राजस्थान में किसान आंदोलन (Part 06)

 [?]  झुंझुनू किसान आंदोलन [?] 


* [?] 1925*में *पंडित मदन मोहन मालवीय*के मुख्य आतिथ्य में झुंझुनूं में *अखिल भारतीय जाट सम्मेलन* आयोजित हुआ पंडित मदन मोहन मालवीय जी* के ओजस्वी वक्तव्य से प्रभावित होकर *झुंझुनू में झुंझनु जाट पंचायत की स्थापना*की गई 1932*में झुंझुनू जाट महासभा का *अधिवेशन* हुआ इस अधिवेशन में तय किया गया कि *किसान और नेता* अपने साथ *हथियार रखें* ताकि उन्हें *कमजोर नहीं* समझा जाए इस अधिवेशन तहत लोगों ने *रिवाल्वर बंदूक और बर्छिया* रखना प्रारंभ कर दिया 1938* तक इस क्षेत्र में *हथियारों का प्रदर्शन* करना आम बात बन गई थी 11 मार्च 1931*को *झुंझुनू में वृहत महिला सम्मेलन*बुलाया गया था 1939 में सेठ जमुनालाल बजाज* को *जयपुर की सीमा पर गिरफ्तार* करके उन्हें *आगरा भेज*दिया गया था इसके विरोध में *शेखावाटी क्षेत्र में किसानों*ने विरोध प्रदर्शन किए झुंझुनू सीकर चोमू*में बड़ी-बड़ी सभाएं की गयी झुंझुनू को *सैनिक छावनी* में बदल दिया गया 


[?] किसानों के आंदोलन को देखकर *जागीरदारों और ठिकानेदारों*ने किसानों का  *मनोबल तोड़ने*के लिए *जयपुर नरेश के नेतृत्व*में उन्होंने किसानों पर *अत्याचार*किए यदि कोई व्यक्ति *हाथ में तिरंगा* लेकर निकलता तो सिपाही उसे *गोली मार देते या नंगा करके पीटते उल्टा लिटा कर उनपर थूकते और डंडो की बरसात*करते थे इतने अत्याचारों के बाद भी किसान पीछे नहीं हटे *निरंतर विरोध प्रदर्शन*करते गए *गांव-गांव में चंग* बजने लगे जिन पर गाया जाता था *आठ फिरंगी नौ गौरा, लडे जाट का दो छोरा* 15 मार्च 1939*को *झुंझुनू शहर में सरदार हरलाल सिंह* ने गिरफ्तारी दी हरलाल सिंह की गिरफ्तारी से *झुंझुनू पहुंचने वाले सभी मार्गों* पर पुलिस तैनात कर दी गई बड़ी संख्या में लगभग *एक लाख किसान हाथ में झंडा* लेकर झुंझुनू पहुंचे यह सब देखकर झुंझुनू में पुलिस ने *पाशविकता का नंगा नाच*किया 


[?] पुलिस भूखे *भेडियो* की तरह उन पर टूट पड़ी पुलिस ने इन्हें *पीट पीटकर अधमरा* कर दिया इस आंदोलन में *महिलाओं ने*भी भाग लिया महिलाओं पर भी *लाठियां बरसाई* गई लेकिन महिलाओं ने *पुलिस को झंडे तक नहीं पहुंच* ने दिया पुलिस ने *आत्मघाती रूप* धारण कर लिया था *लोगों पर घोड़े दौड़ाए* गए  झुंझुनू में *रक्त की नदियां* बह निकली जब यह समाचार पूरे देश को मिले तो *पूरा देश स्तब्ध रह* गया इतना होने पर भी *जयपुर नरेश मानसिह*ने अपनी टेक नहीं छोड़ी उसने *29 मार्च 1941* को झुंझुनू का दौरा किया *पंचपाना के सरदारों ने जयपुर नरेश का महानायक* की तरह स्वागत किया स्वतंत्रता प्राप्ति* के साथ यह *आंदोलन समाप्त* हो सका


[?] [?] चिड़ावा किसान आंदोलन [?] [?] 


[?] सीकर की तरह *शेखावाटी क्षेत्र के अन्य जागीदार*भी किसानों पर अत्याचार कर रहे थे 1922 में मास्टर प्यारेलाल गुप्ता* ने चिड़ावा में *अमर सेवा समिति* की स्थापना की मास्टर प्यारेलाल गुप्ता उत्तर प्रदेश के अलीगढ* जिले के रहने वाले थे मास्टर प्यारेलाल गुप्ता को *चिड़ावा का गांधी*कहा जाता था खेतडी नरेश अमर सिंह* द्वारा अमर सेवा समिति पर *दमनात्मक कार्यवाही*की गई खेतड़ी नरेश अमर सिंह के *चिड़ावा के दौरे*के दौरान *खेतडी नरेश की सेवा*के लिए अमर सेवा *समिति के सदस्यों को बेगार के लिए* बुलाया गया था 


[?] लेकिन *अमर सेवा समिति* के सदस्य ने *बेगार करने से मना* कर दिया था इससे *खेतड़ी नरेश अमर सिंह* ने पुलिस को आदेश दिया कि इसके सदस्य को *कठोर दंड* दिया जाए राजा का आदेश प्राप्त होते ही तुरंत *पुलिस ने मास्टर प्यारेलाल गुप्ता सहित समिति के 7 सदस्यों* को गिरफ्तार कर लिया था और इन पर *भयानक अत्याचार* किए गए थे इन सातों सदस्यों को *घोड़ों के पीछे बांधकर 30 मिल* तक घसीटा गया 30 मील*तक घसीटने के बाद इन सदस्यों को *खेतड़ी की जेल* में डाल दिया गया जहां पर यह सब *3 दिन तक बिना अन्न जल* के बेहोश पड़े रहे चिड़ावा अत्याचार* की सूचना पूरे देश में बिजली की तरह फैल गई चांद करण शारदा* तत्काल चिड़ावा आए और लोगों को इन *अत्याचारों के विरुद्ध तनकर खड़े*रहने का आह्वान किया सेठ जमुनालाल बजाज सेट घनश्याम दास बिरला तथा सेट बेनी प्रसाद डालमिया* आदि नेताओं ने *खेतड़ी के राजा को कठोर चिट्ठिया*ं लिखकर कड़ा विरोध जताया पूरे खेतडी में हाहाकार मचा रहा और इन सातो को *23 दिन बाद* छोड़ दिया गया शेखावाटी का किसान आंदोलन *1925 में शुरू* हुआ था और *1946 में श्री हीरालाल शास्त्री के माध्यम*से समाप्त हुआ था शेखावाटी के किसान आंदोलन *मुख्यतः आर्थिक शोषण*के विरुद्ध हुए और यह आंदोलन *अधिकतर जागीर क्षेत्रों*में हुए थे  3 दिसंबर 1945* को जयपुर राज्य प्रजामंडल द्वारा *ताज सर नामक स्थान* पर एक विशाल *जाट सम्मेलन* का आयोजन किया गया था प्रजामंडल समिति के सदस्य *श्री हीरालाल शास्त्री श्री टीकाराम पालीवाल सरदार हरलाल सिंह और एडवोकेट श्री विद्याधर कुलहरि* थे इनके द्वारा *प्रस्तुत प्रतिवेदन* को *राज्य की भूमि सुधारों के इतिहास में मेग्नाकार्टा* कहा जा सत्ता है 


[?] यह प्रतिवेदन *एक संपूर्ण दस्तावेज* था जिसमें किसानो से संबंधित सभी समस्याएं यथा *भूमि का स्थाई बंदोबस्त लगान की न्यायोचित दर भूमि पर किसान का स्वामीत्व तथा बेदखली के विरुद्ध सुरक्षा लाग-बाग बेगार तथा खेतों पर लगाए गए पेड़ों के अधिकतर* अादि का समाधान प्रस्तुत किया गया शेखावाटी का किसान आंदोलन *1925 में शुरू* हुआ था और *1946 में श्री हीरालाल शास्त्री के माध्यम*से समाप्त हुआ था शेखावाटी के किसान आंदोलन *मुख्यतः आर्थिक शोषण*के विरुद्ध हुए और यह आंदोलन *अधिकतर जागीर क्षेत्रों*में हुए थे  3 दिसंबर 1945* को जयपुर राज्य प्रजामंडल द्वारा *ताज सर नामक स्थान* पर एक विशाल *जाट सम्मेलन* का आयोजन किया गया था प्रजामंडल समिति के सदस्य *श्री हीरालाल शास्त्री श्री टीकाराम पालीवाल सरदार हरलाल सिंह और एडवोकेट श्री विद्याधर कुलहरि* थे इनके द्वारा *प्रस्तुत प्रतिवेदन* को *राज्य की भूमि सुधारों के इतिहास में मेग्नाकार्टा* कहा जा सत्ता है 


[?] यह प्रतिवेदन *एक संपूर्ण दस्तावेज* था जिसमें किसानो से संबंधित सभी समस्याएं यथा *भूमि का स्थाई बंदोबस्त लगान की न्यायोचित दर भूमि पर किसान का स्वामीत्व तथा बेदखली के विरुद्ध सुरक्षा लाग-बाग बेगार तथा खेतों पर लगाए गए पेड़ों के अधिकतर* अादि का समाधान प्रस्तुत किया गया देसी बुरा हत्याकांड की दशा का भयावह ब्यौरा दैनिक अर्जुन ने दिया था जाट प्रजापति महायज्ञ*बीसवीं सदी का *सबसे बड़ा और विराट महायज्ञ*था इसमें *100मन घी की आहुतियां*दी गई थी और *साढे तीन लाख लोगों*ने भाग लिया था शेखावाटी किसान आंदोलन* के तहत *मंडावा ठिकाने में देवी बख्श* ने *नागरिक अधिकारों की घोषणा*की थी

: * [?] [?] शेखावाटी आंदोलन जयपुर का तृतीय चरण [?] [?] *
* [?] 1931* में जयपुर राज्य *प्रजामंडल*की स्थापना हुई जाट क्षेत्रीय किसान पंचायत का *वार्षिक सम्मेलन गोठड़ा गांव में 11 से 12 सितंबर 1938* को आयोजित किया गया था
 1 मार्च 1939*को जयपुर राज्य प्रजामंडल में *किसान दिवस* मनाया था जयपुर महाराज ने प्रजामंडल के नेताओं के साथ *30 दिसंबर 1946 को समझौता* किया था 1 जनवरी 1947* को *जयपुर राज्य प्रजामंडल* में महाराजा की छत्रछाया में *उत्तरदायी सरकार*का गठन किया था इस सरकार का *मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री*को बनाया गया था  इस सरकार ने *25 जनवरी 1947* को जयपुर *जागीर लैंड टीनेंसी एक्ट-1947* पारित किया था मार्च 1947*को सीकर शेखावाटी के *किसान संघर्ष का अन्त* हुआ और *जयपुर में हीरालाल शास्त्री के नेतृत्व मे लोकप्रिय सरकार गठन* हुआ 


* [?] 
6 जून 1949* को राजस्थान सरकार ने *राजस्थान किसान सुरक्षा अधिनियम*पारित किया था 1952* में राजस्थान सरकार ने *जागीरदारी व जमीदारी उन्मूलन अधिनियम* पास किया


✍? [?] भू राजस्व निर्धारण हेतु पद्धतियां लाग एवं कर [?] ✍?

* [?] काकड़ कुट*➖ इस पद्धति के अंतर्गत *खड़ी फसल के आधार* पर उपज का अनुमान लगा कर *कर* निर्धारित किया जाता था
* [?] डोरी*➖इस पद्धति के अनुसार *प्रति बीघा के हिसाब से लगान निर्धारित*किया जाता था इसके तहत *हलगत और बीघोड़ी पद्धतियां* प्रयुक्त होती थी 


* [?] घर बराड़*➖ *मेवाड*में वसूल किया जाने वाला *कर*
* [?] घर बाब*➖ *मारवाड़*में मशहूर किया जाने वाला घर
* [?] घर की बिछोती*➖ *जयपुर* में वसूल किया जाने वाला *कर*
* [?] खिचड़ी लाग*➖किसी गॉव के पास *पडाव डालने पर राज्य की सेना हेतु भोजन* के लिए गांव के लोगों से वसूल किया जाने वाला *लाग* 


* [?] जावामाल*➖ ठिकााने की ओर से *पशुओ*ं पर लगाया गया *कर*
* [?] पान चराई*➖ *भेड़ बकरी की चराई* पर लिया जाने वाला *कर*
* [?] घास मरी*➖ *चराई करो* का सामूहिक नाम
* [?] मलबा और चौधर बाब*➖ *मारवाड़ में किसानों* से वसूले जाने वाले *कर*
* [?] कमठा लाग*➖ *गढ़ के निर्माण व मरम्मत* हेतु *दो रुपए प्रति घर*से वसूलना
* [?] रूखवाली भाछ*➖ *बीकानेर में राठौड़ों सिख्खो जोहियो बागी ठाकुरों की लूट खसोट* से देश को बचाने के लिए *नए सैनिक दायित्व की पूर्ति हेतु यह कर* वसूल किया जाता है इसे *रक्षात्मक कर* की भी संज्ञा दी गई है 


* [?] गनीम बराड*➖ *मेवाड़*के युद्ध के समय यह *युद्ध कर* वसूल किया जाता था
* [?] राम राम लाग*➖इसे *मुजरा लाग*भी कहते हैं यह *प्रति व्यक्ति ₹1*के हिसाब से वसूल की जाती है
* [?] कुंवर जी का घोड़ा*➖ *लाग* का एक प्रकार
* [?] तालियां*➖ताली शब्द उस भूमी के लिए प्रयुक्त किया जाता था जहां *शिकार के लिए सूअर पाले* जाते थे
* [?] अंगा कर*➖ मारवाड़ में *महाराजा मानसिह* के समय *प्रति व्यक्ति से एक रुपए*की दर से वसूल किया जाने वाला *कर*
* [?] दाण*➖  *मेवाड और जैसलमेर*राज्यों में *माल के आयात निर्यात* पर लगाया जाने वाला *कर*
* [?] रेख*➖वह *मापदण्ड*जिसके आधार पर *सामंतो व जमींदारों से राजकीय शुल्को* की वसूली की जाती थी
* [?] हबूब*➖ *राज्य के बढ़ते हुए खर्चे* की पूर्ति के लिए लिया जाने वाला *कर*​​​

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