बूंदी प्रजामंडल आंदोलन

?बूंदी में राजनीतिक चेतना जागृत करने का कार्य किसान आंदोलन में किया था बूंदी मे सार्वजनिक सूचना के लक्षण 1922 में परिवर्तित हुए थे
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इसका श्रेय बिजोलिया किसान आंदोलन के नेता पथिक जी को ही जाता है पथिक जी के बरड आंदोलन को समर्थन देने से  राजनीतिक चेतना का संचार हुआ बूंदी में भी कई लागे व बेगारें ली जाती थी और भूमि कर की दर भी ऊंची थी
?पथिक जी ने रामनारायण चौधरी के साथ मिलकर कर वृद्धि व बेगार प्रथा के विरुद्ध आंदोलन छेड़ा था जब इस विरोध ने आंदोलन का रुप धारण कर लिया तो पुलिस आंदोलनकारियों पर अमानुषिक अत्याचार करने लगे
?आंदोलन को व्यापक होता देख बूंदी नरेश महाराज ईश्वरीसिंह ने बेगार प्रथा को प्रतिबन्धित कर दिया
?इसके पश्चात राजमहल मे एक अजीब सी घटना हुई महाराज की एक प्रिय पासवान की 1927 में मृत्यु हो गई उसकी अन्तिम क्रिया कराने से राजपुरोहित ने इनकार कर दिया इसका उसने कारण बताया कि वह पासवान राज घराने की सदस्य नहीं थी इस पर खुद महाराज ने पुलिस द्वारा उसका कत्लकरवा दिया राजपुरोहित के कत्ल से बूंदी में भारी असंतोष फैलगया नगर में 9 दिन हड़ताल रही इससे पुलिस का क्रोध और बड़ा और उसने जनता पर गोली चलादी इस से जनता राज-विरोधीहो गई

??बूंदी प्रजामंडल की स्थापना?? 
?इस वातावरण में कांतिलाल की अध्यक्षता में 1931 में बूंदी प्रजामंडल की स्थापना की गई
?ऋषि दत्त मेहता ,नित्यानंद नगर, गोपाल कोटिया, गोपाल लाल जोशी मोतीलाल अग्रवाल ,पूनमचंद आदि बूंदी प्रजामंडल के प्रमुख सक्रिय कार्यकर्ता थे
?प्रजामंडल ने सरकार के समक्ष उत्तरदायी शासन और नागरिक अधिकारों की मांग प्रस्तुत की महाराज ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए जनसभाओं पर प्रतिबंध लगा दिए
?इसके फलस्वरुप जनता का आक्रोश और उग्रहो गया और प्रजा मंडल के माध्यम से प्रशासनिक सुधारोंकी मांग करने लगा
? सरकार की दमन नीति भी उग्र होने लगी तब सरकार ने 1936 मे समाचार पत्र पर प्रतिबंध लगा दिए
?1937में प्रजामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष श्री ऋषि दत्त मेहता को 3 वर्षों के लिए राज्य से निर्वासित कर दिया गया और प्रजामंडल को अवैध घोषित कर दिया गया
?ऋषि दत्त मेहता की गिरफ्तारी के बाद ब्रज सुंदर शर्मा ने प्रजामंडल का नेतृत्व संभाला

??बूंदी राज्य लोक परिषद् का गठन?? 
?1942 में श्री ऋषिदत्त मेहताको गिरफ्तार कर अजमेर भेजदिया गया था
?जेल से रिहा होने पर ऋषिदत्त मेहता ने 1944 में बूंदी राज्य लोक परिषद्का गठन किया
?हरि मोहन माथुर को बूंदी राज्य लोक परिषद् का अध्यक्ष और ब्रज सुंदर शर्मा को इसका मंत्री बनाया गया
?इस परिषद का उद्देश्य भी उत्तरदायी शासन की मांग और नागरिक अधिकारों की रक्षा करना था
? बूंदी राज्य लोक परिषद को कुछ समय बाद मान्यता प्राप्तहो गई
?महाराव ने बदलती परिस्थितियों को भॉपते हुए संविधान निर्मात्री सभा का गठन किया
?जिसमें प्रजा मंडल के सदस्य मनोनीत किए गए
?नव निर्मित संविधान पारित होने से पूर्व ही बूंदी राजस्थान में विलय हो गया

??बूंदी प्रजामंडल के अन्य तथ्य?? 
?बूंदी में जन जाग्रति के कार्य में नागर परिवारकी महती भूमिका रही
?महाराजा बहादुर सिंह ने 1946 में राज्य में विधान परिषद और लोकप्रिय मंत्रिमंडल बनाने की घोषणा की थी
?बूंदी में राजस्थान सेवा संघ की शाखा हाडोती सेवा संघ की स्थापना पंडित नयनूराम शर्माकी अध्यक्षता में कि थी
?इस संघ ने लोगों में राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न की जिसमें तनसुख लाल मित्तलका पूरा सहयोग मिला
?बूंदी महाराज ईश्वर सिंह ने हाड़ोती सेवक संघ की गतिविधियों के साथ-साथ, “”राजस्थान, नवीन भारत, प्रताप और परमवीर”” समाचार पत्रों की बूंदी में आने पर रोक लगा दी थी
?1945 में लोक परिषद की जुलूस पर पुलिस द्वारा गोली चलाने से वकील कल्याणमल शर्मा की मृत्युहो गई थी
?बूंदी में नित्यानंद और उनके पुत्र ऋषिदत्त मेहता को 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में गिरफ्तार किया गया था
?बूंदी प्रजामंडल के प्रथम अध्यक्ष कांतिलाल चोथाणी थे

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