भारत में महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण

☘ महमूद गजनवी ने भारत पर कितने आक्रमण की इस संबंध में विद्वानों में मतभेद है।
☘ हेनरी इलियट ने बताया है कि 1000 से 1027 के मध्य की अवधि में महमूद ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया
☘ अधिकांश विद्वान हेनरी इलियट के मत का ही समर्थन करते हैं

 ??प्रथम आक्रमण 1000 ईस्वी??
⚔महमूद ग़ज़नवी का प्रथम आक्रमण 1000 ईस्वी में सीमावर्ती नगरों पर हुआ
⚔ इस समय हिंदू शाही का शासक जयपाल था
⚔हिंदू शाही राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के कुछ दुर्गा पर अधिकार करने के बाद महमूद गजनवी वापस गजनी लौट  गया

 ??दूसरा आगमन 1001 ईस्वी)??
⚔महमूद ग़ज़नवी का दूसरा आक्रमण 1001 इसवी में हिंदू शाही राज्य पर हुआ था उस समय  भी हिंदू शाही वंश का राजा जयपाल था
⚔उसने पेशावर के निकट महमूद ग़ज़नवी का मुकाबला किया लेकिन उसे इस मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा और अपने संबंधियों और सेनापतियों के साथ उसे बंदी बना लिया गया
⚔महमूद गजनबी ने जयपाल की राजधानी वेहिंद अथवा उद्भाण्डपुर पर अपना  अधिकार कर लिय,  अंत में महमूद गजनबी ने 25 हाथी, और 250000 दिनार देकर जयपाल को मुक्त कर दिया
⚔महमूद गजनबी लूट का अपार धन प्राप्त कर वापस चला गया
⚔जयपाल अपने निरंतर पराजय से इतना अपमानित महसूस करने लगा कि अंत में उसने (1001)आत्महत्या कर ली
⚔उसकी मृत्यु के पश्चात उसका पुत्र आनंदपाल गद्दी पर बैठा
⚔उत्तर भारत में हिंदू शाही  राज्य भारत का प्रथम महत्वपूर्ण हिंदू राज्य था जो मुस्लिम आक्रमण का शिकार हुआ
⚔हिंदू शाही वंश के शासकों ने ही महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का सबसे अधिक प्रतिरोध किया। इसकी राजधानी वैहिन्द अथवा उद्भाण्डपुर थी

 ??तीसरा आक्रमण (1004)??
⚔महमूद ने तीसरा आक्रमण 1004 ईस्वी  में भेजा (वर्तमान उच्छ)  के राजा बजरा पर किया
⚔जिसने जयपाल के विरुद्ध महमूद गजनबी को सैनिक सहायता नहीं दी थी
⚔बजरा पराजित हुआ और भाग गया महमूद ने उसके नगर को निर्दयतापूर्वक लूटा और वहां के निवासियों को बलपूर्वक मुसलमान बनाया

 ??चौथा आक्रमण 1004-05??
⚔महमूद का चौथा आक्रमण मुल्तान पर हुआ था उस समय वहां का शासक अब्दुल फतह दाऊद था जो मुसलमानों के शिया संप्रदाय करमातथियों से संबंधित था।
⚔उसने महमूद के आक्रमण से बचने के लिए हिंदू शाही  शासक आनंदपाल से मदद मांगी थी आनंदपाल ने भैरा के निकट महमूद का मुकाबला किया लेकिन पराजित हुआ
⚔फतह दाऊद ने भी आत्म समर्पण कर दिया और 20000 दिरहम प्रतिवर्ष देने का वादा किया
⚔मुल्तान पर महमूद ग़ज़नवी का अधिकार हो गया वापस जाते समय महमूद ने सुखपाल को मुल्तान का शासक नियुक्त किया
♦⚜♦सुखपाल♦⚜♦
⚔ सुखपाल आनंदपाल का पुत्र था उसने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम ग्रहण कर लिया था उस का उपनाम नौशाशाह था
⚔शासक बनने के पश्चात उसने पुन: हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया अतः महमूद ने उसे पदच्युत कर बंदी बना लिया

 ??पाचवां आक्रमण??
⚔महमूद गजनबी ने पांचवा आक्रमण सुखपाल को दंड देने के लिए किया था
⚔क्योंकि सुखपाल ने उस की अधीनता और इस्लाम धर्म दोनों को त्याग दिया था
⚔सुखपाल को पराजित कर उसे बंदी ग्रह में डाल दिया गया

??छठा आक्रमण (1008ईस्वी) ??
⚔महमूद का छठा आक्रमण आनंदपाल के विरुद्ध था गद्दी प्राप्त करने के बाद आनंदपाल की स्थिति अत्यंत दयनीय  थी
⚔यह पंजाब पर दूसरी बार आक्रमण था जिसमें पंजाब के शासक आनंदपाल को वैहिंद के युद्ध में पराजित किया
⚔दक्षिण में उसके राज्य की सीमाएं मुल्तान के अमीरों द्वारा शासित क्षेत्रों से टकराते थी और भाटियाह  सहित झेलम के पश्चिमी किनारे के प्रदेश उस में सम्मिलित थे
⚔उसके राज्य रोहन के समय  भाटिया का शासक विजयराज था। मुल्तान विजय से पूर्व महमूद ने विजय राज को पराजित कर भाटियाह  के किले पर अधिकार कर लिया था
⚔इस युद्ध में विजय राज वीरता पूर्वक लड़ा लेकिन पराजित होकर अपनी रक्षा के लिए भागा और अंत में स्वयं अपना प्राणांत कर दिया
⚔1005ईस्वी  में मुल्तान पर आक्रमण के समय आनंदपाल ने महमूद को बाधा   पहुंचाई थी।इस कारण महमूद ने अपना छठा अभियान आनंदपाल के विरुद्ध किया
⚔आनंदपाल ने महमूद के आक्रमण के लिए उज्जैन के परमार, ग्वालियर के कछवाहा, कालिंजर के कालचुरी ,कन्नौज के राठौर और दिल्ली और अजमेर के चौहान राजाओं का एक संघ बनाया

⚔पंजाब के खोखर लोगों ने भी आनंदपाल की सहायता की इस प्रकार आनंदपाल ने एक विशाल सेना एकत्र कर ली थी
⚔सिंधु नदी के किनारे पेशावर के पास एक निर्णायक युद्ध हुआ 30,000 खोखरो ने ऐसा प्रहार किया कि महमूद ग़ज़नवी की सेना विचलित होने लगी महमूद ग़ज़नवी पीछे हटने के लिए सोचने लगा
⚔किंतु दुर्भाग्य से महमूद की सेना द्वारा छोड़ी गई  अलकतरे  की अग्नि ज्वालाओं से  वशीभूत होकर आनंदपाल का हाथी मैदान से भाग निकला
⚔आनंदपाल की सेना अस्त-व्यस्त हो कर भागने लगी महमूद ग़ज़नवी विजय हुआ उसने साल्ट रेंज में स्थित आनंदपाल की नई राजधानी नंदन या नंदनपुर को तबाह कर दिया था और आनंदपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए बाध्य किया

??सातवा आक्रमण 1009 ईस्वी??
⚔आनंदपाल को पराजित करने के बाद महमूद ग़ज़नवी को युद्ध की लूट में कुछ हाथियों के अतिरिक्त उसके हाथ कोई विशेष वस्तु नहीं लगी थी
⚔अतः लूट की अपनी भूख मिटाने के लिए उसने 7वां आक्रमण 1009 ईस्वी में कांगड़ा के पहाड़ी प्रदेश नगरकोट पर किया
⚔हिंदुओं ने नगरकोट के किले में बहुत सा धन एकत्र कर रखा था वहॉ किसी ने महमूद का सामना नहीं किया नगरकोट के किले से महमूद ग़ज़नवी को अपार धन मिला
♦⚜♦फरिश्ता के अनुसार नगरकोट में मिला धन♦⚜♦
⚔फरिश्ता के अनुसार महमूद गजनबी 7 लाख स्वर्ण दिनार, 700 मन चांदी के पात्र, 200 मन शुद्ध स्वर्ण मुद्राएं ,2000 मन  अपरिष्कृत रजत और 20मन पन्ने, हीर,  रत्न मोती आदि बहुमूल्य मणिया लेकर भारत से वापस लौटा

??आठवां आक्रमण(1010 ईसवी) ??
⚔1010 ईस्वी में महमूद गजनबी ने मुल्तान पर दोबारा आक्रमण किया
⚔वहां के विद्रोही शासक दाऊद को पराजित कर बंदी बना लिया और उसने मुल्तान पर अधिकार कर लिया था

 ??नौवां आक्रमण (1011 से 1012 ईस्वी)??
⚔महमूद का नवां आक्रमण थानेश्वर पर था वहां के चक्र स्वामी मंदिर को लूटा
⚔मार्ग में डेरा के शासक ने रोकने का प्रयास किया लेकिन वह असफल रहा

??दसवां आक्रमण(1012 ईसवी)??
⚔आनंदपाल की मृत्यु के बाद उसका पुत्र त्रिलोचन पाल गद्दी पर बैठा।त्रिलोचन पाल को भी महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का सामना करना पड़ा
⚔त्रिलोचन पाल के अपने पुत्र भीम पाल जो प्रशासन में उसका प्रमुख शासक था के  कहने पर महमूद का विरोध करने की नीति अपनाई
⚔भीमपाल ने मर्गला दर्रे में अपनी किलाबंदी की थी। महमूद की सेनाओं को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन महमूद ने उस दर्रे को जीतकर नंदन के दुर्ग पर चढ़ाई कर दी
⚔त्रिलोचन पाल और भीम पाल ने भागकर कश्मीर में शरण ली और वहां के राजा संग्राम राज( 1003- 1028ई.) से मिलकर महमूद गजनबी से लड़ने की तैयारी करने लगे।कश्मीरी मंत्री तुंग उनकी सहायता के लिए भेजा गया
⚔तोषी (पुंछ क्षेत्र की आधुनिक तोही)नदी के किनारे महमूद और त्रिलोचन पाल और कश्मीर की संयुक्त सेनाओं के मध्य युद्ध हुआ।इस युद्ध में महमूद गजनबी विजय हुआ
⚔त्रिलोचन पाल पराजित होने के बाद पंजाब की शिवालिक पहाड़ियों की ओर चला गया और पुनः अपनी शक्ति स्थापित करने में लग गया
⚔उसने बुंदेलखंड के शासक विद्याधर जो समय उत्तरी भारत का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक  माना जाता था से मित्रता स्थापित की और अपने खोए राज्य को पुनः जीतने का प्रयास किया
⚔1018 से 1019ई.में महमूद गजनबी ने जब चंदेलों के विरुद्ध चढ़ाई की तो  मार्ग में राहीब अथार्थ रामगंगा नदी के किनारे त्रिलोचन पाल ने उसका मुकाबला किया लेकिन वह पराजित हुआ और अपने प्राण बचाने के लिए चंदेल सेनाओं के खेमे की और भागा।
⚔अंत में 1021-22 ईस्वी में उसका वध कर दिया गया। त्रिलोचन पालकी मृत्यु के साथ ही शाही वंश का  का भी अंत हो गया
यद्यपि उसका पुत्र भीम पाल उसका उत्तराधिकारी बना जो लोहर  के आसपास के क्षेत्रों में 1026 ईस्वी तक  शासन किया किंतु शाही वंश के इतिहास में उसका कोई महत्व नहीं है

 ??ग्यारहवां आक्रमण 1015-16 ईसवी में??
⚔महमूद गजनबी ने 1015- 16 ईस्वी  में कश्मीर में प्रवेश करने का प्रयास किया लेकिन भौगोलिक बाधाओं के कारण  लोहकोट  से आगे नहीं बढ़ सका

 ??बारहवां आक्रमण 1018 ईस्वी??
⚔1018 ईस्वी में महमूद ने कन्नौज पर आक्रमण किया जो उस समय भारतीय साम्राज्य की प्रमुख राजधानी था उस समय यहां गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक राज्यपाल का शासन था
⚔महमूद ने पहली बार गंगा नदी घाटी में प्रवेश किया कन्नौज आक्रमण के दौरान ही महमूद गजनबी ने सर्वप्रथम बटन ,महावन, मथुरा और वृंदावन पर आक्रमण किया।और अंत में कन्नौज पर आक्रमण किया
⚔1018 ई में महमूद ने गजनी से प्रस्थान किया। मार्ग में सभी दुर्गा को जीतते हुए बरन (बुलंदशहर) पहुंचा।
⚔यहां का शासक हरदत्त ने भयभीत होकर उस की अधीनता स्वीकार कर ली और अपने कुछ साथियों सहित इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया
⚔तत्पश्चात महमूद ने महावन पर आक्रमण किया उस समय वहां यदु वंश के शासक कूलचंद का शासन था उसने वीरतापूर्वक महमूद का सामना किया
⚔किंतु पराजित हुआ अंत में कुल चंद ने सम्मान की रक्षा के लिए अपने दोनों पत्नियों को काट कर स्वयं भी आत्महत्या कर ली थी


♦⚜♦मथुरा पर आक्रमण♦⚜♦


⚔महावन को लूटने के बाद  महमूद गजनबी ने मंदिरों की नगरी के नाम से विख्यात मथुरा पर आक्रमण किया
⚔मथुरा हिंदुओं का तीर्थ स्थान था जहां हजारों मंदिर थे।  मथुरा की रक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया गया था।  महमूद ने वहां ईच्छानुसार लूटमार की और अपार धन प्राप्त किया
?उत्बी के अनुसार➖ मथुरा के वैभव के बारे में लिखा है कि महमूद ने एक ऐसा शहर देखा जिसका वैभव स्वर्ग के समान है कृष्ण का जन्म स्थान होने के कारण मथुरा को हिंदुओं का बेथलहम कहा जाता है

??तेरहवॉ आक्रमण ??
⚔मथुरा को लूटने के बाद महमूद गजनबी ने वृंदावन पर चढ़ाई की यहां भी उसने लूट में अपार धन प्राप्त किया वहां से वह कन्नौज गया वहां गुर्जर प्रतिहार वंश के अंतिम शासक राज्यपाल का शासन था
⚔राज्यपाल भयभीत होकर बिना युद्ध किए ही गंगा के पार उस के पूर्वी किनारे पर स्थित बारी भाग गया
⚔महमूद ने कन्नौज को खूब लूटा उसके बाद उसने कानपुर के निकट मंझावन नामक स्थान पर आक्रमण किया जो ब्राह्मणों के किले के नाम से प्रसिद्ध था
⚔25 दिन तक संघर्ष के बाद अंत में महमूद ने विजय प्राप्त की लौटते समय मार्ग में पड़ने वाले असी  और  सिरसावा(सहारनपुर के निकट) के दुर्गा को भी जीता
⚔असी के शासक चंद्रपाल और सिरसावा के शासक चांदराय ने  उस का मुकाबला नहीं किया अतः अपार धन के साथ महमूद ग़ज़नवी गजनी लौट आया

 ?? चौदहवाँ आक्रमण(1019-20)??
⚔महमूद गजनबी ने यह आक्रमण चंदेल राजा को दंडित करने के लिए किया था
⚔महमूद के वापस जाने के बाद बुंदेलखंड के चंदेल शासक विद्याधर ने ग्वालियर के शासक के सहयोग से कुछ दिन हिंदू राजाओं का एक संघ बनाया
⚔इस संघ का उद्देश्य कन्नौज के शासक राज्यपाल को दंड देना था क्योंकि राज्यपाल महमूद ग़ज़नवी से बिना युद्ध किए ही भाग गया था जिसे राजपूत शासकों ने एक कलंक समझा था
⚔इन राजाओं ने मिलकर राज्यपाल पर आक्रमण किया और विद्याधर के आदेश से उसके कछवाहा सामंत अर्जुन ने राज्यपाल की हत्या कर दी
⚔महमूद ने विद्याधर को दंडित करने के लिए 1019-20 ईस्वी में भारत आया वह बारी की ओर बढ़ा जिसे प्रतिहारों ने कन्नौज की लूट के पश्चात अपनी राजधानी बनाया था
⚔त्रिलोचन पाल यहा का शासक था वह बिना युद्ध के भाग गया महमूद ने बारी को नष्ट कर दिया इसके पश्चात महमूद अपने मुख्य शत्रु विद्याधर को परास्त करने के लिए बुंदेलखंड पहुंचा
⚔वहां विद्याधर एक बड़ी सेना के साथ महमूद का मुकाबला करने के लिए तैयार था महमूद विद्याधर की विशाल सेना देख कर एक बार विचलित अवश्य हुआ था लेकिन युद्ध प्रारंभ होने के बाद शाम होते-होते विद्याधर की सेना के एक भाग की पराजय हो चुकी थी
⚔विद्याधर साहस खो बेठा और रात में चुपके से भाग निकला महमूद गजनबी ने उसके संपूर्ण राज्य में लूटमार की और बहुत सी संपत्ति लेकर वापस गजनी लौट गया

?? पन्द्रहवां आक्रमण(1021-22)??
⚔महमूद गजनबी पुन:भारत आया और पंजाब में प्रवेश किया इस बार उसने पंजाब का प्रशासन अपने हाथ में लेने का निश्चय किया
⚔पंजाब में प्रत्यक्ष शासन स्थापित करने का महमूद ग़ज़नवी का उद्देश्य दूर स्थित प्रांतों की विजय के लिए भारत में एक सैनिक केंद्र की स्थापना था इसके लिए पंजाब का क्षेत्र उपयुक्त था
⚔पंजाब पर अधिकार करने के पश्चात ही महमूद गजनबी ने पंजाब के प्रचलित शाही सिक्को को भी अपनाया
⚔उसके अपने सिक्कों पर “”घुड़सवार और नंदी”” चिह्न  जो पहले से प्रचलित थे को अपनाया और उस पर संस्कृत भाषा में “”आव्यक्तमेंक  अवतार महमूद”” खुदवाया
⚔उसने संस्कृत में “”अयं टंकं  महमूद पूरे घटित””  अथार्थ  टकसाल का नाम भी खुदवाया उसके द्वारा प्रचलित सिक्के दिल्ली वाला के नाम से प्रसिद्ध थे जिनका वजन 56  ग्रेन था
⚔पंजाब पर अधिकार करने के बाद में महमूद गजनबी ने आरियारुक को यहां का गवर्नर नियुक्त किया था

?? सोलहवाँ आक्रमण(1025-26ई.)- सोमनाथ आक्रमण ??
⚔महमूद गजनवी ने भारत पर अपना सोलहवां और सर्वाधिक महत्वपूर्ण आक्रमण 1025 में किया
⚔इस दौरान उसने सोमनाथ मंदिर को निशाना बनाया था वहां के प्रसिद्ध मंदिर को तोड़ दिया और वहां से अपार धन लूटकर ले कर गया था
⚔1025-26 ई में महमूद गजनबी ने एक विशाल सेना लेकर सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था यह महमूद गजनबी का सबसे प्रसिद्ध अभियान था
⚔सोमनाथ का मंदिर गुजरात में स्थित भारत के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में था यह शिव मंदिर था इस में अत्यधिक धन संचित था जो महमूद गजनवी के आक्रमण का मुख्य कारण बना
⚔मुल्तान के मार्ग से उसने काठियावाड़ में प्रवेश किया तत्पश्चात अन्हिलवाडा पहुंचा जो काठियावाड़ की राजधानी थी इस समय वहां का शासक भीमदेव था जो बिना युद्ध किए भाग गया
⚔महमूद ने बिना किसी विरोध के अन्हिलवाडा को लूटा इसके पश्चात वह सोमनाथ मंदिर के निकट पहुंचा।एक संघर्ष के बाद मंदिर पर कब्जा कर लिया गया
⚔उसे यहां से अपार धन राशि इकट्टा की और मंदिर को नष्ट कर दिया अतुल संपत्ति के साथ महमूद सिंध के रेगिस्तान से वापस लौट गया
⚔उसे मार्ग में जाटों ने बहुत हानि पहुंचाई लेकिन महमूद मुल्तान होता हुआ सुरक्षित गजनी लौट आया
?उत्बी के अनुसार➖ सोमनाथ के शिव मंदिर पर आक्रमण से महमूद ग़ज़नवी को कितनी धनराशि प्राप्त हुई जितनी अन्य सभी अभियानों से नहीं हुई थी
⚔महमूद ग़ज़नवी द्वारा ध्वस्त सोमनाथ के शिव मंदिर का  पुनर्निर्माण 1026ई.में चालुक्य शासक  भीम पाल प्रथम और 1196 में कुमारपाल ने कराया करवाया था
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??सत्रहवाँ और अंतिम आक्रमण (1027 ईस्वी )??
⚔जाटों और खोखरो को दंड देने के लिए महमूद गजनबी ने 1027 ईस्वी में भारत पर अंतिम आक्रमण किया
⚔सोमनाथ मंदिर को लूट कर वापस जाते समय महमूद गजनबी को पश्चिमोत्तर में सिंध के जाटों और खोखरों ने अत्याधिक हानि पहुंचाई थी
⚔प्रतिशोधात्मक कार्यवाही में महमूद ने इन पर आक्रमण किया और कठोरता से इन्हें समाप्त कर दिया खोखर जाति सीमांत क्षेत्रों के उग्र निवासी थे
⚔इन्होने महमूद गजनबी और महमूद गोरी दोनों के लिए समस्या पैदा की थी


?इस प्रकार महमूद ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया अपने सैनिक पराक्रम का परिचय देते हुए उसने अनेक भारतीय शासकों को पराजित किया
?गुजरात से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक के क्षेत्रों को रौंदा। इन सफलताओं के बाद भी वह भारत में अपनी सत्ता स्थापित नहीं की क्योंकि उसके इस अभियान का उद्देश्य साम्राज्य निर्माण करना नहीं था बल्कि धन को लूटना था
?जिस उद्देश्य की प्राप्ति में वह पूरी तरह से सफल रहा उस के आक्रमण का एकमात्र स्थाई परिणाम पंजाब सिंध और मुलतान को गजनी साम्राज्य में मिलाया जाना रहा
?महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण का सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभाव भारत की राजनीतिक और सैनिक दुर्बलता का उजागर होना
?1030 महमूद गजनवी की मृत्यु हो गई

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