Rajasthan Natural Vegetation and Forest – राजस्थान प्राकृतिक वनस्पति

Rajasthan Natural Vegetation and Forest 

राजस्थान प्राकृतिक वनस्पति  एंव वन संसाधन

ऐतिहासिक नगर जैसलमेर से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर आकलन मे wood fossil पार्क मे मौजूद fossils को संरक्षित करने ,इन्हें बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने एवं पर्यटन की आधार भूत सुविधाओं के विकास का कार्य किया जायेगा।

जैसलमेर मे भारत सरकार के सहयोग से गोडावण Great Indian Bustard (GIB) को संरक्षित करने के लिये ब्रीडिंग सेटर खोलने की कार्यवाही की जा रही हैं।

प्रदेश मे leopard एक महत्वपूर्ण वन्यजीव हैं। leopard के संरक्षण हेतु ‘project leopard’ प्रांरभ किया जायेगा। वर्ष 2017-18 मे इस हेतु 7 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना प्रस्तावित हैं।

प्रदेश मे Tiger एवं leopard के संरक्षण तथा वन्य क्षेत्रो मे शिकार एवं अन्य अवैध गतिविधियों की रोकथाम हेतु रंणथभौर, सरिस्का, जवाई तथा मुकंदरा वन्यजीव अभयारण्यों एवं झालाना आरक्षित वनक्षेत्र मे सुरक्षा हेतु IT Security System लगाये जाने की घोषणा की गई हैं।

मांउट आबू स्थित Trevor’s Tank. को ECo-tourism के दृष्टिकोण से विकसित किया जायेगा। चूरु जिला मुख्यालय पर नेचर पार्क विकसित किया जाना भी प्रस्तावित हैं। बीकानेर मे ‘बीछवाल बायोलॉजिकल पार्क की स्थापना की घोषणा की हैं।

अग्रेजी शासन से पहले भारत मे जनता द्रारा जंगलों का इस्तेमाल मुख्यत: स्थानीय रीति-रिवाजो के अनुसार होता था। भारत मे सबसे पहले लार्ड डलहौजी ने 1855 मे एक वन नीति घोषित की जिसके अन्तर्गत यह कहा गया कि राज्य के वन क्षेत्र मे जो भी इमारती लकड़ी के पेड हैं वे सरकार के हैं और उन पर किसी व्यक्ति का कोई अधिकार या दावा नही है।इस नीति को अमल मे लाने के लिए एक वन विभाग की स्थापना की गई।

इस प्रकार भारत मे वनो पर सरकारी सत्ता की शुरुआत हुई। इस सत्ता को सुदृढ़ बनाने एव लोगों को वनो पर परम्परागत अधिकारो से वंचित करने के लिए अनेक वन कानूनों एवं वन-नीतियों का निर्माण किया गया।जो निम्न प्रकार है।

  • 1855 की वन नीति 
  • 1865 का पहला वन कानून 
  • 1878 का वन कानून 
  • 1894की पहली वन नीति 
  • भारतीय वन अधिनियम 1927 
  • राष्टीय वन नीति-1952 
  • फाॅरेस्ट कंजर्वेशन आॅडिनेंस एक्ट ( वन.संरक्षण अधिनियम )-1980
  • नयी राष्ट्रीय वन नीति-1988

संविधान 42वें संशोधन 1976 के द्रारा वनों का विषय राज्य सूची से समवर्ती सूची मे लाया गया।

केन्द्रीय वन अनुसंधान संस्थान ,(देहरादून) -भारतीय वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत 1981 मे केन्द्रीय वन अनुसंधान संस्थान देहरादून की स्थापना की गई। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय हैं-शिमला, कोलकाता, नागपुर एवं बंगलौर।

अधिनियम के तहत :’केन्द्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ’ की स्थापना की गई। ये संस्थान पर्यावरण एंव वन मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करते हैं।

वन मण्डल ( Forest circle )

राजस्थान प्रान्त मे वैधानिक स्तर पर वनो.के लिये 12मंडल बनाए गए हैं

1. जयपुर मण्डल :- सीकर ,झुझनू, जयपुर, दौसा, तथा पश्चिमी सवाई माधोपुर जिला।

2 जोधपुर मण्डल:- गंगानगर, बीकानेर, चूरु, नागौर, जैसलमेर,जोधपुर, बाडमेर, जालौर व पाली जिला।

3 कोटा मण्डल:- कोटा, बारा जिला।

4. बूँदी मण्डल:- बूँदी जिला।

5. अजमेर मण्डल:- अजमेर जिला।

6. भरतपुर मण्डल:- अलवर, भरतपुर, व धौलपुर, जिले तथा सवाई माधोपुर जिले का पूर्वी भाग।

7. टोकं मण्डल:- टोंक जिला तथा भीलवाड़ा जिले का उतरी-पूर्वी भाग।

8. झालावाड़ मण्डल:- झालावाड़ जिला।

9. चितौड़गढ़ मण्डल:- भीलवाड़ा जिले का पश्चिमी भाग तथा चितौड़गढ़ जिले के दक्षिणी भाग के अतिरिक्त।

10. उदयपुर मण्डल:- उदयपुर, राजसंमद।

11. सिरोही मण्डल:- सिरोही जिला।

12. बाँसवाड़ा मण्डल:- डूँगरपुर तथा बाँसवाड़ा जिला तथा चितौड़गढ़ जिले का दक्षिणी भाग।

 

Specially thanks to Post writer ( With Regards )

प्रभुदयाल मूंड चूरु