ब्रिटिश अधिनियमो के तहत हुए समझोते

ब्रिटिश अधिनियमो के तहत हुए समझोते

 साइमन कमीशन ( Simon Commission)

 भारत सरकार अधिनियम 1919 में सुधार हेतु सुझाव देने के उद्देश्य से वायसराय लार्ड इरविन के समय में भारत सचिव बिर्किन हैड द्वारा जॉन साइमन की अध्यक्षता में 8 नवंबर 1927 को 7 सदस्य साइमन कमीशन की नियुक्ति की गई
 साइमन कमीशन में सभी सदस्य अंग्रेज होने के कारण भारतीयों ने इसका बहिष्कार किया
 मई 1930 में साइमन कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में दोहरे शासन की समाप्ति मताधिकार का विस्तार करने आदि सिफारिशें की
 इस आयोग में औपनिवेशिक दर्जे को उत्तरदायी सरकार की स्थापना को पूर्णतया नकार दिया था

 नेहरू रिपोर्ट ( Nehru Report)
 भारत सचिव लार्ड बिर्किन हैड द्वारा ब्रिटिश संसद में भारतीयों को एक सर्वसम्मत संविधान बनाने में अक्षम बताया गया
 इसे चुनौती  मानते हुए देश के सभी दलों ने सर्वसम्मति से मोतीलाल नेहरु की अध्यक्षता में मई 1928 में मुंबई में नेहरू समिति का गठन किया
 नेहरू समिति ने अगस्त 1928 में एक सवेधानिक रिपोर्ट लखनऊ में आयोजित कर सर्वदलिय कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत की जिसे नेहरू रिपोर्ट कहा गया
 इस रिपोर्ट में भारत के सविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की गई जिसमें औपनिवेशिक शासन व्यवस्था का प्रावधान था
 लेकिन दिसंबर 1928 में कलकत्ता में हुए सर्वदलीय सम्मेलन ने नेहरू रिपोर्ट को मंजूर नहीं किया

 मैकडोनाल्ड का सामुदायिक पंचाट 
 द्वितीय गोलमेज सम्मेलन ( Second Round Table Conference) की असफलता के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड का सांप्रदायिक समस्या के हल के अभाव में 16 अगस्त 1932 को अपने निर्णय की घोषणा के द्वारा 11 समुदाय के लिए प्रथक निर्वाचन की व्यवस्था की गई
 मैकडोनाल्ड के इस निर्णय से भारतीयों को सामाजिक व राजनीतिक आधार पर बॉटने का प्रयास किया गया

 पूना समझौता (Poona pact)
दलितों के लिए प्रथक निर्वाचन के निर्णय को समाप्त करने के संबंध में *मदन मोहन मालवीय व अन्य नेताओं के प्रयासों से गांधी जी व बी आर अंबेडकर के मध्य 25 सितंबर 1932 को पूना समझोता*हुआ

 भारतीय संविधान के स्त्रोत 
 संविधान में अनुच्छेद 368 मैं संशोधन की जो प्रक्रिया दी गई है उसके अनुसार 90 से अधिक संशोधन हो चुके हैं वे सविधान के अंग है भविष्य में भी ऐसे संशोधन की संभावना हो सकती है

 संविधान में यह कहा गया है कि कुछ बातों का निर्धारण संसद अपने अधिनियम द्वारा करेगी अत: संसद में समय समय पर अनेक अधिनियम पारित किए हैं जो भारतीय सविधान के अंगभूत बन गए हैं जैसे➖ निवारक निरोध अधिनियम 1950 ,जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950-51,भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 आदि

 सर्वोच्च न्यायलय व अनेक उच्च न्यायालय के निर्णय भी सविधान के स्त्रोत के रूप में कार्य कर रहे हैं
 जैसे➖ गोपालन बनाम मद्रास राज्य केस में सर्वोच्च न्यायलय ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सीमा को स्पष्ट किया है इसी प्रकार➖केशवानंद भारती केस के निर्णय से संसद की सर्वोच्चता के विषय में  गोलकनाथ निर्णय से पहले की स्थिति लगभग पुन:स्थापित हो गई और संसद मूल अधिकारों में संशोधन कर सकती है

 भारतीय संविधान का एक स्त्रोत वो अनेक पुस्तके व ग्रंथ है जिन्हे संविधान की व्याख्या के उपयोग में देखा जाता है
 जैसे➖ ग्लेडहिल की पुस्तक -Fundamental Rights in India and Indian Republic अलेण्जैन्ड्रो विज की पुस्तक Constitutional development of India आदि

 संविधानसभा में हुए वाद विवाद भी कहीं अवसरों पर सविधान के उपबंधों को स्पष्ट करने के लिए प्रयुक्त होते हैं
 उदाहरण के लिए राष्ट्रपति की स्थिति के बारे में

 भारत के वर्तमान सविधान के अनेक उपबंध 1935 के भारतीय शासन अधिनियम से लिए गए हैं सविधान के आपातकालीन उपबंध केंद्र व राज्य में शक्तियों के वितरण की सूचिया आदि थोड़े बहुत परिवर्तन के साथ 1935 के अधिनियम से लिए गए हैं

 भारतीय संविधान का एक स्त्रोत अनेक स्थापित परंपराएं को विभिन्न आयोगों व सम्मेलनों के निर्णय है
 उदाहरण के लिए➖ राज्यपाल की नियुक्ति केंद्र द्वारा संबंधित राज्य के परामर्श से होनी चाहिए,
 इसी प्रकार केंद्र व राज्य में संसदीय सरकार की कार्य प्रणाली व संचालक परंपराओं पर आधारित

 जनवरी 1981 में सरकारिया आयोग में भारतीय संविधान में केंद्र व राज्य के संबंधों राज्यपाल के पद से संबंधित उपबंधों संस्तुति की है जिन पर केंद्र को अमल करना चाहिए

 सविधान सभा की शब्दावलियां 

  •  सदन का स्थगन ➖ सदन के स्थगन द्वारा के कामकाज को विनिर्दिष्ट समय के लिए स्थगित कर दिया जाता है सत्रावसान द्वारा सत्र की समाप्ति होती है
  •  विघटन ➖विघटन केवल लोकसभा का ही हो सकता है इससे लोकसभा का अंत हो जाता है
  •  स्थगन प्रस्ताव ➖ स्थगन प्रस्ताव पेश करने का मुख्य उद्देश्य किसी अविलंबनीय लोक महत्त्व के मामले की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करना है इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए न्यूनतम 50 सदस्य की स्वीकृति आवश्यक है
  •  कटौती प्रस्ताव ➖ सत्ता पक्ष द्वारा सदन की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत अनुदान की मांगों में से किसी भी प्रकार की कटौती के लिए विपक्ष द्वारा रखे गए प्रस्तावों को कटौती प्रस्ताव कहा जाता है
  •  विश्वास प्रस्ताव ➖ बहुमत का समर्थन प्राप्त होने में संदेह होने की स्थिति में सरकार द्वारा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है विश्वास प्रस्ताव के पारित होने की दशा में सरकार को त्यागपत्र देना आवश्यक हो जाता है
  •  अल्पकालीन चर्चाएं ➖भारत में इस प्रथा की शुरूआत 1953 के बाद ही हुई इसमें लोक महत्त्व के प्रश्न पर सदन का ध्यान आकर्षित किया जाता है
  •  मार्शल लाँ ➖ समस्त नागरिक कानूनों को ताक पर रखते हुए जब किसी क्षेत्र का प्रशासन सैनिक कानूनों के अधीन हो जाता है तो इस स्थिति को मार्शल लॉ कहते हैं
  •   स्नेप पॉल ➖ राष्ट्रपति द्वारा संसद को अथवा राज्यपाल द्वारा विधानमंडल को यकायक भंग कर दिया जाता है और थोड़े समय के नोटिस पर इस चुनाव करा दिए जाते हैं तो ऐसे चुनाव को स्नेप पॉल कहते हैं
  •  गुलेटिन ➖ यह वह संसदीय प्रक्रिया हे जिसमे सभी मांगों को नियत तिथि तक ना निपटाई गई हो बिना चर्चा के पारित कर दिया जाता है
  •  बैक वेंचर ➖ सदन में पीछे बैठने वाले सदस्य
  •  पंगु सत्र ➖एक विधानमंडल के कार्यकाल की समाप्ति तथा दूसरे विधानमंडल के कार्यकाल की शुरुआत के बीच के काल में संपन्न होने वाले सत्र को पंगु सत्र का जाता है यह व्यवस्था केवल अमेरिका में ही है
  •  रिफ्रेंडम ➖जब कोई विषय वाद विवाद का विषय बन जाता है और उस पर आम जनता की राय जानने के लिए जनमत ज्ञात किया जाता है तो उस जनमत को रिफ्रेंडम*कहते है
  •  लेम डक सेशन ➖ यह व्यवस्थापिका का वह सत्र है जब नई व्यवस्थापिका का चुनाव हो गया हूं परंतु पुरानी व्यवस्थापिका अपनी अंतिम बैठक कर रही हो वास्तव में लेम डक व्यवस्थापिका के उन सदस्य को कहते हैं जो नए व्यवस्थापिका में पुन निर्वाचित ना हो सके हो
  •  अॉम्बुड्समेन ➖ यह स्वीडिश राजनीतिक व्यवस्था का एक शब्द है इसका प्रयोग उस सतर्कता अधिकारी के लिए किया जाता है जो सरकार की गतिविधियों पर निगरानी रखता है और सरकार के विरुद्ध नागरिकों की शिकायतें सुनता है
  •  गन बोट डिप्लोमेसी ➖ उस कूटनीति को कहते हैं जिसके अंतर्गत अपने  राजनीतिक उद्देश्य पूरे करने के लिए कोई देश दूसरे देश को अपनी शक्ति का भय दिखाता है
  •  चार्ज डी अफेयर्स ➖ राजदूत के स्थान पर जो व्यक्ति अल्पकाल के लिए काम करता है उसे चार्ज डी अफेयर्स कहते हैं
  •  कोकस ➖ किसी राजनीतिक दल अथवा गुट के प्रमुख सदस्य की बैठक को कोकस कहते है!

 

 सविधान का उदय   

  • भारतीय संविधान विधि एवं कानूनों का ऐसा संकल्प है जिसमें संबंधित देश की शासन व्यवस्था संचालित होती है सविधान कहलाता है 
  • सविधान शब्द की उत्पत्ति लेटिन शब्द कांस्टीट्यूटर से हुई है जिसका अर्थ है प्रबंध करना
  • विश्व में सर्वप्रथम सविधान का प्रयोग ब्रिटिश अधिकारी सर हेनरी मेन के द्वारा किया गया था
  • विश्व का प्रथम संविधान ब्रिटेन का है जिसका निर्माण परंपराओं से हुआ और वर्तमान में ब्रिटेन का संविधान विश्व का एकमात्र अलिखित संविधान है 
  • विश्व का प्रथम लिखित संविधान सहित सयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान है
  • सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत का संविधान है
  • भारत में सर्वप्रथम संविधान की अवधारणा 1895 में बाल गंगाधर तिलक द्वारा प्रस्तुत स्वराज जी विदेश में मिलती है
  •  5 जनवरी 1922 को महात्मा गांधी ने कहा था भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छा अनुसार ही होना चाहिए और 1922 में महात्मा गांधी द्वारा भारतीय संविधान निर्माण की मांग की गई
  • 1924 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ब्रिटिश सरकार से सविधान सभा के निर्माण की मांग करी
  • 1928 में साइमन कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय के लिए सविधान की मांग को स्वीकार किया था
  • 1942 में क्रिप्स मिशन के द्वारा संविधान सभा के गठन का सुझाव सर्वप्रथम दिया गया था
  • 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में गठित नेहरू कमेटी की रिपोर्ट को भारतीय संविधान का ब्लू प्रिंट कहा जाता है
  • 1946 में कैबिनेट मिशन के सुझाव पर संविधान सभा का गठन किया गया था
  • 1000000 व्यक्तियों पर सविधान सभा में एक सदस्य होगा 
  • भारतीय संविधान में ब्रिटिश शासन के द्वारा लागू किए गए अधिनियमों की  भी विशेष भूमिका रही है
  • हमारे देश के संविधान पर सर्वाधिक विदेशी प्रभाव इंग्लैंड का है
  • संविधान सभा द्वारा ऐसे नियमों का समूह बनाना जिसे समाज के सदस्य में एक न्यूनतम संबंध में और विश्वास बना रहे
  •  संविधान को देश की आधारभूत विधि भी कहा जा सकता है
  • संविधान द्वारा राज्य के मुख्य अंगों की शक्तियों और उनके उत्तरदायित्व का निर्धारण करता है
  • भारतीय संविधान के विकास का प्रारंभिक चरण रेग्यूलेटिंग एक्ट जो 21 जून 1973 को लागू किया गया था माना जाता है
  •  1931 में कराची में हुए कांग्रेस अधिवेशन में एक प्रस्ताव के द्वारा भारतीय सविधान केसा हो इस की रूपरेखा रखी गई थी
  • 22 जनवरी 1945 को उद्देश्य प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद संविधान निर्माण हेतु अनेक समितियां नियुक्त की गई

 संविधान विशेष 
 भारतीय संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 

  • भारतीय गणतंत्र का संविधान राजनीतिक क्रांति का परिणाम नहीं था बल्कि यह जनता के माननीय प्रतिनिधियों के निकाय के अनुसंधान और विचार विमर्श के परिणाम का फल था 
  • भारतीय संविधान का निर्माण एक संविधान सभा द्वारा हुआ था
  • भारतीय संविधान का विकास  अंग्रेजो के द्वारा पारित किए गए एक्ट के कारण हुआ
  • भारत में पहली बार सविधान की मांग तिलक के द्वारा 1895 में की गई थी परंतु संविधान सभा की व्यापक मांग गांधीजी ने की थी
  • सविधान सभा के द्वारा निर्मित सविधान की मांग मानवेंद्र नाथ राय के द्वारा की गई जिसे जवाहर लाल नेहरू ने व्यापक रुप से उठाया
  • अंग्रेजों की ओर से पहली बार 1942 में क्रिप्स मिशन के द्वारा तृतीय विश्व दिन में भारतीय सहयोग पाने के लिए युद्ध के बाद संविधान देने का प्रस्ताव रखा है जिसे महात्मा गांधी ने पोस्ट डेटेड चेक कहा
  • भारत के सविधान निर्माण के लिए 60 देशों के संविधान का अध्ययन किया गया था
  • सविधान राजकीय आचरण का विधान है यह किसी  देश की शासन व्यवस्था के आधारभूत नियमों का संग्रह है जिसके आधार पर उस देश का शासन तंत्र संचालित होता है
  •  सविधान को बनने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे
  • इस संविधान में वर्तमान में 460 अनुच्छेद 12 अनुसूचियां 22 भाग और 122 संशोधन है 
  • सविधान निर्माण 11 अधिवेशन में पूर्ण हुआ था
  • संविधान निर्माण का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को हुआ था
  • संविधान निर्माण का अंतिम व 11 वा अधिवेशन 26 नवंबर 1949 को खत्म हुआ था इस दिन सविधान को पारित किया गया था
  • भारत के मूल संविधान में 22 भाग 395 अनुच्छेद व 8 अनुसूचिया थी
  • इस सविधान में कुल 389 सदस्य थे जिसमें से 93 सदस्य देसी रियासतों के थे
  • मुस्लिम बहुल क्षेत्र के 65 सदस्य के सविधान सभा से अलग होने के कारण सविधान सभा का 3 जून 1947 को पुनर्गठन किया गया
  • संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन का मुस्लिम समाज ने बहिष्कार किया था इसी दिन डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया गया था
  • 11 दिसंबर 1946 को डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष चुना गया था और बी एन राव को संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार नियुक्त किया गया था
  • 13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया था जो कि 22 जनवरी 1947  को पारित किया गया
  • डॉक्टर अंबेडकर ने सभा द्वारा निर्मित संविधान को पारित करने का प्रस्ताव रखा और यह प्रस्ताव 26 नवंबर 1949 को पारित किया गया
  • अंतिम अधिवेशन में अथार्थ 24 जनवरी 1950 को इस सविधान पर 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए
  • इस संविधान के कुछ प्रावधान 26 नवंबर 1949 को और तथा संपूर्ण संविधान को 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया था
  • संविधान सभा के निर्माण की प्रक्रिया 1946 के कैबिनेट मिशन प्लान में दी गई थी और इसी के आधार पर जुलाई 1946 में संविधान सभा के चुनाव हुए थे 

 सविधान के कुछ अन्य तथ्य  

  • सविधान के निर्माण में कुल 114 दिन बहस हुई थी 
  • भारतीय संविधान सभा में 12 महिलाएं थी
  • सविधान सभा के सदस्यों में 33 अनुसूचित जनजाति के सदस्य थे
  • भारत की हैदराबाद एक ऐसी रियासत थी जिसने संविधान सभा में भाग नहीं लिया था
  •  संविधान निर्माण में प्रांतों के प्रतिनिधित्व को समुदाय की जनसंख्या के आधार पर 3 भागों में विभाजित किया गया था मुस्लिम सिख और साधारण 
  • इस सविधान सभा के निर्माण में सबसे बुजुर्ग सदस्य डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा थे
  • संविधान के 15 अनुच्छेद को 26 जनवरी 1949 को पारित किया गया था
  • सविधान सभा की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 का अंतिम अधिवेशन में डाक्टर राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया था
  •  इस सविधान सभा में  राजस्थान के 11 सदस्य थे हीरालाल शास्त्री माणिक्य लाल वर्मा गोकुल लाल असावा जय नारायण व्यास आदि थे
  • सविधान की प्रस्तावना को संविधान की कुंजी कहा जाता है ,सविधान की प्रस्तावना को न्यायालय में प्रवर्तित नहीं किया जा सकता है यह निर्णय *यूनियन ऑफ इंडिया बनाम मदन गोपाल 1957 के निर्णय पर घोषित किया गया
  • सर्वोच्च न्यायलय के केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य वाद 1973 में  प्रस्तावना को संविधान का अंग माना गया और इसीलिए संसद प्रस्तावना में संशोधन कर सकती है
  • संविधान सभा के गठन में समानुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत पद्धति का प्रयोग किया गया
  • सविधान सभा का पहला प्रारूप फरवरी 1948 में प्रकाशित किया गया था
  • पहले प्रारूप में संशोधन और परिवर्तन करके संविधान का दूसरा प्रारूप अक्टूबर 1948 में प्रकाशित किया गया
  • डॉ बी आर अंबेडकर ने सभा में 4 नवंबर 1948 को संविधान का अंतिम प्रारूप पेश किया गया इस दिन सविधान को पहली बार पढ़ा गया इसलिए इसे संविधान का प्रथम वाचन कहा गया जो 4 नवंबर से 9 नवंबर 1948 तक चला
  • संविधान का दूसरा वाचन 15 नवंबर 1948 से प्रारंभ हुआ जो 17 अक्टूबर 1949 तक चला
  • डॉ भीमराव अंबेडकर देश के पहले कानून/विधि मंत्री बने
  • डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भारत के सविधान के प्रमुख शिल्पकार को आधुनिक मनु की संज्ञा दी गई
  • 1950 को सविधान की शुरुआत का विशेष दिन इसलिए चुना गया क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पारित हुए प्रस्ताव के आधार पर पूर्ण स्वराज्य दिवस मनाया गया* था इसलिए भारत के संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया
  • संविधान के लागू होते ही भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को समाप्त कर दिया गया
  • 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होते ही भारत की संसद का निर्माण हुआ
  • संविधान में केवल एक ही प्रावधान ऐसा था जिस पर कोई बहस नहीं हुई और वह पारित हो गया और वह प्रावधान सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का था​​

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