फारसी साहित्य

फारसी साहित्य

 राजस्थान की मध्ययुगीन घटनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में फारसी साहित्य भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है
 फारसी  ऐतिहासिक ग्रंथ (historical books) दिल्ली के सुल्तान व मुगल सम्राटो ने उनके आश्रय में रहने वाले लेखकों से लिखवाए थे
 हालांकि मुस्लिम लेखकों ( Muslim writers)m ने भी अपने आश्रय दाता शासकों का वर्णन अतिशयोक्तिपूर्ण ढंग से किया लेकिन कालक्रम को समझाने में वह अवश्य सहायक सिद्ध हुए
 फारसी ग्रंथों में कुछ प्रमुख ग्रंथ निंलिखित है

अकबरनामा-( Akbarnama)
 इस ग्रंथ का  रचयिता अकबर का दरबारी अबुल फजल ( Abul fazal) था
अकबरनामा के माध्यम से राजस्थान के कई राजपूत नरेशों की जानकारी मिलती है
अकबर के शासनकाल में राजस्थान पर कई मुगल आक्रमण भी हुए
उन आक्रमणों के परिणाम स्वरुप राजाओं ने अकबर की अधीनता भी स्वीकार की थी उन सब का उल्लेख अकबरनामा में है
प्रसंगवंश अतुल फजल ने राजस्थान की उपज, सैनिक स्थिति, और समाज का भी अच्छा वर्णन किया है
इसके लेखक ने मेवाड़ की स्वतंत्रता का मुख्य कारण भोगोलिक व प्राकृतिक स्थिति माना है

खजाइन-उल-फूतह-
इसका लेखक विख्यात कवि अमीर खुसरो (Amir Khusro) था
राजस्थान के संबंध में उसके द्वारा चित्तौड़गढ़ रणथंबोर के दुर्गो और उन पर किए गए अलाउद्दीन के आक्रमणों का वर्णन अति महत्वपूर्ण है
चित्तौड़ अभियान में वह स्वयं सुल्तान के साथ आया था
इसके अतिरिक्त इसमें अलाउद्दीन खिलजी ( Allauddin Khilji) की विजय, आर्थिक सुधार व बाजार नियंत्रण की जानकारी मिलती है
इसमें चित्तौड़गढ़, रणथंबोर की शासन व्यवस्था और सती प्रथा का वर्णन मिलता है 

तारीख ए मुबारक शाही-
इसका लेखक अहमद अब्दुल शाह सरहिंदी था
उसने तुगलक कालीन इतिहास पर प्रकाश डालते हुए मुबारक शाह खिलजी द्वारा मेवात क्षेत्र के नासिर खाँ के विरुद्ध आक्रमण का वर्णन किया

तबकाते नासिरी-
दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश के शासनकाल में मिनहाज-उल- सिराज ने इस ग्रन्थ की रचना की थी
यह प्रथम फारसी लेखक (( Persian writers) था जिसने उत्तरी पूर्वी राजस्थान को मेवात की संज्ञा दी थी
इस ग्रंथ में इल्तुतमिश से लेकर सुल्तान नासिरुद्दीन के राज्य काल के 15 वे वर्ष तक की जानकारी मिलती है
जालौर व नागौर पर मुस्लिम आक्रमण की जानकारी भी इस ग्रंथ में है

हुमायूंनामा-
गुलबदन बेगम ( Gulbadan Begum)द्वारा रचित इस ग्रंथ में हुमायूं के मारवाड़ और मेवाड़ के साथ संबंधों और
रेगिस्तान  क्षेत्र की जलवायु के बारे में वर्णन किया गया है

तजाकीरात-उल-वाकेयात-
इस ग्रंथ के रचियता जौहर- आफताबची हैं
यह ग्रंथ हुमायूं की जीवनी पर आधारित है
इसमें हुमायूं द्वारा मालदेव से मिलने के प्रयासों और मारवाड़ बीकानेर और जैसलमेर के मरू क्षेत्र की कठिनाइयों का वर्णन किया गया है

तबकाते अबकरी-
निजामुद्दीन अहमद द्वारा रचित इस ग्रंथ में राजपूत राजकुमारियों के मुगलों से विवाह जोहर आदि की जानकारी मिलती है 

इसी प्रकार जहांगीरनामा, शाहजहांनामा,बाबरनामा, आलमगिरीनामा,आदि फारसी तवारीखों में भी राजस्थानी नरेशों की मूगल सेवाओं का वर्णन किया गया है
जिन राजपूत नरेश ने मुगल सम्राटों ( Mughal emperors) का विरोध किया उनका वर्णन भी इन फारसी ग्रंथों में उपलब्ध है
इन तवारीखों  में राजस्थान के नगर व ग्रामों का भी वर्णन फारसी इतिहासकारों ने किया है