Behavior ( व्यवहार )

Behavior ( व्यवहार )

अतिलघुतरात्मक (15 से 20 शब्द)

प्र 1. मन के अनुसार अधिगम को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- मन के अनुसार- “सीखना व्यवहार का अपेक्षाकृत स्थाई प्रगति पूर्ण रूपांतरण है। यह प्रशिक्षण या निरीक्षण के परिणाम स्वरुप क्रिया विशेष में होता है।”

प्र 2. संवेदी स्मृति क्या है?

उत्तर- संवेदी स्मृति वह स्मृति है जो प्राथमिक स्तर पर होती है या जो ज्ञानेंद्रियों तक ही अधिकतर सीमित होती है।

प्र 3. गिलफोर्ड के अनुसार अभिप्रेरणा को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- गिलफोर्ड के अनुसार- “अभिप्रेरक एक विशेष आंतरिक कारक अथवा स्थिति है जो किसी क्रिया को शुरू करने एवं जारी रखने की प्रवृत्ति रखता है।

प्र 4. आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत के अनुसार मानव अभिप्रेरक आवश्यकताएं बताइए।

उत्तर- 1.दैहिक या शारीरिक आवश्यकताएं
2. सुरक्षा की आवश्यकताएं
3. संबद्धता और स्नेह की आवश्यकताएं
4. सम्मान की आवश्यकताएं
5.आत्म सिद्धि की आवश्यकताएं

लघूतरात्मक (50 से 60 शब्द)

प्र 5. अभिप्रेरणा के संज्ञानात्मक सिद्धांत पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- अभिप्रेरणा के संज्ञानात्मक सिद्धांत का विकास टॉलमैन तथा लेविन द्वारा किए गए अध्ययनों को आधार पर हुआ। टॉल मैन और लेविन ने व्यवहार के घटित होने का प्रमुख कारण संज्ञान को बताया है अर्थात संज्ञान के बिना व्यवहार की अभिव्यक्ति नहीं हो सकती। इन दोनों मनोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यवहार का स्रोत शक्ति है। टॉल मैन का विचार है कि शक्ति का स्रोत आवश्यकताओं और अंतर्नोदों का उद्दीपन है जबकि लेविन का विचार है कि शक्ति का स्रोत आवश्यकताओं और अंतर्नोदों का उद्दीपन नहीं है बल्कि व्यक्ति में उपस्थित तनाव है। लेविन के अनुसार जब कोई व्यक्ति लक्ष्य निर्देशित करता है तो उस व्यक्ति की शक्ति के स्रोत तनाव में कमी हो जाती है।

प्र 6. विस्मरण के कारणों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। (100 शब्द)

उत्तर– 1. जैविक कारण- विस्मरण की मात्रा तब बढ़ जाती है जब व्यक्ति को मस्तिष्कीय क्षति हो जाती है। अथवा वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो जाता है और इन कारणों से जो विस्मरण होता है उस को जैविकीय विस्मरण या विस्मृति कहते हैं।

2. मनोवैज्ञानिक कारण-

  1. प्रेरणा के अभाव में धारण नहीं हो पाता है और विस्मृति अधिक होती है।
  2. संवेगात्मक दशाएं – भय, क्रोध, प्रेम आदि संवेगात्मक अवस्थाएं भी विस्मरण को प्रभावित करती है।
  3. मानसिक झुकाव- जिन उद्दीपकों की ओर से व्यक्ति की तत्परता या झुकाव अधिक होता है, वे ज्यादा दिनों तक याद रहते हैं।
  4. दमन- दमित घटनाओं का स्मरण कठिन है।
  5. रुचि के अभाव के कारण कार्य करने पर विस्मरण जल्दी होता है।
  6. व्यक्ति द्वारा किए गए व्यवहार या सीखी गई सामग्री का लोप करने पर भी स्मरण की मात्रा अधिक होती है।
  7. पढ़ी गई अध्ययन सामग्री या कार्य में समानता हो तो उस भाग का भी शीघ्र विस्मरण होता है।
  8. संवेगात्मक आघात और चिंता के कारण भी विस्मरण की मात्रा में बढ़ोतरी होती है
  9. भावात्मकता
  10. त्रुटिपूर्ण मानसिक विन्यास

प्र 7. स्मृति के एकल स्मृति मॉडल को समझाइए।

उत्तर- एकल स्मृति स्थिति या प्रक्रमण स्तर उपागम का प्रतिपादन क्रेक और लॉकहार्ट (1972) के अध्ययन के आधार पर किया गया है।
इन मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि स्मृति का स्वरूप एटकिंसन और शिफ़रीन के स्मृति की अवस्थाएं मॉडल के अनुसार ना होकर स्मृति का एकल भंडार मॉडल होता है।

इन विद्वानों के अनुसार ज्ञानेंद्रियों के द्वारा प्राप्त सूचनाओं का भंडारण न अनेक भंडारों में होता है और ना ही सूचनाएं एक भंडार से दूसरे भंडार को स्थानांतरित होती है। बल्कि स्मृति का भंडार मात्र एक ही होता है जहां से ही कूट संकेतन, संकलन और पुनरोत्पादन किया जाता है।

कुछ मनोवैज्ञानिक यह मानते हैं कि इनमें से अवस्थाएं मॉडल सही है, कुछ मनोवैज्ञानिक एकल स्मृति स्थिति मॉडल को ज्यादा महत्व देते हैं।

प्र 8. अर्जित व्यक्तिगत अभिप्रेरकों को स्पष्ट कीजिए (80 शब्द) ।

उत्तर- प्रमुख अर्जित वैयक्तिक अभिप्रेरक निम्न है-

1. जीवन लक्ष्य – व्यक्ति जब दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में आता है तब दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में आने पर अन्य व्यक्ति की भांति कोई न कोई अपना जीवन उद्देश्य निश्चित करता है। एक बार जीवन उद्देश्य निर्धारित होने पर व्यक्ति अनुक्रियाएं इस जीवन उद्देश्य से अभिप्रेरित होकर करता है। जीवन लक्ष्यों से अभिप्रेरणा व्यक्ति को तब तक मिलती रहती है जब तक वह अपने निश्चित लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर लेता है।

2. आकांक्षा स्तर- आकांक्षा स्तर का संबंध जीवन लक्ष्य से भी है। लक्ष्यों और मूल्यों को प्राप्त करने के प्रति व्यक्ति की इच्छा की तीव्रता या स्तर आकांक्षा स्तर कहलाता है। आकांक्षा स्तर से व्यक्ति के तात्कालिक लक्ष्य का संकेत मिलता है जिसे एक व्यक्ति प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है।

3. अचेतन अभिप्रेरक- फ्रायड ने मानव व्यवहार की व्याख्या में अचेतन अभिप्रेरकों को बहुत अधिक महत्व दिया है। उनके अनुसार दैनिक जीवन के अधिकतर व्यवहारों का स्रोत अचेतन मस्तिष्क है। अचेतन अभिप्रेरकों के महत्व को भारतीय ऋषि-मुनियों एवं दार्शनिकों ने भी स्वीकार किया है।

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

P K Nagauri