विश्नोई संप्रदाय एवं जांभोजी

  सभी तिथि या date विक्रम सम्वत के अनुसार लिखी गई है

      परिचय
विश्नोई पंथ के संस्थापक
जन्म 1508 भादो वदीअष्टमी पीपासर
पिता :- लोहट जी पवार
माता :- हंसा देवी (केसर देवी)
दादा प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य की 40 वी पीढी के  पवार वंशी राजपूत रोलोजी थे  रोलोजी के दो पुत्र वह एक पुत्री थी
मूल नाम :-धनराज
जांभोजी साक्षात विष्णु के अवतारी थी
जांभोजी द्वारा उपदेश दिए गए प्रमुख लोग
1 सिकंदर लोदी
2  मोहम्मद खा नागोरी
3  राव जैतसी
4  राव सातल ,राणा सांगा, लूणकरण प्रमुख थे
ग्रुप जांभोजी का स्थाई निवास समराथल धोरा था
जांभोजी के द्वारा कहे गए शब्दों के संग्रह का नाम शब्दवाणी है इसे जम्भ वाणी या जम्ब सागर भी कहते हैं इसमें 120 शब्द है
निर्वाण लालासर साथरी में हरि ककेड़ी की नीचे 1593 में मार्गशीर्ष वदी नवमी
समाधि स्थल :-तालवा गांव (वर्तमान मुकाम)
जांभोजी के प्रमुख धाम
1  पीपासर – अवतार स्थल – नागोर
2  समराथल – उपदेश स्थल – बीकानेर
3  मुकाम – समाधि स्थल – बीकानेर
4  जागलू -नागौर
5  जम्भोलाव – जोधपुर
NOTE:-जांभोजी ने जिस दिन अपना भौतिक शरीर त्यागा उस दिन को चितल नवमी कहते हैं

विश्नोई पंथ -संप्रदाय

परिचय:- 1542 कार्तिक वदि अष्टमी को विश्नोई पंथ की स्थापना की गई

20 और 9 उपदेश को मानने के कारण यह संप्रदाय विश्नोई कहलाया =29 उपदेश
विश्नोई पंथ की अति प्रसिद्ध कवि परमानंद बणियाल
विश्नोई समाज में 24 भण्डारो की मान्यता है
विश्नोई पंथ में हवन का अत्यधिक महत्व है | विश्नोई पंथ में प्रत्येक संस्कार पर हवन व पाहल का होना अनिवार्य है |
वृक्ष रक्षा के लिए दिए गए बलिदान
1• करमा व गोरा विश्नोई का बलिदान :-1661 रामासड़ी गांव जोधपुर में
2• खेजडली बलिदान :- सम्वत 1787 में राजा अभय सिंह  के काल में गिरधरदास भंडारी (हाकिम) यह द्वारा राजा के आदेश पर 363 स्त्री पुरुष शहीद
खेजडली में 363 उन शहीदों की याद में शहीद स्मारक भी बना हुआ है |
NOTE :- 2001 में राज्य सरकार द्वारा अमृता देवी पर्यावरण पुस्कार शुरु किया गया !

विश्नोई पंथ का साहित्य :- संपूर्ण विश्नोई साहित्य को सामूहिक रुप से जाम्भाणी साहित्य कहते हैं

विश्नोई संप्रदाय पर्यावरण रक्षा हेतु वह जीवो के लिए प्राण तक का बलिदान देने के लिए प्रसिद्ध है

  सभी तिथि या date विक्रम सम्वत के अनुसार लिखी गई है

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