बीकानेर प्रजामंडल आंदोलन

?बीकानेर के महाराजा गंगासिंह प्रतिक्रियावादी व निरंकुश शासक थे गंगासिह प्रथम भरतपुर के बाद शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले एकमात्र भारतीय प्रतिनिधिथे
?1931 में स्थापित नरेंद्र मंडलके संस्थापकों में से एक थे
?बीकानेर क्षेत्र के प्रारंभिक नेता कन्हैया लाल ढूंढो स्वामी गोपाल दास है
?इन्होने 1907 में चूरु में सर्व हितकारिणी सभाकी स्थापना की गई
?यह एक सामाजिक शैक्षणिक संस्था और किसी हद तक राजनीतिक संस्थाथी
?सर्व हितकारिणी सभा ने चुरू में लड़कियों की शिक्षा हेतु पुत्री पाठशाला खोली गयी
?अनुसूचित जातियो की शिक्षा के लिए कबीर पाठशालास्थापित की गई
?महाराजा इस रचनात्मक कार्य के प्रति आशंकितहो उठे और इस सभा को षड्यंत्र बताकर प्रतिबंधित कर दिया गया
?बिकानेर में राजनीतिक चेतना महाराजा गंगा सिंह के शासन काल में प्रारंभ हो गई थी
?गंगा सिंह जी वैसे प्रगतिशील विचारों के और ख्याति प्राप्त महाराज थे
?इन्होंने गोलमेज सभा में भारत के नरेशोकी तरफ से भाग लिया था
? लेकिन यह अपनी रियासत में बिकानेर में राष्ट्रीय विचारों को पनपने नहीं देखना चाहते थे
?1913मेबीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने बिकानेर राज्य के लिए प्रतिनिधि सभा का गठन किया
?महाराजा गंगासिंह ने बिकानेर राज्य में रिप्रेजेण्टेटिव असेंबली की स्थापना की घोषणा कर अगले वर्ष के इस सभा का प्रथम अधिवेशन का उद्घाटन किया
?प्रतिनिधि सभा राजस्थान में ही नहीं बल्कि सारे उत्तरी भारत की राज्यों में उस समय अपने ढंग की एकमात्र उत्तरदायी राजनीतिक संस्थाथी
?इस   संस्था में कुल 35 सदस्य थे
?1917में प्रतिनिधि सभा को विधानसभा का नामदिया गया
?1937 में इस सभा में सदस्य की संख्या बढ़कर 45 कर दी गई
? इस प्रकार बिकानेर राजस्थान का पहला राज्य था जिसमें बिकानेर में प्रजामंडल आंदोलन को आगे बढ़ाकर संरक्षण प्रदान किया
?D.R.मानकेकर ने लिखा है कि उन्होंने भारत के राजाओं की ओर से भारत के लिए संघात्मक संविधान के सर तेज बहादुर सप्रू के प्रस्ताव को स्वीकारा और उसका समर्थन किया
?महाराजा द्वारा किए गए संवैधानिक सुधारों के पक्ष में कहा जाता है कि 1910 में इन्होंने स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना की थी
?डॉक्टर कर्ण सिहलिखते हैं कि बिकानेर गर्व के साथ कह सकता है कि यह राजपूताना में प्रथम राज्य था जिस ने कार्यपालिका और न्यायपालिका को अलग करने का कदम उठाया था

?1928 मे महाराजा ने ग्राम पंचायतों को दीवानी फौजदारीऔर प्रबंध संबंधी निश्चित अधिकार प्रदान किया
?महाराजा ने 1937में अपने राज्य में म्युनिसिपल बोर्ड और डिस्ट्रिक्ट बोर्ड कायम किए
?महाराजा गंगा सिंह जी प्रथम भारतीय नरेश थे जिन्होंने अलग से प्रिवीपर्स और सिविल लिस्ट पद्धति चालूकी थी
?प्रिवीपर्स की रकम राज्य की सामान्य आमदनी का 5% निश्चितकी गई थी
?रीजेंसी कौंसिल के समय में उर्दू को बीकानेर रियासत की सरकारी भाषा बना दिया गया था
?जिसे 1912में बदल कर पुनः हिंदी को सरकारी कामकाज की राजभाषाबनाया गया
?यह आदेश 1914 में पूर्ण रुप से लागू हुआ
?महाराजा गंगा सिंह ने 1921 में जमीदार बोर्डकी स्थापना की
?1892 से 93 में राज्य का प्रथम नियमित बंदोबस्त करवाया

?महाराजा गंगा सिंह द्वारा जहां अपनी जनता को सुखी बनाने के लिए कई प्रयासकिए गए वहीं का दूसरा पहलू बहुत ही शर्मनाक था
?महाराजा गंगा सिंह जो आधुनिक विचारधारा के राजा थे
?उन्होंने अपने राज्य में राजनीतिक आंदोलनों को पूरी तरह से कुचलाथा
?सुखबीर सिह गहलोत ने लिखा है कि जब यहा भी  अंग्रेजी प्रांतों से असहयोग आंदोलन की हवा आने लगी और जनता में रियासती शासन के प्रति असंतोष फैलने लगा तो महाराजा ने 4 जुलाई 1932 से बिकानेर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम आरंभ कर दिया
?यह अधिनियम मार्शल लॉ की ही भाति कठोर था
?शारंगधर दासने लिखा है कि रियासत में नागरिक स्वतंत्रताओं का दमन इस  सीमा तक प्रबल  था कि लोग कानाफूसी में बातकरते थे की पूरी रियासत एक जेलखानाथी
?1920 में बीकानेर में सदविद्या प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई
?इस संस्था का उद्देश्य रिश्वतखोरी और अन्याय के विरुद्ध अभियान चलाना था
?महकमा खास बीकानेर की रिपोर्ट में लिखा गया कि इस संस्था में राज्य में धर्म विजय और सत्य विजय नामक दो नाटक मंचित किए थे
? इन नाटको से समस्त सरकारी क्षेत्र में हलचलमच गई थी
?26 जनवरी 1930को चूरू में धर्मस्तूप पर महंत गणपति दास, चंदन मल बहड़ ,वेद शांत शर्मा द्वारा तिरंगा फहरानेपर महाराजा ने महंत से मंदिर ही जप्त कर लिया था
?पंडित मदन मोहन मालवीय और घनश्याम दास बिरला के हस्तक्षेप पर महाराजा ने मंदिर पुन: खोल दिया और नगर पालिका के सदस्यको सौंप दिया
?महाराजा की स्वेच्छाचारितापर प्रकाश डालते हुए विजयसिंह मोहता ने बीकानेर राज्य में नादिरशाही नामक पुस्तक लिखी
?सत्यनारायण सर्राफ खूबराम सर्राफ और उनके साथियों ने बीकानेर राज्य की निरंकुशता और अत्याचारों का पर्दाफाश प्रभावशाली लेख द्वारा किय
? इंहोने दिल्ली के प्रिंसली इंडिया और रियासती तथा अजमेर के त्याग भूमि नामक समाचार पत्र  में बीकानेर राज्य की निरंकुशता और अत्याचारों के समाचार प्रकाशित किए
?इन खबरों के प्रकाशन से राज्य सरकार बौखला उठी थी
?बीकानेर महाराज गंगासिह ने अप्रैल 1932 में लंदन में हुए दितीय गोलमेज सम्मेलन में देशी राज्यों के प्रतिनिधिके रूप में भाग लिया था
?बीकानेर राज्य के राजनीतिक कार्यकर्ताओंसे प्राप्त सूचना के आधार पर बीकानेर एक दिग्दर्शन नामक ज्ञापन तैयार करके सम्मेलन के सदस्यों में बांटागया था
?इन पेंपलेट में बिकानेर की वास्तविक दमनकारी नीतियोंका खुलासा किया गया था
?गोलमेज सम्मेलन के अध्यक्ष लार्ड सेंकी ने उस ज्ञापन को महाराजा गंगा सिंहके सामने ठीक उस समय रखा जब वे बड़े जोश के साथ अपने विचार व्यक्तकर रहे थे
?लार्ड सेंकी ने ज्ञापनपर यह लिख दिया था कि “”बीकानेर महाराज को उसका उत्तर देना चाहिए””
?ज्ञापन को देखकर महाराज अत्यधिक खिन्न हुए और गोलमेज सम्मेलन के समाप्त होने से पहले ही भारत लौट आए
?गोलमेज सम्मेलन से लौटने के बाद महाराजा ने सार्वजनिक सुरक्षा कानून लागू किया
?स्वामी गोपाल दास, चंदन मल बहड,सत्यनारायण सर्राफ खूबचंद सर्राफआदि को बिकानेर षड्यंत्र के नाम पर गिरफ्तार कर लिया गया

♻?बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना?♻  

?4 अक्टूबर 1936 को बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना मद्याराम वेद बाबू मुक्ता प्रसाद रघुवीर गोयल के प्रयासोसे की गई
?इस प्रजामंडल का प्रथम अध्यक्ष मद्याराम वैद्य को बनाया गया
?इस संस्था में किसानो पर होने वाले अत्याचार ,लागबाग ,हरिजन समस्याएं और पुलिस द्वारा जनता पर किए जाने वाले अत्याचार के विरुद्ध अपने कार्यक्रम चलाए
?इस समय बिकानेर में महाराजा गंगा सिंह का शासन था
?मार्च 1937में महाराज सरकार ने प्रजामंडल के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया
?कुछ समय बाद रिहा  करके तत्काल 6 वर्ष के लिए राज्य से निर्वासित कर दिया गया
?राज्य से निर्वासित किये गये नेताओं में वकील मुक्ता प्रसाद मद्याराम वैद, लक्ष्मी दासशामिल थे
?प्रजामंडल मंडल के नेताओं को बिकानेर से बाहर निकालकर प्रजामंडल को निष्क्रियबना दिया
?बिकानेर महाराज गंगासिह द्वारा बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना की कुछ समय बाद ही उसे निष्क्रियकर देने की घटना बिकानेर प्रजामंडल की शैशव काल में ही दमन की घटना बनी
?इस घटना को बीकानेर प्रजामंडल की भ्रूण हत्या कहा जाता है
?22 मार्च 1937 को अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषदके तत्वाधान में दिल्ली स्थित मारवाड़ी लाइब्रेरी में एक सभा का आयोजन किया गया
?इस सभा में बीकानेर राज्य की निष्कासन पद्धति की निंदा की गई
?बीकानेर से निष्काषित लोगों ने कलकत्ता में निवास कर रहे प्रवासी राजस्थानियोंके सहयोग से मघाराम ने कलकत्ता में बिकानेर राज्य प्रजामंडल की स्थापना की और बीकानेर की “”थोथी-पोथी”” नाम की पुस्तिका प्रकाशित करवाई गई
?इस प्रकार बीकानेर राज्य प्रजामंडल की स्थापना राजस्थान से  बाहर ही हो पायी
?इस प्रकार बीकानेर में संगठन स्थापित करने का प्रथम प्रयास मद्याराम वेद्य ने किया

♻?बीकानेर राज्य परिषद की स्थापना?♻  
?इस दिशा में दूसरा प्रयास एडवोकेट रघुवरदयाल गोयलने किया था
?उन्होंने 1942 में बीकानेर राज्य प्रजा परिषद की स्थापना की थी
?इस परिषद का मुख्य उद्देश्य महाराजा के नेतृत्व में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था
?महाराज ने 1 सप्ताह पश्चात ही श्री रघुवरदयाल गोयल को राज्य से निर्वासितकर दिया गया
?अत: महाराजा गंगा सिंह की निरंकुश कार्यकाल में कार्यकर्ता असंगठित होने के कारण अधिक कार्य नहींकर पाए
?महाराजा गंगा सिंह ने अपने प्रभाव से बिकानेर में पोलिटिकल एजेंट की नियुक्ति भी नहींहोने दी थी
?उन दिनों बीकानेर राज्य को राष्ट्रीय आंदोलन से सुरक्षित माना जाता था

♻?दुधवा खारा आंदोलन?♻ 
? राज्य के दूधवाखारा गांव में ठाकुर सूरजमल सिंह द्वारा जबरन वसूली के विरोध में कृषक नेता हनुमान सिंह महाराजा से मिलने गया
?हनुमान जी को अपमानित”किया गया और *गिरफ्तार करलिया गया
?उनकी गिरफ्तारी के विरोध में और सूरज मल के अत्याचारों से तंगआकर
?बिकानेर प्रजा परिषद के मार्ग निर्देशनमें 300 किसानों और कुछ स्त्रियो ने सत्याग्रह प्रारंभ कर दिया गया
?बीकानेर में वैद्य मद्याराम के नेतृत्व में यह आंदोलनकिया गया किया
?26 अक्टूबर 1944 को बीकानेर दमन विरोधी दिवस मनाया गया
?जो राज्य में प्रथम सार्वजनिक प्रदर्शनथा
?इसी बीच भारत में राजनीतिक गतिविधियां तेजहो गई और महाराज ने उत्तरदायीशासन की घोषणा की
?फरवरी 1946 में महाराजा गंगा सिंह के देहांत के बाद उनके पुत्र शार्दुलसिंह गद्दीपर बैठे
?शार्दुलसिंह के कार्यकाल में पुन:पोलिटिकल एजेंट की नियुक्ति की गई
?महाराज ने अनेक राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया
?परिषद के कार्यकर्ताओं ने महाराजा से प्रजा परिषद  को मान्यता देने की मांग की
?कोई परिणाम नहीं निकलने के कारण रघुवरदयाल गोयल को पुनः गिरफ्तार कर लूणकरणसर में नजर बंद कर दिया
?द्वारका प्रसाद नामकछठी कक्षा के बालक को संस्था से बाहर निकाला गया
?क्योंकि इस बालक ने अपनी उपस्थिति गणना के समय जय हिंद बोल दिया था
?जय नारायण व्यासने बीकानेर राज्य के विरोध में जोधपुर में एक कार्यालय खोल कर वहां से गतिविधिया संचालित की थी

♻?बीकानेर में चना निकासी विवाद?♻  
?1947 के अंतमें महाराजा ने बीकानेर राज्य के गृह मंत्री ठाकुर प्रतापसिह को आपूर्ति मंत्रालयभी सोंप दिया
?ठाकुर प्रतापसिंह ने लालची और भ्रष्ट व्यपारियो से साठगांठ करके बीकानेर से बाहर जाने वाले चने और सरसों के निकासी परमिट जारी करने में भ्रष्टाचार किया
?जो एक बहुत बड़ा विवाद का विषय बन गया था

 ♻?बिकानेर में हरिजनों के मंदिर प्रवेश का मामला?♻ 

?बीकानेर में हरिजनों को मंदिर में प्रवेश देने को लेकर कांग्रेस द्वारा आंदोलन चलाया गया
?बीकानेर लोक सेवा संघ ने इस कार्य का विरोध किया
?जिसमें कई जगह पर झगड़े मारपीट और दंगों की स्थितिउत्पन्न हो गई थी

♻?रायसिंहनगर हत्याकांड?♻ 
?राज्य में चल रहे किसान आंदोलन से सरकार घबरा गयी और आंदोलनकारियो की मांगे माननेके लिए विवश हो गई
?21 जून 1946 को महाराजा ने घोषणा की राज्य में उत्तरदायी शासन की स्थापना की जाएगी
?30 जून 1946 में बीकानेर परिषद का अधिवेशन रायसिहनगर में आयोजित किया गया था
?इस सम्मेलन के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण सर्राफ थे
?सम्मेलन के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण सर्राफ 1 जुलाई को सम्मेलन में शरीक होने जा रहे थे
?उनके साथ हाथ में तिरंगा लिए कुछ कार्यकर्ताभी थे
?पुलिस ने हाथ से झंडे छीन कर उन पर गोलीबारीकर दी
?इस गोलीबारी में कार्यकर्ताओं का नेतृत्व करने वाला एक हरिजन नौजवान बीरबल सिंह शहीद हुआ
?इन्हीं बीरबल  सिंह की स्मृति में इंदिरा गांधी नहर की एक प्रमुख वितरिका का नाम शहीद बीरबल शाखा रखा है
?एक तरफ महाराजा उत्तरदायी शासन की घोषणा कर रहे थे
?दूसरी तरफ नित्य प्रति दिन लाठी गोली और धारा-144 की खबर आ रही थी
?अतः बीकानेर में नागरिक अधिकारोंकी सही स्थिति की जांच के लिए अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद की राजपूताना प्रांतीय परिषद के अध्यक्ष श्री गोकुल भाई भट्ट और मंत्री श्री हीरालाल शास्त्री बीकानेर में जांच के लिए भेजे गए
? देश की राजनीति परिस्थितियोंको देखते हुए महाराजा ने अपना रवैया बदला 1946 को श्री रघुवरदयाल गोयल और चौधरी कुंभाराम को जेल से रिहा कर दिया गया
?बीकानेर नगर में प्रजा परिषद का कार्यालय पुनः प्रारंभ किया गया
?1946 में राज्य हेतु संविधान बनाने के लिए महाराजा ने दो समिति बनाई संवैधानिक समिति एवं मतादिकार समिति की स्थापना की गई
?31 अगस्त 1946 को बीकानेर नरेश उत्तरदायी शासन की घोषणा की
?राज्य में 1947 में एक नया संविधान लागूकर दिया
?इसके तहतराज्य में अंतरिम सरकार बनाने और सविधान के अंतर्गत धारा सभा के चुनाव कराने के लिए राज्य व परिषद के बीच एक समझौता हुआ
?लेकिन इस समझौते को लेकर परिषद दो गुटोंमें विभाजित हो गई
?इस रिपोर्ट को लागू करने का आश्वासन तो दिया गया पर कोई ठोस कार्यवाही नहींहो पाई और उत्तरदायी शासन की मांग अधूरी ही रही
?बाद में इन गुटों में समझोताहो गया और रामचंद्र चौधरी की अध्यक्षता में एक तदर्थ समितिगठित की गई
?भारत की संविधान निर्मात्री सभा में रियासतों से अपने प्रतिनिधियों को भेजने के लिए नरेंद्र मंडल में एक स्थाई समिति बनाई गई
?भोपाल के नवाब के नेतृत्व वाला एक गुट चाहता था कि रियासतें संविधानसभा में अपने प्रतिनिधि इतनी जल्दी नहीं भेजें
?इसके विपरीत दूसरे गुट सहित बीकानेर महाराजा शार्दुलसिह अविलम्ब भारत की संविधान परिषद में शामिल होना चाहते थे
?उन्होंने स्थाई समिति से *बर्हिगमन”कर दिया
?भारत की संविधान निर्मात्री सभा हेतु बीकानेर से सरदार के.एम. पणिक्करको भेजा गया
?रियासतों की भारत में शामिल होने के प्रश्न पर भी बिकानेर महाराज ने पहल करते हुए 7 अगस्त को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर कर दिए
?महाराणा के इस साहसिक कदम की सरदार पटेल ने काफी तारीफकी
?विजय सिह मेहता द्वारा बीकानेर राज्य में नादिरशाही नामक पुस्तक की रचना की गई थी
?16 मार्च 1948 में जसवंत सिंह दाऊद सर के नेतृत्व में मंत्री मंडल बनाया गया
?इस मंत्रिमंडल को प्रजा परिषद ने अस्वीकृत कर दिया और उसके मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया
?30 मार्च 1949 को वृहत्तर राज्य के निर्माण के साथ रघुवरदयाल हीरालाल शास्त्री के मंत्रिमंडल में शामिल हो गया

♻♻बीकानेर का झंडा विवाद?♻  
?बीकानेर राज्य में झंडा विवाद लंबे समयसे चला आ रहा था
?रायसिहनगर गोली कांड के पश्चात राष्ट्रीय तिरंगे झंडे को का महत्व अत्यधिक बढ़ गया था
?जनसामान्य में विशेषत: ग्रामीण क्षेत्र में राष्ट्रीय तिरंगा आम आदमी के अस्तित्व और मूलभूत अधिकारों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता था
?जबकि इसके विपरीत बीकानेर महाराजा की दृष्टि में तिरंगा झंडा लोगों की भावनाओं को भड़काने का माध्यम था
?अलवर से संचालित बीकानेर राज्य प्रजा परिषद के अध्यक्ष दाऊलाल आचार्य ने जयपुर के हीरालाल शास्त्री को लिखाकि राज्य में इस में झगड़े का मूल बिंदु तिरंगा झंडा है
?बीकानेर सरकार इस पर दमन किये बिना नहींरहती है
?किसानों मे तिरंगे के नाम पर बलिदान हो जाने की भावनाने  जोर पकड़ लिया था
? बीकानेर राज्य प्रजा परिषद द्वारा समय समय पर तिरंगा फहराए जाने पर आपत्ति जताते हुए महाराजा सार्दुल सिंह ने 22 जुलाई 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक पत्रलिखा था
?इस पत्र में लिखा कि तिरंगा झंडा कांग्रेस का झंडा है बीकानेर राज्य एक स्वतंत्र इकाईहै और इस राज्य का अपना एक राजकीय झंडाहै जो यहां के निवासियों की एकता का प्रतीक भी है
?ऐसी स्थिति में बीकानेर राज्य में तिरंगा झंडा थोपना न्याय संगत नहीं ह
ै? यदि ऐसे प्रयास किए जाते हैं तो राजकीय झंडे के समर्थकों और तिरंगे झंडे के समर्थकों के बीच टकराव हो सकता है
?जिससे राज्य में राजनीति उलझन पैदा हो सकती है
?इस कारण राज्य में तिरंगा झंडा फहराने के संबंध में कोई निधि निर्धारित करना आवश्यक है 12 अगस्त 1946 को नेहरू ने महाराजा को पत्र लिखकर उनके विचारों से अपनी सहमति व्यक्त की
?उन्होंने लिखा कि यह मामला दोनों पक्षों को आपसी सद्भाव से सुलझा लेना चाहिए
?हमें झंडे के प्रश्न को लेकर किसी भी विवाद से बचना चाहिए ?जहां इस झंडे का स्वागत ना हो वहां इस झंडे को नहीं थोपा जाना चाहिए
?राष्ट्रीय झंडे को किसी भी स्थिति में राज्य के झंडे से झगड़े में नहीं आना चाहिए
?यह स्थिती अन्य देशी रियासत के संबंध में थी

 ♻♻अमर शहीद जीनगर बीरबल सिंह ढालिया?♻  
श्री बीरबल सिंह ढालिया गंगानगर जिले के रायसिहनगर (बीकानेर) के निवासी थे
?इनके विचार राष्ट्रीयता से परिपूर्ण थे और बीकानेर राज्य परिषद के सदस्यथे
?उन्होंने सामंती अत्याचारोंका विरोध किया
?नागरिक अधिकारों की प्राप्ति के लिए हमेशा संघर्ष किया
?राज्य की ओर से प्रजा परिषद के अधिवेशन करने पर प्रतिबंध नहीं था लेकिन तिरंगा फहराने पर प्रतिबंधथा
?30 जून 1946 को राज्यदेश की अवहेलना कर तिरंगा लेकर जुलूस निकालागया था
?बीरबल सिंह की बाईं भुजा पर इतनी जोर की लाठीया पडीकी भुजा से खून टपकने लगा
?किन्तु आजादी के दीवाने ऐसे नहीं रुकनेवाले थे
?भारत माता की जय, इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए जब रेस्ट हाउस की ओर बढ़े तो सेना के जवानों ने अंधाधुंध गोलियांचलानी शुरु कर दी
? इस समय बीरबल सिंह की जांघ में एक साथ तीन गोलियां लगीफिर भी वह रुके नहीं चलतेगए
?उन्होंने अपने अंतिम शब्दों में यही कहा था कि इस झंडे की लाज अब मैं आपको सोपे जा रहा हूं
?इसी के साथ 30 जून 1946को बीरबल सिंह ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद ली
?1 जुलाई 1946 को शहीद के पार्थिव शरीर का जुलूसनिकाला गया
?जिसमें आजाद हिंद फौज के कर्नल अमरसिह तिरंगा झंडालिए हुए थे
?हजारों लोगों ने शहीद को पुष्पांजलि दी एक और चिता पर अमर शहीद की देह को अग्नि में समर्पितकिया जा रहा था
? दूसरी ओर उनकी पत्नी श्रीमती मूलीदेवी और 4 वर्षीय पुत्री चंपा कुमारी साहसपूर्वक उस यशा को पंचभूत में विलीनहोते देख रही थी
?30जून व 1 जुलाई को शहीद मेला लगता है
?राज्य सरकार ने राजस्थान नहर की एक वितरिका का नाम भी शहीद बीरबल सिंह रखा है
?बिकानेर प्रजामंडल ने 17 जुलाई 1946 को बीरबल दिवस मनाया था