तनोट माता मन्दिर जैसलमेर(Tanot Mata Temple Jaisalmer)

तनोट माता मन्दिर जैसलमेर(Tanot Mata Temple Jaisalmer)

 मन्दिर निर्माण 
भाटी राजपुत नरेश तणूराव ने  वि.स.828 मे तनोट का मन्दिर  

बनवाकर मुर्ति स्थापित कि थी  इस तरह से भाटी तथा जैसलमेर

के पडोसी इलाकों के लोग आज भी पुजते आ रहे है। तनोट माता

का मन्दिर जैसलमेर जिले से लगभग .130.कि.मी कि दुरी पर

स्थित है यहजगह भारत पाकिस्तान सीमा के करिब है मातेश्वरी 

तनोट माँ का  पाकिस्तान बल्लुचिस्तान मे पड़ने वालै हिँगलाज

माँ के  मन्दिर का ही एक रूप है।

माता के जन्म से जूडी कथा-
बहूत पहले मामडिया नाम के एक चारण थे आपकी कोई संतान नही  संतान प्राप्त करने के लिये आपने हिँगलाज शक्ति पीठ की सात बार पैदल यात्रा कि एक बार माता ने स्वप्न मे आकर आपकी इच्छा पुच्छी तो आपने कहा कि माता आप मेरे घर जन्म ले माता की कूपा से आपको सात पुत्रियाँ ओर एक पुत्र प्राप्त हूआ  इन्हीं सात पुत्रियाँ मे से एक आवड माता ने वि.स.808 मे आपके रहाँ जन्म लिया ओर चमत्कार दिखाने शुरू कर दिये।सातो पुत्रियाँ भी चमत्कारो से यूक्त थी माता आवड ने हुणौँ के आक्रामणो से माडं.प्रदेश की रक्षा कि
आप चारणो की आराध्य देवी है

 विशेषता 
माना जाता है कि भारत ओर पाकिस्तान के मध्य सितम्बर 1965 को लडाई हूई थी उसमे पाकिस्तान के सेनिको ने मन्दिर व मन्दिर के आस-पास  कई बम  गिराये थे। लेकिन माँ कि कूपा से मन्दिर परिसर मे एक एक भी खरोच तक नही आ सकी  तभी से सीमा सूरक्षा  बल के जवान इस मन्दिर के प्रति काफी क्षद्धा रखते है आज भी इस मन्दिर परिसर के  म्यूजियम मे वो बम रखे हूए है  इस मन्दिर को  फिल्म बाँर्डर  मे दिखाया गया  हमारे जवान के लिए माँ तनोट मे बडी आस्था है ।

प्रसिद्धि का कारण-
 तनोट पर कब्जा करना चाहती थी पाक सेना 
17, 19, नवम्बर के बीच जब तनोट को  दूश्मनो ने तीनो ओर से घेर लिया था ओर मेजर जयसिंह के पास सीमित संख्या में सेनिक असलाह था  शत्रु सेना ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए तनोट से जैसलमेर की ओर आने वाले मार्ग मे स्थित घँटियाली के आस-पास तक एँटी टैँक माईन्स लगा दिये थे ताकि भारतीय सेना की मदद के लिये जैसलमेर के सड़क मार्ग से कोई वाहन या टैँक इस ओर न आ सके ।

 सैनिकों  की  करती है मदद माँ 
जब सितम्बर 1965 मे शत्रु ने तीनों दिशाओं से अलग -अलग आक्मण किया ओर दूशमन के तोपखाने  आग उगलते रहे तब माँ तनोट की रक्षा के लिए मेजर जय सिंह को कमाँड ग्रेनडियर की एक कम्पनी सीमा सूरक्षा बल की व दो कम्पनियाँ दूश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना कर रही थी   आखिरकार मे पाकिस्तान की सेना को पिछे हटना पड़ा इस लडाई मे पाक द्वारा गिराये  गये करिब 3000 बम भी इस  मन्दिर पर खरोच तक नही ला सके। यहा तक कि मन्दिर मे गिरे 850 बम तो फटे भी नही। इस घटना की याद मे आज भी मन्दिर परिसर  म्यूजियम मे  पाकिस्तान द्वारा दागे गये जीवित बम रखे हूए है।

 BSF के जवान करते है मन्दिर की देख रेख 
लगभग 1200 सौ साल पूराने तनोट माता के मन्दिर के महत्व के कारण  सीमा सूरक्षा बल ने यहाँ चोकि बनाई ।इतना ही नही सीमा सेरक्षा बल के जवानों द्वारा अब मन्दिर की पूरी देख- रेख कि जाती है मन्दिर की सफाई से लेकर पूजा- अर्चना ओर क्षद्धालूओ के लिए सुविधाएँ जूटाने का काम अब सीमा सूरक्षा बखूबी निभा रही है

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