Lok Sabha – लोकसभा

Lok Sabha – लोकसभा

संरचना – अनुच्छेद 81 व 331

उपनाम  – 

  1. निम्न सदन
  2. प्रथम सदन
  3. लोकप्रिय सदन
  4. जनता का प्रतिनिधि सदन
  5. जनता का सदन
  • प्रथम लोकसभा का गठन 17 अप्रैल 1952
  • प्रथम अधिवेशन 13 मई 1952
  • प्रथम आम चुनाव 1951- 52
  • प्रथम संविधान संशोधन 18 जून 1951
  • लोकसभा के पिता जी वी मावलंकर
  • निर्वाचन जनता द्वारा प्रत्यक्ष रुप से

नोट – मूल भारतीय संविधान में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 500 निर्धारित की गई थी जिसे 31 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1973 के द्वारा बढ़ाकर 547 कर दी गई जिसे गोवा, दमन व दीव पुनर्गठन अधिनियम 1987 के द्वारा बढ़ाकर 552 कर दी गई है

अनुच्छेद 81 के अनुसार लोकसभा की अधिकतम निर्वाचित सदस्य संख्या 550,  530 राज्यों से एवं 20 संघ राज्य क्षेत्रों से निर्वाचित हो सकते हैं

अनुच्छेद 331 के अनुसार राष्ट्रपति दो आंग्ल भारतीय सदस्यों का मनोनयन कर सकेगा

वर्तमान में लोकसभा में आंग्ल भारतीय सदस्य
1 रिचर्ड हे ( केरल )
2 जॉर्ज बेकर ( पश्चिम बंगाल )

वर्तमान सदस्य संख्या 545 – 530 राज्य व 13 संघ राज्य क्षेत्र एवं दो एंग्लो इंडियन मनोनीत

राजस्थान से लोकसभा के लिए 25 सदस्य हैं लोकसभा का एक सदस्य 5 लाख जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है

अनुच्छेद 85. 2 (ख) राष्ट्रपति लोकसभा को समय से पूर्व भंग कर सकेगा और ऐसे कार्य को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी

अनुच्छेद 83 (2) लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष होगा

42वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 के द्वारा लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष बड़ा करें 6 वर्ष कर दिया गया था जिसे 44 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 के द्वारा पुनः 5 वर्ष कर दिया गया था

नोट = अब तक लोकसभा को 9 बार समय से पूर्व विघटित किया जा चुका है प्रथम बार विघटित है 1990 & अंतिम बार लोकसभा विघटित 2004 में ( अटल बिहारी वाजपेई )

अनुच्छेद 330 लोकसभा में अनुसूचित जाति व जनजाति को आरक्षण

  • वर्तमान में अनुसूचित जाति के सदस्य 84
  • अनुसूचित जनजाति के सदस्य 47
  • सर्वाधिक अनुसूचित जाति के सदस्य उत्तर प्रदेश से 17
  • सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति के सदस्य महाराष्ट्र से 6
  • राजस्थान से अनुसूचित जाति के सदस्य 4
  • राजस्थान से अनुसूचित जनजाति के सदस्य 3

नोट – 61 वां संविधान संशोधन अधिनियम 1989 के द्वारा मताधिकार की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई है इस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे

84 वां संविधान संशोधन अधिनियम 2001 के द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि लोकसभा व विधानसभा की सदस्य संख्या 2026 तक के यथावत रहेगी

परिसीमन आयोग

अनुच्छेद 82 परिसीमन आयोग का अध्यक्ष मुख्य निर्वाचन आयुक्त होता है इसका कार्यकाल 10 वर्ष होता है कार्य जनसंख्या के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परी सीमांकन करना

अनुच्छेद 99 शपथ संसद सदस्यों को राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा शपथ दिलाई जाएगी

नोट – सामान्यतः राष्ट्रपति नई लोकसभा के गठन के पश्चात नए सदस्यों को शपथ दिलाने हेतु वरिष्ठतम सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करता है जिसका कार्य सिर्फ नए सदस्यों को शपथ दिलाना होता है प्रोटेम स्पीकर को लोकसभा सदस्य के रूप में राष्ट्रपति शपथ दिलाता है

अनुच्छेद 100 गणपूर्ति लोकसभा की बैठकों के लिए यह आवश्यक है कि कुल सदस्य संख्या का कम से कम 1/ 10 (55 सदस्य) उपस्थित है राज्यसभा के लिए 1/ 10 ( 25 सदस्य )

नोट – संसद के वर्ष में 2 अधिवेशन होना आवश्यक है जिनमें प्रथम अधिवेशन की अंतिम बैठक है और द्वितीय अधिवेशन की प्रथम बैठक के बीच 6 माह से अधिक का अंतर है नहीं होगा

अनुच्छेद 85 सामान्यत वर्ष में 3 अधिवेशन बुलाए जाते हैं जो निम्न है

  1. बजट अधिवेशन
  2. मानसून अधिवेशन
  3. शीतकालीन अधिवेशन

1919 के अधिनियम द्वारा गठित द्विसदनात्मक विधानमंडल की प्रथम अध्यक्ष शहर फ्रेड्रिक वाइट थे

  • प्रथम उपाध्यक्ष – सच्चिदानंद सिन्हा
  • प्रथम भारतीय अध्यक्ष  – विट्ठल भाई पटेल
  • स्वतंत्रता के बाद प्रथम भारतीय अध्यक्ष  – जी वी मावलंकर
  • प्रथम लोकसभा उपाध्यक्ष – अनंत स्वामी आयंगर

नोट – जी वी मावलंकर के खिलाफ पहली बार पंडित नेहरु के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था जो पारित नहीं हुआ था जी वी मावलंकर प्रथम लोकसभा अध्यक्ष थे जिनकी पद पर रहते हुए मृत्यु ( 28 फरवरी 1956 में को ) हुई थी

पद पर रहते हुए मरने वाले दूसरे लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बाल योगी थे जो प्रथम दलित लोकसभा अध्यक्ष थे

राष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव की तारीख तय करता है

पद क्रम

1 राष्ट्रपति
2 उपराष्ट्रपति
3 प्रधानमंत्री
4 राज्यों के राज्यपाल
5 पूर्व राष्ट्रपति उप प्रधानमंत्री
6 मुख्य न्यायाधीश वह लोकसभा अध्यक्ष अन्य न्यायाधीश
7 लोकसभा का उपाध्यक्ष, राज्यसभा का उपसभापति

लोकसभा अध्यक्ष को लोकसभा सदस्यों द्वारा पूर्ण बहुमत द्वारा हटाया जा सकता है

नोट – लोकसभा अध्यक्ष नवीन लोक सभा की प्रथम अधिवेशन की प्रथम बैठक तक पद पर रहता है

लोकसभा अध्यक्ष के कार्य

  • धन विधेयक का निर्धारण करना
  • निर्णायक मत का प्रयोग ( अभी तक एक बार भी नहीं )
  • गणपूर्ति के अभाव में सदन की बैठक स्थगित करना
  • संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता करना
  • राष्ट्रपति और संसद के बीच की कड़ी का कार्य करता है
  • संसद सदस्यों के विशेषाधिकार की रक्षा
  • संसद के सदस्यों को बोलने का अधिकार देता है
  • लोक लेखा समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति करता है (विपक्ष का सदस्य)
  • लोकसभा अध्यक्ष सचिवालय का प्रमुख होता है
  • दल बदल का निर्धारण करता है (91वां संविधान संशोधन)

अध्यक्ष कार्यमंत्रणा समिति, नियम समिति, सामान्य प्रयोजन समिति का सभापति होता है

  • प्रथम महिला लोकसभा – अध्यक्ष मीरा कुमार
  • वर्तमान लोकसभा अध्यक्ष – सुमित्रा महाजन ( दूसरी महिला ) पद क्रम के अनुसार 21वीं

लोकसभा सदस्य की योग्यता

  • वह भारत का नागरिक हो न्यूनतम आयु 25 वर्ष हो

संसद सदस्यों का स्थान रिक्त होना

  1. अगर कोई व्यक्ति एक ही सदन में 2 सीटों पर चुना जाता है तो उसे स्वेच्छा से किसी एक सीट को खाली करने का अधिकार है अन्यथा दोनों सीटें रिक्त हो जाएंगी
  2. यदि कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों में चुन लिया जाता है तो उसे 10 दिन के भीतर यह बताना होता है कि वह किसी सदन का सदस्य रहेगा सूचना न देने पर उसकी राज्यसभा की सदस्यता समाप्त हो जाएगी
  3. संसद का कोई सदस्य यदि दूसरे सदन के लिए चुन लिया जाता है तो उसके पहले वाले सदन की सदस्यता समाप्त हो जाएगी

यदि कोई सांसद राज्य विधानमंडल का सदस्य चुन लिया जाता है तो उसे 14 दिन के अंदर राज्य विधानमंडल की सीट खाली करनी पड़ती है

नोट  – विधायक निधि की सीमा 2 करोड रुपए है

संसदीय शब्द

1 प्रश्न काल  – संसद के अधिवेशन की कार्यवाही का प्रथम 1 घंटा 11 से 12 बजे इसमें मंत्रियों से प्रश्न पूछे जाते हैं

2 शून्यकाल – 12 से 1 बजे तक का समय शून्य काल कहलाता है जिसमें विलंबित महत्व के प्रश्नों को उठाया जाता है जिन पर तुरंत कार्यवाही होती है यह भारतीय संसदीय प्रणाली की देन है

नोट – संसद में पूछे जाने वाले प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं

1 तारांकित प्रश्न  इनका उत्तर मौखिक दिया जाता है

2 अतारांकित प्रश्न का उत्तर लिखित में दिया जाता है

3 अल्प सूचना प्रश्न – यह प्रश्न 10 दिन की पूर्व सूचना पर पूछे जा सकते हैं इसका उत्तर है मौखिक दिया जाता है

संसदीय प्रस्ताव

1 निंदा प्रस्ताव  – यह किसी एक मंत्री मंत्री समूह या संपूर्ण मंत्रिपरिषद के खिलाफ लाया जा सकता है यह संसद के दोनों सदनों में लाया जा सकता है  आरोपों को बताना आवश्यक है यह प्रस्ताव सर्वप्रथम लाल बहादुर शास्त्री के खिलाफ रेल दुर्घटना पर लाया गया था

2. अविश्वास प्रस्ताव –  सिर्फ लोकसभा में विपक्ष के द्वारा लाया जा सकता है ऐसे प्रस्ताव पर 50 सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं 

अब तक 26 बार यह प्रस्ताव लाया गया है प्रथम बार 1963 में नेहरु के खिलाफ जे बी कृपलानी लेकर आए लेकिन पारित नहीं हुआ  25 बार ऐसा प्रस्ताव पारित नहीं हो सका एक बार 15 जुलाई 1979 को मोरारजी देसाई सरकार अविश्वास प्रस्ताव प्राप्त करने में सफल रही
सर्वाधिक अविश्वास प्रस्ताव इंदिरा गांधी के खिलाफ 15 बार लाया गया,

3. विश्वास प्रस्ताव – अब तक 12 बार लाया गया है  यह सरकार के द्वारा लाया जाता है पहली बार चौधरी चरण सिंह सरकार द्वारा अविश्वास प्रस्ताव 1980 लाया गया लेकिन उससे पूर्व ही चौधरी चरण सिंह ने त्यागपत्र दे दिया

प्रथम बार 1989 में वी पी सिंह सरकार द्वारा विश्वास मत विश्वास प्रस्ताव हासिल किया गया  प्रथम बार नवंबर 1990 में वी पी सिंह सरकार द्वारा अविश्वास प्रस्ताव पारित करवाने में असफल रही

4 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव – संसद को कोई सदस्य सदन के पीठासीन अधिकारी की अनुमति से किसी मंत्री का ध्यान अविलंब य लोक महत्व के मामले पर आकर्षित कर सकता है  यह भारतीय संसदीय प्रणाली की देन है  यह 1954 में अस्तित्व में आई थी इसकी सूचना सदस्य को 10 बजे तक देनी होती है

5 स्थगन प्रस्ताव या काम रोको प्रस्ताव – इस प्रस्ताव पर ढाई घंटे से कम की चर्चा नहीं होगी ऐसा प्रस्ताव 50 सदस्यों के हस्ताक्षर द्वारा लाया जा सकेगा

6 विशेषाधिकार प्रस्ताव – यदि किसी मंत्री ने तथ्यों को छिपाकर या गलत जानकारी देकर संसद सदस्यों के विशेष अधिकारों का हनन करता है तो यह प्रस्ताव लाया जा सकता है

Specially thanks to Post and Quiz makers ( With Regards )

सुभाष शेरावत