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राजस्थान की प्रमुख विभूतियां: RAS & UPSC Mains Model Q&A

राजस्थान की प्रमुख विभूतियां: RAS & UPSC Mains Model Q&A

RAS एवं UPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं के मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में 'राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विभूतियां' एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अंकदायी खंड है। इन महापुरुषों के जीवन, संघर्ष और योगदान को समझना न केवल परीक्षा में सटीक और प्रभावी उत्तर-लेखन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह राजस्थान के गौरवशाली अतीत और वर्तमान के प्रति हमारी समझ को भी गहरा करता है। यह पोस्ट विशेष रूप से एस्पिरेंट्स को लघूतरात्मक (50-60 शब्द) और निबन्धात्मक (100-150 शब्द) प्रश्नों के प्रारूप में उत्तर-लेखन का अभ्यास कराने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस खंड से प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं, इसलिए इस पोस्ट को अंत तक ध्यानपूर्वक पढ़ें और प्रत्येक उत्तर के प्रारूप को समझें, ताकि आप मुख्य परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। इन विभूतियों का जीवन आपके लिए न केवल ज्ञान का, बल्कि प्रेरणा का भी स्रोत बनेगा।

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भाग-1: लघूतरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 50 - 60 शब्द)

प्रश्न 1. स्वतंत्रता आंदोलन में 'केसरी सिंह बारहठ' के योगदान को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: केसरी सिंह बारहठ राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी एवं राष्ट्रीय चेतना के वाहक थे।

  • प्रमुख योगदान: इन्होंने 1903 में मेवाड़ महाराणा फ़तेह सिंह को कर्जन के दरबार में जाने से रोकने के लिए डिंगल भाषा में 'चेतावनी रा चूंगट्या' (13 सोरठे) लिखा।
  • वीर भारत सभा: 1910 में कोटा में 'वीर भारत सभा' की स्थापना कर युवाओं में राष्ट्रवाद जगाया।
  • त्याग: इनका पूरा परिवार (भाई जोरावर सिंह व पुत्र प्रताप सिंह) देश की स्वतंत्रता हेतु समर्पित रहा।

प्रश्न 2. बिजोलिया किसान आंदोलन में विजय सिंह पथिक की भूमिका का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: विजय सिंह पथिक (मूल नाम: भूप सिंह) राजस्थान में किसान आंदोलन के जनक माने जाते हैं।

  • नेतृत्व: इन्होंने 1916 में बिजोलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व संभाला तथा 'ऊपरमाल पंच बोर्ड' (1917) की स्थापना की।
  • जन-जागृति: 'प्रताप' समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी) के माध्यम से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
  • संगठन: 'राजस्थान सेवा संघ' (1919) की स्थापना कर सामंती शोषण के विरुद्ध किसानों को संगठित एवं अनुशासित किया।

प्रश्न 3. स्वामी केशवानंद के सामाजिक एवं शैक्षणिक योगदान पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: स्वामी केशवानंद राजस्थान के महान समाज सुधारक एवं शिक्षा संत थे।

  • शिक्षा प्रसार: इन्होंने ग्रामीण एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों (विशेषकर बीकानेर संभाग) में 300 से अधिक शालाओं एवं 'ग्रामोत्थान विद्यापीठ, संगरिया' का निर्माण/संचालन किया।
  • सामाजिक सुधार: छुआछूत, बाल विवाह एवं पर्दा प्रथा के उन्मूलन तथा नारी शिक्षा के लिए निरंतर कार्य किया।
  • संग्रहालय: संगरिया में एक समृद्ध पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित किया। उन्हें 'शिक्षा संत' की उपाधि दी गई।

प्रश्न 4. प्रजामंडल आंदोलन में जयनारायण व्यास के योगदान का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: जयनारायण व्यास (शेर-ए-राजस्थान) मारवाड़ में राजनीतिक जागृति के प्रमुख सूत्रधार थे।

  • संगठन निर्माण: इन्होंने मारवाड़ सेवा संघ (1920), मारवाड़ यूथ लीग तथा मारवाड़ लोक परिषद के गठन में मुख्य भूमिका निभाई।
  • पत्रकारिता: 'आगीबाण' (राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक पत्र), 'पीप' (अंग्रेजी) और 'तरुण राजस्थान' के माध्यम से उत्तरदायी शासन की मांग उठाई।
  • राजनीतिक भूमिका: स्वतंत्रता के बाद वे राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहे।

प्रश्न 5. पर्यावरण संरक्षण एवं बलिदान की प्रतीक 'अमृता देवी विश्नोई' का ऐतिहासिक महत्व बताइए।

उत्तर: अमृता देवी विश्नोई पर्यावरण संरक्षण हेतु प्राणों की आहुति देने वाली अमर विभूति हैं।

खेजड़ली बलिदान (1730 ई.): जोधपुर के राजा अभय सिंह के काल में खेजड़ी वृक्षों को कटने से बचाने के लिए अमृता देवी के नेतृत्व में 363 विश्नोई नर-सारियों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

महत्व: यह विश्व इतिहास का अद्वितीय वृक्ष-रक्षक आंदोलन था। इनकी स्मृति में राज्य सरकार द्वारा 'अमृता देवी विश्नोई पर्यावरण पुरस्कार' प्रदान किया जाता है।

प्रश्न 6. 'काली बाई' के अमर बलिदान का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर: काली बाई डूंगरपुर जिले के रास्तापाल गांव की 13 वर्षीय भील बालिका थीं, जिन्होंने शिक्षा एवं गुरु-भक्ति हेतु अपना बलिदान दिया।

घटना (जून 1947): रास्तापाल सेवा संघ की पाठशाला को बंद कराने आई ब्रिटिश/रियासती पुलिस जब उनके गुरु सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर घसीट रही थी, तब काली बाई ने बिना डरे दांतेली से रस्सी काट दी।

परिणाम: पुलिस की गोलियों से काली बाई शहीद हो गईं। वे राजस्थान में साक्षरता एवं स्वाभिमान की अमर प्रतीक हैं।

प्रश्न 7. कृपाल सिंह शेखावत कौन थे?

उत्तर: कलाविद्, पद्म श्री और पद्म भूषण से सम्मानित सीकर के कृपाल सिंह शेखावत भारतीय पारंपरिक कला के युग पुरुष एवं 'ब्लू पॉटरी' के पर्याय थे। उन्होंने इस कला में पारंपरिक रंगों के अतिरिक्त नए रंगों का समावेश कर 'कृपाल शैली' ईज़ाद की। वे राजस्थान रत्न पुरस्कार (2012) से भी सम्मानित हो चुके हैं।

प्रश्न 8. डॉक्टर कोमल कोठारी के योगदान पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: 'रूपायन संस्थान', बोरुंदा (जोधपुर) के संस्थापक डॉक्टर कोमल कोठारी ने कलाकार, लोक संगीत, लोक वाद्य, लोक गायन एवं लोक साहित्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने का उल्लेखनीय कार्य किया। उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और राजस्थान रत्न (2012) सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

प्रश्न 9. लक्ष्मी कुमारी चुंडावत के साहित्यिक और सामाजिक योगदान का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

उत्तर: देवगढ़ की पूर्व विधायक, सांसद एवं प्रसिद्ध साहित्यकार लक्ष्मी कुमारी चुंडावत का राजस्थानी साहित्य में अतुलनीय योगदान है। उन्हें उनके साहित्यिक कार्यों के लिए पद्म श्री और राजस्थान रत्न (2012) पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। वे राजस्थान की एक प्रमुख सामाजिक और राजनीतिक हस्ती रही हैं।

प्रश्न 10. सीताराम लालस के 'राजस्थानी शब्दकोश' के महत्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: 'राजस्थानी जुबान की मशाल' नाम से प्रसिद्ध सीताराम लालस ने राजस्थानी भाषा का विशाल शब्दकोश तैयार किया, जिसमें 10 खंडों में दो लाख से अधिक शब्द हैं। जोधपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. और भारत सरकार ने पद्म श्री से सम्मानित किया। यह शब्दकोश राजस्थानी भाषा के संरक्षण और संवर्धन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

प्रश्न 11. देवेंद्र झांझडिया के खेल उपलब्धियों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर: राजस्थान के पैरा जेवेलिन थ्रोअर (भाला फेंक) देवेंद्र झांझडिया अब तक पैरालंपिक खेलों में दो बार स्वर्ण पदक (एथेंस 2004, रियो 2016) और एक बार रजत पदक (टोक्यो 2020) जीत चुके हैं। वे पहले पैरा-खिलाड़ी हैं जिन्हें खेल रत्न अवॉर्ड और पद्म भूषण (2022) जैसे सर्वोच्च सम्मान मिले हैं।

प्रश्न 12. दौलत सिंह कोठारी के वैज्ञानिक और शैक्षणिक योगदान का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: उदयपुर में जन्मे प्रतिभाशाली वैज्ञानिक दौलत सिंह कोठारी दिल्ली विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर और पंडित नेहरू के रक्षा सलाहकार रहे। उन्होंने 1964-66 में शिक्षा आयोग (कोठारी आयोग) की अध्यक्षता की, जिसने आधुनिक भारतीय शिक्षा की नींव रखी। उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण (1973) से अलंकृत किया गया।

भाग-2: निबन्धात्मक प्रश्न (शब्द सीमा: 100 - 150 शब्द)

प्रश्न 13. राजस्थान के जनजातीय पुनर्जागरण में गोविंद गुरु एवं उनके 'भगत आंदोलन' के योगदान का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर: 19वीं सदी के उत्तरार्ध में गोविंद गुरु ने वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) के भील एवं गरासिया आदिवासियों में सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक चेतना का संचार किया।

प्रमुख योगदान:

  1. सम्प सभा की स्थापना (1883): आदिवासियों में आपसी बंधुत्व, कुरीतियों के उन्मूलन तथा अधिकार चेतना हेतु 'सम्प सभा' का गठन किया।
  2. भगत आंदोलन: इसके माध्यम से शराबबंदी, मांस-भक्षण त्याग, शिक्षा-प्रसार और बेगार प्रथा के विरोध पर बल दिया गया।
  3. मानगढ़ धाम नरसंहार (1913): 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर सम्प सभा के सम्मेलन पर ब्रिटिश सेना ने अंधाधुंध गोलाबारी की, जिसमें लगभग 1500 भील शहीद हुए। इसे 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' कहा जाता है।

मूल्यांकन: गोविंद गुरु ने आदिवासियों को न केवल धार्मिक रूप से परिष्कृत किया, बल्कि उनमें सामंती एवं ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध खड़ा होने का साहस भरा। यद्यपि मानगढ़ में आंदोलन का दमन कर दिया गया, किंतु इसने राजस्थान के दक्षिणी अंचल में स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत नींव रखी।

प्रश्न 14. स्वतंत्रता संग्राम एवं एकीकरण के दौरान माणिक्य लाल वर्मा के राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: माणिक्य लाल वर्मा मेवाड़ क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं राजस्थान एकीकरण के प्रमुख शिल्पी थे।

प्रमुख योगदान:

  1. बिजोलिया व मेवाड़ में भूमिका: पथिक जी के बाद बिजोलिया आंदोलन की कमान संभाली। 1938 में 'मेवाड़ प्रजामंडल' की स्थापना की और नागरिक स्वतंत्रता की मांग की।
  2. लोक गीतों से जन-चेतना: अपने प्रसिद्ध गीत 'पंछीड़ा' तथा 'अर्जी' के माध्यम से किसानों व जनता में राष्ट्रीय भावना का बीजारोपण किया।
  3. जनजातीय कल्याण: 'राजस्थान सेवा संघ' के माध्यम से भील क्षेत्रों में शिक्षा और कुरीतियों के खिलाफ कार्य किया। 'मेवाड़ का वर्तमान शासन' नामक पुस्तिका लिखकर रियासती निरंकुशता को उजागर किया।
  4. एकीकरण एवं प्रशासन: संयुक्त राजस्थान (तीसरा चरण, 1948) के प्रधानमंत्री बने तथा संविधान सभा के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

निष्कर्ष: माणिक्य लाल वर्मा का जीवन जन-सेवा, कृषक अधिकारों और रियासती निरंकुशता के विरुद्ध सतत संघर्ष का अनुपम उदाहरण है।

प्रश्न 15. मध्यकालीन राजस्थान में सामाजिक समरसता एवं भक्ति आंदोलन के प्रसार में संत मीराबाई एवं संत दादू दयाल के योगदान की तुलनात्मक व्याख्या कीजिए।

उत्तर: मध्यकालीन राजस्थान में संत मीराबाई और संत दादू दयाल ने भक्ति मार्ग के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर समरसता स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संत मीराबाई (सगुण भक्ति):

  • स्त्री सशक्तीकरण व विद्रोह: मेड़ता की राजपुत्री मीरा ने राजसी वैभव और पर्दा प्रथा का त्याग कर कृष्ण भक्ति को चुना, जो तत्कालीन पुरुष सत्तात्मक सामंती व्यवस्था पर गहरा प्रहार था।
  • जातिगत भेदों का खंडन: संत रैदास (संत रविदास) को अपना गुरु बनाकर उन्होंने सामाजिक ऊंच-नीच के ढाँचे को चुनौती दी।

संत दादू दयाल (निर्गुण भक्ति):

  • दादू पंथ एवं कबीर विचार: 'राजस्थान के कबीर' कहे जाने वाले दादू दयाल ने निर्गुण ब्रह्मा की उपासना का संदेश दिया।
  • सद्भाव व सुधार: नराणा (जयपुर) को अपना केंद्र बनाकर ढोंग, बाह्याडंबर, मूर्तिपूजा और वर्ण-व्यवस्था का कड़ा खंडन किया। इनकी रचनाएं 'सद्दुक्कड़ी' (ढूंढाड़ी) भाषा में हैं।

निष्कर्ष: जहां मीराबाई ने सगुण कृष्ण भक्ति और व्यक्तिगत समर्पण के माध्यम से रूढ़ियों को तोड़ा, वहीं दादू दयाल ने संगठनात्मक रूप (दादू पंथ) में समाज सुधार एवं समन्वय का मार्ग प्रशस्त किया।

प्रश्न 16. राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को जानकी देवी बजाज एवं अंजना देवी चौधरी के विशेष संदर्भ में रेखांकित कीजिए।

उत्तर: राजस्थान के स्वाधीनता आंदोलन में महिलाओं ने न केवल पुरुषों का साथ दिया, बल्कि जुलूसों, धरना प्रदर्शनों और रियासती दमन का निर्भीकता से सामना किया।

1. जानकी देवी बजाज:

  • सेठ जमनालाल बजाज की पत्नी जानकी देवी ने पर्दा प्रथा का त्याग कर रचनात्मक कार्यों में भाग लिया।
  • 1934 में जयपुर प्रजामंडल के अध्यक्षीय दायित्व का निर्वहन किया।
  • छुआछूत निवारण, गो-सेवा, चरखा प्रचार तथा भूदान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

2. अंजना देवी चौधरी:

  • रामनारायण चौधरी की धर्मपत्नी अंजना देवी बिजोलिया एवं बेगू किसान आंदोलन में सक्रिय रहीं।
  • समस्त रियासती भारत में गिरफ्तार होने वाली प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी थीं।
  • इन्होंने समस्त सुख-सुविधाएं छोड़कर भील एवं दलित बस्तियों में शिक्षा व सेवा का कार्य किया।

निष्कर्ष: इन विभूतियों ने न न केवल राजपूताना की पारंपरिक बंदिशों को तोड़ा, बल्कि राज्य की महिलाओं के लिए राजनीतिक एवं सामाजिक चेतना के नए द्वार खोले।

प्रश्न 17. केसरी सिंह बारहठ की देशभक्ति और उनके साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन कीजिए।

उत्तर: शाहपुरा रियासत के देवपुरा गांव में जन्मे केसरी सिंह बारहठ एक उच्च कोटि के डिंगल कवि एवं कट्टर क्रांतिकारी थे। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से राजस्थान के शासकों और जनता में देशभक्ति, स्वाभिमान एवं अपने गौरवशाली अतीत के प्रति चेतना जगाई। उनकी देशभक्ति का सबसे प्रखर उदाहरण 'चेतावनी रा चूंगट्या' (13 सोरठे) है, जिसे उन्होंने मेवाड़ महाराणा फतेह सिंह को लार्ड कर्जन के दिल्ली दरबार में जाने से रोकने के लिए लिखा था। इन सोरठों से प्रभावित होकर महाराणा दिल्ली दरबार में उपस्थित नहीं हुए।

केसरी सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह के लिए राजाओं और नवयुवकों को जागृत करने हेतु 'वीर भारत सभा' की स्थापना की। उनका पूरा परिवार (भाई जोरावर सिंह और पुत्र प्रताप सिंह) स्वाधीनता आंदोलन में समर्पित रहा, जो राजस्थान के इतिहास में एक अद्वितीय उदाहरण है। उनकी साहित्यिक कृतियों ने राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना को प्रज्वलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 18. डॉ. नगेंद्र सिंह की न्यायविद् और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रतिनिधि के रूप में भूमिका को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: डूंगरपुर में जन्मे डॉ. नगेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय के क्षेत्र में एक वैश्विक विभूति थे। वे संयुक्त राष्ट्र संघ की असेंबली में भारत के प्रतिनिधि रहे। वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ), हेग में न्यायाधीश और दो बार मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहने वाले राजस्थान के ही नहीं, वरन भारत के प्रथम व्यक्ति थे।

इससे पूर्व, वे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। उनकी विधिक विशेषज्ञता के लिए उन्हें 1938 में कामा अवार्ड से और 1973 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उन्होंने कानून पर कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे, जो आज भी विधिक अध्ययन के लिए संदर्भ ग्रंथ हैं। उनकी न्याय के प्रति निष्ठा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके योगदान ने राजस्थान और भारत का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ाया। उन्हें मृत्यु उपरांत वर्ष 2013-14 का राजस्थान रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रश्न 19. जगजीत सिंह के गजल गायकी और राजस्थान के प्रति उनके लगाव पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: 'गजल किंग' के नाम से विख्यात जगजीत सिंह ने गजल गायकी को शास्त्रीयता के बंधन से मुक्त कर उसे आम आदमी तक पहुँचाने में एक अलग मुकाम स्थापित किया। श्री गंगानगर में जन्मे जगजीत सिंह को 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनकी गायकी में एक अनूठा ठहराव और दर्द था, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।

'अर्थ', 'प्रेम गीत', 'सरफरोश', 'वीर जारा', 'पिंजर' जैसी कई प्रसिद्ध फिल्मों में गाए उनके गजल और गीत लोगों की जुबां पर आज भी जीवित हैं। उन्होंने अपनी गायकी में शास्त्रीय कविताओं और आधुनिक संगीत का अद्भुत प्रयोग कर एक नया आयाम स्थापित किया। यद्यपि वे मुंबई में रहे, लेकिन राजस्थान के प्रति उनका प्रेम और लगाव उनकी आवाज़ और व्यक्तित्व में हमेशा झलकता रहा। उनके इस योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत राजस्थान रत्न (2012) पुरस्कार से नवाजा गया।

 

विशेष आभार (Special Thanks): इस प्रश्नोत्तरी/सामग्री को तैयार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सम्मानित लेखकगण — श्री पी. के. नागौरी जी एवं  SGGP Team का हम सहृदय धन्यवाद करते हैं। 

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आशा है कि 'राजस्थान की प्रमुख विभूतियां' पर आधारित यह पोस्ट आपके RAS एवं UPSC Mains परीक्षा की तैयारी में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। इन प्रश्नों और उत्तरों के प्रारूप को समझकर आप स्वयं भी अन्य महत्वपूर्ण विभूतियों पर उत्तर-लेखन का अभ्यास करें। सफलता सटीक रणनीति और सतत अभ्यास पर निर्भर करती है। यदि आपके कोई प्रश्न या सुझाव हों, तो नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें। तैयारी में जुटे रहें, सफलता निश्चित है!

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