सिंध विजय का प्रभाव/परिणाम

☘सिंध में अरब शासन 12 वीं शताब्दी तक था भारत पर अरबों के प्रभाव को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है

?वुल्जले हेग के अनुसार➖अरबों  द्वारा सिंध विजय को भारतीय इतिहास की एक आकस्मिक कथा मात्र बताया ।
?लेनपूल के अनुसार➖सिंध पर अरब आक्रमण भारतीय इतिहास में एक घटना और इस्लामी इतिहास में परिणाम विहीन थी अतः  सिंध विजय के राजनीतिक परिणाम अल्पकालीन रहे सांस्कृतिक दृष्टि से यह महत्वपूर्ण घटना थी
?प्रसिद्ध इतिहासकार स्मिथ के अनुसार➖भारत पर अरब आक्रमण के प्रभाव को शून्य मानते है  परंतु यह पूर्णतया सत्य नहीं है भारत पर सिंध विजय का प्रभाव बहुत सीमित रहा

☘अरब इस्लाम धर्म को न तो एक राजनीतिक रूप दे सके और नहीं इसे सामाजिक, सांस्कृतिक घटक का जामा  पहना सके। हिंदुओं और बौद्धो के उच्च कोटि के नैतिक आचरण और भारतीय संस्कृति से अत्यधिक प्रभावित हुए
☘स्थानीय प्रशासन चलाने के लिए बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों और बौद्धो को शामिल किया परिणाम स्वरुप शासक और शासित वर्ग के बीच अच्छे संबंध स्थापित हो गए अंततः हिंदू संस्कृति ने इस नव शासक वर्ग पर विजय प्राप्त कर ली
☘आरंभ से ही बलपूर्वक धर्म परिवर्तन का कोई प्रयास नहीं किया गया ।बौद्धो और हिंदुओं और अग्नि पूजको को जिम्मी का दर्जा दिया गया


 ?♦जिम्मी का अर्थ♦?

☘जिम्मी का अर्थ एक ऐसी संरक्षित जनता जो मुस्लिम शासन को स्वीकार करती है और जजिया देने पर सहमत है
☘सिंध विजय के बाद सर्वप्रथम जजिया कर लगाने वाला शासक मीर कासिम था
☘अरब शासकों ने भारतीय भाषाओं ,साहित्य दर्शन ,खगोल विज्ञान, गणित और औषधि और अन्य विषयों का अध्ययन किया और इस से अत्यधिक प्रभावित हुआ
☘अलबरूनी के अनुसार अरबों द्वारा प्रयुक्त संख्याओं के चिह्न,हिंदू चिन्हों के सर्व सुंदर उदाहरण है। “हिंदसा” (संख्या का अरबी नाम) का मूल स्थान भारत है

☘अबूमशर नामक अरब सिद्धांत ज्योतिषी ने बनारस जाकर ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन किया
☘खलीफा मंसूर के समय में अरब विद्वानों ने ब्रम्हा गुप्त द्वारा लिखित ग्रंथ ब्रम्हा सिद्धांत और खंड खंड वाक अपने साथ ले गए और भारतीय विद्वान जल जाफरी  की सहायता से इसका अरबी भाषा में अनुवाद किया गया
☘खलीफा मंसूर  के समय इन पुस्तकों को विद्वान 8 वीं सदी में बगदाद ले गए थे

☘पंचतंत्र का फारसी अनुवाद खुसरो प्रथम के समय में किया गया जो  नौशीर वां  के नाम से विख्यात है कलीला और दिम्ना पंचतंत्र का अरबी अनुवाद है
☘वैज्ञानिक ज्योतिष के प्रथम सिद्धांत भी अरबों ने भारतीयों से ग्रहण किया।मंसूर के बाद हारुन खलीफा (786 से 808 ईसवी )बना। वह विद्या प्रेमी था उस के समय में अरबों ने पश्चिमी तुर्किस्तान पर आक्रमण किया और वहां के नौ बिहार नामक बौद्ध मंदिर के विद्वान महंत  बरामका को बगदाद ले आए

☘खलीफा हारून उसके गुण और ज्ञान पर मुक्त होकर उसे अपना प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया बरामका ने भारतीय हिंदू विद्वानों को बगदाद बुलाकर चिकित्सा दर्शन और ज्योतिष विद्या की संस्कृति भाषा की पुस्तको का अरबी भाषा में अनुवाद करवाया
☘अपने चिकित्सालय का निरीक्षण भी उन्होंने भारतीय  वैद्य  के साथ किया
☘कला के क्षेत्र में भी अरबों ने भारतीय कला का अनुकरण किया भारतीय गायकों की प्रवीणता और हिंदू चित्रकारों की चतुरता से अत्यधिक प्रभावित हुए
☘मंदिरों के मंडपो के  बुर्ज को उन्होंने मस्जिदों और मकबरों का बुर्ज बनाकर भारत की कला का अनुकरण किया
☘अरबों ने दिरहम नामक सिक्को को  सिंध  में प्रचलित किया अरबों ने भारतीय अंकों को अपनाया

☘मुहम्मद बिन कासिम ने अपनी बहूजातिय  सेना में हिंदुओं को भी नियुक्त किया
☘कुबाचा  मोहम्मद गौरी का एक तुर्की दास है इसे मुल्तान और सिंध का गवर्नर नियुक्त किया गया था
☘871 ईस्वी मे सिंध में खलीफाओं की सत्ता लगभग समाप्त हो गई और सिंध का मुल्तान और मंसूरा नामक दो अरब राज्य में विभाजन हो गया

☘सिंध विजय के प्रभाव के संक्षिप्त विवरण से स्पष्ट होता है कि सिंध में अरबों के अधिकार के साथ ही जीवन विज्ञान और धर्म के अनेक क्षेत्रों में हिंदू मुस्लिम संस्कृति के पारस्परिक आदान-प्रदान प्रारंभ हुआ था

?विशेष➖  यह महत्वपूर्ण है कि भारत में अरबों का प्रथम आगमन मालाबार तट (केरल) में व्यापारियों के रूप में हुआ ।अत: भारत में इस्लाम का प्रथम आगमन केरल में हुआ ना कि सिंध में

Leave a Comment

Scroll to Top