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स्वातंत्र्योत्तर काल में राष्ट्रीय एकीकरण एवं पुनर्गठन: Important Mains QA

स्वातंत्र्योत्तर काल में राष्ट्रीय एकीकरण एवं पुनर्गठन: Important Mains QA

UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों (जैसे RAS, MPPSC, UPPSC) की मुख्य परीक्षा के इतिहास खंड में 'स्वातंत्र्योत्तर भारत (Post-Independence India)' एक अत्यधिक अंकदायी और महत्वपूर्ण विषय है। इस कालखंड में भारत ने न केवल भौगोलिक अखंडता हासिल की, बल्कि विविधता को समेटते हुए एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र की नींव भी रखी। मुख्य परीक्षा में सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र सटीक और प्रभावी Mains Answer Writing है। यह पोस्ट आपको इस अध्याय के सभी मुख्य व्यक्तित्वों (जैसे शास्त्री जी, अमृत कौर, श्रीरामालू), राष्ट्र निर्माण की चुनौतियों और जूनागढ़ विलय जैसे ज्वलंत विषयों पर परीक्षा-मानक मॉडल उत्तर प्रदान करती है। यदि आप अपनी उत्तर लेखन शैली को निखारकर मेरिट लिस्ट में अपनी जगह पक्की करना चाहते हैं, तो इन चुनिंदा प्रश्नों का अभ्यास आज ही से शुरू करें!

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लघूतरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 50-60 शब्द)

Q1. स्वतंत्रता के समय भारतीय रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को रेखांकित कीजिए।

उत्तर: सरदार पटेल ने गृह मंत्री के रूप में अपनी दूरदर्शिता, कूटनीति और दृढ़ संकल्प (लौह नीति) से 560 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया। उन्होंने 'गाजर और छड़ी' (प्रिवी पर्स और सैन्य बल) की नीति अपनाई। जूनागढ़, हैदराबाद और कश्मीर जैसी जटिल रियासतों के विलय में उनकी रणनीतिक सूझबूझ ने अखंड भारत की नींव रखी।

Q2. राज्य पुनर्गठन आयोग (1953) की मुख्य सिफारिशें क्या थीं?

उत्तर: फजल अली की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को स्वीकार किया, लेकिन 'एक राज्य-एक भाषा' के सिद्धांत को खारिज कर दिया। इसकी मुख्य सिफारिशों के आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए। आयोग ने राष्ट्रीय सुरक्षा, प्रशासनिक सुगमता और भाषाई-सांस्कृतिक समरूपता को मुख्य आधार माना।

Q3. 'ऑपरेशन पोलो' क्या था और यह भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण के लिए क्यों आवश्यक था?

उत्तर: सितंबर 1948 में हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ में शामिल करने के लिए चलाई गई सैन्य कार्रवाई को 'ऑपरेशन पोलो' कहा जाता है। हैदराबाद के निजाम ने स्वतंत्र रहने या पाकिस्तान में मिलने का प्रयास किया था। भारत के मध्य में स्थित होने के कारण सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता और भौगोलिक अखंडता के लिए इसका विलय अनिवार्य था।

Q4. 1950 और 60 के दशक में भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के पक्ष और विपक्ष में मुख्य तर्क क्या थे?

उत्तर: पक्ष में तर्क: प्रशासनिक सहूलियत, क्षेत्रीय भाषाओं का विकास और लोकतांत्रिक सहभागिता में वृद्धि।

विपक्ष में तर्क: राष्ट्रीय एकता को खतरा, अलगाववाद की भावना का उदय और अन्य क्षेत्रों में नए राज्यों की मांग उठने का डर (जैसे धर और JVP समिति की चिंताएं)।

Q5. फ्रांस और पुर्तगाल के अधीन रहे उपनिवेशों (जैसे गोवा, पोंडिचेरी) का भारतीय संघ में विलय किस प्रकार हुआ?

उत्तर: फ्रांसीसी उपनिवेश (पोंडिचेरी, कराइकल, माहे): 1954 में शांतिपूर्ण कूटनीतिक वार्ताओं और जनमत के आधार पर भारत को सौंपे गए।

पुर्तगाली उपनिवेश (गोवा, दमन और दीव): पुर्तगाल के अड़ियल रुख के कारण दिसंबर 1961 में सैन्य कार्रवाई (ऑपरेशन विजय) द्वारा इन्हें मुक्त कराकर भारत में मिलाया गया।

Q6. लाल बहादुर शास्त्री?

उत्तर: लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 1930 के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। वे 1951 से 1964 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहे। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उन्होंने देश के जवानों और किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए 'जय जवान जय किसान' का ऐतिहासिक नारा दिया।

Q7. राजकुमारी अमृत कौर?

उत्तर: राजकुमारी अमृत कौर (1889-1964) कपूरथला के राजपरिवार से संबद्ध एक प्रमुख गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्हें माता से विरासत में ईसाई धर्म मिला था। वह संविधान सभा की सदस्य तथा स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल में शामिल होने वाली देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं, जिन्होंने 1957 तक इस पद पर कार्य किया।

Q8. भारत की आजादी के समय तक कौन सी रियासतें भारत संघ में सम्मिलित नहीं हुई थीं?

उत्तर: 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के समय तक देश की अधिकांश रियासतें भारतीय संघ में शामिल हो चुकी थीं, किंतु तीन प्रमुख रियासतें—जूनागढ़, जम्मू-कश्मीर तथा हैदराबाद—भारत संघ में सम्मिलित नहीं हुई थीं। इन तीनों रियासतों ने अपनी भौगोलिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण स्वतंत्र रहने या अन्य विकल्प चुनने का प्रयास किया था।

Q9. पोट्टी श्रीरामालू?

उत्तर: पोट्टी श्रीरामालू एक प्रख्यात गांधीवादी कार्यकर्ता थे, जिन्होंने नमक सत्याग्रह में भाग लेने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। उन्होंने मद्रास प्रांत से अलग 'आंध्र प्रदेश' (भाषाई आधार पर तेलुगु भाषियों के लिए) राज्य के गठन की मांग को लेकर 19 अक्टूबर 1952 से आमरण अनशन शुरू किया और 56 दिनों के अनशन के बाद 15 दिसंबर 1952 को उनका निधन हो गया।

Q10. स्वातंत्र्योत्तर काल में राष्ट्र के समक्ष मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियां क्या थीं?

उत्तर: स्वतंत्रता के समय भारत के सामने निम्नलिखित तीन बुनियादी चुनौतियां थीं:

  1. राष्ट्र निर्माण व एकता: विविधता से भरे भारतीय समाज को एकता के सूत्र में पिरोना, जहाँ सभी संस्कृतियों के लिए जगह हो।
  2. लोकतंत्र की स्थापना: लोकतांत्रिक संविधान के अनुरूप वास्तविक लोकतांत्रिक व्यवहार और राजनीतिक व्यवस्था को कायम करना।
  3. समावेशी विकास: ऐसा आर्थिक विकास सुनिश्चित करना जिससे संपूर्ण समाज का भला हो और प्रभावी नीतियों द्वारा गरीबी का खात्मा किया जा सके।

Q11. देशी रियासतों के एकीकरण में आ रही प्रमुख समस्याएं कौन सी थीं?

उत्तर: रियासतों के एकीकरण की मुख्य समस्याएं निम्नलिखित थीं:

  • देशी राजाओं का स्वतंत्र रहने या संप्रभु बने रहने का दृष्टिकोण।
  • प्रजामंडल आंदोलनों को सहयोग देने के कारण राजाओं का कांग्रेस के प्रति आलोचनात्मक रुख।
  • रियासतों के मध्य आपसी समन्वय और किसी स्पष्ट, सर्वसम्मत नीति का अभाव।
  • एकीकरण के पश्चात राजाओं के विशेषाधिकारों (प्रिवी पर्स) की समाप्ति की संभावना का डर।
  • आकार में बड़ी और छोटी रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने की जटिल प्रक्रिया तथा उनकी बिखरी हुई भौगोलिक व सांस्कृतिक स्थिति।

निबन्धात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 100-150 शब्द)

Q12. स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रशासनिक एकीकरण के साथ-साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक एकीकरण की थी। इस कथन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: 1947 में भारत न केवल प्रशासनिक रूप से विभाजित था (ब्रिटिश भारत और रियासतें), बल्कि भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधताओं से भरा था।

  • प्रशासनिक एकीकरण: सरदार पटेल के नेतृत्व में रियासतों का विलय कर भौगोलिक अखंडता तो हासिल कर ली गई, लेकिन विविधता को एक सूत्र में पिरोना बड़ी चुनौती थी।
  • भावनात्मक व सांस्कृतिक चुनौती: विभाजन के दंगों के कारण सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ चुका था। इसके तुरंत बाद दक्षिण भारत में भाषाई आधार पर राज्यों की मांग तेज हो गई, जिससे क्षेत्रीय असंतोष उभरा। नेहरू सरकार ने 'विविधता में एकता' की नीति अपनाई।

मूल्यांकन: भारत ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और फजल अली आयोग के भाषाई पुनर्गठन को अपनाकर क्षेत्रीय आकांक्षाओं को समायोजित किया। प्रशासनिक ढांचे (IAS/IPS) ने देश को जोड़ा, वहीं सांस्कृतिक सहिष्णुता ने आंतरिक अलगाववाद को कमजोर कर भारत को एक मजबूत राष्ट्र राज्य बनाया।

Q13. रियासतों के विलय के संदर्भ में 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसन' (Instrument of Accession) और 'प्रिवी पर्स' (Privy Purse) की अवधारणा को समझाते हुए इसके तात्कालिक प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर: इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेसन: यह एक कानूनी दस्तावेज था जिसके तहत रियासतों के शासकों ने स्वेच्छा से अपनी संप्रभुता भारत को सौंपी। इसके तहत मुख्य रूप से तीन विषय - रक्षा, विदेशी मामले और संचार भारत सरकार को दिए गए।

प्रिवी पर्स: रियासतों के शासकों को भारतीय संघ में शामिल होने के बदले दी जाने वाली एक निश्चित वार्षिक वित्तीय राशि और विशेषाधिकार थे, ताकि उनका राजसी खर्च और सम्मान बना रहे।

तात्कालिक प्रभाव:

  1. रक्तहीन क्रांति: इन दो रणनीतियों के कारण अधिकांश रियासतों ने बिना किसी बड़े संघर्ष के शांतिपूर्ण ढंग से भारत में विलय स्वीकार कर लिया।
  2. भू-राजनीतिक सुदृढ़ता: भारत की सीमाओं का निर्धारण आसान हुआ और एक एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू की जा सकी।
  3. लोकतांत्रिकरण: राजाओं की निरंकुश सत्ता समाप्त हुई और पूर्व रियासतों की जनता को मुख्यधारा के लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त हुए।

Q14. नेहरू-पटेल-पंत समिति (JVP समिति) और फजल अली आयोग के दृष्टिकोण में क्या अंतर था? भाषाई पुनर्गठन ने भारतीय संघवाद को किस प्रकार मजबूत किया?

उत्तर: दृष्टिकोण में अंतर: 1948 में गठित JVP समिति ने देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को सर्वोपरि मानते हुए भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को पूरी तरह टाल दिया था। इसके विपरीत, 1953 के फजल अली आयोग ने जमीनी हकीकत और जनता की भावनाओं को समझते हुए भाषा को पुनर्गठन का एक प्रमुख (लेकिन एकमात्र नहीं) आधार स्वीकार किया।

संघवाद की मजबूती:

  • क्षेत्रीय पहचान को मान्यता: भाषा के आधार पर राज्यों के गठन से क्षेत्रीय संस्कृतियों को पहचान मिली, जिससे केंद्र के प्रति उनका असंतोष कम हुआ।
  • लोकतंत्र का विकेंद्रीकरण: स्थानीय भाषा में प्रशासन होने से आम जनता की शासन में भागीदारी बढ़ी।
  • विविधता का समायोजन: इसने साबित किया कि भारत में भाषाई विविधता राष्ट्रीय एकता की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक है।

इस पुनर्गठन ने अलगाववादी प्रवृत्तियों को दबाकर भारतीय संघ को और अधिक लचीला, लोकतांत्रिक और सहयोगात्मक बनाया।

Q15. देशी रियासतों के विलय एवं राजनीतिक एकीकरण के तहत जूनागढ़ का भारत संघ में विलय कैसे हुआ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जूनागढ़ सौराष्ट्र (गुजरात) के तट पर स्थित एक छोटी सी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूभाग से घिरी हुई थी। 15 अगस्त 1947 को जूनागढ़ के मुस्लिम नवाब ने भौगोलिक विसंगति के बावजूद अपने राज्य का विलय पाकिस्तान में करने की घोषणा कर दी और पाकिस्तान ने इसे स्वीकार भी कर लिया।

किंतु, जूनागढ़ की बहुसंख्यक आबादी हिंदू थी जो भारत संघ में शामिल होना चाहती थी। नवाब के फैसले के खिलाफ जनता ने एक व्यापक जनांदोलन संगठित किया, जिससे डरकर नवाब पाकिस्तान भाग गया। इसके बाद जूनागढ़ के दीवान शाहनवाज भुट्टो ने भारत सरकार को हस्तक्षेप करने और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए आमंत्रित किया।

परिणामस्वरूप, भारतीय सेना ने वहां शांति स्थापना की। अंततः, स्थिति को पूर्णतः लोकतांत्रिक बनाने के लिए फरवरी 1948 में रियासत में जनमत संग्रह (Plebiscite) कराया गया। जनमत संग्रह में वहां की जनता ने भारी बहुमत से भारत के पक्ष में निर्णय दिया, जिसके बाद जूनागढ़ को आधिकारिक रूप से भारत संघ में विलीन कर लिया गया।

Q16. स्वातंत्र्योत्तर काल में भाषाई राज्यों की मांग से देश की एकता एवं अखंडता पर आंच आने की चिंता थी, लेकिन इसके विपरीत देश की एकता और ज्यादा मजबूत हुई। विवेचना कीजिए।

उत्तर: स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में राष्ट्रीय नेतृत्व को आशंका थी कि भाषाई आधार पर राज्यों के गठन से अलगाववाद की भावना पनपेगी, जिससे नवनिर्मित राष्ट्र की अखंडता खतरे में पड़ जाएगी। इसी डर से जेवीपी (JVP) समिति ने इस मांग को टाल दिया था। परंतु, तीव्र जनांदोलनों के बाद जब भाषावार पुनर्गठन को अपनाया गया, तो परिणाम आशंकाओं के बिल्कुल विपरीत निकले।

भाषाई पुनर्गठन ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को राष्ट्रीय मुख्यधारा में समायोजित कर अलगाववाद के खतरे को कम किया। इसने सत्ता और राजनीति का रास्ता अंग्रेजी भाषी अभिजात वर्ग से निकालकर स्थानीय भाषा बोलने वाले आम जनमानस के लिए खोल दिया, जिससे लोकतंत्र का वास्तविक विकेंद्रीकरण हुआ।

यह प्रयोग दर्शाता है कि भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि विविधताओं और उनके आपसी मतभेदों को पहचानना व स्वीकार करना था। विचारों और जीवन पद्धतियों की इस बहुलता ने संघवाद को और अधिक लचीला व मजबूत बनाया। यद्यपि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों (जैसे महाराष्ट्र में विदर्भ, प. बंगाल में उत्तर भाग) में छोटे राज्यों की मांग उठती रहती है—जिसकी तुलना अमेरिका के 50 राज्यों से की जाती है—परंतु भाषाई पुनर्गठन ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक सुगमता के लिए राज्यों की संख्या का बढ़ना राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा नहीं है।

 

विशेष आभार (Special Thanks): इस प्रश्नोत्तरी/सामग्री को तैयार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सम्मानित लेखकगण — श्री पी. के. नागौरी एवं SGGP Team का हम सहृदय धन्यवाद करते हैं। 

अन्य महत्वपूर्ण नोट्स और टेस्ट इन्हें भी ज़रूर देखें।

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