केंद्रीय परिवर्तित सड़क योजनाएं

भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा केंद्र सड़क निधि के अंतर्गत दी जानेवाली राशि का कुछ भाग अंतर्राज्य सड़कों के विकास के लिए रखा जाता है योजना के आरंभ से वर्ष 2015-16 (दिसंबर 2015 )तक अंतर्राज्य सड़कों हेतु 219.73 करोड़ रुपए लागत के 29 कार्य स्वीकृत किए गए थे उक्त स्वीकृत कार्यों में से माह दिसंबर 2015 तक उक्त जिलों के 28 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं और 155.60 करोड रुपए का व्यय कर 381.07 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर लिया गया है

??आर्थिक महत्व की सड़कें?? 
भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा केंद्रीय सड़क निधि के अंतर्गत दी जानेवाली राशि का कुछ भाग आर्थिक महत्व की सड़कों के लिए रखा गया है इस मद में वर्ष 2015- 16 से 100%  राशि भारत सरकार द्वारा सीधे ही भुगतान प्रक्रिया द्वारा वहन की जाएगी

 ??गांव को सड़कों से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण?? 

वर्ष 2000-01 से 2009 -10 तक 9 चरणों में 36239 किलोमीटर लंबाई की ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर 10863 गांव को सड़कों से जोड़ने हेतु 5534.70 करोड रुपए की स्वीकृत राशि जारी की गई थी इन स्वीकृति के विरुद्ध दिसंबर 2015 तक 34 864 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण से 10733 गांव को सड़कों से जोड़कर 5000.24 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है

??ग्रामीण सड़कों का उन्नयन?? 

वर्ष 2007-8 से 2009-10 तक तीन चरणों में 14546 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का उन्नयन किए जाने हेतु 3365.30 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई थी इन स्वीकृति के विरुद्ध दिसंबर 2015 तक 13932 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के उन्नयन का कार्य पूर्ण कर 2984.30 करोड़ रुपए का व्यय किया गया है इस प्रकार इस योजना के प्रारंभ से लेकर दिसंबर 2015 तक 500 से अधिक आबादी के 9038 गांव और 250 से 499 की आबादी के 1695 गांव को छोड़कर 34864 किलोमीटर लंबाई की डामर सड़कों का निर्माण किया गया और 13932 किलोमीटर सड़कों का उन्नयन कार्य करवाया गया

??बसावटों(ढाणियों)को सड़कों से जोड़ना?? 

अभी तक राज्य सरकार को सामान्य आबादी क्षेत्रों में 500 से अधिक आबादी और मरू क्षेत्र और जनजाति क्षेत्र में 250 वर्ष से अधिक के सभी गांवों को जोड़ने हेतु स्वीकृति प्राप्त हुई थी योजना की हैबिटेशन परिभाषा का सही आकलन पेयजल आपूर्ति विभाग की सर्वे 2003 के अनुसार कर 250 और अधिक आबादी वाली 3706 में करने की स्वीकृति भारत सरकार से प्राप्त हुई थी दिसंबर 2015 तक 9606.13 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कर 3215 बसावटों को सड़कों से जोड़ा गया है वर्ष 2015-16 से इस योजना के अंतर्गत 60% निधी केंद्रीय सरकार द्वारा 40% राशि राज सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी     


♻बी.ओ.टी.व पी.पी.पी. आधार पर सड़को पर लोगो उप मार्गो का निर्माण♻

☘?सड़क निर्माण की नई युक्तियां?☘
?बी. ओ. टी., पी. पी. पी., ओ. एम टी. के बाद स्विच ऑक्शन का भी विकल्प है
?कंस्ट्रक्शन कंपनीया ठेकेदार की बजाय दिखेंगे सर्जनकर्ता और निवेशक की भूमिका में

रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश की इच्छुक कंपनियों के लिए कई विकल्प होंगे बीओटी,पीपीपी अवधारणा से थोड़ा आगे बढ़ते हुए सरकार सड़क निर्माता कंपनियों के हाथ खोलने जा रही है भविष्य में यह कंपनियां भी सरकार को बता सकेगी कि कौन सी सड़क बननी चाहिए और किस सड़क के बनने से ट्रैफिक से जुड़ी समस्याओं का निराकरण होगा कंपनी ही इसकी डी. पी. आर. बनाएगी और फिर उसका निर्माण करेगी बशर्तें कोई और उससे कम लागत में उस प्रोजेक्ट को पूरा करने को राजी ना हो

1⃣ स्वीस ऑक्शन??
इसमें सड़क निर्माता कंपनियां निर्माण के साथ योजना में भी भागीदार बनेगी कंपनियां खुद सुझायेगी कि कौन सी सड़क बननी चाहिए और उसकी डिजाइन कैसी होनी चाहिए सड़क बनाने का प्रस्ताव सबसे पहले कंपनी को ही मिलेगा लेकिन इसमें बाकी के लिए भी विकल्प खुले  रखे जाएंगे ताकि लागत मूल्य को प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सके केंद्र सरकार के इस प्रारूप को कुछ राज्य में पायलट प्रोजेक्ट में अपनाए राजस्थान में भी इसकी शुरुआत जल्द होने जा रही है

2⃣  ओएमटी??
ऑपरेट मेंटल एंड ट्रांसफर की यह अवधारणा उन सड़कों को ठेके पर देने की है जिनका निर्माण बी. ओ. टी. के तहत नहीं हुआ है इसके मेंटेनेंस का काम किसी और कंपनी को निश्चित अवधि के लिए  देकर सरकार बेफिक्र हो जाएगी इससे सडके बनने के बाद भी बाजार में काम मिलने की गुंजाइश बनी रहेगी राजस्थान में उदयपुर-पिंडवाड़ा, झांसी-बारान-ं शिवपुरी रोड के प्रोजेक्ट ऑपरेशन मेंटेन एंड ट्रांसफर पर कंपनियों को दिए गए हैं

3⃣  डी. बी. एफ. ओ. टी??
डिजाइन बिल्ट फाइनेंस ऑपरेट एंड ट्रांसफर के इस प्रोजेक्ट से सरकार ने सड़क ब्रिज निर्माण में आने वाली दिक्कतों को दूर करने की कोशिश की है इससे निर्माता कंपनी न सिर्फ सड़क बनाएगी बल्कि उसकी डिजाइन भी खुद तैयार करेगी सड़क टूटने पर कंपनी सरकारिया एजेंसी पर किया तो मत नहीं लगा सके गी सरकार निश्चित हो कर किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करवा सकती है क्योंकि इसमें फाइनेंस की गारंटी से लेकर मेंटेनेंस के दायित्व कंपनी के हैं

??बीओटी- बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर??
राजस्थान देश का सबसे बड़ा प्रदेश है राज्य में सभी गांव तक पक्की सड़कें पहुंचाने आधारभूत ढांचागत विकास करने और सड़क तंत्र के समुचित विकास के लिए सड़क विकास नीति 1994 बनाई गई और घोषित की गई थी इस नीति के अंतर्गत देश में चल रहे उदारीकरण और निजीकरण के वातावरण का समुचित उपयोग करने हेतु सड़कों और पूलों के निर्माण में निजी निवेशक बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर के आधार पर कराने का भी प्रावधान रखा गया था ऐसे निवेश करवा कर सड़क और पूलों के कार्य हो पाएंगे
वर्तमान में इस प्रकार के बी. ओ. टी. आधार पर कार्य केवल कुछ राज्यों में ही प्रयोग के आधार पर लेने के प्रयत्न किए गए हैं पिछले अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट है कि सड़कों और पूलों में निवेश करने हेतु निजी निवेश कर्ताओं को बहुत अधिक उत्कंठा नहीं है इसका एक कारण यह रहा है कि जिन शर्तों पर राज्य सरकार और केंद्र सरकार ऐसा निवेश कराने के लिए निजी निवेश कर्ताओं को आमंत्रित करती है उसमें संपूर्ण जोखिम उठाने की निवेशकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने काफी गंभीरता से इस पूरे मामले पर विचार कर ऐसी शर्ते रखने का निश्चय किया है कि जिससे निजी निवेशकर्ता ऐसा कार्य करने के लिए आकर्षित हो इस संबंध में राज्य सरकार ने निजी निवेशकों से ही. ओ.टी.आधार पर अधिकाधिक निवेश कराने के लिए 28 अप्रैल 2002 को राजस्थान सड़क विकास अधिनियम-2002 जारी किया गया था एेसी बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर परियोजना जो अपने आप में पूर्ण रुप से वाइबल नहीं थी व जिसके कारण ही निजी निवेशकों द्वारा इन परियोजनाओं को हाथ में नहीं लिया जा रहा था ऐसी परियोजना में अधिकाधिक विधि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए वर्तमान सरकार द्वारा राजस्थान सड़क विकास नियम- 2002 में संशोधन किया गया जिसके तहत सरकार इन परियोजनाओं में अनुदान निवेशकों को उपलब्ध करा सकेगी सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा दिसंबर 2015 तक 46 परियोजनाएं जो निजी निवेशकों  को आवंटित की गई थी पूर्ण कर ली गई है और इन्हें यातायात के लिए खेज दिया गया है इन परियोजनाओं में से 32 परियोजनाएं टोल वसूली पूर्ण होने के बाद निवेशकों द्वारा राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी गई है


♻जन-निजी सहभागिता (पी.पी.पी.) पद्धति से सड़कों का विकास♻
भारत सरकार द्वारा ऐसे राष्ट्रीय राजमार्गों राज्य मार्गों और मुख्य जिला सड़कों जिन पर की तुलनात्मक रुप से यातायात का दबाव कम है के विकास हेतु जन निजी सहभागिता कार्यक्रम के अंतर्गत नई नीति प्रतिपादित की गई है इस नीति के अनुसार परियोजना की कुल लागत की अधिकतम 20% तक की राशि भारत सरकार द्वारा वि.जी.ऐफ. (वाईब्लिटी गैप फंड)के रूप में वहन की जाएगी और लागत के अधिकतम 20% प्रतिशत तक की राशि राज्य सरकार द्वारा ऑपरेशन मेंटीनेन्स सहायता के रूप में दी जा सकेगी राष्ट्रीय राजमार्गो मामलों में 40% तक की राशि भारत सरकार द्वारा वहन की जाएगी
भारत सरकार की पीपीपी योजना के अंतर्गत वि.जी.एफ. परियोजना स्कीम के तहत राज्य सरकार और भारत सरकार के मध्य हुए निम्न परियोजनाओं के एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं इन परियोजनाओं की स्वीकृति भी सड़क परिवहन और  राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी की जा चुकी है जो निम्न प्रकार हैं

बीकानेर से सूरतगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-15➖172.38 किलोमीटर
चित्तौड़गढ़ से नीमच व निंबाहेड़ा से प्रतापगढ़ NH-79 और 113➖117 किलोमीटर
अजमेर से नागौर राष्ट्रीय राजमार्ग -89➖148 किलोमीटर
सीकर से बिकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग- 11➖237.58 किलोमीटर
नागौर से बीकानेर राष्ट्रीय राजमार्ग-89➖108.26 किलोमीटर
जोधपुर से पाली राष्ट्रीय राजमार्ग- 65➖71.55 किलोमीटर         


वर्ष 2014 15 की बजट घोषणा के अनुसार आगामी 5 वर्षों में 20000 किलोमीटर लंबाई में राज्य राजमार्गों का पीपीपी आधार पर विकास किया जाना है दिसंबर 2015 तक की प्रगति निम्न प्रकार है कार्य योजना को मूर्त रूप देने के लिए विशेष पीपीपी डिवीजन का गठन किया गया
सड़कों के विकास प्रचालन सुरक्षा और राजमार्गो को संलग्न भूमियों के नियमन हेतु राजस्थान राज्य मार्ग अधिनियम 2014 विधान सभा द्वारा पारित कर दिनांक 8 मई 2015 से लागू किया गया है

राजस्थान स्टेट हाईवे अथॉरिटी का गठन दिनांक 2 जून 2015 को किया गया प्रथम चरण में 8910 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का चयन कर साध्यता अध्यन कराया गया
दो सड़कें पीपीपी(वी.जी.एफ) आधार पर व्यवहार्यपाई गई हे तथा डीईएए भारत सरकार को वी. जी. एफ. स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भिजवाए गए हैं इन दोनों सड़कों के लिए आरफक्यू आमंत्रित कर प्राप्त किए जा चुके हैं मलेशिया सरकार द्वारा रिसर्जेंट राजस्थान के दौरान दिनांक 19 नवंबर 2015 को राजमार्गों के विकास हेतु मलेशियन कंपनियों के माध्यम से 10000 करोड रुपए के निवेश का करार किया गया उक्त निवेश से लगभग 4000 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का विकास किया जावेगा
आधारभूत परियोजनाओं विशेषकर सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधार पर विकसित की जा रही परियोजनाओं के नीतिगत मामलों के निर्णय हेतु राज्य सरकार द्वारा माननीय मुख्यमंत्री महोदया की अध्यक्षता में वर्ष 2014-15 में काउंसिल फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (CID) का गठन किया गया C.I.D.500 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के नीतिगत मामलों को निर्णित कर परियोजनाओं का अनुमोदन करती है
राज्य सरकार द्वारा C.I.D. के कार्यों के सुचारु संचालन में स्वयं हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एंपावर्ड कमेटी फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट(E.C.I.D.) का भी गठन किया गया
राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता/संसोधन नियम-2015 के अनुसरण में स्विस चैलेंज विधि से क्रय के अंतर्गत परियोजना प्रस्ताव पी.पी.पी. और गैर पी.पी.पी. दोनों पर विचार परीक्षण अनुमोदन के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक सर्वाधिकार समिति बनाई गई है

??राज्य में सार्वजनिक निजी सहभागिता का सामान्य परिदृश्य??
वर्ष 1997 से 31 मार्च 2015 तक कुल 9,814.86 करोड़ की लागत से 133 सार्वजनिक निजी सहभागिता परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी है 41 सार्वजनिक निजी सहभागिता परियोजना जिनकी लागत 5,453.08 करोड़ है के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं जबकि 152 सार्वजनिक निजी सहभागिता परियोजनाएं जिनकी लागत 32, 379.72 करोड़ है के परियोजना विकास के कार्य विभिन्न स्तर पर प्रक्रियाधीन है इस प्रकार कुल 326 सार्वजनिक निजी सहभागिता परियोजनाए जिन की अनुमानित लागत 47,647.66 करोड है विभिन्न स्तरो पर है