जलालुद्दीन फिरोज खिलजी

?पूरा नाम-जलालुद्दीन फिरोज खिलजी
?उपाधि-शइस्ता खॉ (कैकुबाद के द्वारा दी गई)
?जलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेवा प्रारंभ की- बलवन के शासनकाल में
?जलालुद्दीन खिलजी का राजनीतिक उत्कर्ष काल- कैकुबाद के समय में
?कैकुबाद  के समय नियुक्त किया-समाना का सूबेदार और सर- ए-जहांदार के पद पर
?दिल्ली की सत्ता पर अधिकार किया-कयूमर्स की हत्या कर के
?जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का राज्यारोहण-*13 जून 1290 ईस्वी को केलुगड़ी के महल में
?जलालुद्दीन ने अपनी राजधानी बनाया-केलू गढ़ी (किलोखरी )को
?जलालुद्दीन खिलजी ने अपने पुत्रों को उपाधि दी-बड़े पुत्र को खानखाना ,दूसरे पुत्र को अर्कलीखां,तीसरे पुत्र को कद्र खॉ  की उपाधि
?जलालुद्दीन खिलजी के शासन की नई संकल्पना-सभी समुदायों के लोगों की सद्भावना और समर्थन पर आधारित
?जलालुद्दीन प्रथम शासक था-जिसने उदार  निर्कुंशवाद  को शासन का आधार बनाया
?सुल्तान बनने के समय पर जलालुद्दीन की आयु-*70 वर्ष
?जलालुद्दीन का व्यक्तित्व- उदार,  विनम्र, दयाल,  शांतिप्रिय, रक्तपात से घृणा
?जलालुद्दीन पहला शासक था-जिसने अपने विरोधियों को संतुष्ट करने का प्रयास किया
?जलालुद्दीन के समय मंगोल आक्रमण हुआ- 1292 ईस्वी में अब्दुल्ला के नेतृत्व में
?जलालुद्दीन के सैन्य अभियान-रणथंबोर और मंडोर अभियान
?रणथंभोर दुर्ग के लिए जलालुद्दीन ने कहा-वह एक मुसलमान के बाल को भी ऐसे 10 किलो की तुलना में अधिक महत्व देता है
?जलालुद्दीन की मृत्यु-*20 जुलाई 1296ईस्वी को
?जलालुद्दीन की मृत्यु की गई-अलाउद्दीन के दो प्रमुख सहयोगी  मुहम्मद सलीम और ईख्तियारुद्दीन हुद ने
?जलालुद्दीन ने इरानी फकीर को हाथी के पैरों से कुचलवा दिया था-फकीर सीदी मौला
?दक्षिण भारत में प्रथम मुस्लिम आक्रमण -*1294 ईस्वी में देवगिरि के शासक रामचंद्र देव पर अलाउद्दीन खिलजी के नेतृत्व में
?विभाग की स्थापना की- दीवाने वकूफ

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???जलालुद्दीन खिलजी का प्रारंभिक जीवन???
?जलालुद्दीन खिलजी कबीले का तुर्क था जो अफगानिस्तान में निवास करते थे
?उस के पूर्वज इल्तुतमिश के शासनकाल में भारत आए थे और सल्तनत में नौकरी करने लगे थे
?जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने बलबन के शासनकाल में अपनी सेवा प्रारंभ की और एक कुशल सेनानायक के रूप में ख्याति अर्जित कर ली
?मंगोलों के विरुद्ध संघर्ष में अपनी योग्यता का परिचय दिया,बलबन उसकी सैनिक प्रतिभा से प्रभावित होकर उसे पश्चिमोत्तर सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात किया और सेनानायक का पद दिया
?जलालुद्दीन का राजनीतिक उत्कर्ष कैकुबाद के समय में प्रारंभ हुआ, कैकुबाद के समय में वह  समाना का सूबेदार और सर जहांदार (शाही अंगरक्षक )के पद पर नियुक्त हुआ
?निजामुद्दीन के वध के बाद कैकुबाद ने जलालुद्दीन को समाना से बुलाकर बरन का सूबेदार और आरिज- ए-  मुमालिक (सेना मंत्री) नियुक्त किया और शाइस्ता खां की उपाधि प्रदान की
?वह भारत में खिलजी कबीले का प्रधान और दरबार में गैर- तुर्की मुसलमानों के दल का नेता था
?तुर्की सरदार  सुर्खा  और कच्छन ने गैर तुर्की सरदारों की शक्ति को नष्ट करने के लिए महत्वपूर्ण सरदारों के कत्ल की योजना बनाई इसमें जलालुद्दीन खिलजी का नाम सबसे ऊपर था
?जलालुद्दीन ने कच्छन की हत्या कर सावधानीपूर्वक अपनी रक्षा कि, इसके बाद वह कयूमर्स का संरक्षक बना
?कुछ समय पश्चात उसने कयूमर्स की हत्या कर सत्ता पर अधिकार कर लिया, इसी के साथ दिल्ली की सत्ता तुर्कों के हाथों से निकलकर खिलजियों के हाथों मैं चली गई

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  ???जलालुद्दीन का सिन्हासनारोहन???


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?जलालुद्दीन फिरोज का राज्यारोहण 13 जून 1290ईस्वी  को कैकुबाद द्वारा बनाए गए अपूर्ण किलोखरी (केलुगड़ी) के महल में हुआ
?उसने 1 वर्ष तक वहीं रहने का निश्चय किया क्योंकि दिल्ली की जनता इल्बारी तुर्को के शासन की 80 वर्षों से अभ्यस्त हो चुकी थी
?अतः वह एका एक जलालुद्दीन खिलजी के शासन को स्वीकार करने को तैयार नहीं थी
?एक वर्ष पश्चात दिल्ली के कोतवाल और अन्य व्यक्ति के आमंत्रण पर वह दिल्ली पहुंचा दिल्ली पहुंच कर वह बलबन के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करने लगा और उसके सिंहासन पर बैठने से इंकार कर दिया
?उसने अमीरों से भाव विह्वल शब्दों में कहा तुम जानते हो कि मेरे पूर्वजों में कोई भी शासक नहीं था, जिससे राजत्व का अभिमान और गौरव मुझे विरासत में मिलते,सुल्तान बलबन यहां बैठते थे और मैंने उन की सेवा की है उस शासक के भय और गौरव को मेरे हृदय ने अभी त्यागा नहीं है
?यह महल बलबन ने बनवाया था जब वह खान था और यह उसकी, उसके पुत्रों और संबंधों की संपत्ति है इससे दिल्ली की जनता और अमीर अत्यधिक प्रभावित हुए


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 ???जलालुद्दीन फिरोज शाह की नीति???
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?सत्ता ग्रहण करने के पश्चात जलालुद्दीन नें तुर्की सरदारों को संतुष्ट करने की नीति अपनाई
?उसने सभी तर्कों को सत्ताच्युत नहीं किया, शासन के महत्वपूर्ण पदों पर विश्वास पात्र व्यक्तियों की नियुक्ति की
?बलबन का भतीजा मलिक छज्जू को कड़ा- मानिकपुर का सूबेदार बनाया गया
?फखरुद्दीन दिल्ली का कोतवाल रहा ,ख्वाजा खतिर  को वजीर रहने दिया
?सुल्तान ने अपने सबसे बड़े पुत्र को खानखाना, दूसरे पुत्र को अर्कलीखा और तीसरे को कद्र खां की उपाधि दी
?सुल्तान के छोटे भाई को यगरश खां की उपाधि और  अरीज ए मुमालिक बनाया गया
?अपने भतीजे अलाउद्दीन और अलमास वेग  को उच्च पद प्रदान किया गया और अपने संबंधी अहमद चप को अमीर ए हाजिब का पद दिया
?जलालुद्दीन ने अपने कार्यों से शासन में एक नए प्रकार की संकल्पना प्रस्तुत की जो मूलतः सभी समुदाय के लोगों की सद्भावना और समर्थन पर आधारित थी
?शासन में उसने अनावश्यक हस्तक्षेप और कूटनीति त्याग दी
?उसके नीतियों के विषय में बरनी ने लिखा है कि-“वह एक चींटी को भी नुकसान न  पहुंचाने की नीति में विश्वास करता था
?सुल्तान बनने के अवसर पर जलालुद्दीन 70 वर्ष का था, दुर्बलता उसके चरित्र से प्रकट होने लगी थी
?यद्यपि वह एक योग्य सेनापति था लेकिन वह युद्ध प्रिय नहीं रह गया।रक्तपात  से घृणा करता था और शांति प्रिय जीवन व्यतीत करना चाहता था
?वह धर्म परायण मुसलमान था और हिंदुओं को बलात  धर्मांतरित करने या अपमानित करने की नीति का विरोध करता था
?अपने निकट सहयोगी अहमद चप के साथ बहस करते हुए उसने हिंदुओं द्वारा मूर्ति पूजा करने अपने धर्म का प्रचार करने और अनुष्ठानों का संपादन करने का भी पक्ष लिया
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???जलालुद्दीन के समय में हुए विद्रोह ???
?जलालुद्दीन खिलजी एक निष्ठावान, निष्कपट और उदार व्यक्ति था
? यही कारण था कि वह शाही सत्ता का दृढ़ता के साथ प्रयोग करने में असमर्थ रहा और उसके सत्ता में आते ही विद्रोह और षड़यंत्रों का क्रम आरंभ हो गया
?लेकिन विद्रोहियों के प्रति उसने दुर्बल नीति अपनाई और कहा मैं एक मुसलमान हूं और मुसलमानों का रक्त बहाने की मेरी आदत नहीं
?जलालुद्दीन खिलजी के समय 1290ईस्वी में कड़ा- मानिकपुर के सूबेदार मलिक छज्जू ने विद्रोह किया, उसने सुल्तान मुगीसुद्दीन की उपाधि धारण कर अपने नाम के सिक्के चलाए और खुत्बा पढवाया
?इस विद्रोह में अवध का सूबेदार हातिम ,मलिक छज्जू के साथ था
?एक विशाल सेना के साथ वह बदायूं के मार्ग से दिल्ली की ओर बढ़ना आरंभ किया बदायूं में मलिक बहादुर और आलम गाजी अपनी सेना के साथ मलिक छज्जू से आ मिले
?जलालुद्दीन इस विद्रोह को दबाने के लिए स्वयं सेना के साथ कुच करने लगे अपने जेष्ट पुत्र खानेखाना को राजधानी का दायित्व सौंपा
?दूसरा पुत्र अर्कली खां उसके साथ था ।अर्कली खां सेना के अग्रिम भाग के साथ गया और बदायूं के निकट मलिक छज्जू को परास्त कर बंदी बना लिया
?मलिक छज्जू और उसके अन्य साथियों को जंजीरों में बांधकर गंदे वस्त्रों में सुल्तान के समक्ष पेश किया गया
?मलिक छज्जू की दयनीय दशा देखकर सुल्तान भ्रमित हो उठा ।मलिक छज्जू को क्षमादान कर मुल्तान भेज दिया गया और उसके सभी साथियों को मुक्त कर दिया गया
?जलालुद्दीन ने पराजित अमीरों से सम्मानजनक व्यवहार करने का आदेश दिया
?अलाउद्दीन को मलिक छज्जू के स्थान पर कड़ा- मानिकपुर का सूबेदार बनाया गया


???जलालुद्दीन की उदारता???
?जलालुद्दीन उदार विनम्र और दयालु व्यक्ति था ,वह रक्त पात से घृणा करता था
?उसकी यह नीति तत्कालीन परिस्थितियों में उसके लिए घातक सिद्ध हुई और उसके पतन का कारण बनी
?जलालुद्दीन पहला शासक था जिसने अपने विरोधियों को संतुष्ट करने का प्रयास किया


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    ?ठगों का दमन?
?चोरों ओर ठगों के विषय में भी जलालुद्दीन ने अपनी उदार नीति का ही परिचय दिया
?चोरी लूट मार डकैती और हत्या करने वाले लगभग 1000 ठग  दिल्ली में पकड़े गए
?सुल्तान ने उन्हें दंडित नहीं किया बल्कि एक नाव में बिठाकर बंगाल की ओर रवाना कर दिया
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   ?षड्यंत्र कारी अमीर?
?जलालुद्दीन की उदार नीति ने अमीरों की महत्वकांक्षा को जागृत कर दिया
?इस उदार नीति को उसकी कमजोरी समझकर अमीरों ने एक सामाजिक उत्सव पर सुल्तान जलालुद्दीन का वध करके उसके स्थान पर ताजुद्दीन कूची को सिंहासनारूढ़ करने का षड्यंत्र रचा
?ताजुद्दीन कूची बलबन के समय में प्रभावशाली सरदारों के गुटों में से एक था
?सुल्तान को यह सूचना मिली तो उसने षड्यंत्रकारियों  को खुली चुनौती दी बाद में क्षमा मांगने और चाटुकारिता पूर्ण व्यवहार करने से वह प्रसन्न हो गया
?षड्यंत्र कारियों को केवल चेतावनी देकर 1 वर्ष के लिए दरबार से बाहर निकाल दिया
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?सीद्दी मौला की हत्या?
?सीद्दी मौला के विषय में जलालुद्दीन की उदार नीति में एक बड़ा परिवर्तन हुआ
?सुल्तान जिसने विद्रोहियों गद्दारों और ठगों को क्षमा किया था उस शांति के पुजारी की हत्या के लिए उत्तरदाई बना जिसका अपराध तक साबित ना हो सका था
?सीद्दी मौला इरान से आया एक संत था वह  अजोधन के शेख फरीदुदीन गंज शंकर का अनुयाई था
?बलवन के शासनकाल में ही वह दिल्ली में बस गया था
?वह एक विशाल खानकाह  चलाता था ,जिसमें प्रतिदिन हजारों भूखे लोग खाना खाते थे
?सीद्दी मौला के प्रभाव से आकर्षित होकर अनेक अमीर और अधिकारी खानकाह में जाने लगे जहां राजनीतिक चर्चाएं होने लगी थी
?सुल्तान का पुत्र शाहजादा खानखाना भी सीद्दी मौला का अनुयाई था
?सीद्दी मौला पर यह आरोप लगाया गया की दो हिंदू अधिकारियों हथियापायक  और निरंजन कोतवाल ने सुल्तान की हत्या करने और सीद्दी मौला को सुल्तान बनाने के लिए षड्यंत्र रचा
?यह सूचना सुल्तान को मिली तो हथियापायक  और निरंजन कोतवाल को मृत्युदंड दिया गया
?सीद्दी मौला को हाथियों से कुचल दिया गया
?सीद्दी मौला के मृत्यु के कुछ दिन बाद ही जलालुद्दीन के जेष्ट पुत्र खानखाना की मृत्यु हो गई
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    ?मंगोल आक्रमण?
?मंगोल से सुरक्षा के लिए जलालुद्दीन ने सुनाम ,दीपालपुर और मुल्तान सीमा पर अर्कली खां  की नियुक्ति की
?जलालुद्दीन के समय अब्दुल्ला के नेतृत्व में 1292 ईस्वी में मंगोल ने आक्रमण किया लेकिन मंगोल पराजित हुए
?अब्दुल्ला और सुल्तान जलालुद्दीन के मध्य मैत्रीपूर्ण संधि हुई, जलालुद्दीन ने उसे अपना पुत्र कहा
?मंगोलों ने पुन:युद्ध ना करके वापस जाने का निर्णय लिया किंतु कुछ समय पश्चात हलाकू के पोत्र उलूग  ने आक्रमण किया
?बाद में उलूग खॉ  ने अपने 4000 समर्थकों के साथ इस्लाम धर्म स्वीकार कर भारत में ही रहने का निश्चय किया
?सुल्तान ने उन्हें भारत में रुकने की अनुमति प्रदान की, मंगोलों को रहने का स्थान, भत्ते और राजकीय पद प्राप्त प्रदान किए गए
?सुल्तान ने अपनी एक पुत्री का विवाह उलूग खॉ  के साथ किया यही मंगोल बाद में नवीन मुसलमान कहलाये और वह स्थान आज भी मंगोलपुरी के नाम से प्रसिद्ध है

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 ???जलालुद्दीन के सैन्य अभियान???
?आंतरिक नीति के समान जलालुद्दीन की बाह्य नीति भी शांतिपूर्ण थी
?अपने शासनकाल में विजय की इच्छा से उसने केवल दो आक्रमण किए रणथंबोर अभियान और मंडौर अभियान

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       ?रणथंबोर?
?वर्तमान में रणथंबोर राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में स्थित प्राचीन एतिहासिक और सामरिक महत्व के दुर्गों में स्थान रखता है
?यह एक अत्यंत विशाल पहाड़ी दुर्ग है जो अरावली पहाड़ियों से घिरा है
?तत्कालीन समय में यहां का प्रसिद्ध शासक हम्मीर देव था उस के नेतृत्व में राजपूत चौहान अत्यधिक शक्तिशाली हो गए थे सभी दिशाओं में अपना विस्तार कर रहे थे और दिल्ली को भी चुनौती देने लगे थे
?इसीलिए सुल्तान को रणथंबोर पर आक्रमण करना आवश्यक हो गया था
?1290 ईस्वी में जलालुद्दीन रणथंबोर की ओर बड़ा, मार्ग में  उसने झायन के दुर्ग को जीता और मंदिरों को नष्ट किया
?इसके पश्चात वह रणथंबोर पहुंचा किंतु दुर्ग की सुदृढ  स्थिति देख कर उसे जीतने की इच्छा छोड़ दी


?रणथंबोर दुर्ग के बारे में जलालुद्दीन ने कहा कि– वह एक मुसलमान के एक बाल को भी ऐसे 10 किलो की तुलना में अधिक महत्व देता है


?इस प्रकार रणथंबोर को बिना जीते ही सुल्तान जून 1291 में दिल्ली वापस लौट आया
?1292 ईस्वी में उसने मंडोर पर आक्रमण किया और उसे दिल्ली के अधीन कर लिया
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???अलाउद्दीन द्वारा अभियान???
?अलाउद्दीन खिलजी (अली गुरशास्प) जलालुद्दीन का भतीजा और दामाद था
?जलालुद्दीन ने उसे कड़ा- मानिकपुर का सूबेदार नियुक्त किया किंतु धीरे-धीरे वह सल्तनत की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनने लगा
?उसके व्यक्तिगत महत्वकांक्षा को मलिक छज्जू ने और उत्साहित किया जिसने यह सलाह दी कि सफल विद्रोह के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है
?इसी धन के संग्रह के लिए अलाउद्दीन ने भिलसा और देवगिरी के दो सेना अभियान किए
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      ?भिलसा अभियान?
?जलालुद्दीन के मंडोर पर अधिकार के बाद  1292 ईस्वी में अलाउद्दीन सुल्तान ने अनुमति लेकर मालवा स्थित भिलसा पर आक्रमण किया और विजय प्राप्त की
?यहां से अपार धन लूट कर वह दिल्ली लाया जिसका एक भाग सुल्तान के पास भेजा
?सुल्तान उसकी सफलता से प्रसन्न होकर उसे कड़ा मानिकपुर के साथ-साथ अवध का भी सूबेदार नियुक्त कर दिया
?अभियान की सफलता से अलाउद्दीन की विजय और धन दोनों की लालसा जागृत हो गई
?वास्तव में वह दिल्ली का सिंहासन प्राप्त करना चाहता था उसे अपनी शक्ति और समर्थकों की संख्या में वृद्धि करने के लिए धन की अत्यधिक आवश्यकता थी
?भिलसा अभियान के दौरान ही अलाउद्दीन ने दक्षिण के देवगिरी राज्य की शक्ति और वैभव के बारे में सुना था इस कारण वह इस पर आक्रमण करने के लिए लालायित था
?उसने देवगिरी को लूटने का निश्चय किया परंतु अपनी योजना को गुप्त रखा
?सुल्तान जलालुद्दीन से उसने  चंदेरी पर आक्रमण करने की आज्ञा मांगी किंतु 1296 ईस्वी में लगभग 8,000 चुने घुड़सवारों के साथ चंदेरी का बहाना बनाकर देवगिरी की ओर चल दिया
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?देवगिरी अभियान(1296)?
?मुसलमानों का दक्षिण भारत पर प्रथम आक्रमण जलालुद्दीन खिलजी के समय में देवगिरि के शासक रामचंद्र देव पर अलाउद्दीन खिलजी के नेतृत्व में 1296 ईस्वी में देवगिरी पर आक्रमण किया गया था
?दक्षिण भारत को जीतने वाला पहला शासक अलाउद्दीन खिलजी था
?यद्यपि दक्षिण भारत को उसके विजित  करने का लक्ष्य साम्राज्य का विस्तार करना नहीं था बल्कि धन की लालसा थी,क्योंकि देवगिरी का राज्य दक्षिण भारत में सर्वाधिक शक्तिशाली और संपन्न राज्य था
?यहां का शासक रामचंद्र देव एक योग्य और साहसी राजा था ,उसने मालवा और मैसूर के राज्य को जीतकर ना केवल अपनी राज्य सीमा का विस्तार किया बल्कि व्यापार और कृषि की उन्नति कर देवगिरी राज्य को संपन्न और वैभव पूर्ण बना दिया था
?अलाउद्दीन मलिक अलाउल मुल्क को कड़ा में अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर चंदेरी और भिलसा होते हुए देवगिरी की उत्तरी सीमा पर स्थित एलीचपुर पहुंचा
?मार्ग में उसने यह अफवाह फैला दी कि वह अपने चाचा से अप्रसन्न  है और तेलंगाना राज्य में नौकरी करने की आशा से जा रहा है ,इस कारण किसी ने उसका विरोध नहीं किया
?देवगिरी से कुछ मील की दूरी पर लासूड़ा के दर्रे में वहां के सरदार कन्हा ने अलाउद्दीन का मार्ग रोका लेकिन वह पराजित हुआ
?देवगिरी पहुंचकर अलाउद्दीन ने अचानक उस पर आक्रमण कर दिया इस सहसा हुए आक्रमण से राजा रामचंद्र देव चकित रह गए उसने किले की फाटक बंद कर अपनी सुरक्षा का प्रबंध किया
?लेकिन रसद आदि  का उचित प्रबंध ना होने के कारण आत्मसमर्पण करने के लिए विवश हो गया
?अलाउद्दीन ने यह अफवाह फैला दी कि उसकी सेना दिल्ली से आने वाली 20000 की मुख्य सेना का अग्रगामी भाग है ,यह सुनकर रामचंद्र देव संधि करने के लिए तैयार हो गया
?जिसके अनुसार अलाउद्दीन धन लेकर वापस लौटने पर सहमत हो गया
?इसी बीच रामचंद्र देव का पुत्र शंकर देव,जो कीसी अन्य अभियान पर गया थ,  राजधानी की विपत्ति सुनकर शंकरदेव  देवगिरी पहुंचा और अपने पिता की संधि के विरुद्ध उसने अलाउद्दीन पर आक्रमण किया
?1000 घुड़सवारों को नसरत जलेसरी  के संरक्षण में किले की देखभाल के लिए छोड़कर अलाउद्दीन ने शंकर देव का मुकाबला किया
?अलाउद्दीन की सेना पराजित ही होने वाली थी कि एकाएक नसरत जलेसरी  सेना के साथ पहुंच गया शंकर देव (सिंहनदेव )उसे दिल्ली से आने वाली सेना समझकर भयभीत हो गया और संधि करने के लिए बाध्य हुआ
?पहली संधि की अपेक्षा अलाउद्दीन ने दूसरी संधि के लिए कठोर शर्ते रखी
?उसने एलिचपुर प्रांत को हस्तगत कर लिया ,जिस की वार्षिक आय के अनुसार रामचंद्र देव ने अलाउद्दीन के पास भेजना स्वीकार कर लिया


?कुछ इतिहासकारों के अनुसार– रामचंद्र देव ने अपनी पुत्री का विवाह अलाउद्दीन से कर दिया
?युद्ध के रूप में संपत्ति लेकर अलाउद्दीन वापस लौट आया

?इस संबंध में डॉक्टर एस. रॉय ने लिखा है कि– वास्तव में दिल्ली को देवगिरी में जीता गया क्योंकि दक्षिण के स्वर्ण ने अलाउद्दीन के सिंहासन पर बैठने का मार्ग प्रशस्त कर दिया
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 ???जलालुद्दीन का वध???
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?अलाउद्दीन खिलजी देवगिरी को लूटकर कड़ा- मानिकपुर की ओर वापस लौट रहा था उस समय जलालुद्दीन ग्वालियर में था
?ग्वालियर में ही उसने अपने भतीजे (अलाउद्दीन) के दक्कन के गुप्त अभियान और धन प्राप्ति का समाचार मिला था
?अहमद चप ने सुल्तान को अलाउद्दीन के महत्वकांक्षा के विरुद्ध सचेत किया, उसे चंदेरी में रोकने की सलाह दी लेकिन सुल्तान ने अहमद चप के इस सलाह को ठुकरा दिया और दिल्ली चला आया
?अलाउद्दीन बिना किसी बाधा के कड़ा-मानिकपुर पहुंच गया
?कुछ दिनों पश्चात अलाउद्दीन ने अपने भाई अलमास बैग (उलूग खां)  को उस समय सुल्तान के दरबार में था ,को पत्र लिखकर दक्षिण अभियान के लिए सुल्तान से क्षमा मांगी और पूरा धन  जलालुद्दीन को देने का वचन दिया
?लेकिन उसने यह शर्त रखी कि सुल्तान कड़ा- मानिकपुर आए उसने यह भी चेताया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह आत्महत्या कर लेगा या बंगाल भाग जाएगा
?जलालुद्दीन बहुत भावुक हो गया और कड़ा मानिकपुर जाने का निर्णय किया
?स्वयं जलालुद्दीन नदी मार्ग से मानिकपुर गय,  उसकी सेना अहमद चप  के नेतृत्व में स्थल मार्ग से आई
?अलाउद्दीन ने कड़ा छोड़कर गंगा नदी को पार कर मानिकपुर पहुंचा जिससे स्थल मार्ग से आने वाली सुल्तान की सेना को नदी पार करने में कठिनाई हुई
?अलमास बेग ने जलालुद्दीन से निवेदन किया कि वह अकेले ही अलाउद्दीन से मिलने जाए क्योंकि वह सेना देखकर भयभीत हो जाएगा
?उसकी बातों में आकर जलालुद्दीन ने अपने कुछ सरदारों के साथ अलाउद्दीन से मिलने के लिए चल पड़ा
?तट पर  पहुंचने से पहले ही अलमास बेग की प्रार्थना पर उसने स्वयं और अपने सरदारों के शस्त्र उतार दिये।
?अलाउद्दीन नदी के तट पर जलालुद्दीन से मिलने आया और सुल्तान के पैरों पर गिर पड़ा जलालुद्दीन उसे प्रेमपूर्वक उठाकर हृदय से लगा लिया और उसका हाथ पकड़ कर नाव की तरफ बढ़ने लगा
?उसी समय अलाउद्दीन के इशारे पर मुहम्मद सलीम ने सुल्तान पर आक्रमण किया, सुल्तान घायल होकर नाव की तरफ यह कहता हुआ भागा की “”धोखेबाज अलाउद्दीन यह तूने क्या किया””
?तत्पश्चात अलाउद्दीन के दूसरे सहयोगी इख्तियारुद्दीन हुद ने सुल्तान के सिर को धड़ से अलग कर दिया
?20जुलाई 1219ईस्वी  को सुल्तान जलालुद्दीन के वध के बाद अलाउद्दीन को सुल्तान घोषित किया गया
?सुल्तान के कटे हुए सिर को कड़ा मानिकपुर और अवध की सीमाओं में घुमाया गया
?इस घटना में एक मात्र  मलिक फखरुद्दीन को छोड़कर सुल्तान के सभी साथियों का कत्ल कर दिया गया
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?जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का मूल्यांकन जलालुद्दीन उदार विनम्र और दयालु व्यक्ति था।लेकिन शाही पद के लिए अयोग्य था ।
?उसकी उदारता ही उसके पतन का कारण बनी, वह रक्त पात से घृणा करता था लेकिन उसकी यह नीति तत्कालीन परिस्थितियों में उसके लिए घातक सिद्ध हुई
?वह इस बात को भूल गया था कि वह तलवार के बल पर शासक बना था और इस पद की रक्षा तलवार के बल पर ही की जा सकती थी
?लगभग सभी इतिहासकारों का मत है कि जलालुद्दीन के उदारता की नीति शासक के रूप में उसकी अयोग्यता को सिद्ध करता है
?इस संबंध में डॉक्टर एस. लाल ने लिखा है कि–राजमुकुट के लिए शायद ही कोई व्यक्ति इतना अनुपयुक्त रहा होगा जितना कि खिलजी वंश के संस्थापक
?डॉक्टर ए.बी.पांडे ने जलालुद्दीन के विषय में अपना मत प्रस्तुत किया है कि– जलालुद्दीन पहला शासक था जिसने उदारता को शासन की आधारशिला बनाने का प्रयत्न किया
?जलालुद्दीन एक योग्य सेनापति था ,उसमें वीरता का अभाव नहीं था, सुल्तान बनने से पहले उसने मंगोलों के विरुद्ध युद्ध करने में सफलता प्राप्त की थी
?लेकिन सुल्तान बनने के बाद उसने युद्ध और आक्रमण की नीति त्याग दी थ
?जलालुद्दीन प्रथम सुल्तान था जिसने अपने विरोधियों को संतुष्ट करने का प्रयत्न किया
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   ?साहित्यिक विकास?
?जलालुद्दीन के समय शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में भी उन्नति हुई थी
?कुतुबुद्दीन अल्वी ,शदुद्दीन, ख्वाजा जमालुद्दीन, मुइद जर्मी ,अमीर खुसरो आदि विद्वानों को जलालुद्दीन फिरोज खिलजी का संरक्षण प्राप्त था
?उस के शासनकाल की विस्तृत जानकारी का एकमात्र प्रमाणिक ग्रंथ बरनी के द्वारा “”तारीख ए फिरोजशाही”” है
?ऐसा माना जाता है कि जलालुद्दीन से बरनी ने के संबंध अच्छे नहीं थे इस कारण उसने अनेक विवरणों को आलोचनात्मक दृष्टि से देखा है

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