करौली प्रजामंडल आंदोलन

?करौली में भीराजस्थान के अन्य राज्य की भाँति सामंतशाही शासन व्यवस्था थी
?करौली में जन जागृति एवं रचनात्मक कार्य की शुरूआत ठाकुर पूर्ण सिंह और कुंवर मदन सिंह ने की थी
?यहॉ के नरेश भीम पाल ने भी जंगली सूअर के शिकार पर पाबंदी लगा रखी थी
? किसान इस बात से नाराजथे
?1927 में कुँवर मदन सिंह के नेतृत्वमें वहां से किसानों ने इसके विरुद्ध आंदोलनकिया
?मदन सिंह ने खेती की रक्षा के लिए सूअर मारने, हिंदी भाषा का शासकीय कार्य में प्रयोग करने और बेगार प्रथा समाप्त करने की मांग को लेकर अनशन किया था
? राजा ने किसानों की मांगे स्वीकार कर ली
?परंतु यहां यह राजनीतिक चेतनाप्रमुख रूप से करौली राज्य सेवक संघ के माध्यम से जाग्रत हुई
?करौली राज्य सेवक संघ के संस्थापक मुंशी त्रिलोक चंद माथुर थे
?इस प्रकार करौली में राजनीतिक जागृति  की शुरुआत करौली राज्य सेवक संघ के माध्यम से हुई थी
?उन्होंने 1938 में प्रांतीय कांग्रेस कमेटी अजमेर की एक शाखा करौलीमें स्थापित कर दी थी
?जब राजस्थान के अन्य रियासत में प्रजामंडल स्थापित किए गए,तो करौली में भी कांग्रेस शाखा को प्रजामंडल में परिणत कर दिया

??प्रजामंडल की स्थापना?? 
?जब देश की अन्य रियासतों में प्रजामंडल बने तो त्रिलोचन्द माथुर ने 1939 में चिरंजीलाल शर्मा मदनसिह आदि के सहयोग से करौली राज्य प्रजामंडल की स्थापना की
?इस प्रजामंडल के प्रमुख नेता चिरंजीलाल शर्मा ,कल्याण दास गुप्ता, कृष्णा प्रसाद पूर्ण सिंह और मानसिंह थे
?प्रजामंडल का आरंभिक उद्देश्य जनता का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास था
? लेकिन सत्तावादी सरकार और राजा भीमपालइस संस्था को भी सहन नहीं कर सके
?राज्य ने प्रजा मंडल के कार्यकर्ताओं के साथ कठोर बर्ताव किया
? यह प्रजामंडल समय-समय पर प्रस्ताव पारित कर राज्य में शासन सुधार की मांग करता रहा
? लेकिन प्रजामंडल और राज्य शासन के बीच कभी भी सीधा टकराव नहीं हुआ
?इस कारण करौली प्रजामंडल को कोई आंदोलन नहीं करना पडा था

??करौली प्रजामंडल का अधिवेशन और उत्तरदायी शासन की मांग?? 
?1939 में त्रिलोकचंद माथुर की अध्यक्षता में प्रजामंडल का अधिवेशनहुआ
?जिसमें  प्रशासनिक सुधारों की मांग की गई
?इस कारण 1939 में प्रजामंडल ने एक प्रशासनिक समिति के गठनकी मांग की गई
?यह प्रजामंडल प्रशासन की स्थापना और बेगार समाप्त करने की भी मांग करता रहा है लेकिन सरकार उसकी इन मांगो के प्रति उदासीनबनी रही 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में करौली में भाग अवश्यलिया था
?इस आंदोलन में श्री कल्याण प्रसाद गुप्ता को बंदी बना लिया गया था
?इस पर अन्य कई कार्यकर्ता भूमिगतहो गए लेकिन सरकार की ओर से विशेष दमननहीं हुआ
?श्री कल्याण प्रसाद गुप्ता को दो माह के बाद छोड़ दिया गया
?श्री त्रिलोक चंद्र माथुर की मृत्यु के बाद 1946 में चरखा संघ के एक कार्यकर्ता श्री चिरंजी लाल शर्मा ने प्रजामंडल की बागडोर संभाली
?1946 में करोली प्रजामंडल के अध्यक्ष चिरंजी लाल शर्माबन गये
?स्वतंत्रता प्राप्ति तक के यहां का प्रजामंडल उनके नेतृत्व में ही कार्य करता रहा
?नवंबर 1946 में पड़ोसी राज्यों के राजनीतिक कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन करौलीमें आयोजित हुआ
?इस सम्मेलन में पहली बार करौली में उत्तरदायी शासन की मांग की गई
? इस पर जुलाई 1947 में करौली महाराज ने एक ग्यारह सदस्य की संवैधानिक समितिगठित की
?प्रजामंडल ने इस समिति में अपने सदस्य लेने की मांगकी थी
?लेकिन महाराज ने प्रजामंडल के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया
?और इस समिति में प्रजामंडल का कोई भी सदस्य नहींलिया गया
?फरवरी 1948 तक प्रजामंडल आंदोलन चलता रहा
? कुछ समय पश्चात 18 मार्च 1948 को करौली का मत्स्य संघ में विलय हो गया
?करौली का मत्स्य संघ में विलय होने के साथ ही आंदोलन समाप्त हो गया