बाल विकास के महत्वपूर्ण कथन

बाल विकास के महत्वपूर्ण कथन

शैशवावस्था – (जन्म से 5 वर्ष की उम्र)
स्टैंग :- जीवन के प्रथम 2 वर्षों में बालक अपने भावी जीवन का शिलान्यास करता है!
ब्रिजेस:- 2 वर्ष की उम्र तक बालक में लगभग सभी संवेगों का विकास हो जाता है !
जे.न्यूमेन:- 5 वर्ष तक की अवस्था शरीर और मस्तिष्क के लिए बड़ी ग्रहणशील रहती है !
वैलेंटाईन :- शैशवावस्था सीखने का आदर्श  काल है !
क्रो एंड क्रो :-  बींसवीं शताब्दी बालकों की शताब्दी है !
रॉस :- शिशु कल्पना का नायक  है अत: उसका भली प्रकार निर्देशक अपेक्षित हैं !
एडलर :- शिशु के जन्म के कुछ समय बाद ही यह निश्चित किया जा सकता है कि भविष्य में उसका स्थान क्या है !
गैसल :- बालक प्रथम छ: वर्ष में बाद के 12 वर्ष से भी दुगुना  सीख जाता है !
सिगमंड फ्रायड :- शिशु में काम प्रवर्ती बहुत प्रबल होती हैं पर वयस्को की भांति उसकी अभिव्यक्ति नहीं होती है !

वाटसन :- शैशवावस्था में सीखने की सीमा व तीव्रता  विकास की अवस्था से बहुत अधिक होती हैं !
रूसो :- बालक के हाथ, पैर, व नैत्र उसके प्रारंभिक शिक्षक हैं! इन्ही के द्वारा वह पाँच वर्ष मे ही पहचान कर सकता है , सोच सकता है और याद कर सकता है !

बाल्यावस्था :-(6-12 वर्ष)
कोल एवं ब्रुस- बाल्यावस्था को जीवन का अनोखा काल कहा है

रॉस – बाल्यावस्था को मिथ्या या छदम परिपक्वता का काल कहा है !

ब्लेयर, जोन्स एवं सिम्पसन- शैक्षिक दृष्टिकोण से बाल्यावस्था से अधिक जीवन मे कोई महत्वपूर्ण अवस्था नही है 

स्ट्रैंग- बालक अपने को अति विशाल संसार में पाता है व उसके बारे में जल्दी से जल्दी जानकारी प्राप्त करना चाहता है

सिगमंड फ्रायड – बाल्यावस्था को काम की प्रसुप्तावस्था का कहा है

बर्ट- बाल्यावस्था भ्रामक एवं साहसिक कार्य की प्रवृति मे वृद्धि होती है

किलपैट्रिक महोदय- बाल्यावस्था को प्रतिद्वंद्वात्मक समाजीकरण का काल कहा है