इल्बारी वंश

??ग्यासुद्दीन बलबन (1266 से 1286 ईस्वी  तक)??


?मूलनाम-बहाउद्दीन
?पूरा नाम-गियासुद्दीन बलबन
?वंश की स्थापना- द्वितीय इल्बारी वंश
?उपाधि- उलूग खॉं (नासीरुद्दीन मोहम्मद द्वारा), जिल्ले इलाही (ईश्वर का प्रतिबिंब )स्वयं धारण की, गियासुद्दीन( राज्यारोहण के बाद ),नियामत-ए-खुदाई 

?जाति-इल्बारी तुर्क
?वंशज- अफरासियाब का वंशज
?बंदी बनाया गया- मंगोलों द्वारा
?गुलाम के रूप में खरीदा गया- जमालुद्दीन बसरी
?इल्तुतमिश ने खरीदा- 1233 ई. में (ग्वालियर विजय के बाद )
?बलबन का उत्कर्ष काल- नासिरुद्दीन मुहम्मद का काल
?उलूग खां की उपाधि दी गई-नासिरुद्दीन से अपनी पुत्री के विवाह के अवसर पर( अगस्त 1249ईस्वी में )

?राज्य रोहन -*1266 ईस्वी में (नासिरुद्दीन की मृत्यु के बाद)
?लोहा और रक्त की नीति अपनाई-विरोधी तत्वों से निपटने के लिए
?इल्तुतमिश ने शामिल किया- चालीसा दल में
?इल्तुतमिश ने पद दिया- खासदार( सुल्तान का व्यक्तिगत सेवक )
?अमीर -ए -शिकार का पद मिला-रजिया के शासनकाल में
?गैर-इस्लामी प्रथाओं का प्रचलन किया–बलवन (जो कि दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने यह परंपरा प्रारंभ की )

?बलबन ने प्रथाए प्रारंभ की थी-सिजदा( घुटने पर बैठकर सिर झुकाना) और पायबोस (सुल्तान का चरण चुंबन की)
?प्रत्येक वर्ष इरानी त्यौहार शुरू किया- नौरोज मनाने की प्रथा आरंभ की
?अपने पुत्रों के नाम रखें– फारस के सम्राटों की भांति
?शेर खां था-बलबन का सबसे शक्तिशाली और संभावित विरोधी सरदार
?सर्वप्रथम बलबन ने निर्णय लिया- मेवाती को कुचलने का
?बंगाल के तुगरिल खॉ  द्वारा किया गया विद्रोह– सुल्तान के दास द्वारा प्रथम विद्रोह था
?बलवन ने दिल्ली से दूर जाकर नेतृत्व किया– बंगाल अभियान ( एकमात्र ऐसा सैन्य अभियान था, जिसका बलबन ने दिल्ली से दूर जाकर नेतृत्व किया)

?सर्वप्रथम बलबन ने शुरुआत की–सदेव तत्पर सेना रखने की
?बलबन ने स्थापना की– भारत में आरिज विभाग की
?सर्वप्रथम बलबन ने ध्यान दिया– किले बनवाने पर (बलबन पहला शासक था जिसने किले बनाने पर ध्यान दिया)
?बलबन ने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया– केखुशरव को   (शहजादा मोहम्मद का बड़ा पुत्र )
?बलबन की मृत्यु–*1287 ईस्वी में बलबन का मकबरा दिल्ली में स्थित शुद्ध इस्लामी शैली से निर्मित है

??बलबन का प्रारंभिक जीवन ??
? बलबन का वास्तविक नाम बहाउद्दीन था वह इस्लामिक तुर्क था
? गद्दी पर बैठने के पश्चात उसने एक नवीन राजवंश बलबनी वंश अर्थात द्वितीय इल्बारी वंश की नींव डाली
? उसके पिता या पितामाह इल्बारी तुर्क के 1 बड़े कबीले के मुखिया थे दुर्भाग्यवश बलवंत किशोरावस्था में ही मंगोलों द्वारा बंदी बना लिया गया था
? मंगोल उसे बगदाद ले आए जहां एक गुलाम के रूप में ख्वाजा जमालुद्दीन बसरी नामक व्यक्ति के हाथों में बेच दिया
? जमालुद्दीन बसरी ने उसे अन्य तुर्क दासों के साथ दिल्ली लाया और वहां  इल्तुतमिश ने 1233 ईस्वी में ग्वालियर विजय के बाद उसे खरीदा

 ? शीघ्र ही इल्तुतमिश ने बलवन को चालीसा दल में शामिल कर लिया। बलबन की चालीसा दल में स्थिति सबसे नीचे थी, लेकिन अपनी योग्यता और कार्यशैली के आधार पर वह सबसे उच्च था
? कुछ समय पश्चात इल्तुतमिश ने उसे खासदार (सुल्तान का व्यक्तिगत सेवक) का पद प्रदान किया
? रजिया के शासनकाल में वह “अमीर- ए -शिकार” के पद पर नियुक्त हुआ।
? रजिया और बहरामशाह के मध्य हुए सत्ता के लिए संघर्ष में उसने बहरामशाह का पक्ष लिया फलस्वरुप उसे “अमीर- ए-आखुर”का पद  प्राप्त हुआ

?अमीर ए हाजिब मलिक बरुद्दीन शंकर रूमी की विशेष कृपा के कारण उसे रेवाड़ी की जागीर दी गई
?सुल्तान बहरामशाह को हटाकर मसूद शाह को शासक  बनाने में उसकी सहायता की फलस्वरुप उसे “अमीर-ए-हाजिब”का पद और हांसी की सुबेदारी प्राप्त हुई
?इसी समय उसने मंगोलों को पराजित कर उच्छ पर अधिकार कर लिया इसे बलबन की शक्ति और प्रतिष्ठा दोनों में वृद्धि हुई
?अलाउद्दीन मसूद शाह को सिहासन से हटाकर नासिरुद्दीन महमूद को सुल्तान बनाने में बलबन का प्रमुख योगदान रहा
?नासिरुद्दीन महमूद का काल बलबन का उत्कर्ष का काल था। उस के समय में संपूर्ण शक्ति बलबन के हाथों में केंद्रित थी
?अगस्त1249 ई. को बलबन ने अपनी पुत्री का विवाह नासिरुद्दीन से कर दिया। इस अवसर पर उसे “उलूग खां”की उपाधि और नायब एवं मामलिकात का पद दिया गया

??राज्यारोहन??
?1266 ईस्वी में नासिरुद्दीन की मृत्यु के बाद बलवंत गद्दी पर बैठा
?बलबन के समय में यह कथन प्रसिद्ध है कि–“”एक मलिक होते हुए भी वह खान हो गया और फिर सुलतान बन गया””
?इसामी ने उसके विषय में लिखा है कि–वह एक महामानव और वंशानुगत शासक की भाति बात और व्यवहार करने लगा जो पौराणिक अफरासियाब का वंशज था

??बलबन की समस्याएं??

?बलबन का राज्यारोहण विषम परिस्थितियों में हुआ था दिल्ली सल्तनत कई आंतरिक और बाहरी समस्याओं से घिरी हुई थी
?इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियों का शासनकाल सुल्तान की शक्ति और प्रतिष्ठा के पतन का काल रहा
?शासकों की अयोग्यता के कारण संपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था छिन्न भिन्न हो गई

 ?बलवंत के सम्मुख दो समस्याएं प्रमुख थी
1. प्रथम समस्या– सुल्तान की शक्ति और प्रतिष्ठा को स्थापित करना और जनसाधारण में सुल्तान के प्रति भय और सम्मान की भावना जागृत करना था
2. दूसरी और तत्कालिक समस्या–कानून और व्यवस्था की थी।जो केवल एक स्थाई सुव्यवस्थित सेना और पुलिस शासन द्वारा ही स्थापित की जा सकती थी

?राज्य की आर्थिक स्थिति भी दयनीय थी लगातार युद्ध षड्यंत्रों विद्रोह और ढिलाई के कारण खजाना खाली हो गया था
?राज्य की आंतरिक अव्यवस्था का लाभ उठाकर राजपूत शासक पुन:तुर्को को भारत से बाहर खदेड़ने और अपनी राजनीतिक सर्वोच्चता स्थापित करने का प्रयास करने लगे
?मेव(मेवाती) और कटेहर और दोआब के हिंदुओं के विद्रोह और उपद्रवों ने राज्य के अंदर अशांति और अव्यवस्था उत्पन्न कर दी थी
?दिल्ली के निकट मेवातो का इतना अधिक आतंक हो गया कि कोई मार्ग सुरक्षित नहीं था

 ?मेवों के आतंक के संबंध में इतिहासकार बरनी ने लिखा है कि– दोपहर की नमाज से पहले भी मेव उन पानी भरने वालों और दासियों को लूटते थे जो तालाब से पानी ले जाती थी और उनके कपड़े उतार कर ले जाते थे और उनको नग्न दौडा़ देते थे 

?उत्तर पश्चिम सीमा भी असुरक्षित थी। पश्चिमोत्तर सीमांत पर मगोलों का आक्रमण तीव्र गति से हो रहा था
?पंजाब पर व्यास नदी के तट तक मंगोल सेनाओं का अधिकार हो चुका था।अब वे दिल्ली विजय का सपना देख रहे थे
?मंगोलों के आक्रमण के विरुद्ध एक संगठित शासन की आवश्यकता थी इस प्रकार बलबन के समक्ष कई समस्याएं थी लेकिन उसने दृढ़तापूर्वक स्थिति का सामना किया
?इन तत्वों से निपटने के लिए बलबन ने “”लोहे और रक्त”” की नीति अपनाई
?उसने सुल्तान की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और चालीसा का प्रभाव समाप्त किय
?आंतरिक विद्रोह को नियंत्रित कर मंगोलों से राज्य की सुरक्षा की और प्रशासन का पुनर्गठन किया
?सल्तनत की स्थिति पहले की अपेक्षा अधिक सुदृढ़ हो गई थी

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