इल्तुतमिश ने शासक वर्ग का गठन

? साम्राज्य विस्तार के बाद इल्तुतमिश ने उसे संगठित करने का प्रयास किया
? उसने 40 गुलाम सरदारों के गुट अथार्थ तुर्कान ए चिहलगानी का गठन किया जिसे बरनी ने चालीसा या तुर्कान-ए-चिहलगानी कहा है
? इल्तुतमिश ने मुइज्जी तथा अमीरों के वर्चस्व से मुक्ति पाने के लिए और प्रशासनिक कार्य को सुचारु रुप से चलाने के लिए नवीन शासक वर्ग का गठन किया

 जिसमें दो प्रमुख दल थे
(1) तुर्क दास
(2)ताजीक
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?तुर्क दास?
?यह अजम के विभिन्न भागों से लाए गए दास थे। वे आपस में एक दूसरे को समान व भाई समझते थे।तथा एक ही ख्वाजाताश अथार्थ एक ही  स्वामी के दास समझे जाते थे
?जब तक इल्तुतमिश जीवित था वह एक स्वामी के दास थे इल्तुतमिश की मृत्यु के बाद उसके दासों ने स्वयं को सुल्तानी (सुल्तान के दास) कहना शुरु कर दिया
?तुर्क दासों के इसी वर्ग से इल्तुतमिश ने 40 दल(चिहालगानी) बनाया था 40 दल के सदस्य पूरी तरह से इल्तुतमिश के नियंत्रण में थे और सुल्तान के प्रति वफादार थे
?उनकी नियुक्ति प्रमुख प्रशासनिक और सैनिक पदों पर थी में इल्तुतमिश के प्रमुख सलाहकार भी थे

?ताजिक?
?यह कुलीन वंशो के गेर तुर्क विदेशी थे यह लोग सुरक्षा और जीविका की खोज में भारत आए थे
?””बरनी के अनुसार””- चंगेज खां के अत्याचार से बचने के लिए अधिक प्रसिद्ध शहजादे, अभिजात वर्ग के लोग ,मंत्री और अन्य प्रसिद्ध विदेशी भारत आए और इल्तुतमिश के दरबार में एकत्रित हुए थे
?यह स्वतंत्र थे और दास नहीं थे
?इल्तुतमिश के प्रधानमंत्री रहे निजामुल्क जुनैदी और फुतूहुस्सलातीन  लेखक इसामी के पूर्वज ताजिक वर्ग में ही शामिल थे
?इल्तुतमिश जब तक जीवित रहा इन दोनों दलों  पर उसका नियंत्रण रहा
?लेकिन उसकी मृत्यु के बाद चालीसा दल के सदस्य स्वेच्छाचारी हो गए और ताजीक के प्रति उनका वैमनस्य बढ़ने लगा
?इल्तुतमिश ने निजामुल्क जुनैदी और फखरूल-मुल्क असमी की सहायता से शासन प्रबंध की व्यवस्था का पुनर्गठन किया और उसका रूप सुधारा

 ?इक्ता व्यवस्था?
?भारत में इक्ता प्रणाली की शुरुआत मोहम्मद गोरी के समय की गई थी लेकिन इसे सुव्यवस्थित रुप से एक संस्था के रुप में शुरू करने का श्रेय सुल्तान इल्तुतमिश को दिया जाता है
?इक्ता एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है भूमि
?इक्ता हजारेद्वारी के लिए दिया गया भू राजस्व क्षेत्र था जो सैनिक अथवा अमीर किसी को भी दिया जा सकता था, बाद में इक्ता प्रांतों में परिवर्तित हो गए
?इक्ता प्रणाली की विस्तृत व्याख्या “”निजामुल मुल्क-अबू- अली हारुन बिन अली तुसी”” की पुस्तक “”सियासतनामा”” में मिलती है
?इक्ता के अधिकारी इक्तेदार कहलाते थे
?इल्तुतमिश के शासनकाल में मुल्तान से लखनौती के बीच संपूर्ण सल्तनत बड़े और छोटे भागों में विभाजित हो गई थी जिन्हें इक्ता कहा जाता था जो मुक्ता नामक विशिष्ट अधिकारी के प्रशासन के अंतर्गत था

इक्ता की दो श्रेणियां थी
1. पहली श्रेणी–खालसा के 12 प्रांतीय स्तर की
इस श्रेणी में बड़े क्षेत्रों के इक्तेदार प्रांतीय गवर्नर के रूप में थे जो कानून और व्यवस्था की देखरेख, लगान वसूली, मुकदमों की सुनवाई और सैनिक सेवा प्रदान करते थे
2. दूसरी श्रेणी– कुछ गांव के रूप में छोटी इक्ता

?इस श्रेणी में छोटे-छोटे क्षेत्रों के इक्तेदार केवल सैनिक सेवा प्रदान करते थे

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?दोनों श्रेणी  के  इक्तेदारों को वेतन के रूप में अपने इक्ता से वसूल किए गए Lagaan पर अधिकार प्राप्त था
?इल्तुतमिश ने इस व्यवस्था का उपयोग उत्तर भारत की सामंतवादी प्रथा का अंत करने और केंद्रीय प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए किया था
?सामंती प्रथा के विपरीत इल्तुतमिश ने समय समय पर इक्तेदारो का स्थानांतरण कर उन्हें केंद्रीय प्रशासन के नियंत्रण में रखने का सफल प्रयास किया
?इल्तुतमिश प्रथम तुर्क शासक था जिसने दोआब में आर्थिक महत्व को समझा
?वहां दो हजार तुर्क सैनिक नियुक्त कर उसने तुर्की राज्य के लिए उत्तर भारत के सबसे संपन्न प्रदेश पर आर्थिक और प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित किया
?सैनिक व्यवस्था इल्तुतमिश ने ही सर्वप्रथम शाही सेना के गठन हेतु विचार प्रस्तुत किया
?उसने केंद्रीय सेना के नियंत्रण में एक स्थाई सेना का निर्माण प्रारंभ किया
?सेना का मुख्य अंग घुड़सवार और पैदल सैनिक थे
?सेना की देखभाल दीवान ए आरिज करता था
?सेना की कुशलता सुल्तान और दीवान-ए-आरिज की योग्यता और निरीक्षण पर निर्भर थी
?सुल्तान सेना का मुख्य पति था
?प्रांतों में मुक्ता अपनी-अपनी सेना का नेतृत्व करते थे

  ?न्याय व्यवस्था?
?इल्तुतमिश ने न्याय का समुचित प्रबंध किया था
?न्याय के लिए राजधानी और सभी प्रमुख नगरों में काजी और अमीर-ए-दाद की नियुक्ति की गई
?सुल्तान न्याय का स्त्रोत होता था अंतिम निर्णय उसी के द्वारा होता था
?इल्तुतमिश के न्याय व्यवस्था के संबंध में इब्नबतूता ने लिखा है कि सुल्तान के महल के सम्मुख संगमरमर के दो सिंह बने हुए थे जिनके गले में घंटीया लटकी हुई थी
?पीड़ित व्यक्ति इन घंटियों को बजाता था उसकी फरियाद सुन कर तत्काल न्याय की व्यवस्था की जाती थी
?इल्तुतमिश के शासन काल में न्याय चाहने वाले व्यक्ति को लाल वस्त्र धारण करने पड़ते थे लाल वस्त्र उस समय न्याय का प्रतीक माना जाता था
?उल्लेखनीय है कि रजिया ने लाल वस्त्र पहन कर ही जनता से रुकनुद्दीन फिरोज शाह को सिंहासन से हटाने की प्रार्थना की थी
?इल्तुतमिश ने अनेक हिंदू सरदारों को भी अपने क्षेत्रों पर राज्य करने का अधिकार दिया था

?मुद्रा व्यवस्था?
?दिल्ली की मुद्रा प्रणाली में इल्तुतमिश का शासनकाल ऐतिहासिक महत्व रखता है और मुद्रा प्रणाली में उसका योगदान सर्वाधिक है
?वह पहला तुर्क शासक था जिसने शुद्ध अरबी के सिक्के चलाए
?इल्तुतमिश एक महान मुद्रा विशेषज्ञ था
?विदेशों के प्रचलित टंको पर टकसाल का नाम लिखने की परंपरा को भारतवर्ष में प्रचलित करने का श्रेय  इल्तुतमिश को ही प्राप्त है
?इल्तुतमिश ने चांदी का टंका और तांबे का जीतल प्रचलित किया
?सिक्को पर खलीफा का नाम अंकित करवाया और अपने लिए भी शक्तिशाली सम्राट, धर्म और राज्य का तेजस्वी सूर्य ,सदा विजय इल्तुतमिश शब्द अंकित करवाया ।,साथ ही स्वयं को प्रधान धर्म रक्षक “नासिर- अमीर-उल- मुमनिन भी घोषित किया
?इन सिक्कों पर हिंदुओं के प्रचलित प्रतीक जैसे शिव का नंदी और चौहान घुड़सवार अंकित होते थे
?सर्वप्रथम इल्तुतमिश ने चांदी का सिक्का प्रचलित किया
? इल्तुतमिश का चांदी का सिक्का 175 ग्रेन का होता था
?इल्तुतमिश प्रथम सुल्तान था जिस के सिक्के पश्चिमी देशों के सिक्के के समान थे

?इल्तुतमिश ने अपने ग्वालियर विजय के बाद अपने चांदी के टंकी पर राज्य का नाम अंकित करवाया था
?आगे चलकर बलबन ने सोने का टंका और सिकंदर लोधी ने तांबे का टंका जारी किया

?राजवंशी राजतंत्र की स्थापना?
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?इल्तुतमिश ने ईरान की राजतंत्रीय परंपरा को ग्रहण किया और उसे भारतीय वातावरण के अनुकूल समन्वित कर दरबार में ईरानी राज दरबार के रीति रिवाजों और व्यवहार को आरंभ किया
?राजतंत्रीय संबंधित ग्रंथ  अंदाबुस्स सलातीन और मुआसिरूस्स सलातीन को उसने अपने पुत्रों के लिए बगदाद से मंगवाया था

? सांस्कृतिक उपलब्धियां ?
? इल्तुतमिश एक महान विजेता और प्रशासक होने के साथ-साथ कला और संस्कृति का पोषक था
? उस के समय में दिल्ली का नगर एक मुख्य सांस्कृतिक केंद्र के रुप में विकसित हुआ जहां मध्य एशिया से आने वाले शरणार्थी ,कलाकार ,शिल्पकार और विद्वानों को प्रश्रय मिलता था
? दिल्ली को समकालीन साहित्य में हजराते-दिल्ली कहा गया है
? इल्तुतमिश ने लाहौर के स्थान पर दिल्ली को राजधानी बनाया था

??स्थापत्य कला के क्षेत्र में इल्तुतमिश का योगदान??
? स्थापत्य कला के क्षेत्र में इल्तुतमिश का योगदान महत्वपूर्ण है
? उसने  दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में सुंदर भवनों का निर्माण करवाया
? उसने 1231-32 ईस्वी में कुतुब मीनार का निर्माण पूरा करवाया
? इसका निर्माण कार्य मूलतः इराक के निवासी सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा प्रारंभ किया गया था
? लेकिन कुतुब मीनार को पूर्ण इल्तुतमिश   ने करवाया
? इल्तुतमिश ने क़ुतुब मीनार पर अपने  अपने आश्रय दाताओं, कुतुबुद्दीन ऐबक और सुल्तान मुइजुद्दीन मुहम्मद गौरी का नाम अंकित करवाया
? इसके अतिरिक्त जोधपुर में अतारकीन का दरवाजा निर्मित करवाया और दिल्ली में एक मस्जिद और मदरसा का भी निर्माण करवाया
? इल्तुतमिश ने अपने पुत्र नासिरुद्दीन महमूद की कब्र पर 1231 में सुल्तानगढी़ का मकबरा बनवाया
? भारत में प्रथम मकबरा निर्मित कराने का श्रेय इल्तुतमिश को ही प्राप्त है
? उसने बदायूं में हौज-ए- शम्शी और शम्शी ईदगाह का निर्माण करवाया
? 1223ईस्वी में उसने बदायूं में एक जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था

 ??साहित्य के क्षेत्र में इल्तुतमिश का योगदान??
? इल्तुतमिश विद्वानों और योग्य व्यक्तियों का सम्मान करता था
? उसने मंगोल आक्रमण के कारण मध्य एशिया और इस्लामी प्रदेशो से भाग आए हुए सभी योग्य व्यक्तियों और राजपुरुषों  को अपने दरबार में स्थान दिया।
? समकालीन विद्वान मिनहाज-उल-सिराज और मलिक कुतुबुद्दीन हसन गोरी और फखरूल-मुल्क इसामी जैसे योग्य व्यक्तियों को उसने दरबार में आश्रय दिया था।
? निजामुलमुल्क जुनैदी को इल्तुतमिश ने अपना प्रधानमन्त्री नियुक्त किया।
? जनता की शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इल्तुतमिश ने मदरसों का निर्माण करवाया
? उस ने सर्वप्रथम दिल्ली में एक मदरसे की स्थापना कि और उसका नामकरण मोहम्मद गोरी के नाम पर “मदरसा -ए- मुइज्जी” जी रखा
? इसी के नाम पर उसने बदायूं में भी एक मदरसे की स्थापना की थी
? नासिरी मदरसा की स्थापना भी इल्तुतमिश ने करवाई थी इसका नामकरण  उसने अपने पुत्र नासिरुद्दीन महमुद के नाम पर रखा
? इल्तुतमिश ने अमीर खुसरो के पिता को संरक्षण प्रदान किया
? इल्तुतमिश के समय नासिर,  अबूबक्र बिन मुहम्मद रूहानी और नूरुद्दीन मुहम्मद मुख्य विद्वान थे
? नूरुद्दीन ने लुबाव- उल- अल्बाव को लिखा

??धार्मिक नीति के क्षेत्र में इल्तुतमिश का व्यक्तित्व ??
?व्यक्तिगत जीवन में इल्तुतमिश अत्यधिक धार्मिक प्रवृत्ति वाला व्यक्ति था
?मिनहाजुद्दीन सिराज ने उसके संबंध में लिखा है कि– “”उसके समान धर्म परायण, दयालु और महात्माओं और विद्वानों का सम्मान करने वाला दूसरा कोई शासक नहीं हुआ””

? इल्तुतमिश रात्रि का पर्याप्त समय प्रार्थना और चिंतन में व्यतीत करता था
? वह सूफी संतों जैसे शेख कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, काजी हमीमुद्दीन नागौरी, शेख जलालुद्दीन तबरेजी ,शेख बहाउद्दीन जकारिया और शेख नखशवी का बड़ा आदर करता था
? दरबार में धार्मिक गोष्ठियों का आयोजन करवा उलेमा वर्ग को भी संतुष्ट करता था
? उसने रहस्यवादियों के सद्भावना से पूरा लाभ भी उठाया

? शेख बहाउद्दीन जकारिया की सहायता से इल्तुतमिश ने मुल्तान पर विजय प्राप्त की और शेख  कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी ने उसे शम्शी तालाब के निर्माण में सहायता दी
? इस्माइल शियाओं का विद्रोह इल्तुतमिश के समय में हुआ था लेकिन सुल्तान ने उन का दमन कर दिया

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