बलबन की मृत्यु , उपलब्धि

??बलबन के अंतिम दिन और मृत्यु??
? बलबन अत्यधिक वृद्ध  हो चुका था, शहजादा मुहम्मद की मृत्यु बलवंत पर एक भयंकर कुठारा घात थी
? क्योंकि वही उसकी सांसारिक आशाओं का एकमात्र सहारा था उसका दूसरा पुत्र बुगरा खां विलासी और आराम पसंद था इसीलिए बलबन को अपने वंश का विनाश दिखाई देने लगा था
? उसने बुगरा खां को लखनौती से बुलाया और दिल्ली रहने का आदेश दिया लेकिन बुगरा खां  बहुत दिनों तक दिल्ली में नहीं रहा
? वह बहाना बनाकर बिना बलबन की अनुमति के पुनः लखनौती की ओर चल दिया बलबन का यह पुत्र बुगरा खां  बंगाल की सुबेदारी  से ही संतुष्ट रहा
? जीवन के अंतिम समय में बलबन ने दिल्ली के कोतवाल गुलिकुल उमरा ,ख्वाजा हसन बसरी और अन्य अधिकारियों को बुलाकर “खाने शहीद”, “शहीद ए आजम”अथार्थ “शहजादा मुहम्मद” के बड़े पुत्र केखुसरो को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया
? कुछ समय पश्चात 1287 ईस्वी में बलबन की मृत्यु हो गई

 ?बरनी ने लिखा है कि– बलबन की मृत्यु से दुखी हुए मलिकों ने अपने वस्त्र फाड़ डाले और सुल्तान के शव को नंगे पैरों दारुल-अमन के कब्रिस्तान को ले जाते हुए उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल फेकी

? उन्होंने 40 दिन तक उसकी मृत्यु का शोक मनाया और जमीन पर सोए

??बलबन की उपलब्धि और मूल्यांकन??
?बलबन एक योग्य शासक था गुलाम सुल्तानों में उसका स्थान महत्वपूर्ण है
?वह अपनी योग्यता से एक दास से सुल्तान के पद पर पहुंचा था उस के राज्यकाल को मजबूत शासन का काल माना जाता है
?अपनी बढ़ती हुई महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तुर्कान ए चहलगानी का दमन किया वह दिल्ली के सिंहासन को अपने उत्तराधिकारियों को सुरक्षित कर एक नवीन वंश की स्थापना करना चाहता था
?लेकिन उसके अयोग्य उत्तराधिकारियों ने उसकी सत्ता को संभालने में असफल रहे फल स्वरुप उसकी मृत्यु के मात्र 3 वर्ष बाद ही उसके वंश का अंत हो गया
?सर्वप्रथम बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा और शक्ति को स्थापित करने के लिए राजत्व का सिद्धांत प्रतिपादित किया
?सुल्तान की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए बलबन ने राज दरबार पुन:सुसज्जित किया उसने सिजदा और पैबोस नामक इरानी प्रथा को प्रारंभ किया

?प्रोफेसर हबीबुल्ला ने लिखा है कि–बलबन का एकमात्र और महानतम कार्य राज्य में सल्तनत को पुनः श्रेष्ठतम स्थान प्रदान करना था 

?सुल्तान की शक्ति में वृद्धि के लिए बलबन ने सैन्य संगठन को शक्तिशाली बनाया उसने सैन्य विभाग (दीवान-ए-अर्ज) की स्थापना की
?इक्तादारों पर नियंत्रण रखने के लिए उसने प्रत्येक विभाग में बरीद(गुप्तचर) नियुक्त किए
?बलबन ने अपने राज्य में आंतरिक शांति और व्यवस्था स्थापित की उसने क्रूरतापूर्वक विद्रोहियों का दमन किया
?उसके काल में मंगोलों के आक्रमण का भय बना रहा ,उसने विदेशी आक्रमण की समस्या पर भी नियंत्रण प्राप्त करने में सफलता पाई
?बलबन दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने मंगोल आक्रमण से देश की रक्षा हेतु एक सुनिश्चित योजना बनाई
?मगोलों से निपटने के लिए उसकी नीति का स्वरूप सुरक्षात्मक था मंगोलों के आक्रमण को रोकने के लिए बलबन ने सीमांत क्षेत्रों में दुर्गों का निर्माण किया और अपने योग्यतम सैनिकों को वहां नियुक्त किया
?इस प्रकार बलबन मंगोल आक्रमण के भय को हमेशा के लिए समाप्त नहीं कर सका लेकिन उनकी सफलता के मार्ग को अवश्य अवरुद्ध कर दिया
?अपने उत्तरी पश्चिमी सीमा के संबंध में उसने जो नीति अपनाई वह आगे चलकर खिलजी शासकों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हुई

?प्रोफेसर हबीबुल्ला के अनुसार—बलबन ने भी बड़ी सीमा तक खिलजी राज्य व्यवस्था की पृष्ठभूमि का निर्माण किया 

?बलबन एक महान विद्या प्रेमी था उसने मध्य एशिया से आने वाले बहुत से विद्वानों का स्वागत किया
?अमीर खुसरो और अमीर हसन जी देहलवी को बलबन के पुत्र शहजादे मुहम्मद का संरक्षण प्राप्त था
?शहजादे मुहम्मद के मृत्यु के बाद बलबन का राज्याश्रय प्राप्त किया
?इसके अतिरिक्त ज्योतिषी और चिकित्सक मौलाना हमीदुद्दीन मुतरिज, मौलाना बदरुद्दीन और मौलाना हिसामुद्दीन भी उस के दरबार में थे

 ?इतिहासकार हबीबुल्लाह– ने बलबन के शासनकाल को सुदृढ़ीकरण का काल कहा 

?जलालुद्दीन फिरोज खिलजी जो कि आरिजे  मुमालिक था,ने  कैकुबाद और कयूमर्स की हत्या कर गुलाम वंश को समाप्त कर दिया और खिलजी क्रांति का सूत्रपात किया

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