भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 (18 जुलाई 1947)

🍃अधिनियम पेश किया गया- 4 जुलाई 1947
🍃अधिनियम पारित हुआ- 18 जुलाई 1947
🍃ब्रिटिश संसद में अधिनियम पेश किया गया-लॉर्ड सुई माउंटबेटन द्वारा
🍃अधिनियम के तहत दो राष्ट्र का निर्माण-भारत और पाकिस्तान
🍃15 अगस्त 1947 अधिनियम का आधार-माउंटबेटन की योजना
🍃अधिनियम का स्वरूप-क्रिप्स योजना के दो सुझाव में संशोधन
🍃स्वतंत्र भारत का प्रथम ब्रिटिश गवर्नर जनरल- लॉर्ड माउंटबेटन
🍃स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री- पंडित जवाहरलाल नेहरू
🍃भारत का विभाजन- 15 अगस्त 1947
🍃मोहम्मद अली जिन्ना का कराची पहुंचना-*7 अगस्त 1947
🍃मोहम्मद अली जिन्ना का राष्ट्रपति बनना-*11 अगस्त 1947
🍃पाकिस्तान के प्रथम गवर्नर जनरल-मोहम्मद अली जिन्ना(14 अगस्त 1947)
🍃 पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री-लियाकत अली खाँ
🍃पाकिस्तान की स्थापना–14 अगस्त 1947
🍃 भारत की स्थापना- 15 अगस्त 1947

🍃भारत की स्वतंत्रता का समय- रात 12:00 बजे (15 अगस्त प्रारंभ )
🍃भारत राज्य सचिव का पद समाप्त-भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के बाद
🍃भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा पूर्ण हुआ- लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा की गई घोषणा
🍃भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का मुख्य कार्य-भारत का विभाजन करना

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ब्रिटिश सरकार ने एक कानून बनाया उस कानून को माउंटबेटन योजना के आधार पर 4 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में भारतीय स्वतंत्रता विधेयक पेश किया 18 जुलाई 1947 को इस विधायक को स्वीकृति मिल गई
ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाए गए कानून को माउंटबेटन योजना के आधार पर 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश संसद में एक अधिनियम के रूप में पास किया जिसे भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 कहते हैं इसी अधिनियम के द्वारा भारत और पाकिस्तान नाम के दो स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना 15 अगस्त 1947 को की गई थी

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किस अधिनियम में कोई नया संविधान नहीं बनाया गया इसमें केवल भारतीय और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को अपने संविधान बनाने की अनुमति दी गई थी अथार्थ इस अधिनियम द्वारा 3 जून की माउंटबेटन प्रतिज्ञा की पूर्ति की गई थी

☄🌴भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947का तात्पर्य-अर्थ 🌴☄
संक्षेप में हम कह सकते हैं कि भारत में क्राउन पर आश्रित एक उपनिवेश के स्थान पर दो स्वतंत्र अधिराज्य स्थापित हो गए  स्वतंत्र शब्द के प्रयोग ले यह स्पष्ट था कि आप उस पर ब्रिटिश संसद और व्हाइट हाल का नियंत्रण नहीं रह गया

☄🌴अधिनियम 1947 का स्वरूप🌴☄
मूलभूत रूप में कहा जा सकता है कि 1947 का भारतीय अधिनियम 1942 की क्रिप्स योजना में दो प्रमुख संशोधन वाला स्वरूप था तथा 3 जून की योजना में बिना किसी विलंब के सत्ता का हस्तांतरण ,

  • जबकि क्रिप्स योजना में यह काम अनिश्चित था
  •  दूसरा इस योजना में अल्पसंख्यकों के लिए किसी आरक्षण की बात नहीं कही गई थी
  • जबकि क्रिप्स योजना में इसका उल्लेख स्पष्ट था


🌴भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा दो राष्ट्रो का निर्माण अथार्थ भारत का विभाजन🌴
इस अधिनियम द्वारा भारत में 15 अगस्त 1947 को दो प्रादेशिक शासन इकाइयां भारत और पाकिस्तान स्थापित किए जाने की स्थिति के पश्चात इंग्लैंड ने भारत पर अपना आधिपत्य छोड़ देना था

नये संविधान बनने और लागू होने तो यही संविधान सभाएं ही विधानसभाओं के रूप में कार्य करेगी और 1935 के एक्ट के अनुसार कार्य चलेगा

इस अधिनियम के तहत दोनों राष्ट्रों को पूरी स्वतंत्रता और प्रभुसत्ता सौप दी जाएगी

14 अगस्त को स्वतंत्र राष्ट्र पाकिस्तान और 15 अगस्त को भारत की स्थापना की जाएगी

14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान की स्थापना हुई मोहम्मद अली जिन्ना स्वतंत्र राष्ट्र पाकिस्तान के गवर्नर जनरल और लियाकत अली प्रधानमंत्री बने थे

भारतीय संघ की बैठक संविधान सभा की 14 अगस्त की आधी रात को हुई थी रात के 12:00 बजे और 15 अगस्त आरंभ होते ही जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा को संबोधित किया था

🌻जवाहरलाल नेहरू द्वारा सभा को को संबोधन🌻
आधी रात की इस घड़ी में जब दुनिया सो रही है भारत जगकर जीवन और स्वतंत्रता प्राप्त कर रहा है एक क्षण ऐसा आता है जो इतिहास में बहुत ही कम आता है जब हम पुराने युग से नए युग में कदम रखते हैं जब एक युग खत्म होता है और जब एक राष्ट्र की अरसे से दबी आत्मा बोल उठती है यह बहुत ही अच्छी बात है कि इस पवित्र क्षण में हम भारत और उसकी जनता की सेवा और उससे भी बढ़कर मानवता की सेवा करने की सौगंध लेते हैं

इसके बाद सविधान सभा ने लार्ड माउंटबेटन को भारत का प्रथम गवर्नर जनरल नियुक्त किया  स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को बनाया गया 15 अगस्त की प्रातः जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में नए मंत्रिमंडल को शपथ दिलाई गई

🌻 जवाहरलाल नेहरू द्वारा मंत्रिमंडल को दिलाई गई शपथ🌻
जो स्वतंत्रता हमें मिली वह केवल विभाजित स्वतंत्रता थी इसके साथ ही सांप्रदायिक घटनाओं और क्रूरता के रूप में एक बड़ी मानवीय त्रासदी हुई जिसका कोई लिखित सादृश्य भारत के लिखित इतिहास में नहीं मिलता यह कहना ही पर्याप्त होगा कि भारत को अपनी स्वतंत्रता के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी

☄🌴भारत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947  का  प्रभाव🌴☄ 
भारत स्वतंत्रता अधिनियम के तहत प्रत्येक प्रदेश को 31 मार्च 1948 तक गवर्नर जनरल द्वारा पारित एक्ट से इस अधिनियम में परिवर्तन करने का अधिकार दिया गया और उसके उपरांत वहां की संविधान सभा को यह अधिकार प्राप्त होगा

सम्राट का कानूनों के निषेधाधिकार का अथवा उसे महामहीम की इच्छा पर छोड़ देने का अधिकार त्याग दिया गया और प्रत्येक गवर्नर जनरल को अपने-अपने देश के विधान मंडलों द्वारा पारित कानूनों को स्वीकार करने की अनुमति दे दी गई

इस अधिनियम के अनुसार ब्रिटिश क्राउन का भारतीय रियासतों पर प्रभुत्व समाप्त हो गया और 15 अगस्त 1947 को सभी संधिया और समझौते समाप्त माने जाएंगे ऐसी घोषणा हो गई,

लेकिन जब तक की इन नये प्रदेशों और रियासतों के बीच नए समझौते नहीं होंगे उस समय तक तत्कालीन समझौते चलते रहेंगे

इसी प्रकार उत्तर पश्चिमी सीमा पर बनने वाली जातियों से समझौते उत्तराधिकारी प्रशासन द्वारा संशोधित किए जाने थे

भारत राज्य सचिव का पद समाप्त हो गया और उसका कार्य राष्ट्रमंडलीय  मामलों के सचिव को दे दिया गया

शक्ति के हस्तान्तरण की निशानी के रुप में अंग्रेज सम्राट के नाम के साथ संलग्न भारत के सम्राट शब्द समाप्त कर दिए गए दोनों राष्ट्र को राष्ट्रमंडल को छोड़ने की अनुमति थी

☄🌴एटली के अनुसार अधिनियम 1947🌴☄
एटली ने इस विधेयक को दूसरे पठन के समय कॉमन सभा में कहा था कि “”यह एक लंबी श्रृंखला की चरम सीमा है……..1935 का अधिनियम ,क्रिप्स शिष्टमंडल के समय घोषणा, मेरे कुछ परम आदरणीय मित्रों का पिछले वर्ष भारत जाना, सभी इस पथ पर ले जाने वाले भिन्न-भिन्न चरण थे जिनकी  घोषणा मैंने पिछले 3 जून को की थी इस विधेयक का तात्पर्य उन प्रस्ताव को कार्यान्वित करना है””

☄🌴ब्रिटिश संसद के अनुसार भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947🌴☄
ब्रिटिश संसद ने इस विधेयक को भारत के लिए पारित सभी विधायको में सबसे महान और उत्तम कहा है

इससे भारत में लगभग 200 वर्ष पुराना अंग्रेजी राज्य समाप्त हो गया

1947 का भारत उस प्राचीन भारत से जिस पर लगभग 150 वर्ष पूर्व उन्होंने राज्य स्थापित किया बिल्कुल अलग था इन 150 वर्षों में न केवल बाह्य रूप से ही अपितु उनकी आत्मा ही बदल गई थी

जहां एक और इस विधेयक ने अपने पुराने अध्याय को समाप्त किया वह दूसरी और इस विधेयक ने एक और नए युग का सूत्रपात भी किया

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