  इल्तुतमिश को पराजित किया
? इस आक्रमण में इल्तुतमिश को भारी क्षति उठानी पड़ी
? इल्तुतमिश ने गुजरात के चालुक्य को दबाने का प्रयत्न किया उसने चालुक्यों की राजधानी  अन्हिलवाडा़  पर आक्रमण किया लेकिन उसे पराजित होकर वापस लौटना पड़ा

??मालवा यात्रा ??
?1234 35ईस्वी में इल्तुतमिश ने मालवा के एक अभियान का नेतृत्व किया और भिलसा के नगर और दुर्ग पर अधिकार कर लिया
?एक मंदिर जिसे मिनहाज के अनुसार 300 वर्ष में निर्मित किया था विध्वंस कर दिया गया
?उसके पश्चात इल्तुतमिश ने उज्जैन नगर की ओर प्रस्थान किया और वहां स्थित महाकाल मंदिर को ध्वस्त किया और लूटपाट की
?वहॉ से प्रसिद्ध लिंग और विक्रमादित्य और अन्य राजाओं की अष्टधातु की मूर्ति इल्तुतमिश दिल्ली लाया था

?? दोआब विजय ??
?दोआब  की स्थिति भी असंतोषजनक थी सल्तनत में व्याप्त अव्यवस्था का लाभ उठाकर अनेक राज्य स्वतंत्र हो गए थे
?जिनमें बदायूं,कन्नौज, बनारस ,कटेहर (रूहेलखंड) इत्यादि प्रमुख थे
?अवध में  पिरथू का विद्रोह इल्तुतमिश के कार्यकाल में ही हुआ था अपनी स्थिति सुदृढ़ करने के बाद इल्तुतमिश ने उनके विरुद्ध कदम उठाया
?उसने बदायूं,कन्नौज, बनारस, कटेहर और बहराइच पर अधिकार कर लिया। कठोर संघर्ष के बाद अवध पर भी इल्तुतमिश का अधिकार हो गया
?अवध में स्थानीय जाति के लोग अपने नेता पीरथू के नेतृत्व में विद्रोह कर रहे थे

?पीरथू जिसके विषय में इल्तुतमिश के पुत्र नासिरुद्दीन और अवध के सूबेदार ने कहा था कि उसने प्राय 1,20,000 मुसलमानों का रक्त बहाया था

 ?इल्तुतमिश का अंतिम अभियान और मृत्यु?
? इल्तुतमिश ने 1236 ईस्वी  में बामियन की ओर कुच किया। खोखरो के विरुद्ध  उसका अंतिम अभियान था
? यहां पर जलालुद्दीन मांगबर्नी का अधिकारी सैफुद्दीन हसन का कार्लूग शासन कर  रहा था
? लेकिन मार्ग में इल्तुतमिश बीमार हो गया जिसके कारण से राजधानी दिल्ली लाया गया
? जहां पर 30 अप्रैल 1236 को इल्तुतमिश की मृत्यु हो गई

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