राजस्थान में किसान आंदोलन (Part 06) : झुंझुनू और चिड़ावा किसान आंदोलन 

राजस्थान में किसान आंदोलन

राजस्थान में किसान आंदोलन के भाग 6 झुंझुनू किसान आंदोलन, चिड़ावा किसान आंदोलन, शेखावाटी आंदोलन जयपुर और भू राजस्व निर्धारण हेतु पद्धतियां लाग एवं कर के सम्पूर्ण तथ्यों से संबधित पॉइंट को बारीकी से समझाया गया है जो आपको राजस्थान इतिहास को समझने और Central and Rajasthan state government ( केंद्र और राज्य सरकार ) के द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओ (  में अच्छे नंबर लाने में सहायक होंगे 

झुंझुनू किसान आंदोलन 

अखिल भारतीय जाट सम्मेलन

1925 में पंडित मदन मोहन मालवीय के मुख्य आतिथ्य में झुंझुनूं में अखिल भारतीय जाट सम्मेलन आयोजित हुआ पंडित मदन मोहन मालवीय जी के ओजस्वी वक्तव्य से प्रभावित होकर झुंझुनू में झुंझनु जाट पंचायत की स्थापना की गई 11 मार्च 1931 को झुंझुनू में वृहत महिला सम्मेलन बुलाया गया था 1939 में सेठ जमुनालाल बजाज को जयपुर की सीमा पर गिरफ्तार करके उन्हें आगरा भेज दिया गया था इसके विरोध में शेखावाटी क्षेत्र में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किए झुंझुनू सीकर चोमू में बड़ी-बड़ी सभाएं की गयी झुंझुनू को सैनिक छावनी में बदल दिया गया 

झुंझुनू जाट महासभा

1932 में झुंझुनू जाट महासभा का अधिवेशन हुआ इस अधिवेशन में तय किया गया कि किसान और नेता अपने साथ हथियार रखें ताकि उन्हें  कमजोर नहीं समझा जाए इस अधिवेशन तहत लोगों ने रिवाल्वर बंदूक और बर्छिया रखना प्रारंभ कर दिया 1938  तक इस क्षेत्र में  हथियारों का प्रदर्शन करना आम बात बन गई थी किसानों के आंदोलन को देखकर जागीरदारों और ठिकानेदारों ने किसानों का मनोबल तोड़ने के लिए जयपुर नरेश के नेतृत्व में उन्होंने किसानों पर अत्याचार किए यदि कोई व्यक्ति हाथ में तिरंगा लेकर निकलता तो सिपाही उसे गोली मार देते या नंगा करके पीटते उल्टा लिटा कर उन पर थूकते और डंडो की बरसात करते थे इतने अत्याचारों के बाद भी किसान पीछे नहीं हटे निरंतर विरोध प्रदर्शन करते गए गांव-गांव में चंग बजने लगे जिन पर गाया जाता था  “आठ फिरंगी नौ गौरा लडे जाट का दो छोरा” 

15 मार्च 1939 को झुंझुनू शहर में सरदार हरलाल सिंह ने गिरफ्तारी दी, हरलाल सिंह की गिरफ्तारी से झुंझुनू पहुंचने वाले सभी मार्गों पर पुलिस तैनात कर दी गई बड़ी संख्या में लगभग एक लाख किसान हाथ में झंडा लेकर झुंझुनू पहुंचे यह सब देखकर झुंझुनू में पुलिस ने पाशविकता का नंगा नाच किया पुलिस भूखे भेडियो की तरह उन पर टूट पड़ी पुलिस ने इन्हें पीट पीटकर अधमरा कर दिया  इस आंदोलन में महिलाओं ने भी भाग लिया महिलाओं पर भी लाठियां बरसाई गई लेकिन महिलाओं ने पुलिस को झंडे तक नहीं पहुंच ने दिया पुलिस ने आत्मघाती रूप धारण कर लिया था लोगों पर घोड़े दौड़ाए गए झुंझुनू में रक्त की नदियां बह निकली जब यह समाचार पूरे देश को मिले तो पूरा देश स्तब्ध रह गया इतना होने पर भी जयपुर नरेश मानसिह ने अपनी टेक नहीं छोड़ी उसने 29 मार्च 1941 को झुंझुनू का दौरा किया पंचपाना के सरदारों ने जयपुर नरेश का महानायक की तरह स्वागत किया स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ यह  आंदोलन समाप्त हो सका

चिड़ावा किसान आंदोलन 

सीकर की तरह शेखावाटी क्षेत्र के अन्य जागीदार भी किसानों पर अत्याचार कर रहे थे

मास्टर प्यारेलाल गुप्ता

1922 में मास्टर प्यारेलाल गुप्ता ने चिड़ावा में अमर सेवा समिति की स्थापना की मास्टर प्यारेलाल गुप्ता उत्तर प्रदेश के अलीगढ  जिले के रहने वाले थे मास्टर प्यारेलाल गुप्ता को  चिड़ावा का गांधी कहा जाता था  खेतडी नरेश अमर सिंह  द्वारा अमर सेवा समिति पर दमनात्मक कार्यवाही की गई खेतड़ी नरेश अमर सिंह के चिड़ावा के दौरे के दौरान खेतडी नरेश की सेवा के लिए अमर सेवा समिति के सदस्यों को बेगार के लिए बुलाया गया था लेकिन अमर सेवा समिति  के सदस्य ने बेगार करने से मना कर दिया था इससे खेतड़ी नरेश अमर सिंह ने पुलिस को आदेश दिया कि इसके सदस्य को कठोर दंड दिया जाए राजा का आदेश प्राप्त होते ही तुरंत पुलिस ने मास्टर प्यारेलाल गुप्ता सहित समिति के 7 सदस्यों  को गिरफ्तार कर लिया था और इन पर भयानक अत्याचार  किए गए थे

इन सातों सदस्यों को घोड़ों के पीछे बांधकर 30 मिल  तक घसीटा गया 30 मील तक घसीटने के बाद इन सदस्यों को खेतड़ी की जेल में डाल दिया गया जहां पर यह सब 3 दिन तक बिना अन्न जल के बेहोश पड़े रहे चिड़ावा अत्याचार की सूचना पूरे देश में बिजली की तरह फैल गई चांद करण शारदा तत्काल चिड़ावा आए और लोगों को इन अत्याचारों के विरुद्ध तनकर खड़े रहने का आह्वान किया 

सेठ जमुनालाल बजाज, सेट घनश्याम दास बिरला तथा सेट बेनी प्रसाद डालमिया आदि नेताओं ने खेतड़ी के राजा को कठोर चिट्ठिया लिखकर कड़ा विरोध जताया पूरे खेतडी में हाहाकार मचा रहा और इन सातो को 23 दिन बाद  छोड़ दिया गया शेखावाटी का किसान आंदोलन 1925 में शुरू हुआ था और 1946 में श्री हीरालाल शास्त्री के माध्यम से समाप्त हुआ था शेखावाटी के किसान आंदोलन मुख्यतः आर्थिक शोषण के विरुद्ध हुए और यह आंदोलन अधिकतर जागीर क्षेत्रों में हुए थे  

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3 दिसंबर 1945 को जयपुर राज्य प्रजामंडल द्वारा  ताज सर नामक स्थान पर एक विशाल जाट सम्मेलन का आयोजन किया गया था प्रजामंडल समिति के सदस्य  श्री हीरालाल शास्त्री, श्री टीकाराम पालीवाल, सरदार हरलाल सिंह और एडवोकेट श्री विद्याधर कुलहरि थे इनके द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन को राज्य की भूमि सुधारों के इतिहास में मेग्नाकार्टा कहा जा सत्ता है 

यह प्रतिवेदन एक संपूर्ण दस्तावेज था जिसमें किसानो से संबंधित सभी समस्याएं यथा भूमि का स्थाई बंदोबस्त लगान की न्यायोचित दर भूमि पर किसान का स्वामीत्व तथा बेदखली के विरुद्ध सुरक्षा लाग-बाग बेगार तथा खेतों पर लगाए गए पेड़ों के अधिकतर  अादि का समाधान प्रस्तुत किया गया देसी बुरा हत्याकांड की दशा का भयावह ब्यौरा दैनिक अर्जुन ने दिया था जाट प्रजापति महायज्ञ बीसवीं सदी का सबसे बड़ा और विराट महायज्ञ था इसमें  100 मन घी की आहुतियां दी गई थी और साढे तीन लाख लोगों ने भाग लिया था शेखावाटी किसान आंदोलन के तहत  मंडावा ठिकाने में देवी बख्श ने नागरिक अधिकारों की घोषणा की थी

शेखावाटी आंदोलन जयपुर का तृतीय चरण

1931 में जयपुर राज्य प्रजामंडल की स्थापना हुई जाट क्षेत्रीय किसान पंचायत का वार्षिक सम्मेलन गोठड़ा गांव में 11-12 सितंबर 1938 को आयोजित किया गया था 1 मार्च 1939 को जयपुर राज्य प्रजामंडल में किसान दिवस मनाया था जयपुर महाराज ने प्रजामंडल के नेताओं के साथ 30 दिसंबर 1946 को समझौता  किया था  1 जनवरी 1947 को जयपुर राज्य प्रजामंडल  में महाराजा की छत्रछाया में उत्तरदायी सरकार का गठन किया था इस सरकार का मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री को बनाया गया था 

इस सरकार ने 25 जनवरी 1947  को जयपुर जागीर लैंड टीनेंसी एक्ट-1947 पारित किया था मार्च 1947 को सीकर शेखावाटी के  किसान संघर्ष का अन्त  हुआ और जयपुर में हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व मे लोकप्रिय सरकार गठन  हुआ  6 जून 1949  को राजस्थान सरकार ने राजस्थान किसान सुरक्षा अधिनियम पारित किया था 1952 में राजस्थान सरकार ने  जागीरदारी व जमीदारी उन्मूलन अधिनियम पास किया

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भू राजस्व निर्धारण हेतु पद्धतियां लाग एवं कर

  • काकड़ कुट : इस पद्धति के अंतर्गत  खड़ी फसल के आधार पर उपज का अनुमान लगा कर  कर निर्धारित किया जाता था
  • डोरी : इस पद्धति के अनुसार प्रति बीघा के हिसाब से लगान निर्धारित किया जाता था इसके तहत  हलगत और बीघोड़ी पद्धतियां  प्रयुक्त होती थी 
  • घर बराड़ : मेवाड में वसूल किया जाने वाला  कर
  • घर बाब : मारवाड़ में मशहूर किया जाने वाला घर
  • घर की बिछोती : जयपुर  में वसूल किया जाने वाला  कर
  • खिचड़ी लाग : किसी गॉव के पास पडाव डालने पर राज्य की सेना हेतु भोजन  के लिए गांव के लोगों से वसूल किया जाने वाला लाग  
  • जावामाल : ठिकााने की ओर से पशुओ पर लगाया गया कर
  • पान चराई : भेड़ बकरी की चराई  पर लिया जाने वाला कर
  • घास मरी : चराई करो का सामूहिक नाम
  • मलबा और चौधर बाब  : मारवाड़ में किसानों  से वसूले जाने वाले कर
  • कमठा लाग : गढ़ के निर्माण व मरम्मत  हेतु  दो रुपए प्रति घर से वसूलना
  • रूखवाली भाछ : बीकानेर में राठौड़ों, सिख्खो, जोहियो, बागी ठाकुरों की लूट खसोट से देश को बचाने के लिए नए सैनिक दायित्व की पूर्ति हेतु यह कर वसूल किया जाता है इसे रक्षात्मक कर की भी संज्ञा दी गई है 
  • गनीम बराड : मेवाड़ के युद्ध के समय यह युद्ध कर वसूल किया जाता था
  • राम राम लाग : इसे मुजरा लाग भी कहते हैं यह प्रति व्यक्ति के हिसाब से वसूल की जाती है
  • कुंवर जी का घोड़ा : लाग का एक प्रकार
  • तालियां : ताली शब्द उस भूमी के लिए प्रयुक्त किया जाता था जहां शिकार के लिए सूअर पाले जाते थे
  • अंगा कर : मारवाड़ में महाराजा मानसिह के समय प्रति व्यक्ति से एक रुपए की दर से वसूल किया जाने वाला कर
  • दाण : मेवाड और जैसलमेर राज्यों में माल के आयात निर्यात पर लगाया जाने वाला कर
  • रेख : वह मापदण्ड जिसके आधार पर सामंतो व जमींदारों से राजकीय शुल्को की वसूली की जाती थी
  • हबूब : राज्य के बढ़ते हुए खर्चे की पूर्ति के लिए लिया जाने वाला कर

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