पश्चिमी भारत में अरबों की असफलताएं

मीर कासिम की मृत्यु के बाद भारत में अरबों का विस्तार लगभग शिथिल सा पड़ गया था सुलेमान के पश्चात उमर द्वितीय खलीफा बना (717 से 720 ईसवी तक) उस के समय में जयसिंह ने मुस्लिम धर्म स्वीकार कर लिया अगला खलीफा हिशाम (724 से 743 ईसवी ) बना इसके समय मे जयसिह ने इस्लाम धर्म त्याग दिया | हिशाम के समय में जुनैद सिंध का गवर्नर नियुक्त किया गया वह पुन: एक बार भारत में अरब सत्ता को विकसित करने का प्रयास करने लगा उसने एक युद्ध में जय सिह को कैद कर मार डाला जय सिंह के अंत के साथ ही सिंध से हिंदू के राजवंश का अंत हो गया

राजस्थान पर अरबों का अधिकार

सिंध पर सत्ता स्थापित होने के बाद जुनैद ने सिंध से बाहर भी अरब सत्ता को विकसित करने का प्रयास किया जैसलमेर और जोधपुर के क्षेत्र  (मरुमाल ), मालवा में उज्जैन, गुजरात के ओखामंडल (अल्कीराज) और दक्षिण भड़ौच (बरबास) पर धावा बोला इस आक्रमण के फलस्वरुप राजस्थान के कुछ क्षेत्रों पर अरबों का अधिकार हो गया किंतु वह स्थाई नहीं रहा

आगे बढ़ने का प्रयास करने लगा लेकिन समकालीन हिंदू शासकों ने उसके अभियान को विफल कर दिया इन शासकों में चालुक्य शासक- पुलकेशिन (अवनिजनाश्रय), प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम, गुर्जर राजा जय भट्ट, बल्लभी का शासक शिलादित्य पंचम, कश्मीर-कांगड़ा का शासक मुक्तापीड ललितादित्य और यशोवर्मन प्रमुख है। पुलकेशीराज अवनिजनाश्रय के नौसारी अभिलेख में उसे अरबो को हराने के कारण दक्षिणपंथ के ठोस स्तंभ की उपाधि प्रदान की गई है भोज के ग्वालियर प्रशस्ति में नागभट्ट प्रथम को म्लेच्छों अथवा अरबों को परास्त करने का श्रेय दिया गया है प्रतिहार राजा अरबों के सबसे बड़े शत्रु थे इसी कारण अरबों को मान्यखेत के राष्ट्रकूटों से संधि करनी पडी़

सिंध से खलीफा का नियंत्रण समाप्त

जुनैद के बाद तमीम सिंध का गवर्नर नियुक्त हुआ वह शिथिल और कमजोर था उस के समय में जुनैद के जीते हुए प्रदेश स्वतंत्र हो गए केवल सिंध अरबों के अधीन रह गया वहां भी स्थिति सुरक्षित नहीं थी तब उन्होंने एक झील के किनारे अल हिंद की सीमा पर अल महफूज (सुरक्षित ) नामक एक नगर बसाया 750 ईस्वी मे दश्मिक में एक क्रांति के फलस्वरुप उमय्या खलीफाओं का स्थान अब्बासी खलीफाओं ने ग्रहण कर लिय।

अब्बासी खलीफा अल मंसूर (745 से 775 ) के समय अरबों ने पुन: सिंध में अपनी प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सके इसके बाद खलीफाओं का नियंत्रण दिन-प्रतिदिन कम होने लगा सिंध के अधिकार सरदार स्वतंत्र हो गए नवीं शताब्दी के अंत में सिंध से खलीफा का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया सिंध में मंसूरा और मुलतान केवल दो छोटी रियासत ही अरबों के नियंत्रण में शेष रह गई थी

Leave a Reply