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राजस्थान कृषि, बागवानी व पशुपालन मॉडल प्रश्न: RAS & UPSC Mains

राजस्थान कृषि, बागवानी व पशुपालन मॉडल प्रश्न: RAS & UPSC Mains

RAS (RPSC) तथा UPSC (IAS) मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए 'राजस्थान की अर्थव्यवस्था' और 'भूगोल' खंड अत्यंत निर्णायक भूमिका निभाता है। राज्य लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग द्वारा राजस्थान में कृषि, शुष्क बागवानी, डेयरी विकास और पशुधन प्रबंधन से संबंधित अवधारणात्मक तथा विश्लेषणात्मक प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं। यदि आप मुख्य परीक्षा में 5-अंक (लघूतरात्मक) और 10-अंक (निबन्धात्मक) वाले प्रश्नों में अधिकतम अंक प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए सफलता की कुंजी साबित होगी। इसमें उत्तर-लेखन की सटीक रणनीति, टू-द-पॉइंट सब-हेडिंग्स और हालिया आर्थिक डेटा का समावेश किया गया है। इन प्रश्नों का अभ्यास करें और अपनी तैयारी को शीर्ष स्तर पर ले जाएं!

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लघूतरात्मक प्रश्न (Short Answer Questions) (शब्द सीमा: 50 से 60 शब्द | 5 अंक)

Q1. राजस्थान में शुष्क बागवानी (Dryland Horticulture) की संभावनाओं और इसके प्रमुख आर्थिक लाभों पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: राजस्थान के पश्चिमी व अर्ध-शुष्क भागों में कम पानी की खपत वाली फसलों (जैसे- बेर, अनार, आंवला, खजूर) की बागवानी। drip irrigation (बूंद-बूंद सिंचाई) का उपयोग। लाभ: किसानों की आय का विविधीकरण, बंजर भूमि का सदुपयोग, और चरम मौसम (Climate Change) में भी स्थिर उत्पादन।

Q2. "मिश्रित कृषि (Mixed Farming)" राजस्थान के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए किस प्रकार एक सुरक्षा कवच (Safety Net) सिद्ध होती है?

उत्तर: फसलों के साथ-साथ पशुपालन (जैसे- भेड़, बकरी, ऊँट, दुधारू पशु) का समावेश। मानसूनी अनिश्चितता या फसल खराब होने की स्थिति में पशु उत्पाद (दूध, ऊन, मांस) आपातकालीन आय प्रदान करते हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों की आजीविका स्थिर रहती है।

Q3. राजस्थान में राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF) की भूमिका, राज्य में दुग्ध उत्पादन की प्रमुख चुनौतियों और महत्व को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: वर्ष 1977 में स्थापित RCDF राज्य में डेयरी विकास की शीर्ष संस्था है, जो 'आनंद (Anand) मॉडल' पर त्रिस्तरीय संरचना में कार्य करती है।

भूमिका:

  1. ग्रामीण पशुपालकों से उचित मूल्य पर दूध का संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन ('सरस' ब्रांड नाम से)।
  2. पशुपालकों को उचित मूल्य, संतुलित पशु आहार (Pashu Aahar), कृत्रिम गर्भाधान और ऋण/बीमा सुविधा (जैसे- कामधेनु बीमा) उपलब्ध कराना।

चुनौतियाँ: हरा चारा (Green Fodder) की कमी, असंगठित क्षेत्र का वर्चस्व, और गर्मियों में दूध उत्पादन में गिरावट।

Q4. "राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM)" राजस्थान में नस्ल सुधार और चारा प्रबंधन में किस प्रकार सहायक है?

उत्तर: उद्देश्य: देशी नस्लों (जैसे- राठी, थारपारकर, गिर, चोकला) के आनुवंशिक विकास और चरागाह विकास को बढ़ावा देना। चारा बैंक निर्माण, कृत्रिम गर्भाधान (AI) सेवाओं के विस्तार और उद्यमिता विकास के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाना।

Q5. राजस्थान में "वालरा (Walra) कृषि" से आप क्या समझते हैं? इसके पर्यावरणीय प्रभावों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: दक्षिण राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों (जैसे- उदयपुर, बांसवाड़ा) में की जाने वाली स्थानांतरित (Shifting/Slash & Burn) कृषि को 'वालरा' कहते हैं (पहाड़ों पर 'चीमाता' व मैदानों में 'दाजिया')।

प्रभाव: वनों की कटाई, मृदा अपरदन (Soil Erosion) और जैव विविधता को नुकसान।

Q6. राजस्थान में बारानी (Rainfed) खेती विकास कार्यक्रम पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: राज्य के वर्षा-आधारित (शुष्क एवं अर्ध-शुष्क) क्षेत्रों में कम पानी वाली फसलों के विकास हेतु बारानी खेती कार्यक्रम संचालित किया गया। इसके तहत जल संचयन हेतु एनीकटों, खेतों में तलाई (Farm Ponds) और जल-समभर (Watershed) प्रबंधन पर बल दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य मृदा नमी संरक्षण, वर्षा जल के कुशल उपयोग द्वारा फसल सघनता बढ़ाना और मानसूनी अनिश्चितता के बावजूद किसानों की आजीविका को स्थायित्व प्रदान करना है।

Q7. राजस्थान राज्य सहकारी उत्पादक संघ लिमिटेड ("राजफैड" - RAJFED) के प्रमुख कार्यों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: स्थापना: 26 नवंबर 1957 (जयपुर)।

प्रमुख कार्य:

  1. प्राथमिक क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण उन्नत बीज, उर्वरक व कीटनाशक उपलब्ध कराना।
  2. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद सुनिश्चित कर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना।
  3. कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण (Processing), भंडारण, ग्रेडिंग और विपणन हेतु बुनियादी ढाँचा व मार्गदर्शन प्रदान करना।

Q8. "काजरी" (CAZRI) का प्रमुख उद्देश्य एवं इसकी रणनीतिक भूमिका क्या है?

उत्तर: केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर की स्थापना 1959 में ICAR के तहत (यूनेस्को/ऑस्ट्रेलियन सहयोग के विस्तार के रूप में) हुई।

मुख्य उद्देश्य: शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण (Desertification) को रोकना, बंजर भूमि का प्रबंधन करना, शुष्क कृषि तकनीकों, सौर ऊर्जा अनुप्रयोगों, पशु नस्ल सुधार, चारागाह विकास और शेल्टर-बेल्ट (वनारोपण) तकनीकों का विकास कर थार मरुस्थल की पारिस्थितिकी और कृषि-आजीविका को टिकाऊ बनाना।

Q9. भारत एवं राजस्थान के संदर्भ में "ऑपरेशन फ्लड" (Operation Flood) का प्रमुख लक्ष्य क्या था?

उत्तर: वर्ष 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में शुरू किया गया श्वेत क्रांति अभियान।

प्रमुख लक्ष्य:

  1. देश/राज्य में दुग्ध उत्पादन में तीव्र वृद्धि कर उत्पादकों (ग्रामीणों) को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ना।
  2. मध्यस्थों का उन्मूलन कर ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाना।
  3. राजस्थान में इस मॉडल के आधार पर त्रिस्तरीय सहकारी डेयरी ढांचे (RCDF) की नींव रखी गई।

Q10. राजस्थान की प्रमुख गौवंश (Cattle) नस्लों और उनके क्षेत्र का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: राजस्थान में पाई जाने वाली प्रमुख देशी गौवंश नस्लें:

  • राठी (कामधेनु): उत्तर-पश्चिमी राजस्थान (बीकानेर, जैसलमेर - सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन)।
  • थारपारकर: पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र (बाड़मेर, जैसलमेर - द्विप्रयोजनी नस्ल)।
  • कांक्रेज: सांचौर, बाड़मेर (भारवाही व दुग्ध)।
  • गिर (अजमेरा/रेंडा): अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़।
  • नागौरी: नागौर (सर्वश्रेष्ठ कृषि/भारवाही बैल)।

Q11. मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH / पूर्व राष्ट्रीय बागवानी मिशन) का उद्देश्य और राजस्थान में इसका दायरा समझाइए।

उत्तर: दायरा: राजस्थान के 24 चयनित जिलों (जैसे- जयपुर, कोटा, झालावाड़, जोधपुर, बाड़मेर आदि) में संचालित। (केंद्र:राज्य अंशदान 60:40)।

मुख्य लक्ष्य:

  • उद्यानिकी फसलों (फल, फूल, मसाले, औषधीय पौधे) का क्षेत्र व उत्पादकता बढ़ाना।
  • ड्रिप सिंचाई और शेड-नेट/ग्रीनहाउस जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना।
  • पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट (सब्जी/फल प्रसंस्करण व कोल्ड चेन) के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना।

निबन्धात्मक प्रश्न (Long Answer Questions)  (शब्द सीमा: 100 से 150 शब्द | 10 अंक)

Q12. राजस्थान में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है। इस क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं का विश्लेषण करते हुए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: भूमिका: राजस्थान में भारत के कुल पशुधन का बड़ा हिस्सा है तथा दूध व ऊन उत्पादन में राज्य अग्रणी स्थान रखता है।

प्रमुख चुनौतियाँ:

  1. चारे व पानी की मौसमी कमी (Fodder Deficit)।
  2. पशु चिकित्सा सुविधाओं एवं गुणवत्तापूर्ण टीकाकरण का ग्रामीण स्तर पर अभाव।
  3. प्रशीतन (Cold Storage/Chilling Centers) और वैल्यू-एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी।

सरकारी पहलें: मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, RCDF का विस्तार, और मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयाँ (Mobile Veterinary Units)।

निष्कर्ष: पशुधन आधारित खाद्य प्रसंस्करण और संगठित विपणन को बढ़ावा देकर ग्रामीण आय को दोगुना किया जा सकता है।

Q13. राजस्थान के जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) की विषमताओं को ध्यान में रखते हुए, कृषि-बागवानी के सतत विकास (Sustainable Development) के लिए उपयुक्त रणनीतियों की चर्चा कीजिए।

उत्तर: भूमिका: राजस्थान को 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जहाँ वर्षा और मृदा में भारी भिन्नता है।

रणनीतियाँ व समाधान:

  1. सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (Micro-Irrigation): ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई द्वारा जल दक्षता बढ़ाना।
  2. फसल विविधीकरण (Crop Diversification): मोटे अनाज (श्री अन्न/बाजरा) और शुष्क बागवानी (अनार, खजूर, औषधीय पौधे) का विस्तार।
  3. एग्रो-प्रोसेसिंग (Agro-Processing): क्लस्टर आधारित खाद्य प्रसंस्करण (Food Parks) और राजस्थान कृषि प्रसंस्करण नीति का लाभ उठाना।

निष्कर्ष: सतत कृषि केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न होकर जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और तकनीक-आधारित विपणन (e-NAM) के समन्वय पर निर्भर करती है।

Q14. राजस्थान की कृषि संबंधी समस्याओं का विस्तारपूर्वक विश्लेषण करते हुए इनके समाधान हेतु सुझाव दीजिए।

उत्तर: राजस्थान की कृषि अर्थव्यवस्था जलवायु संबंधी विषमताओं और ढांचागत चुनौतियों से जूझ रही है:

1. प्राकृतिक एवं भौगोलिक समस्याएँ:

  • राज्य में देश के कुल जल संसाधनों का मात्र 1.16% सतह जल उपलब्ध है।
  • मरुस्थलीय प्रसार, अनिश्चित एवं विषम मानसून, बार-बार अकाल/सूखा और इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में 'सेम' (Waterlogging) व क्षारीयता की समस्या।

2. आर्थिक एवं तकनीकी बाधायें:

  • लघु व सीमांत किसानों की अधिकता (भूमि का अत्यधिक उप-विभाजन)।
  • संस्थागत साख (Loan) की कमी, महंगा उन्नत बीज/उर्वरक और कोल्ड स्टोरेज/भंडारण सुविधाओं का अभाव, जिससे किसानों को उपज का उचित मूल्य (Distress Sale) नहीं मिलता।

3. सामाजिक व प्रशासनिक सीमाएँ:

  • अशिक्षा, कृषि तकनीकों (Precision Farming) के प्रति कम जागरूकता और नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन न होना।

समाधान: सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप/स्प्रिंकलर), मिलेट प्रोत्साहन (श्री अन्न), एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर और e-NAM के माध्यम से विपणन तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है।

Q15. राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र के योगदान और महत्व की समीक्षा कीजिए।

उत्तर: पशुपालन राजस्थान के शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि का मुख्य विकल्प और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का 'सुरक्षा कवच' (Safety Net) है।

1. आर्थिक योगदान एवं डेटा (नवीनतम आंकड़े):

  • पशुधन हिस्सा: राजस्थान में भारत के कुल पशुधन का लगभग 10.60% (20वीं पशुगणना के अनुसार 5.68 करोड़ पशुधन) निवास करता है।
  • उत्पादन में स्थान: राज्य भारत के कुल दूध उत्पादन का लगभग 15% (देश में शीर्ष/अग्रणी स्थानों में) और ऊन उत्पादन का लगभग 45% योगदान देता है।
  • GSVA में योगदान: राज्य के कृषि क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन (GSVA) में पशुपालन का योगदान कृषि (फसलों) के लगभग बराबर या अधिक रहता है।

2. ग्रामीण जीवन पर प्रभाव:

  • आजीविका व रोजगार: अकाल या वर्षा की विफलता के समय पशुधन (गाय, भैंस, भेड़, बकरी) किसानों को नियमित दैनिक आय (दूध, ऊन, मांस, चमड़ा) प्रदान करता है।
  • उद्योगों को संबल: डेयरी, ऊन प्रसंस्करण, चमड़ा उद्योग तथा जैविक खाद उद्योग का मुख्य आधार है।

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना, पशुधन आरोग्य योजना और मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों जैसे सरकारी प्रयासों से इस क्षेत्र को और अधिक व्यावसायिक रूप दिया जा रहा है।


विशेष आभार (Special Thanks): इस प्रश्नोत्तरी/सामग्री को तैयार करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले सम्मानित लेखकगण — श्री Dinesh जी Meena , श्री चित्रकूट जी त्रिपाठी एवं SGGP Team का हम सहृदय धन्यवाद करते हैं। 

अन्य महत्वपूर्ण नोट्स और टेस्ट इन्हें भी ज़रूर देखें।

हमें पूरा यकीन है कि राजस्थान में कृषि, बागवानी एवं पशुपालन पर आधारित यह पोस्ट और क्विज़ आपकी RAS व UPSC Mains की तैयारी को एक नई दिशा देगा! आपको यह पोस्ट कैसा लगा, अपनी राय और Suggestions नीचे Comment Box में ज़रूर शेयर करें। अपने तैयारी करने वाले दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ इसे शेयर करना न भूलें। और हाँ, अगर आप ऐसे ही शानदार Quizzes और Study Material पाना चाहते हैं, तो अभी WhatsApp करें: 9015746713 पर। सीखते रहिए, आगे बढ़ते रहिए!

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