सुल्तान ग्यासुद्दीन और शेख निजामुद्दीन औलिया का संबंध

सुल्तान ग्यासुद्दीन का संबंध उस समय के महानतम संत शेख निजामुद्दीन औलिया से मैत्रीपूर्ण नहीं थे इस मनमुटाव के कई कारण बताए जाते हैं

खुसरो खॉ ने अपने राज्यारोहन के समय निजामुद्दीन औलिया को 5 लाख टंके भेंट स्वरूप भेजा जिसे शेख निजामुद्दीन औलिया ने गरीबो में दान कर दिया था | सुल्तान ग्यासुद्दीन तुगलक जब गद्दी पर बैठा तो उसने खुसरो खॉ के अनुग्रह से प्राप्त धन सभी व्यक्तियों से मांगा तो शेख निजामुद्दीन ने उस मांग को यह कह कर मना कर दिया की चूकीं धन सार्वजनिक कोष का था, इसीलिए उन्होंने उसे जनता में बाट दिया इस उत्तर से गयासुद्दीन तुगलक रुष्ट हो गए

Mohammad bin Tugalak ke samay samrajya vistar  

गयासुद्दीन तुगलक का निजामुद्दीन औलिया से द्वेष का एक अन्य कारण शेख निजामुद्दीन की संगीत के प्रति रुचि बताई जाती है सुल्तान गयासुद्दीन ने निजामुद्दीन ओलिया का इस आधार पर विरोध किया कि शेख प्रफुल्लतापूर्ण रागों और दरवेशों के नृत्य में तल्लीन रहता है और इस ढंग की भक्ति को संस्थापित धर्म के कट्टर सुन्नी लोग गैरकानूनी समझते थे लेकिन उसे अपने उद्देश्य में सफलता नहीं प्राप्त हो सके क्योंकि 56 धर्म विद्वान जिनसे सुल्तान ने परामर्श किया शेख के कार्य में कोई दोष नहीं पाया

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बंगाल के सफल अभियान के बाद सुल्तान गयासुद्दीन ने शेख निजामुद्दीन औलिया को यह संदेश भेजा था कि उसके राजधानी में प्रवेश से पूर्व दिल्ली छोड़ दें इसके प्रत्युत्तर में निजामुद्दीन औलिया ने जवाब दिया कि “”हनुज देहली दूर अस्त””( दिल्ली अभी दूर है)

सुल्तान ग्यासुद्दीन तुगलक के रचनात्मक कार्य

ग्यासुद्दीन तुगलक एक सफल शासक था उसने कुछ सृजनात्मक कार्य भी किए, कुतुब मीनार के पूर्व में तुगलकाबाद नामक नगर बसाया और उसमें दुर्ग का निर्माण करवाया और अपनी राजधानी वहां स्थानांतरित की तुगलकाबाद दूर्ग की दीवारें मिश्र की पिरामिड की भांति झुकी है उसने स्वयं अपने मकबरे का निर्माण करवाया था, उस के मकबरे के ऊपर हिंदू मंदिर के समान आमलक और कलश का प्रयोग हुआ है तथा उस पर अर्ध गोलाकार या उल्टे कटोरे की सी छतों का निर्माण किया गया है

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वास्तुकला की तुगलक शैली का प्रारंभ उसके मकबरे के निर्माण से हुआ, तुगलको के स्थापत्य की नवीन विशेषताएं जैसे ढलानदार दीवारें, ऊंचाई पर निर्माण विशालता का आभास उसकी इमारतों की विशेषताए है, यह लाल पत्थर और सफेद संगमरमर से बने हुए

गयासुद्दीन तुगलक का मूल्यांकन दिल्ली का प्रथम सुल्तान था जिसने अपने नाम के साथ गाजी (काफिरों का वध करने वाला) शब्द जोड़ा, यह उपाधि मंगोलों को पराजित करने के उपलक्ष में धारण की

ग्यासुद्दीन तुगलक ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया, वह संगीत विरोधी था, इसीलिए वह निजामुद्दीन ओलिया को पसंद नहीं करता था अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण राज्यों से सिर्फ अधीनता स्वीकार करवाई थी, जबकि गयासुद्दीन तुगलक ने दक्षिण राज्य को अपनी सल्तनत में मिलाया था अतः खिलजी काल की तुलना में यह एक महत्वपूर्ण विदेशी नीति का परिवर्तन था गयासुद्दीन तुगलक ने लगभग संपूर्ण दक्षिण भारत (कांपाली) को छोड़कर दिल्ली संतलत में मिला लिया था इससे दिल्ली सल्तनत का क्षेत्र विस्तार अधिक हो गया जिसके कारण असंख्य विद्रोह हुए और सल्तनत कमजोर हुई

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