Fundamental duty – मौलिक कर्तव्य

Fundamental duty 

मौलिक कर्तव्य

मूल संविधान 26 जनवरी 1950 में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख नहीं था । मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान में समाहित करने के लिए सरदार स्वर्ण सिंह समिति (1973) का गठन किया गया जिसने 8 मौलिक कर्तव्यों का सुझाव दिया जिनमें से 6 मौलिक कर्तव्यों को स्वीकार किया गया

स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को शामिल करने हेतु 42वां संविधान संशोधन अधिनियम 1976 पारित किया गया जिसके तहत भारतीय संविधान में एक नया भाग (4क ) मूल कर्तव्य के नाम से जोड़ा गया इस समय इनकी संख्या 10 थी ।

एक नया अनुच्छेद 51 क के तहत 10 मूल कर्तव्यों को भारतीय संविधान में शामिल किया गया

मूल कर्तव्य की प्रकृति सकारात्मक है । यह वाद योग्य नहीं या गैर न्याययिक है । मूल कर्तव्य सोवियत संघ (प्राथमिकता सोवियत संघ को ) या रूस से लिए गए।  

अधिकार व कर्तव्य का बहुत ही 11 संबंधी अधिकार एवं कर्तव्य एक दूसरे के पूरक के एक व्यक्ति के करते दूसरे के अधिकार मंच जाते हैं अत कर्तव्यों की अनुपस्थिति में अधिकारों की कल्पना करना संभव नहीं है

भारतीय संविधान में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लेख था मूल कर्तव्यों का नहीं बाद में अनुभव किया गया कि संविधान में नागरिकों के मूल कर्तव्यों का भी उल्लेख किया जाना चाहिए अत संविधान के भाग 4 के बाद भाग4क व अनुच्छेद 51क का जोड़ा गया जिसमें 10 मूल कर्तव्यों की व्यवस्था की गई उसमें उल्लेख किया गया कि भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह

  1. संविधान का पालन करे तथा उसके आदर्शों संस्थाओं राष्ट्र ध्वज तथा राष्ट्रगान का आदर करें
  2. मित्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोए रखें एवं उनका पालन करें
  3. भारत की प्रभुता एकता व अखंडता को अक्षुण्ण रखें
  4. देश की रक्षा करें आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें
  5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म भाषा प्रदेश या वर्ग पर आधारित भेदभाव से परे हो ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो
  6. हमारी समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्व समझें और उसका परिरक्षण करें
  7. प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन झील नदी और वन्य जीवन रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण मानववाद ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें
  9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें
  10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्र में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रगति व उत्कर्ष की नई ऊंचाइयों को छू ले

नोट-  11वां मूल कर्तव्य 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को उनके अभिभावक अथवा संरक्षक या प्रतिपालक जैसी भी स्थिति हो शिक्षा के अवसर प्रदान करें यह मूल कर्तव्य 86 वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा पारित किया जा चुका है

मूल कर्तव्य में दो बार संविधान संशोधन हुए 

वर्मा समिति की टिप्पणियां निम्नलिखित है-

  1. राष्टीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम(1971)
  2. सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम(1955)
  3. विधि विरुद्द क्रियाकलाप अधिनियम(1976)
  4. लोक प्रतिनिधि अधिनियम(1951)
  5. वन्य जीव अधिनियम(1972)
  6. वन अधिनियम(1980)

स्वर्ण सिंह समिति – ने संविधान में आठ मूल कर्तव्यों को जोड़े जाने का सुझाव दिया था, लेकिन 42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा 10 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया। 2002 में एक ओर मूल कर्तव्य को जोड़ा गया।

मूल कर्तव्यों का महत्व

 मूल कर्तव्य भारत के नागरिकों के लिए आदर्श के रूप में जोड़े गए हैं यह राष्ट्रहित व राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने वाले हैं संविधान में इन को सम्मिलित करने के पीछे कोई राजनीतिक या दलगत भावना नहीं थी ऐसे में व्यक्ति इन कर्तव्यों को जानकर धीरे-धीरे इनका पालन करने के अभ्यस्त हो जाएंगे

नोट- भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों का जोड़ना रूस के संविधान से प्रेरित है

Fundamental duty Important Facts – 

  • मौलिक कर्तव्यों को प्रभावी बनाने हेतु ईरानी समिति का गठन किया गया था
  • 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 51 k तहत एक मूल कर्तव्य और जोड़ा गया जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ
  • वर्तमान में मौलिक कर्तव्यों की संख्या 11 है
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को सोवियत संघ के संविधान से प्रभावित होकर अपनाया गया है

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

महेन्द्र चौहान, Dipa, सुभाष शेरावत