मध्यप्रदेश मे पर्यटन(Tourism in Madhya Pradesh)

मध्यप्रदेश मे पर्यटन(Tourism in Madhya Pradesh)

जैनो के तीर्थ स्थल

ग्वालियर झाँसी लाइन पर सोनागिरि स्टेशन से 2 मील श्रमणाचल पर्वत है। पहाड़ पर 77 दिगंबर जैन मंदिर हैं। वहाँ से नंगानंगकुमार आदि साढ़े पाँच सौ करोड़ मुनि मोक्ष गए हैं।

बागगजा(बड़वानी)  15 वी शताब्दी के 72 फीट ऊंचे जैन भगवान आदिनाथ की मूर्ति आकर्षण का मुख्य केंद्र है 

ललितपुर से 36 मील और टीकमगढ़ से 3 मील है। चारों ओर कोट बना है। यहाँ लगभग 90 मंदिर हैं। कार्तिक सूदी 14 को मेला भरता है।
मुक्तागिरी बैतूल जिले में जैनियों का पवित्र स्थल है !
पावगिरी खरगोन हिंगलाज गिरी इंदौर दर्शनीय स्थलहै
सोनागिरी दतिया गोम्मटगिरि इंदौर पुष्प के सोनकच्छ प्रमुख है
मंगलगिरी- सागर

पशुपतिनाथ मंदिर 

नेपाल की राजधानी काठमांडू से तीन किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में बागमती नदी के किनारे देवपाटनगांव में स्थित एक हिंदू मंदिर है। नेपाल के एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने से पहले यह मंदिर राष्ट्रीय देवता, भगवान पशुपतिनाथ का मुख्य निवास माना जाता था। यह मंदिर यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में सूचीबद्ध है। पशुपतिनाथ में आस्था रखने वालों (मुख्य रूप से हिंदुओं) को मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति है। गैर हिंदू आगंतुकों को इसे बाहर से बागमती नदी के दूसरे किनारे से देखने की अनुमति है। यह मंदिर नेपाल में शिव का सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है।

पशुपतिनाथ लिंग विग्रह में चार दिशाओं में चार मुख और ऊपरी भाग में पांचवां मुख है। प्रत्येक मुखाकृति के दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंडल है। प्रत्येक मुख अलग-अलग गुण प्रकट करता है। पहला मुख ‘अघोर’ मुख है, जो दक्षिण की ओर है। पूर्व मुख को ‘तत्पुरुष’ कहते हैं। उत्तर मुख ‘अर्धनारीश्वर’ रूप है। पश्चिमी मुख को ‘सद्योजात’ कहा जाता है। ऊपरी भाग ‘ईशान’ मुख के नाम से पुकारा जाता है। यह निराकार मुख है। यही भगवान पशुपतिनाथ का श्रेष्ठतम मुख माना जाता है।

पशुपतिनाथ पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मंदिर नेपाल में है लेकिन पशुपतिनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के मंदसौर शिवना नदी के किनारे स्थित है
मंदिर में चार पुजारी (भट्ट) और एक मुख्य पुजारी (मूल-भट्ट) दक्षिण भारत के ब्राह्मणों में से रखे जाते हैं।
पशुपतिनाथ में शिवरात्रि का पर्व विशेष महत्व के साथ मनाया जाता है।

दर्शनीय एवं प्राकृतिक स्थल

1. स्थल – बेसनगर
स्थित – विदिशा
विशिष्ट महत्व – हेलोडोयोरस स्तंभ में गरुणध्वज

2. स्थल- दशपुर
स्थित – गंजबासोदा
विशिष्ट महत्व – मंदिर परमारवंश

3. स्थल – ग्यारसपुर
 स्थित –  विदिशा
विशिष्ट महत्व – माला देवी मंदिर त्रिपुर सुंदरी प्रतिमा

4.स्थल -बीजा मंडल
स्थित विदिशा
विशिष्ट महत्व – मुगल काल में ध्वस्त किया गया

5.स्थल – अमरकंटक
स्थिति – डिस्ट्रिक्ट पुष्पराजगढ़ तहसील अनूपपुर
विशिष्ट महत्व – लगभग 10 से 57 मीटर ऊंचे पर इस्थित कपिलधारा एवं दुग्ध धारा प्रताप ,नर्मदा कुंड ,मां की बगिया ,कबीरचौरा ,नवग्रह, मंदिर जैन मंदिर ,आदिनाथ मंदिर. सोनभद्र दसवीं का मंदिर कहां स्थित है

6. स्थल – चित्रकूट
स्थिति – सतना
विशिष्ट तथय – ब्रहमा विष्णु महेश ने यही प्रभार अवतार लिए थे बनवास मंदाकिनी तट के समय मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम यहीं पर महर्षि अत्रि ब सती अनुसूया के अतिथि बने ! कामदगिरि अनुसूया आश्रम भरतकूप सदा हनुमानधारा व्रत मंदिर स्थित है गुप्त गोदावरी नदी है यहां गधों का मेला लगता है!

7. स्थल – मैहर
स्थिति – सतना
विशिट तथय – संगीतकार अलाउद्दीन खान की कर्मभूमि तथा शारदा मां का मंदिर

8.स्थल – सांची
स्थित – रायसेन
विशिश्ट तथय – बहुत ही तीर्थ स्थल यहां तीन स्तूप है भाई स्तूप 36.5 मीटर व्यास का है ऊंचाई 16.4 मीटर है इस स्तूप की रौलिंग शुन्गो ने बनाई थी

9. स्थल – मुक्तागिरी
स्थित – बेतूल
विशिष्ट महत्व – दिगंबर जैनियों का पवित्र स्थल है यहां 52मंदिर है

10. स्थल -उज्जैन
स्थित – शिप्रा नदी के तट पर बसा है
विशिष्ट मह्त्व – महाकालेश्वर मंदिर जन्तर मन्तर चिंतामणि गोपालजी का मंदिर.सांदीपनि आश्रम. मंगलनाथ मंदिर भर्तहरि गुफा जहां पर 12 वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है. जीवाजी वेधशाला. ज्योतिर्लिंग

11. स्थल – ओंकारेश्वर
स्थित – खंडवा
विशिष्ट महत्व – मध्यकालीन ब्राह्मण शैली में बना मान्ध्ता का मंदिर , 24 अवतार सन मात्रिक मंदिर. गोरी सोमनाथ मंदिर. और शंकराचार्य की गुफाएं हैं 520 मेगावाट जल विद्युत केंद्र ज्योतिर्लिंग

12. स्थल- बावन गजा
स्थिति – बड़वानी से 10 किलोमीटर दूर छ्तरपुर
विशिष्ट महत्व – जैनस्थल 15 शताव्दी की 72 फीट ऊनची  आदिनाथ भगवान की मूर्ति!

13. स्थल – खजुराहो
स्थित – छतरपुर
विशिष्टमहत्व – कंदारिया महादेव मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर ,चतुर्भुज मंदिर, आदिनाथ मंदिर ,नदी मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर ,आदि प्रमुख मंदिर है ,चंदेल राजाओं द्वारा बनवाए गए मंदिरों की श्रंख्ला 950 से 1050 ई.  के मध्य निर्मित मंदिर (हवाई सेवा उपलब्ध) यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है

14. स्थल – बांदकपुर
स्थिति  दमोह
विशिष्ट महत्व – हिंदू तीर्थ स्थल

15. स्थल – कुंडलपुर
स्थिति  दमोह
विशिष्ट महत्व – जैन तीर्थ स्थल

16.स्थल – नोहटी
स्थिति – बानी कटनी रेल मार्ग पर
विशिष्ट महत्व – बारहवीं शताब्दी में चंदेलों की राजधानी गुरैया और बेरवा नदियों के संगम पर बसा जयनगर प्राचीन शिव मंदिर और जैन मंदिरों के अवशेषों हेतु  विख्यात है !

17स्थल – पचमढ़ी
स्थिति – होशंगाबाद
विशिष्ट महत्व – अप्सरा विहार ,जटाशंकर ,पांडव की गुफाएं ,धूपगड़ का चौरागढ़, महादेव पर्वत की सबसे ऊंची चोटी 213 से 50 मीटर है !

18. स्थल – बांधवगढ़
स्थित – उमरिया (शेषशाई मूर्ति)
विशिष्ट महत्व – किला व  राष्ट्रीय उद्यान

19. स्थल – चंदेरी किला
स्थित – अशोकनगर
विशिष्ट महत्व – खूनी दरवाजा ,चारों ओर बावडिया

प्रमुख दुर्ग व कले

1. नाम स्थल – ग्वालियर दुर्ग
निर्माणकर्ता – राजा सूरज सेन
वर्ष निर्माण काल – 525 ईसवी
उल्लेखनीय तथ्य – 5 द्वार. आलमगीर दरवाजा. हिंडोला दरवाजा. उषा किरण महल. गुजरी महल दरवाजा चतुर्भुज मंदिर दरवाजा. और सरस सहस्त्रबाहु का मंदिर. हाथी पोल दरवाजा!  इसे किलो रत्न या जिब्राल्टर ऑफ़ इंडिया कहा जाता है

2 नाम /स्थल -धार का किला
निर्माणकर्ता – सुल्तान मो तुगलक
वर्ष र्निर्माण- 1344 ई.
उल्लेखनीय तथ्य = किले में खरबूजा महल है अब्दुल शाह चंगल का मकबरा है

 3. नाम/स्थल – असीरगढ़ का किला
 निर्माणकर्ता -आसा (अहिर राजा)
 निर्माण काल – 10वीं शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य –  आशादेवी कि प्रितिमा में व  निर्मित एक प्राचीन शिव मंदिर भी है !

 4. नाम/स्थल – चंदेरी का किला
 निर्माणकर्ता – प्रतिहार नरेश कीर्ति पाल
 निर्माण वर्ष कॉल – 11वीं शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य – किले में जौहर कुंड, हवा महल, नौखंडा महल, तथा खूनी दरवाजा,स्थित है!

 5. नाम/स्थल – गिन्नौरगढ़ दुर्ग
 निर्माणकरता – महाराजा उदय वर्मन
 बर्ष निर्माण काल – 13 बी  शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य – किले के निकटवर्ती क्षेत्र में तोते  बहुत पाए जाते हैं

 नाम स्थल – रायसेन दुर्ग
 निर्माणकर्ता – राजा राज बसंती
 निर्माण काल वर्ष – 16वी शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य = दुर्ग में बादल महल ,राजा रोहित महल और इतवार महल स्थित है यहां किले के अंदर एक दरगाह स्थित है!

 6. नाम स्थल – बांधवगढ़ का किला उमरिया स्टेशन से 30 KM दूर
 निर्माणकर्ता – बघेलखंड के राजाओं द्वारा
 वर्ष निर्माण – 14वी शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य  = 16 वी  17 वी शतावदी मै बघेलखंड  के राजा विक्रमादित्य ने अपनी राजधानी बांधवगढ़ स्थानांतरित की यह पर शेषतलाव और विष्णु जी का मंदिर है !

 8. नाम स्थल – अजयगढ़ का किला
 निर्माणकर्ता – राजा अजयपाल
 वर्ष निर्माण काल – 18 वी शताब्दी पुनर्निर्माण
 उल्लेखनीय तथ्य –  इसी किले में राजा अमन का महल है यहां पर पत्थर पर नक्काशी की गई है

 9. नाम स्थल – ओरछा दुर्ग
 निर्माणकर्ता – राजा वीरसिंह  बुंदेला
 वर्ष निर्माण काल – 16 शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य – चतुर्भुज मंदिर ,राम मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर.इसी किले मे है! ज्हान्गीर महल भी इसी किले मे है!

 10. नाम /स्थल – मंडला का दुर्ग
 निर्माणकर्ता – राजा नरेश शाह
 वर्ष/निर्माण काल -14 वी श्ताबदी
 उल्लेखनीय तथ्य –  मंडला के किले मे राजा राजेश्वरी कि स्थापना .निजाम शाह ने कराई थी!

 11. नाम / स्थल – मंदसौर का किला
 निर्माणकर्ता – अलाउद्दीन खिलजी
 बर्ष काल – चौदहवीं शताब्दी
 उल्लेखनीय तथ्य – यहां 500 वर्ष पुराना आपेश्वर महादेव का मंदिर है

 12. नाम स्थल – नरवर का किला
 निर्माण करता – राजा नल
 बर्ष कल  शिवपुरी
 उल्लेखनीय तथ्य – इस  किले का कछवारो.तोंमरो और जयपुर के राजा घरानों से संबंध रहा है !