Category background
आधुनिक भारत का इतिहास: 19वीं सदी से 1956 तक | RAS Mains

आधुनिक भारत का इतिहास: 19वीं सदी से 1956 तक | RAS Mains

यदि आप UPSC Civil Services या RPSC RAS Mains परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आधुनिक भारत का इतिहास और 1956 तक का घटनाक्रम आपके पाठ्यक्रम का सबसे स्कोरिंग हिस्सा है। मुख्य परीक्षा में प्रश्नों का सटीक और विश्लेषणात्मक उत्तर लिखना ही आपको मेरिट में स्थान दिलाता है। इस विशेष ब्लॉग पोस्ट में परीक्षा के नवीनतम ट्रेंड्स को ध्यान में रखते हुए लघूतरात्मक (50-60 शब्द) और निबन्धात्मक (100-120 शब्द) प्रश्नों का संकलन तैयार किया गया है। इसमें सहायक संधि, औपनिवेशिक शिक्षा नीति, प्रशासनिक विवादों से लेकर 1857 की क्रांति के गहरे विश्लेषण को शामिल किया गया है। अपनी उत्तर लेखन शैली (Answer Writing Skill) को मजबूत करने और मुख्य परीक्षा में अधिकतम अंक सुनिश्चित करने के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें और अपने नोट्स में शामिल करें!

modern-indian-history-upsc-ras-mains-questions

लघूतरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 50-60 शब्द)

प्र 1. भारत का वह पहला राज्य कौन सा था जिसने अंग्रेजों की सहायक संधि स्वीकार की?

उत्तर: भारत में वेलेजली की सहायक संधि को सर्वप्रथम स्वीकार करने वाली रियासत हैदराबाद (1798 ई.) थी। हालांकि हैदराबाद में निजामशाही की स्थापना चिनकिलिच खां (आसफजाह) ने 1724 ई. में की थी, परंतु उत्तरवर्ती शासक निजाम अली के समय आंतरिक व मराठा संकटों के कारण हैदराबाद ने फ्रांसीसियों का प्रभाव समाप्त कर अंग्रेजों की अधीनता और सहायक संधि की शर्तों को स्वीकार कर लिया।

प्र 2. बसीन (वसई) की संधि पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: यह संधि 31 दिसंबर 1802 को अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के मध्य हुई थी। यशवंतराव होल्कर से पराजित होने के बाद पेशवा ने पुणे से भागकर अंग्रेजों की शरण ली थी। इस संधि के तहत पेशवा ने कंपनी की अधीनता (सहायक संधि) स्वीकार की, पूना में ब्रिटिश सेना रखना मंजूर किया और अपनी विदेश नीति अंग्रेजों को सौंप दी।

प्र 3. 'सेरमपुर त्रयी' (Serampore Trio) से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: बंगाल की सेरमपुर बस्ती में स्थापित ईसाई मिशनरियों के तीन प्रमुख सदस्यों—डॉ. विलियम केरे, विलियम वार्ड और जोशुआ मार्शमैन को सामूहिक रूप से 'सेरमपुर त्रयी' कहा जाता है। 1799 ई. में अस्तित्व में आई इस त्रयी ने भारत में आधुनिक शिक्षा, प्रिटिंग प्रेस की स्थापना, बाइबिल के भारतीय भाषाओं में अनुवाद और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में शुरुआती बुनियादी कार्य किए थे।

प्र 4. 'होम चार्जेस' (गृह प्रभार) से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: औपनिवेशिक काल में भारत की ब्रिटिश सरकार द्वारा ब्रिटेन में किए जाने वाले खर्चों को 'होम चार्जेस' कहा जाता था, जो भारत के धन निष्कासन (Drain of Wealth) का मुख्य जरिया था। इसके अंतर्गत इंग्लैंड में नियुक्त भारत सचिव के कार्यालय का व्यय, यूरोपीय अधिकारियों के वेतन एवं भत्ते, सैन्य व नागरिक खरीदारी तथा भारत में ब्रिटिश पूंजी निवेश (जैसे रेलवे) पर दिया जाने वाला गारंटीड ब्याज शामिल था।

प्र 5. हिंदी का प्रथम समाचार पत्र कब और किसके द्वारा प्रकाशित किया गया?

उत्तर: हिंदी भाषा का प्रथम समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' (उगता हुआ सूर्य) था। इसका प्रकाशन 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कलकत्ता (कोलकाता) से एक साप्ताहिक पत्र के रूप में शुरू किया गया था। भारतीय देशी भाषाई पत्रकारिता के इतिहास में यह हिंदी का पहला ठोस प्रयास था, जिसने जनचेतना जगाने में भूमिका निभाई।

प्र 6. कर्जन-किचनर विवाद क्या था?

उत्तर: यह विवाद 1902-1905 के दौरान गवर्नर-जनरल लॉर्ड कर्जन और प्रधान सेनापति लॉर्ड किचनर के मध्य सैन्य प्रशासनिक अधिकारों को लेकर हुआ। किचनर ने सेना के आधुनिकीकरण के तहत सैनिकों का कड़ा परीक्षण अनिवार्य किया, क्वेटा में सैन्य कॉलेज खोला और सेना को उत्तरी (मरी/पेशावर) व दक्षिणी (पुणे/क्वेटा) कमानों में बांटा। किचनर गवर्नर-जनरल की परिषद से 'सैनिक सदस्य' का पद समाप्त कर सभी अधिकार सेनापति को सौंपना चाहता था। ब्रिटिश सरकार द्वारा किचनर का पक्ष लेने पर कर्जन ने इसे अपना अपमान मानकर 1905 में त्यागपत्र दे दिया।

प्र 7. भारत में आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता किसे कहा जाता है और क्यों?

उत्तर: चार्ल्स ग्रांट को भारत में आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता माना जाता है। उसने 1792 ई. में "ऑब्जर्वेशन ऑन द स्टेट ऑफ सोसाइटी" नामक पुस्तक में भारतीयों को नैतिक रूप से पतित बताते हुए उन्हें शिक्षित करने व ईसाई बनाने की वकालत की। ग्रांट ने अंग्रेजी माध्यम से यूरोपीय साहित्य, विज्ञान और दर्शन की शिक्षा की रूपरेखा तैयार की, जो बाद में ब्रिटिश शिक्षा नीति का आधार बनी।

प्र 8. 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में 'आंग्ल-प्राच्य विवाद' (Anglicist-Orientalist Controversy) क्या था?

उत्तर: यह विवाद भारत में शिक्षा के माध्यम और विषय-वस्तु को लेकर था। प्राच्यवादी (Orientalists) पारंपरिक भारतीय भाषाओं और साहित्य (संस्कृत, फ़ारसी) को बढ़ावा देना चाहते थे, जबकि आंग्लवादी (Anglicists) अंग्रेजी माध्यम से पश्चिमी विज्ञान और साहित्य की शिक्षा देने के पक्ष में थे। अंततः 1835 के मैकाले मिनट द्वारा आंग्लवादियों की जीत हुई और अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाया गया।

प्र 9. राजा राममोहन राय को 'आधुनिक भारत का जनक' क्यों कहा जाता है?

उत्तर: राजा राममोहन राय ने 19वीं सदी के शुरुआत में धार्मिक और सामाजिक सुधारों की नींव रखी। उन्होंने सती प्रथा (1829 का निषेध अधिनियम), बाल विवाह और जातिवाद के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने ब्रह्म समाज की स्थापना की, तर्कवाद और एकेश्वरवाद का समर्थन किया तथा प्रेस व आधुनिक शिक्षा की स्वतंत्रता की वकालत कर देश में नवजागरण फूंक दिया।

प्र 10. वर्ष 1928 की 'नेहरू रिपोर्ट' का मुख्य ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: नेहरू रिपोर्ट (मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में) भारतीयों द्वारा अपने लिए एक संविधान बनाने का पहला ठोस प्रयास था। साइमन कमीशन की चुनौती के जवाब में तैयार इस रिपोर्ट में भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस (अधिराज्य का दर्जा), मौलिक अधिकार, प्रांतीय स्वायत्तता और सांप्रदायिक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त कर संयुक्त निर्वाचन की सिफारिश की गई थी।

प्र 11. 'कैबिनेट मिशन योजना (1946)' के प्रमुख तीन प्रस्ताव क्या थे?

उत्तर: इस योजना के तीन मुख्य प्रस्ताव थे:

  1. ब्रिटिश प्रांतों और रियासतों को मिलाकर एक 'भारतीय संघ' (Union of India) का गठन किया जाए।
  2. भारत का एक नया संविधान बनाने के लिए एक 'संविधान सभा' का चुनाव किया जाए।
  3. नए संविधान के निर्माण तक देश का शासन चलाने के लिए एक अंतरिम सरकार की स्थापना हो।

प्र 12. वर्ष 1956 के 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम' के तहत भारत में क्या प्रशासनिक बदलाव किए गए?

उत्तर: फजल अली आयोग की सिफारिशों के आधार पर पारित इस अधिनियम ने पूर्ववर्ती 'भाग क, ख, ग और घ' राज्यों के जटिल वर्गीकरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया। इसके स्थान पर भाषाई और प्रशासनिक सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे देश को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया, जिससे आधुनिक भारत का राजनीतिक मानचित्र तैयार हुआ।

निबन्धात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 100-120 शब्द)

प्र 13. 1857 के विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश नीति में आए नीतिगत बदलावों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 1857 के महाविद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत को हिला कर रख दिया था, जिसके बाद भविष्य में ऐसे किसी जन-विद्रोह को रोकने के लिए ब्रिटिश नीति में व्यापक बदलाव किए गए:

  1. सामाजिक सुधारों से दूरी: सती प्रथा निषेध जैसे प्रगतिशील सामाजिक सुधारों की प्रक्रिया को रोक दिया गया और सामाजिक मामलों में पूरी तरह नकारात्मक व तटस्थ दृष्टिकोण अपनाया गया।
  2. रूढ़िवादिता को संरक्षण: भारतीय समाज के प्रगतिशील तत्वों को नकारते हुए अपने साम्राज्यिक हितों की रक्षा के लिए कट्टरपंथी और रूढ़िवादी तत्वों (जैसे जमींदार व राजा) को समर्थन दिया गया।
  3. बांटो और राज करो (Divide and Rule): संकीर्णता और सतर्कता का दृष्टिकोण अपनाते हुए सांप्रदायिक व जातीय आधार पर फूट डालने की नीति को तेज किया गया।
  4. शिक्षा में अवरोध: प्राथमिक व तकनीकी शिक्षा की अवहेलना की गई और राष्ट्रवाद के प्रसार के डर से भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार का विरोध किया जाने लगा।
  5. नस्लीय श्रेष्ठता: शासन की मूल विशेषताएं पहले जैसी ही रहीं, जिसमें श्वेत नस्लवाद का सिद्धांत, भारतीयों को सभ्य बनाने का ढोंग और ईसाई मिशनरियों के छिपे कार्य जारी रहे।

प्र 14. "1857 का विद्रोह एक सैनिक विद्रोह मात्र था।" क्या आप इस कथन से सहमत हैं? विवेचना कीजिए।

उत्तर: ब्रिटिश इतिहासकार सर जॉन लॉरेंस और सीले के अनुसार, 1857 की क्रांति केवल एक स्वार्थी, देशभक्ति रहित 'सैनिक विद्रोह' था, जिसे न तो स्थानीय नेतृत्व प्राप्त था और न ही जनसामान्य का समर्थन। इसके पीछे वे चर्बी वाले कारतूस की तात्कालिक घटना को मुख्य आधार बनाते हैं।

परंतु गहन विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि इसे केवल सैन्य विद्रोह कहना तार्किक रूप से अनुचित है, क्योंकि:

  1. व्यापक जन-भागीदारी: यह विद्रोह निसंदेह छावनियों से शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही यह जन-विद्रोह में बदल गया। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिमी बिहार में सैनिकों के साथ-साथ असैनिक वर्ग, शासक, भूमिपति और कृषक भी इसमें कूद पड़े।

  2. क्षेत्रीय समर्थन: राजस्थान (आउवा, कोटा) और महाराष्ट्र में जनता ने विद्रोहियों का खुलकर साथ दिया। अलवर, दौसा और भरतपुर जैसे क्षेत्रों में गुर्जरों व अन्य समुदायों ने ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी।

  3. न्यायिक साक्ष्य: 1858-59 के ब्रिटिश मुकदमों में हजारों आम नागरिकों को सैनिकों के साथ विद्रोह का दोषी पाकर दंडित किया गया, जो सिद्ध करता है कि नागरिक वर्ग भी सक्रिय था।

निष्कर्ष: यद्यपि पहल सिपाहियों ने की थी, परंतु अपने स्वरूप और विस्तार में यह एक व्यापक ब्रिटिश-विरोधी राष्ट्रीय जन-आंदोलन था।

प्र 15. भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गांधी के 'असहयोग आंदोलन (1920-22)' की भूमिका और इसके अचानक स्थगन के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर: असहयोग आंदोलन भारत का पहला वास्तविक 'जन आंदोलन' था, जिसने राष्ट्रीय चेतना को समाज के निचले तब के तक पहुँचाया। गांधी जी के आह्वान पर वकीलों ने अदालतें छोड़ीं, छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़े और विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। इस आंदोलन ने अंग्रेजों के मन में पहली बार जनशक्ति का डर पैदा किया।

फरवरी 1922 में 'चौरी-चौरा' की हिंसक घटना से दुखी होकर गांधी जी ने आंदोलन अचानक वापस ले लिया। इस स्थगन से देश में निराशा फैल गई और कांग्रेस के भीतर मतभेद उभर आए, जिसके कारण 'स्वराज पार्टी' का गठन हुआ। हालांकि, इस आंदोलन ने भारतीयों के भीतर से अंग्रेजों का भय हमेशा के लिए समाप्त कर दिया और भविष्य के बड़े आंदोलनों की मजबूत आधारशिला रखी।

प्र 16. स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1947 से 1956 के दौरान भारतीय रियासतों के एकीकरण और पुनर्गठन की प्रक्रिया में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और उनके समाधान पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत के सामने 562 से अधिक देशी रियासतों के एकीकरण की विकट चुनौती थी। माउंटबैटन योजना ने रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया, जिससे भारत के खंडित होने का खतरा था। सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन ने कूटनीति, प्रिवी पर्स के प्रलोभन और देशभक्ति की अपील से अधिकांश रियासतों का विलय करा लिया।

जूनागढ़ में जनमत संग्रह, हैदराबाद में सैन्य कार्रवाई ('ऑपरेशन पोलो') और कश्मीर में इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन (विलय पत्र) के जरिए विवाद सुलझाए गए। इसके बाद भाषाई आधार पर राज्यों की मांग उठने लगी (जैसे पोग्गी श्रीरामुलु का अनशन)। सरकार ने फजल अली आयोग का गठन किया, जिसकी रिपोर्ट पर 'राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956' पास हुआ और भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन कर देश को प्रशासनिक स्थिरता दी गई।

विशेष आभार (Special Thanks): इस प्रश्नोत्तरी/सामग्री को तैयार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सम्मानित लेखकगण — श्री पी. के. नागौरी एवं श्रीमती रजनी जी तनेजा का हम सहृदय धन्यवाद करते हैं।

अन्य महत्वपूर्ण नोट्स और टेस्ट इन्हें भी ज़रूर देखें।

कैसी लगी आपको 'आधुनिक भारत का इतिहास' की यह स्पेशल पोस्ट? अपने विचार और मूल्यवान सुझाव कमेंट सेक्शन में जरूर शेयर करें! यदि यह प्रयास आपकी तैयारी में मददगार रहा हो, तो इसे अपने साथी एस्पिरेंट्स के साथ भी शेयर करें। निरंतर मेहनत करते रहें, सफलता आपके कदम चूमेगी।

अधिक क्विज़ के लिए अभी 9015746713 पर WhatsApp message करें! All the best!

Leave a Reply

आधुनिक भारत का इतिहास: 19वीं सदी से 1956 तक | RAS Mains